“मैं सबसे अच्छा मूल्य के लिए सोचा समीक्षा के लिए किफायती स्मार्ट दवाओं को खरीद सकते हैं _मैं सबसे अच्छा मूल्य के लिए सबसे अच्छा कानूनी स्मार्ट दवाएं कहां से खरीद सकता हूं”

(३) खनिज लवण – कैल्सियम, सोडियम, क्लोराइड, मैग्नीशियम और पोटैशियम भी काफी मात्रा में लगते हैं। इन्हे स्थूल पोषक या बृहत् पोषक कहते हैं। इसके अलावा अल्प मात्रा में विटामिन और कुछ अन्य खनिज आवशयक होते हैं।

अगर आप दिल्ली मेट्रो से यात्रा करते हैं और स्मार्ट कार्ड का प्रयोग करते हैं तो 1 अप्रैल के बाद आपको कार्ड लौटाने पर बची रकम का रिफंड नहीं मिलेगी. दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने कहा है कि इसके नए और चलन में मौजूद स्मार्ट कार्ड 1 अप्रैल से नॉन रिफंडेबल हो जाएंगे. यानी, कार्ड की वापसी पर बाकी बची हुई राशि का रिफंड नहीं मिलेगा चाहे कार्ड नया हो या फिर पुराना.

इस शोध से जुड़े शोधकर्ता अल्वारो मार्को ने कहा कि लार में सोडियम के स्तर से हृदय समस्याओं की प्रारंभिक चेतावनी मिल सकती है। लार से दिल की धड़कन, दबाव और कुछ नमूनों के बारे में मामूली सूचना मिलने से स्थिति को बेहतर किया जा सकता है। इससे रोगियों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकती है।

गन्ने के कीट एवं उपचार – posted on : Aug, 09 2015 (1). दीमक (टरमाइट) बुवाई के समय पेड़ों के ऊपर अथवा फसल की कटाई के बाद अथवा खड़ी फसल में प्रकोप होने पर गन्ने के समीप नाली बनाकर किसी एक कीटनाशक का प्रयोग कर ढ़क देना चाहिए। 1. फेनवलरेट 0.4 प्रतिशत धूल (टाटाफेन 0.4 प्रतिशत धूल) 25.0 किग्रा0 प्रति हेक्टे0 2. लिण्डेन 1.3 प्रतिशत धूल 25 किग्रा प्रति हेक्टे0 (2). दीमक एवं अंकुर बेधक बुवाई के समय नालियों में पैड़ो के ऊपर अथवा फसल की कटाई के बाद अथवा खड़ी फसल में प्रकोप होने पर गन्ने के समीप नाली बनाकर किसी एक कीट-नाशक का प्रयोग कर ढत्रक देना चाहिए। 1. क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत घोल 5.0 ली0 प्रति हेक्टे0 1875 ली0 पानी में घोल बनाकर हजारे द्वारा प्रयोग करना। 2. लिण्डेन (गामा बीएचसी) 20 प्रतिशत घोल 6.25 ली0 प्रति हेक्ट0 1875 ली0पानी में घोल बनाकर हजारे द्वारा प्रयोग करना। 3. 10: रवा 25 ग्रा0/हे0 4. 6: रवा 20 ग्रा0/हे0 5. कार्बेराइल-गामा बीएचसी 4:4 रवा(सेवीडाल रवा) 25 किग्रा प्रति हेक्टे0। 6. रीजेण्ट 0.3 प्रतिशत रवा (फिप्रोनिल)200 किग्रा/हे0 (3). अंकुर बेधक ;श्शूट बोरर ग्रीष्मकाल में फसल पर 15 दिन के अन्तर पर तीन बार मेटासिड 50 प्रतिशत घोल 1.0 ली0 को 625 ली0 पानी में घोलकर प्रति हेक्टे0 की दर छिड़काव। 1 आंकुर बेधक से ग्रसित पौधों को सूड़ी सहित काटकर निकालना। 2 जमाव के पश्चात गन्ने की दो पंक्तियों के मध्य 100 कु0 प्रति हेक्टे0 की दर से सूखी पताई बिछाना। (4). चोटीबेधक( टॉपबोरर) बुवाई के समय (शरद एवं बसंत) नालियों में 30 किग्रा कार्बोफयूरान 3 जी0 का प्रयोग प्रथम व द्वितीय पीढ़ी के नियंत्रण हेतु करना। 1. मार्च एवं मई दोनों के प्रथम पखवारों में चोटीबेधक के प्रथम एवं द्वितीय पीढ़ी के अण्ड समूहों को एकत्रित करके नष्ट करना। 2. अप्रैल एवं मई में चोटीबेधक के प्रथम एवं द्वितीय पीढ़ी से ग्रसित पौधों को सूड़ी/प्यूपा सहित काटकर नष्ट करना। 3. जून के अंतिम या जुलाई के प्रथम सप्ताह में तृतीय पीढ़ी के विरूद्ध अधिकतम अण्डरोपण की अवधि में 30 किग्रा0 कार्बोफयूरान 4. जी0 प्रति हेक्टे0 पौधों के समीप नमी की दशा में डालना।

एसिटाइल L-Carnitine (ALCAR) एक अमीनो अम्ल जो मानसिक और शारीरिक ऊर्जा बढ़ जाती है, जबकि मुक्त कणों से नुकसान से अपने मस्तिष्क की रक्षा है. इसके अतिरिक्त, यह न्यूरोट्रांसमीटर सेरोटोनिन और norepinephrine बढ़ जाती है, अवसाद का मुकाबला करने में मदद जो.

यह एप्लिकेशन रसायनज्ञ, फार्मेसिस्ट, मेडिकल स्टोर या किसी भी दवा की जानकारी की तलाश में किसी के लिए बहुत उपयोगी है। दवा की दुकानों उनके लवण और संरचना, इसके विकल्प के साथ 1.5 लाख से अधिक आइटम से खोज और आसपास के वितरकों देख सकते हैं।

अफसरों का दावा है कि स्मार्ट कार्ड होने पर सरकारी तो दूर प्राइवेट अस्पतालों में भी मरीज को कुछ नहीं खरीदना पड़ेगा। अफसरों के दावे के उलट अंबेडकर अस्पताल में ही मरीजों को महंगी दवाएं और उपकरण खरीदना पड़ रहा है। मजबूरी और दूसरा विकल्प न होने के कारण मरीज व उनके रिश्तेदार चुपचाप जैसे तैसे इंतजाम कर रहे हैं। भास्कर की पड़ताल में खुलासा हुआ। दो दिनों तक अस्पताल के कई वार्डों का सर्वे करने के बाद पता चला कि आर्थोपेडिक, सर्जरी ही नहीं पीडियाट्रिक सर्जरी और कैथलैब में कई ऑपरेशन के लिए मरीजों को दवाएं और उपकरण अपने पैसों से खरीदना पड़ा।

तो फिर इस तरह Adderall के रूप में पर्चे दवाओं, जो आमतौर पर एडीएचडी और अन्य बीमारियों के साथ उन लोगों के लिए निर्धारित कर रहे हैं। इन दवाओं एडीएचडी के साथ उन लोगों के लिए चमत्कार कर सकते हैं, लेकिन आम जनता द्वारा उपयोग के लिए सिफारिश नहीं कर रहे हैं।

“जब आप पिन में अपना फोन और चाबी पकड़ते हैं, तो जिस तरह से फोन 1, 5 या 9 को दबाते हैं, वही बहुत अलग होता है। इसी तरह, आपके दाहिने अंगूठे से 1 दबाने से आप 9 को दबाकर अधिक रोका जायेगा,” बताते हैं कि डॉ। भसीन, जिन्होंने अपने सहयोगियों, डेविड बेरेन्द और डॉ। बर्नहार्ड जुंग के साथ 10 महीने बिताए, इस परियोजना पर।

यूं तो धान की खेती के लिए भरपूर पानी की जरूरत होती है। इसके लिए खेतों में लबालब पानी भरा रहना जरूरी होता है, जबकि इस लेख में दो ऐसे काश्तकारों की चर्चा की गई है जिन्होंने बूंद-बूंद सिंचाई सह्ति के जरिए धान की भरपूर पैदावार लेकर कृषि जगत में अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। कोटा शहर के समीपस्थ भदाना ग्राम के इन दोनों कृषक मित्रों ने पहली बार धान की फसल में ड्रिप सिस्टम का इस्तेमाल कर 10 से 20 प्रतिशत तक अधिक पैदावार ली है।‘बूंद-बूंद सिंचाई प्रणाली से हुई धान की भरपूर पैदावार।’ कहने और सुनने में यह बात आपको भले ही अटपटी और अविश्वसनीय लगे, लेकिन है सोलह आना सही। कोटा जिले के दो प्रयोगधर्मी एवं प्रगतिशील युवा कृषकों शांतनु तापड़िया और राजेश विजय ने अपने धान के खेतों में बूंद-बूंद सिंचाई (ड्रिप इरीगेशन तकनीक का इस्तेमाल कर भरपूर फसल लेने में कामयाबी हासिल की है। प्रयोगधर्मी कृषक शांतनु तापड़िया ने बताया कि सर्वप्रथम गतवर्ष उन्होंने 28 बीघा धान के खेत में ड्रिप सिस्टम लगवाया, जिस पर प्रति बीघा चार हजार रुपए का खर्चा हुआ। धान की पूसा- 1121 तथा सुगंधा किस्मों को काम में लिया। धान उपजाने के लिए जरूरी फ्लड इरीगेशन के स्थान पर ड्रिप सिस्टम से सिंचाई की। धान की परंपरागत खेती में खेत में पांच-छः इंच तक पानी का भराव जरूरी होता है, जबकि ड्रिप सिस्टम लगाने के बाद एक इंच पानी से ही धान की भरपूर उपज ले ली। ड्रिप सिस्टम के जरिए एक इंच पानी कुछ ही घंटों में दिया जा सकता है।

आपका भोजन पोषक तत्वों से भरा हो और उसमें ऐसे तत्व न हों जो मोटापा पैदा करें तो आपको लंच में स्मार्ट विकल्पों का चयन करना होगा। जब आप लंच नहीं ले जाते तो आप यह तय नहीं कर पाते कि आपको कितनी कैलारी लेनी है आपके मेटोबॉलिज्म पर असर पड़ता है और इससे पूरा शरीर प्रभावित होता है। ब्रेकफास्ट की तरह लंच भी शरीर के लिए महत्वपूर्ण खाना है, इसलिए लंच में पोषक तत्व वाला भोजन शामिल करना चाहिए।

Lyon, R. C., Taylor, J. S., Porter, D. A., et al. (2006) Stability profiles of drug products extended beyond labeled expiration dates. Journal of Pharmaceutical Sciences; 95:1549-60 – प्राप्त: July 3, 2016.

भारत के सबसे लोकप्रिय समाचार के स्रोत में आपका स्वागत है ताजा समाचार और रोज के ताजा घटनाक्रम के लिए दैनिक समाचार को पढने के लिए हमारी वेबसाइट सही और प्रमाणिक समाचारों को खोजने के लिए सबसे अच्छी जगह है। हम अपने पाठकों को पूरे देश और उसके मुख्य क्षेत्रों में नवीनतम समाचारों के साथ प्रदान करते हैं। हमारा मुख्य लक्ष्य खबरों को एक उद्देश्य के साथ मूल्यांकन भी देना है और इस तरह के क्षेत्रों में राजनीति, अर्थव्यवस्था, अपराध, व्यवसाय, स्वास्थ्य, खेल, धर्म और संस्कृति के रूप में क्या हो रहा है, इस पर भी प्रकाश डालना है। हम सूचना की खोज करते हैं और सबसे महत्वपूर्ण ग्लोबल घटनाओं से संबंधित सामग्री को तुरंत प्रकाशित करते हैं।.

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इटली में डेबिट कार्ड काफी लोकप्रिय हैं। यहां क्लासिक और प्रीपेड दोनों तरह के कार्ड हैं। इटली में मुख्य क्लासिक डेबिट कार्ड पागोबैनकोमैट (PagoBancomat) है: इस तरह के कार्ड अक्सर क्रेडिट कार्ड के साथ इतावली बैंक द्वारा जारी किए जाते हैं (ताकि आपके पास दोहरे मोडवाले कार्ड हों). यह कार्ड के मालिक को बैंक खाते से यह धन निकालने की अनुमति देता है और व्यापक रूप से यह ज्यादातर दुकानों में यह स्वीकृत है, हालांकि इंटरनेट पर यह केवल क्रेडिट कार्ड मोड की ही अनुमति देता है। प्रमुख डेबिट प्रीपेड कार्ड जारी किया जाता है पोस्टे इटालियाना S.p.A, द्वारा, जो पोस्टपे (Postepay) कहलाता है और वीसा इलेक्ट्रॉन (Visa Electron) सर्किट पर चलाता है। पोस्ट इटालियाना के एटीएमों (ATMs) (पोस्टमैट (Postamat)) का इस्तेमाल किया जा सकता है और दुनिया भर के वीसा इलेक्ट्रॉन अनुकूल बैंक के एटीएमों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इंटरनेट पर या POS-आधारित लेनदेन के लिए इसका इस्तेमाल किया जाए तो कोई शुल्क नहीं लगता है। कार्ड अन्य कंपिनयों जैसे वोडाफोन कैशकार्ड (Vodafone CashCard), बैनका डि मिलानो (Banca di Milano) का कार्टा जिन्स (Carta Jeans) और कार्टा मॉनेटा ऑनलाइन (Carta Moneta Online) द्वारा जारी किए जाते हैं।

वजन घटाने के लिए दालचीनी पाउडर और शहद: – posted on : Oct, 19 2015 दालचीनी पाउडर का एक भाग और शहद के दो भाग (मधु मक्खियों की छोटी प्रजातियों से प्राप्त शहद) ले लो। सबसे पहले, दालचीनी पाउडर में उबला हुआ पानी के एक छोटे कप जोड़ सकते हैं और एक समाधान करें। और फिर शांत करने में यह शहद जोड़ सकते हैं और यह अच्छी तरह से मिश्रण करने के लिए 30 मिनट के लिए इस समाधान रखें। इस मिश्रण का आधा भाग सिर्फ खाली पेट में निम्नलिखित सुबह में सेवन किया जाना चाहिए बिस्तर और आराम करने के लिए जाने से पहले सेवन किया जाना चाहिए। काफी वजन घटाने के लिए एक या दो महीने के लिए इस मिश्रण का उपयोग करें। दालचीनी स्वाभाविक रूप से अधिक वजन कम कर देता है और स्वाभाविक रूप से प्रणाली शुद्ध।

“सबसे अच्छी कीमत के लिए स्मार्ट दवा क्या है |सबसे अच्छे मूल्य पर सस्ते स्मार्ट दवा की कीमत कहाँ मिल सकती है”

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कुछ लोगो को हमेशा सर्दी-ज़ुकाम की दिक्कत बनी रहती है.. खासी और साइनस की भी समस्या रहती है।अगर आपके साथ भी ऐसी ही कुछ समस्या है तो आपको रोज एक भूने लोंग का सेवन जरूर करना चाहिए। लौंग में इजेनॉल नामक तत्व पाया जाता है जो कि बॉडी को गर्म रखने में सहायक है।ऐसे में इससे साइनस की दिक्कत से हमेशा के लिए राहत मिल सकती है।

गैस, कब्ज और खांसी की समस्या दूर करेगा लौकी का जूस, होते हैं ये 9 फायदे – posted on : Oct, 08 2015 लाइफस्टाइल डेस्कःलौकी हमारे शरीर के कई रोगों को दूर करने में सहायक होती है। इसका उपयोग रोगियों के लिए सलाद, रस निकालकर या सब्जी के रूप में लंबे समय से किया जाता रहा है। लौकी को कच्चा भी खाया जाता है। यह पेट साफ करने में भी बहुत ही फायदेमंद होता है साथ ही बॉडी को हेल्दी और टॉक्सिक फ्री भी बनाती है। लौकी से सेहत को होने वाले फायदे गैस और कब्ज एसिडीटी, कब्ज, पेट की बीमारियों एवं अल्सर में लौकी का रस फायदेमंद होता है। खाने के बाद अगर पेट में किसी प्रकार की कोई परेशानी महसूस हो रही हो तो लौकी का जूस पिएं। खांसी खांसी, टीबी, सीने में जलन आदि में भी लौकी बहुत उपयोगी होती है। टीबी, सीने में जलन, हार्ट डिसीज, किडनी डिसीज, डायरिया, मिर्गी, हैजा / हार्ट डिसीज खाने के बाद एक कप लौकी के रस में थोड़ी-सी काली मिर्च और पुदीना डालकर पीने से हार्ट डिसीज रोग में आराम मिलता है। किडनी रोग लौकी किडनी के रोगों में बहुत उपयोगी है और इससे मूत्र खुलकर आता है

जीरे एवं गुड़ के पानी का घोल बनाने के लिए सबसे पहले किसी बर्तन में दो कप सादा पानी लें। इसके बाद इसमें एक चम्मच पिसा हुआ गुड़ और एक चम्मच जीरा मिलाएं और अच्छी तरह से उबाल लें। उबालने के पश्चात इस घोल के ठंडा होने पर आप इसे पी सकते हैं। हर रोज सुबह खाली पेट एक गिलास यह पानी पीने से आपके स्वास्थ्य को काफी आराम मिलता है।

AROUND THE WEBFeel Years Younger By Boosting Your Stem Cells At HomeLCR Health SupplementsTwo Banks That Pay 10 Times The Interest On Your SavingsMyFinance Bank ReferralsHe Transformed His Gut With One ThingGundry MDIf You Have Thinning Hair, Watch This NowJuveTressMORE FROM NBTडकैती के शिकार प्रधान के पर‍िवार को प्रशासन से मदद की आस अमेरिका भर में धूमधाम से मना गणतंत्र दिवस का जश्न चीन और भारत के सैनिकों की मीटिंग में दिखा सद्भाव गंदे पानी की हो रही सप्लाई

सीधे किसानों के खाते में आएगा सब्सिडी का पैसा – posted on : Aug, 11 2015 उर्वरक सब्सिडी में घपले को लेकर उठते सवालों के बीच सरकार ने फर्टिलाइजर कंपनियों को सब्सिडी जारी करने के बजाय अब किसानों को सीधे खाद सब्सिडी देने की तैयारी शुरू कर दी है। सब्सिडी की यह धनराशि किसानों के बैंक खाते में जमा कराई जाएगी। इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए किसानों के बैंक खातों को उनके आधार नंबर से जोड़ा जाएगा। उर्वरक, कृषि और सहकारिता मंत्रालय के साथ राज्यों के सहयोग से प्रायोगिक परियोजना की शुरुआत की जाएगी। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सीधी सब्सिडी योजना में सबसे बड़ी बाधा वास्तविक किसानों की पहचान को लेकर पैदा हुई है। खेतों का रकबा जांचकर खाद की सब्सिडी देने का प्रावधान वास्तविक किसानों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है। इतना ही नहीं ज्यादातर राज्यों में भूमि संबंधी दस्तावेज न तो अप-टू-डेट हैं और न ही ऑनलाइन। इससे पैदा होने वाली मुश्किलों को लेकर सरकार चाक-चौबंद और पुख्ता इंतजाम करने में जुट गई है। आधार नंबर वाले किसानों के साथ उनके फर्टिलाइजर उपयोग का पिछला रिकॉर्ड भी जांचा जाएगा। यह आंकड़ा निचले स्तर पर खाद की खुदरा आपूर्ति करने वाली दुकानों से लिया जाएगा। इससे खेत के असल मालिक और वास्तविक खेती करने वालों के बीच तनाव पैदा हो सकता है। बटाई पर होने वाली खेती के प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है। इन सारी चुनौतियों का मुकाबला करने की तैयारियां भी की जा रही हैं। फिलहाल खाद सब्सिडी सीधे किसानों को देने के बजाय उर्वरक उत्पादक कंपनियों को दी जाती है। कंपनियों को सब्सिडी का भुगतान करने की पेचीदगी को लेकर खाद कंपनियां आजिज आ गई हैं। खाद कंपनियों का सरकार पर 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बकाया हो गया है। उनका आरोप है कि सरकार अपने बजट में इतनी कम धनराशि का आवंटन करती है कि कंपनियों का बकाया मिलना मुश्किल हो गया है। सीधे तौर पर किसानों को सब्सिडी देने की योजना उर्वरक मंत्रालय के साथ कृषि व सहकारिता मंत्रालय संयुक्त रूप से तैयार कर रहे हैं। इस योजना में राज्य सरकारों की भूमिका सबसे अहम होगी। योजना के पहले चरण में प्रायोगिक परियोजना शुरू की जाएगी। इसमें उन्हीं राज्यों के कुछ जिलों को शामिल किया जाएगा, जहां भूमि दस्तावेजों का डिजिटलीकरण हो चुका है।

एक अलग न्यूरोट्रांसमीटर की संख्या और मस्तिष्क रसायन भी Citicoline से प्रभावित कर रहे हैं. यह करने के लिए एक अग्रदूत के रूप में कार्य करता Acetylcholine और प्रभावित करने में मदद करता है एक संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं की संख्या इस कार्रवाई के माध्यम से. Dopamine और Norepinephrine स्तर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में भी वृद्धि हुई है। क्यों इस यह भी हो सकता है कई उपयोगकर्ताओं रिपोर्ट उनके समग्र तनाव स्तर कमी और सुधार किया जा करने के लिए एक सामान्य भलाई की भावना का उपयोग करते हुए इस पूरक.

यह nootropic अपने दो प्रमुख प्रभाव है कि कई नई चीजें और तेजी से परिणाम जानने के लिए क्षमता में वृद्धि हुई शामिल लिए जाना जाता है. अन्य सभी racetams की तरह, इस दवा के प्रभाव प्रकाश कर रहे हैं और पहले उपयोग पर विश्लेषण किया लेकिन हम इसे देख सकते हैं और सही प्रभाव न्यायाधीश करने में कम से कम दो या तीन हफ्ते के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए लगता है.

तालापारा से पुलिस की बिलासा शक्ति टीम ने बड़ी मात्रा में नशीली दवाएं जब्त कीं। मामले में दो कारोबारियों को गिरफ्तार किया गया है। मुख्य आरोपी अच्छे घराने का है। वह अपने बच्चों को शहर के महंगे स्कूलों में पढ़ाता है। तालापारा की महिलाएं काफी दिनों से पुलिस की बिलासा शक्ति टीम से मोहल्ले में नशीली दवाएं बिकने की सूचनाएं दे रहीं थीं। गुरुवार को पुलिस टीम ने तालापारा मस्जिद के पास साहिर अहमद उर्फ राजू 47 वर्ष के घर में दबिश दी। वह घर पर ही था। वह नशे का कारोबार करता है। उसके यहां नशे की खेप लेने बेलगहना का यासीन खान 42 वर्ष भी आया हुआ था। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से 286 रेक्सोजेसिक इंजेक्शन, नाइट्रा 328, 1028 एविल एंपुल बरामद किया गया। पूछताछ में साहिर ने नशीली दवाएं शहर के ही मेडिकल स्टोर से खरीदने की बात कही।

अफसोस तो इस बात का है कि किसानों के नाम से जारी सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक नहीं पहुँच पाया है। ज्यादातर योजनाएँ किसानों की बजाय दलालों के लिए वरदान साबित हुई हैं। गाँवों में सड़क से लेकर बिजली-पानी की मूलभूत सुविधाओं का अभाव देखा गया है। रोजगार के साधन आज भी नहीं है।

स्मार्ट दवाओं भी तंत्रिका कोशिकाओं और synapses तरह संबंधित संरचनाओं के विकास को बढ़ावा कर सकते हैं. कई nootropic स्मार्ट दवाओं की दुकानों को हाल के वर्षों में ऑनलाइन popped है, में विशेषज्ञता इन विभिन्न कार्यों प्रदर्शन जो मस्तिष्क बूस्टर बेचना.

हर पेरेंट्स का एक ही सपना होता है कि उनका बच्चा जिंदगी के सबसे बड़े मुकाम पर पहुंचें। लेकिन बच्चों के दिमागी विकास में उनके पेरेंट्स का बहुत बड़ा हाथ  होता है। क्योंकि, बच्चों के लिए घर ही उनका पहला स्कूल होता है, जहाँ वह जिंदगी की सारी चीज़ें सीखते हैं।

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अखरोट के लाभ में मेटाबॉलिज्म में सुधार, और हड्डी का स्वास्थ्य, और मधुमेह का नियंत्रण शामिल हैं। अखरोट भी वजन प्रबंधन में सहायता करता है, और एक मूड बूस्टर के रूप में मदद करता है। यह बालों की अच्छी तरह से देखभाल करता है। अखरोट बालों के रंग को काला और घना बनायें रखने में मदद करता है। जिनके बाल कम उम्र में सफ़ेद हो जाते हैं, उनके लिए अखरोट फायदेमंद रहता है।

पुरानी कहावत है कि पेड़ तो खजूर का भी बड़ा होता है लेकिन उससे क्या. मुसाफिर को छांव नहीं मिलती और उसका फल भी पहुंच से दूर होता है. भारत के बड़े-बड़े शहरों का भी यही हाल है. इनमें रहने के लिए पर्याप्त मकान नहीं हैं, सड़कों पर जाम लगे हैं, बिजली दिन भर आंख-मिचौली खेलती है, हवा में जहर घुला है, पानी ऐसा है कि बिना साफ किए पी नहीं सकते और कूड़े के ढेर हर जगह दिख जाते हैं. पिछली जनगणना बताती है कि मुंबई की आधी से भी ज्यादा और कोलकाता की एक तिहाई आबादी झुग्गियों में रहती है. इस आबादी को शहरी सेवाएं और सुशासन देने में सरकारें विफल रही हैं. इतने साल बीत गए हैं लेकिन, ढहती आधारभूत सुविधाओं, मकान, पानी और बिजली जैसी समस्याओं का हम कोई पुख्ता हल नहीं खोज पाए हैं.

कॉपोलीमिर्स दो अलग-अलग पॉलिमर से मिलकर बनाये गये हैं। विभिन्न प्रतिक्रियाशील समूहों के साथ पॉलिमर के विभिन्न संयोजनों के लिए कई पेटेंट पहले से मौजूद हैं। उत्पाद दोनों व्यक्तिगत घटकों के गुण प्रदर्शित करता है जो स्मार्ट पॉलिमर संरचना में एक नया आयाम जोड़ते हैं और कुछ अनुप्रयोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं। हाइड्रोफोबिक और हाइड्रोफिलिक पॉलिमर को क्रॉस-लिंकिंग के परिणामस्वरूप मिसेल जैसी संरचनाएं बनती हैं, जो कि जलीय माध्यम के माध्यम से रक्षात्मक रूप से दवा वितरण की सहायता कर सकती हैं, जब तक कि लक्ष्य स्थान पर स्थितियां दोनों पॉलिमरों के एक साथ टूटने के कारण नहीं होती हैं।

किडनी यानी गुर्दा हमारे शरीर का प्रमुख अंग है जो खून को साफ कर शरीर के विषाक्‍त पदार्थों को मूत्र के रास्‍ते बाहर निकालता है। इसके अलावा यह रक्‍तचाप नियंत्रण, सोडियम व पोटैशियम की मात्रा में नियंत्रण और रक्त की अम्लीयता में नियंत्रण भी करता है। जब किडनी हमारी शरीर में एकत्रित हुई गंदगी को हटाने में अक्षम हो जाती है तो उसे किडनी फेल्योर कहा जाता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि किडनी को विषैले पदार्थों से दूर रखा जाये और शरीर को बीमारियों से भी बचाया जाये। कम पानी पीने से किडनियों को नुकसान हो सकता है। पानी की कमी के चलते किडनी और मूत्रनली में संक्रमण होने का खतरा भी अधिक रहता है। जिससे पोषक तत्वों के कण मूत्रनली में पहुंचकर मूत्र की निकासी को बाधित करने लगते हैं। साथ ही किडनी में स्टोन की आशंका भी बढ़ जाती है। इसलिए दिनभर में कम से कम 2 से 3 लीटर पानी पीने की सलाह दी जाती है। ताजे फलों और फलों के जूस का सेवन करने से किडनी से विषाक्‍त पदार्थ बाहर निकलते हैं। दरअसल फलों में पोटैशियम की भरपूर मात्रा होती है जो किडनी को स्‍वस्‍थ रखने में मदद करता है। फलों के साथ हरी और पत्‍तेदार सब्जियों में भी पोटैशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। अंगूर, नींबू, संतरा, केला, किवीज, आदि का सेवन करना फायदेमंद है। बेरीज का सेवन करना भी किडनी के लिए फायदेमंद है। इसलिए ब्‍लूबेरी, ब्‍लैकबेरी का सेवन जरूर करें। बेरीज में क्‍वीनाइन नामक पौष्टिक तत्‍व पाया जाता है जो यह खुद को हिप्‍यूरिक एसिड में बदल देता है। हिप्‍यूरिक एसिड यूरिक एसिड को एक जगह जमने से रोकता है जिससे किडनी संबंधित बीमारियों से बचाता है। धूम्रपान एवं तम्बाकू के सेवन से कई गंभीर समस्याएं तो होती ही हैं, लेकिन इसके कराण ऐथेरोस्कलेरोसिस रोग भी होता है। जिससे रक्त नलिकाओं में खून का बहाव धीमा पड़ जाता है और किडनी में रक्त कम जाने से उसकी कार्यक्षमता घट जाती है। इसलिए धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करने से बचें। किडनी को विषैले पदार्थों से बचाने के लिए सुबह उठने के बाद पेशाब जरूर करें। रात भर में मूत्राशय पूरी तरह मूत्र से भर जाता है, जिसे सुबह उठते ही खाली करने की जरूरत होती है। लेकिन जब आलस की वजह लोग मूत्र नहीं त्यागते और काफी देर तक उसे रोके रहते हैं तो आगे चलकर यह किडनी को भारी नुकसान पहुंचाता है। इसके कारण किडनी स्‍टोन भी हो सकता है।

प्रदेश के गवर्ननमेंट डिग्री कॉलेजों में पढ़ा रहे 345 संविदा शिक्षकों की नौकरी पक्की होगी। कैबिनेट से यूपी गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज संविदा प्रवक्ता विनियमितीकरण नियमावली पर मुहर लगा दी है। 31 दिसंबर 2008 तक नियुक्त शिक्षक इसका फायदा पा सकेंगे।

एनडीएमसी एरिया में स्मार्ट सिटी के रूप में एक हजार 800 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पूरी की जानी हैं। इनमें से कुछ की टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इनमें सेंट्रल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, स्मार्ट पावर एंड वाटर ग्रिड, खान मार्केट में मल्टीलेवल पार्किंग, सेंसर बेस्ड स्मार्ट पार्किंग, पब्लिक साइकिल शेयरिंग, स्कूलों में 333 स्मार्ट क्लासरूम, के अलावा 13 सड़कों की रीडिजाइनिंग का कार्य शामिल है। 31 किमी की लंबाई वाली इन सड़कों में से सात सड़कें ऐसी हैं, जो कनॉट प्लेस तक जाती हैं। इन सभी पर जल्द ही कार्य आरंभ हो जाएगा।

रायपुर.सरकारी अस्पतालों में स्मार्ट कार्ड से इलाज करवाने वाले मरीजों को दवा व जरूरी उपकरण बाजार से खरीदकर नहीं लाना पड़ेगा। अस्पताल में जो दवा या उपकरण नहीं होंगे, वह मरीजों अस्पताल प्रशासन खरीदकर उपलब्ध कराएगा। स्वास्थ्य सचिव विकासशील ने बुधवार को इस बारे निर्देश दे दिए हैं।

स्मार्ट बनने के लिए लड़के क्या-क्या नहीं करते। कोई फेयरनेस क्रीम का इस्तेमाल करता है तो कोई जिम जाता है। लेकिन आज हम आपको बताएंगे वो छोटी-छोटी बातें जिनके बिना आपके स्मार्ट होने का कोई मतलब नहीं रह जाता।

इस सिलसिले में शहरी विकास सचिव राजीव गौबा ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग और एनबीसीसी की टॉप मैनेजमेंट के साथ इस प्लान पर विचार विमर्श किया। शहरी विकास मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि दरअसल, जिस जमीन पर यह स्मार्ट कॉलोनी बनाने की तैयारी की जा रही है, वह केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की है। लगभग 240 एकड़ की यह जमीन 1971 से ही खाली पड़ी है। ऐसे में सरकार का इरादा है कि इस जमीन पर कॉलोनी बनाने का जिम्मा एनबीसीसी को दे दिया जाए।

इसके अलावा चीफ एजिक्यूटिव ऑफिसर नहीं होने तक सीइओ का प्रभार नगर आयुक्त को दिया गया. इसके अलावा पहले से स्वीकृति चार नये निदेशक जिलाधिकारी पटना, मेयर पटना, एमडी बुडको व शहरी विकास मंत्रालय के एक निदेशक को मनोनित किया गया. इसके अलावा प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंस्लटेंसी की निविदा तय करने के लिए स्मार्ट सिटी का गठन भी किया गया. बैठक में बिस्कोमान टावर के पांचवीं फ्लोर पर स्मार्ट सिटी के लिए छह हजार वर्ग फुट जगह के लिए 95.30 लाख रुपये स्वीकृत किया गया. 

ऑफलाइन डेबिट कार्डों में प्रमुख क्रेडिट कार्डों (जैसे वीसा या मास्टर कार्ड) या प्रमुख डेबिट कार्डों (जैसे यूनाइटेड किंगडम और दूसरे देशों में माइस्टरो, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका में नहीं) का लोगो होता है और बिक्री के समय क्रेडिट कार्ट की तरह (भुगतानकर्ता के हस्ताक्षर के साथ) इसका इस्तेमाल होता है। इस तरह के डेबिट कार्ड में दैनिक सीमा हो सकती है और/या जिससे धन निकाला जाता है उस चालू/जांच खाते की शेष रकम के बराबर एक अधिकतम सीमा हो सकती है। ऑफलाइन डेबिट कार्ड से किए गए लेनदेन में उपयोगकर्ता के शेष खाते में इसका प्रभाव दिखने में 2-3 दिन लग जाता है। कुछ देशों और कुछ बैंकों और व्यापारी सेवा संगठनों में “क्रेडिट” या ऑफलाइन डेबिट लेनदेन अंकित मूल्य के परे क्रेता की लागत के बगैर लेनदेन होता है, जबकि “डेबिट” या ऑनलाइन डेबिट लेनदेन के लिए एक छोटी-सा शुल्क मांगा जा सकता है (हालांकि यह अक्सर खुदरा विक्रेता द्वारा समाविष्ट कर लिया जाता है). अन्य अंतर इस प्रकार हैं कि डेबिट क्रेता डेबिट खरीददारी की रकम के अतिरिक्त नकद भी निकाल सकता है (बशर्ते व्यापारी इस काम का समर्थन करता है तो), व्यापारी के नजरिए से, “क्रेडिट” (ऑफलाइन) डेबिट लेनदेन की तुलना में ऑनलाइन डेबिट लेनदेन पर व्यापारी छोटी-सी रकम का भुगतान करता है।

निम्नलिखित उन संभावित दुष्प्रभावों की सूची है जो Grd Smart Powder (जीआरडी स्मार्ट पाउडर) की सभी संयोजित सामग्रियों से हो सकते है। यह व्यापक सूची नहीं है। ये दुष्प्रभाव संभव हैं, लेकिन हमेशा नहीं होते हैं। कुछ दुष्प्रभाव दुर्लभ, लेकिन गंभीर हो सकते हैं। यदि आपको निम्नलिखित में से किसी भी दुष्प्रभाव का पता चलता है, और यदि ये समाप्त नहीं होते हैं तो अपने चिकित्सक से परामर्श लें।

श्री रघुरामन ओजस्वी, प्रेरक और प्रभावी वक्‍ता भी हैं; बहुत सी परिचर्चाओं और परिसंवादों के कुशल संचालक हैं। मानसिक शक्‍ति का पूरा इस्तेमाल करने तथा व्यक्‍ति को अपनी क्षमता के अधिकतम इस्तेमाल करने के उनके स्फूर्तिदायक तरीके की बहुत सराहना होती है।

स्मार्ट पॉलिमर तेजी से अधिक प्रचलित हो रहे हैं क्योंकि वैज्ञानिकों ने रसायन विज्ञान के बारे में जानने के लिए और ट्रिगर किए हैं जो बहुलक संरचनाओं में गठनात्मक बदलाव लाते हैं और उनका लाभ उठाने और उन्हें नियंत्रित करने के तरीके तलाशते हैं। नई पॉलिमरिक सामग्रियां रासायनिक रूप से जैविक प्रणालियों में विशिष्ट विशिष्ट पर्यावरणीय परिवर्तन तैयार की जा रही हैं, और

बजट फोन खरीदने वाले ज्यादातर यूजर्स का यही मानना है कि सस्ते स्मार्टफोन दोगुनी कीमत पर मिलने वाले हाई एंड स्मार्टफोन्स से थोड़े कम पावरफुल हैं। यह सोच ग्राहक की उम्मीदें बढ़ा देती है, नतीजतन यूजर्स अपने फोन की शिकायत करते हैं। जहां श्याओमी रेडमी नोट और यूरेका ने महंगे स्मार्टफोन्स से फीचर्स के मामले में फासला कम किया है, वहीं ज्यादातर दूसरे बजट स्मार्टफोन हाई-एंड फोन के मुकाबले में कहीं नजर नहीं आते। सस्ते फोन में स्क्रीन रिजॉल्यूशन, प्रोसेसर टाइप और स्पीड, रैम, कैमरा क्वॉलिटी, बिल्ड क्वॉलिटी और बैटरी लाइफ जैसी चीजों पर ग्राहक को समझौता करना पड़ता है।

किसान विस्तार सेवा योजना – posted on : Oct, 01 2015 आदेश में खाद्यान्न और पोस्ट फसल हानि न्यूनतम के वैज्ञानिक भंडारण पर किसानों को शिक्षित करने के लिए, सीडब्ल्यूसी 1978-79 में अपने किसान विस्तार सेवा स्कीम शुरू की है जिसमें अपने गोदामों पर तैनात तकनीकी स्टाफ आसपास के गांवों का दौरा और पोस्ट हारवेस्ट टेक्नोलाजी पर किसानों को प्रशिक्षित. योजना के आपरेशन में वर्तमान में 292 ग्रामीण आधारित गोदामों के माध्यम से है. इसके अलावा, किसानों को प्रोत्साहित करने और उन्हें प्रेरित करने के लिए सार्वजनिक भंडारण सुविधाओं का लाभ उठाने, सीडब्ल्यूसी किसानों के शेयरों के लिए अपने भंडारण के आरोप में 30% की छूट प्रदान करता है. एक वेयरहाउस रसीद, जो एक परक्राम्य लिखत है किसानों, जो वेयरहाउस रसीद की गिरवी पर संस्थागत ऋण प्राप्त करने और इस तरह संकट बिक्री से बचने कर सकते हैं करने के लिए जारी किया जाता है.

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इन सब के अलावा, इस बात का भी ध्यान रखें कि एक बार में थोक कपड़े न खरीदें क्योंकि छोटे बच्चों में यह बहुत जल्दी खत्म हो जातें हैं। हालाँकि, आप पाने बच्चे के लिए अभी कपड़े खरीद सकते हैं क्योंकि अभी हर जगह सेल लगा हुआ है।

इस शोध के दौरान यह पाया गया कि जिन मक्खियों को गर्भावस्था के दौरान अधिक फलों का जूस मिला, उनके पैदा होने के बाद उनमें याद्दाश्त की क्षमता अधिक देखी गई। जबकि मंधाने द्वारा एक साल के बच्चों पर किए गए शोध में भी यही नतीजे देखने को मिले थे।

Bacopa मस्तिष्क रक्त प्रवाह बढ़ता है, और इतने अधिक ऑक्सीजन उद्धार, पोषक तत्वों, और मस्तिष्क को ग्लूकोज. इस प्राचीन हर्बल उपचार भी लोकप्रिय स्मार्ट दवा modafinil के खिलाफ परीक्षण किया गया था और Bacopa एक दूर बेहतर समग्र घोषित था.

एक Aniracetam है ampakine nootropic और यह piracetam से अधिक शक्तिशाली है. इस संज्ञानात्मक बढ़ाने शक्ति वर्तमान स्मृति को बढ़ाने के लिए है और एकाग्रता को बेहतर बनाता है. कि aniracetam हालांकि दावा है किया गया है piracetam से अधिक शक्तिशाली है, अपनी अनूठी कार्यों की अनुमति देता है acetylcholine रिसेप्टर्स की अधिक उत्तेजना इस प्रकार अधिक ऊर्जा सुनिश्चित और मस्तिष्क के अंदर ध्यान केंद्रित. यह मन जिस दर पर स्मृति की प्रगति में सुधार लाने की क्षमता है का मौका देता. Piracetam क्षमता aniracetam मस्तिष्क के अंदर विकसित जिनमें से प्रभावित करता है, इसलिए नीचे बयान है कि दोनों कि घोषित जानकारी के साथ प्रदान करेगा piracetam और aniracetam synergistically काम करता है साथ में.

नारियल तेल यूं लगाने से, फिर आ सकते हैं जवानी में गिरे बाल – posted on : Sep, 04 2015 मध्य प्रदेश, बुरहानपुर: एक पिछड़े इलाके में मजदूरी करके आजीविका चलाने वाले तोताराम कुशवाहा के भविष्य के बारे में यही कल्पना की जा सकती थी कि वह दूसरों के खेतों में दिहाड़ी मजदूरी करके गरीबी में ही जीवन बिताएगा. लेकिन खुद तोताराम के इरादे कुछ और ही थे. उन्होंने मेहनत के साथ चातुर्य ना दिखाया होता और सरकारी मदद ना ली होती, तो उनकी जिंदगी में यह मोड़ नहीं आता. आज तोताराम एक करोड़पति किसान हैं. सरकारी योजनाओं की मदद और अपनी मेहनत से संपन्न हुए किसानों पर लिखी सफलता की गाथाओं में से एक उनकी भी है. खरगोन जिला मुख्यालय से करीब 45 किमी के अंतर पर स्थित एक छोटे-से गांव गोलवाड़ी के तोताराम दूसरों के खेतों में काम करके किसी तरह अपनी आजीविका चलाया करते थे. उनके यहां तीन पीढ़ियों से दिहाड़ी मजदूरी करके ही परिवार का भरण-पोषण होता आ रहा था. लेकिन तोताराम के इरादे कुछ और ही थे. वे दशकों से चली आ रही परिवार की परंपरा को तोड़ते हुए खुद के पैरों पर खड़ा होना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने अथक मेहनत करके और सूझबूझ से कर्ज लेकर अन्य कार्य भी किए. फिर भाड़े पर जमीन लेकर सोयाबीन, अरंडी, गेहूं की खेती की. बाद में तोताराम ने गोलवाड़ी में जमीन खरीद ली. लेकिन उसकी तरक्की में शासन के उद्यानिकी विभाग का भी कम योगदान नहीं है. उद्यानिकी विभाग ने उद्यानिकी के जरिए तोताराम की खेतीबाड़ी का कायाकल्प करने हेतु तोताराम और उनकी पत्नी रूकमणि को तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ हल्दी एवं अदरक की फसलें लेने के लिए बीस-बीस हजार रूपए का अनुदान दिया. इसके बाद इन दोनों पति-पत्नी को एक बार फिर हल्दी एवं अदरक के लिए दस-दस हजार रूपए का अनुदान दिया. चंद महीनों की उद्यानिकी खेती में यह सफर इतना कामयाब हुआ कि लागत के अलावा भारी मुनाफा भी निकाला. तोताराम का उत्साह कुलांचे भरने लगा. वह आज साल में तीन फसलें लेते हैं. इसमें मक्का, सोयाबीन, मिर्च, हल्दी, अदरक, प्याज, कपास, पपीता, करेला, टमाटर, गेहूं, चना आदि की फसल शामिल है. तोताराम सालभर में तकरीबन एक हजार लोगों को काम देते हैं. तोताराम की पत्नी रूक्मणि याद करती हैं, ‘पहले सर छुपाने को जगह नहीं थी और ठेले पर सोकर रात बिताते थे. आज दो-दो मकान हैं. पहले पैसे को तरसना पड़ता था. अब खुद की कमाई से बचत भी हो रही हैं. तोताराम का बैंक खाता अब उद्यानिकी फसलों की कमाई के बाद भर रहा है. भारी कमाई की बदौलत उनके सारे सपने एक ही झटके में पूरे हो गए. अब उनके पास कहीं कोई तंगी नहीं है. खेती की कमाई से उन्होंने खेत में ही मकान बनवा लिया. एक मकान नागलवाड़ी में बनवाया है। तीन ट्रेक्टर खरीदे तथा एक वेन और जीप भी खरीद ली. तोताराम की जीवन शैली पूरी तरह बदल चुकी है. आज वह कई एकड़ जमीन के मालिक हैं. साथ ही खेती के तमाम अत्याधुनिक संसाधन भी अब वह जुटा चुके हैं.

“मैं सबसे अच्छा मूल्य के लिए किफायती प्राकृतिक स्मार्ट दवाओं को कहाँ खरीद सकता हूं सर्वश्रेष्ठ मूल्य के लिए नोोट्रोपिक्स स्मार्ट दवाओं और मस्तिष्क के कोहरे को ढूंढें”

प्रयोगशाला में ऐसे उपकरणों का परीक्षण करने की भी तैयारी कर रही है जिनके द्वारा कैंसर रोगी अपनी कोशिकाओं का परीक्षण स्वयं कर सकते हैं। जैसे कि ‘स्मार्ट ब्रा’ जिसमें स्तन ऊतकों के चित्र दिखाई दे जाते हैं और ‘स्मार्ट शौचालय’ आदि की तयारी की जा रही है।

इस दवा का प्रयोग करने से पहले, अपने चिकित्सक को अपनी वर्तमान दवाओं, अनिर्देशित उत्पादों (जैसे: विटामिन, हर्बल सप्लीमेंट आदि), एलर्जी, पहले से मौजूद बीमारियों, और वर्तमान स्वास्थ्य स्थितियों (जैसे: गर्भावस्था, आगामी सर्जरी आदि) के बारे में जानकारी प्रदान करें। कुछ स्वास्थ्य परिस्थितियां आपको दवा के दुष्प्रभावों के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना सकती हैं। अपने चिकित्सक के निर्देशों के अनुसार दवा का सेवन करें या उत्पाद पर प्रिंट किये गए निर्देशों का पालन करें। खुराक आपकी स्थिति पर आधारित होती है। यदि आपकी स्थिति में कोई सुधार नहीं होता है या यदि आपकी हालत ज्यादा खराब हो जाती है तो अपने चिकित्सक को बताएं। महत्वपूर्ण परामर्श बिंदुओं को नीचे सूचीबद्ध किया गया है।

आमतौर पर गुड़ और जीरे का उपयोग सभी घरों में होता है। जीरा खाने में प्रयोग किए जाने वाले मसालों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका प्रयोग खाने को स्वादिष्ट एवं सुगंधयुक्त बनाने के लिए किया जाता है। बिना जीरे के तड़के के दाल, सब्जी और रायते का स्वाद फीका-फीका सा लगता है। वहीं, स्वाद के साथ-साथ जीरा हमारे स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होता है। गुड़ की मिठास से मीठे पकवानों का जायका बढ़ता है और यह भी तमाम तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसके साथ इनका सेवन करना स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए भी लाभदायक होता है।

महाराष्ट्र में ाआई आपद के लिए एक बार फिर अभिनेता अक्षय कुमार सामने आये हैं। महाराष्ट्र के सूखा पीड़ितों के लिए अक्षय कुमार ने 50 लाख रुपये दान में दिये हैं। महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भयानक सूखा पड़ा है। पानी की बहुत ज़्यादा किल्लत हो रही है। पीने और ज़रूरी कामों के लिए भी पानी मुहैय्या नहीं हो पा रहा है। लोग पानी के लिए मीलों पैदल चल रहे हैं और घंटों पानी के लिए लाइन लगा रहे हैं। पहले भी किसानों की मदद कर चुके हैं अक्षय… ऐसे में सहायता का हाथ एक बार फिर अक्षय कुमार की तरफ़ से बढ़ा है। उन्होंने 50 लाख रुपये दिए हैं ताकि उन लोगों तक पानी पहुंचाया जा सके। इससे पहले भी अक्षय कुमार ने महाराष्ट्र में क़र्ज तले दबकर आत्महत्या कर रहे किसानों को बचाने की कोशिश में 90 लाख रुपये दिए थे ताकि किसानों को कुछ रहत मिल सके।

स्मार्ट कॉन्टेक्ट लेंस बनाने के लिए दिग्गज दवा कंपनी नोवार्टिस ने गूगल के साथ समझौता किया है. दोनों कंपनियां आंख की देखभाल और डायबिटीज के मरीजों की मदद करने वाला स्मार्ट कॉन्टेक्ट लेंस तैयार करेंगी. नोवार्टिस के मुताबिक उसकी आई केयर शाखा एल्कॉन स्मार्ट लेंस बनाने के लिए गूगल को लाइसेंस देगी. लेंस में अति सूक्ष्म माइक्रोचिप होंगी. असल में यह लेंस में एक बहुत ही छोटा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगा होगा.

नीचे पंक्ति: कुल मिलाकर, OptiMind एक बेहतरीन उत्पाद है जो कि शीर्ष 10 नोट्रोपिक्स की हमारी सूची के लिए आसान विकल्प था। यदि आप कैफिनेटेड उत्पाद की तलाश कर रहे हैं, तो यह आपका सबसे अच्छा विकल्प है। यदि आप कैफीन से बचना चाहते हैं, तो हमारी #1 सिफारिश (ऊपर देखें) एक बेहतर विकल्प है। किसी भी तरह से, हमें लगता है कि OptiMind एक बढ़िया उत्पाद है, और यह वास्तव में अच्छा है कि आप एक पैसा भी बिना खर्च कर सकते हैं।

नई दिल्ली: सभी मॉम्स अपने बच्चों को स्मार्ट और इंटेलिजेंट बनाने के लिए बहुत कुछ खिलाती हैं. उन्हें फ्यूचर के लिए तैयार करने के लिए उनकी डाइट का बहुत ध्यान रखती हैं. लेकिन क्या आपको मालूम है कि उन्हें एक साथ सभी फूड्स नहीं बल्कि कुछ स्पेशल फूड्स ही शार्प और स्मार्ट बना सकते हैं? जी हां, आज हम आपको ऐसे ही 5 फूड्स के बारे में बता रहे हैं. इन्हें अपने बच्चों की डाइट में शामिल कीजिए और करिए उन्हें फ्यूचर प्रिपेयर.

केएल आजाद, प्रवक्ता मेकॉज : अस्पताल से ब्रांडेड दवाओं पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाया गया है। डॉक्टरों और नर्सों को भी सूचित किया गया है कि ब्रांडेड दवाओं का उपयोग न करें। यदि एेसा किया जाता है उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

लखनऊ। उत्तरप्रदेश में योगी सरकार ने भ्रष्टाचार पर एक और वार करते हुए दवाओं की खरीद में घोटाले की गुंजाइश को समाप्त कर दिया है। योगी कैबिनेट में हुए फैसले के तहत अब दवाओं की खरीद नवगठित कारपोरेशन के माध्यम से की जायेगी। इसके साथ ही प्रदेश में स्मार्ट पंचायते बनायी जायेंगी।

बागेश्वर और टनकपुर में यूजर्स चार्जेज में खेल हुआ। संयुक्त चिकित्सालय टनकपुर में 1.21 लाख रुपये यूजर्स चार्जेज को चिकित्सालय कोष में जमा नहीं कराया गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भीमताल में यूजर्स चार्जेज से संबंधित बैंक पास बुक और कैश बुक में जमा-शेष धनराशि में अंतर अनियमितता की ओर इशारा कर रहा है। 

इस साइट पर सभी जानकारी और लेख केवल जानकारी और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेशग्य की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। चिकित्सा निदान और उपचार के लिए हमेशा एक योग्य चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।

खानपान की गड़बड़ी में अपनाएं ये घरेलू नुस्खे – posted on : Oct, 08 2015 दूषित पानी और खराब खानपान की वजह से कई तरह के रोग जन्म लेते हैं। आइए जानते हैं रसोई के ऎसे मसालों व अन्य चीजों के बारे में जो कुछ बीमारियों में लाभकारी हो सकते हैं- दस्त: 1. एक गिलास गर्म पानी को ठंडा कर उसमें एक चम्मच चीनी, एक नींबू का रस व एक चुटकी नमक डालकर घोल बनाएं। दिन में 5-6 बार पीने से दस्त से राहत मिलेगी। 2. 100 ग्राम दही में आधा चम्मच ईसबगोल की भूसी व दो चुटकी हल्दी मिलाकर एक खुराक बनाएं। इसे 3-4 बार लेने से दस्त बंद हो जाएंगे। हैजा: 1. एक गिलास नींबू पानी में एक चुटकी नमक मिलाकर थोड़ी-थोड़ी देर के अंतराल मे पीने से शरीर में पानी की कमी पूरी होती है। 2. आधा कप प्याज के रस में एक चम्मच पुदीने का रस मिलाकर 2-2 चम्मच 5-7 बार पीने से हैजा में लाभ होता है। उल्टी : छाछ में भुनी हींग और थोड़ा नमक मिलाकर पीने से उल्टी में आराम मिलता है। नारियल का पानी पीने से भी उल्टी नहीं आती। जोड़ों में दर्द : 250 मिलिलीटर दूध में लहसुन की 5-6 कलियां डालकर उबालें। हल्का गर्म छानकर पीने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।

बड़वानी। कुछ दशक पूर्व तक बड़ा व संपन्ना किसान वह कहलाता था, जिसके बड़े-बड़े खेत होते थे। लेकिन अब बड़ा किसान वह कहलाता है, जो परंपरागत खेती के साथ-साथ आधुनिक खेती कर वर्षभर आर्थिक लाभ प्राप्त करे। प्रदेश की सरकार ने प्रत्येक किसान को संपन्ना बनाने का बीड़ा उठाया है। किसानों को कृषि महोत्सव के तहत उसके ग्राम-खेतों में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, वैज्ञानिकों को भेजकर जानकारी देना प्रारंभ करवाया है। इसका ही परिणाम है कि गत 3 वर्षों से हमारे राज्य को कृषि क्षेत्र का सबसे बड़ा पुरस्कार कृषि कर्मण अवार्ड मिल रहा है।

किताबें और पेपर बनाने के लिए मशहूर कंपनी मोलेस्किन ने अब हाथ से लिखे नोट्स को तुरंत डिजिटल बनाने के लिए तकनीक बनाई है। कंपनी स्मार्ट पेन बनाने वाली कंपनी के साथ मिलकर ऐसा स्मार्ट सेट लाई है। इस सेट में स्मार्ट पेन, पेपर टैबलेट, एंड्रॉइड व आईओएस एप उपलब्ध है।

सीएमओ ने पूरे मामले में स्टाफ से जवाब-तलब कर लिया है. उन्होंने दो एंबुलेंस का औचक निरीक्षण किया. सीएमओ डा. विनीत कुमार शुक्ला के निर्देश पर बुधवार को एसीएमओ डा. एसएस चौहान ने जिला अस्पताल में खड़ी दो एंबुलेंस का निरीक्षण किया. पहली एंबुलेंस में काफी गंदगी मिली. मरीज की सीट तक साफ नहीं थी.

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पिछला भुगतान नहीं, नई फसल से किसान चिंतित – posted on : Sep, 08 2015 नारायणगढ़ : पिछला भुगतान अभी तक नहीं हुआ जबकि नई फसल लगभग तैयार हो चुकी है। ऐसे में गन्ना उत्पादक किसानों को यह चिंता आए रोज सता रही है कि उनकी इस नगदी कही जाने वाली फसल का आखिर क्या होगा? नारायणगढ़ शुगर मिल से जुड़े गन्ना उत्पादक किसान अपने बकाया भुगतान पाने को लेकर पिछले तीन माह से संघर्षरत है। धरने-प्रदर्शनों से लेकर भूख-हड़ताल तक कर चुके इन किसानों को लेकर भले ही प्रदेश सरकार प्रयासरत नजर आ रही है लेकिन शुगर मिल प्रबंधन के अड़ियल रवैये के चलते इन किसानों की हालत दयनीय हो चली है। बता दें कि नारायणगढ़ शुगर मिल से जुड़े गन्ना उत्पादक किसानों का लगभग पचास करोड़ रुपया का भुगतान चीनी मिल की ओर रुका हुआ है। हालाकि प्रदेश सरकार ने चीनी मिल को अपनी ओर से बिना ब्याज का ऋण उपलब्ध करवा तो दिया है लेकिन मिल प्रबंधन द्वारा इस गण की ऐवज में अभी तक कोई प्रतिभूति (गारटी) ना दिए जाने से यह ऋण मंजूर नहीं हो सका है जिसके चलते किसानों को भी उनका पैसा नहीं मिल पाया।

शब्द ‘nootropicमें ‘गढ़ा गया था 1972 Corneliu ई द्वारा. Giurgea, एक रोमानियाई रसायनज्ञ बेल्जियम में रहने वाले. में Giurgea Piracetam का विकास 1968. यह पूरी तरह से समझा नहीं गया है वास्तव में कैसे Piracetam मस्तिष्क पर काम करता है, लेकिन सबूत है कि यह acetylcholine की कार्रवाई को बढ़ाता है, एक neurotransmitter वर्गीकरण और स्मृति के भंडारण के लिए महत्वपूर्ण. माना जाता है कि Piracetam कोशिका झिल्ली की पारगम्यता बढ़ जाती है और भी समग्र न्यूरोट्रांसमिशन को प्रभावित करने के आयन चैनल मिलाना सकता है.

आज भारत की 32 करोड़ से भी ज्यादा आबादी शहरों और कस्बों में रह रही है. शहरी ढांचे के मामले में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है. 2012 में दिल्ली दुनिया के उन विराट महानगरों में शामिल हो गया जिनमें दो करोड़ से भी ज्यादा लोग बसते हैं. शंघाई जैसे शहरों को पीछे छोड़ता हुआ आज यह आबादी के लिहाज से टोक्यो के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शहर है. 1990 में यह पहले 10 बड़े शहरों में भी नहीं था. भारत के दूसरे बड़े शहर भी इसी अंदाज में बढ़ते जा रहे हैं.

शहरी विकास मंत्रालय अब दक्षिण दिल्ली के घिटोरनी इलाके में सरकारी कर्मचारियों के लिए स्मार्ट सिटी की तर्ज पर एक बड़ी कॉलोनी बनाने की तैयारी में है। हालांकि इस कॉलोनी में इस तरह का प्रावधान किया जा रहा है कि बनाए जा रहे मकानों में साढ़े छह हजार मकान सरकारी कर्मचारियों के लिए होंगे, जबकि 500 मकानों का निर्माण करके उन्हें अन्य लोगों को बेचा जा सकेगा। उन मकानों के बेचने से आने वाली रकम से ही निर्माण का खर्च निकल सकेगा। इस तरह से सरकार को बिना पैसा खर्च किए ही साढ़े छह हजार फ्लैट तैयार मिलेंगे।

भिंडी कब्‍ज को भी दूर करती है। यह डायटरी फाइबर का सबसे अच्‍छा स्रोत मानी जाती है, जो हमारी पाचन क्रिया के लिए काफी लाभकारी होती है। यह घुलनशील फाइबर शरीर में मौजूद पानी में घुल जाते हैं, जिससे हमारी पाचन क्रिया दुरुस्‍त हो जाती है ।

“किफायती नाइट्रोपिक्स स्मार्ट दवाओं को बोन ग्रीनफील्ड सर्वश्रेष्ठ कीमत पर खरीद सकते हैं -सस्ती नायोट्रोपिक्स स्मार्ट दवाओं के नुस्खे पर नॉट्रोपिक्स स्मार्ट दवाओं बेन ग्रीनफील्ड पा सकते हैं”

– कई बार हम अपने लिए ख़रीदी दवा को किसी अन्य व्यक्ति को इसी तरह की बीमारी होने पर इस्तेमाल की सलाह दे देते हैं. लेकिन ऐसा करना हानिकारक हो सकता है, क्योंकि डॉक्टर ने आपकी हालत देखकर ऐसी दवा दी है, जो स़िर्फ आपके लिए सही है. ज़रूरी नहीं कि यह दवा दूसरे पर भी वही असर दिखाए.

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नारायणगढ़ : पिछला भुगतान अभी तक नहीं हुआ जबकि नई फसल लगभग तैयार हो चुकी है। ऐसे में गन्ना उत्पादक किसानों को यह चिंता आए रोज सता रही है कि उनकी इस नगदी कही जाने वाली फसल का आखिर क्या होगा? नारायणगढ़ शुगर मिल से जुड़े गन्ना उत्पादक किसान अपने बकाया भुगतान पाने को लेकर पिछले तीन माह से संघर्षरत है। धरने-प्रदर्शनों से लेकर भूख-हड़ताल तक कर चुके इन किसानों को लेकर भले ही प्रदेश सरकार प्रयासरत नजर आ रही है लेकिन शुगर मिल प्रबंधन के अड़ियल रवैये के चलते इन किसानों की हालत दयनीय हो चली है। बता दें कि नारायणगढ़ शुगर मिल से जुड़े गन्ना उत्पादक किसानों का लगभग पचास करोड़ रुपया का भुगतान चीनी मिल की ओर रुका हुआ है। हालाकि प्रदेश सरकार ने चीनी मिल को अपनी ओर से बिना ब्याज का ऋण उपलब्ध करवा तो दिया है लेकिन मिल प्रबंधन द्वारा इस गण की ऐवज में अभी तक कोई प्रतिभूति (गारटी) ना दिए जाने से यह ऋण मंजूर नहीं हो सका है जिसके चलते किसानों को भी उनका पैसा नहीं मिल पाया।

The 17.8cm tall HomePod is pitched as a music-first wireless speaker that can be controlled by voice using Apple’s Siri assistant, which can also set timers, reminders, check the weather and control smart home devices.

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इलेक्ट्रॉनिक पर्स पद्धति पर आधारित स्मार्ट कार्ड (जिसमें इसका मूल्य कार्ड चिप पर ही संग्रहित होता है, खाते के रिकॉर्ड पर दर्ज नहीं होता, इसीलिए नेटवर्क कनेक्टिविटी की जरूरत के बगैर मशीन कार्ड को स्वीकार कर लेता है) का उपयोग पूरे यूरोप में 1990 के दशक के मध्य से हो रहा है, उल्लेखनीय रूप से जर्मनी (गेल्डकार्टे), ऑस्ट्रिया (क्विक), नीदरलैंड (चिपनिप), बेल्जियम और स्विट्जरलैंड (कैश) में. ऑस्ट्रिया और जर्मनी में, सभी वर्तमान बैंक कार्ड अब इलेक्ट्रॉनिक पर्स में शामिल हो गए हैं।

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मार्केट में एंड्रॉयड, विंडोज फोन के साथ पुरानी ब्लैकबेरी डिवाइस भी अवलेबल है। इसलिए फोन खरीदने का फैसला करने से पहले उसका ऑपरेटिंग सिस्टम को जरूर समझें। आपको एंड्रॉयड या विंडोज फोन का पुराना वर्शन नहीं खरीदना चाहिए। ऐसे फोन से भी दूर रहना बेहतर है जिसके ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेट करने के बारे में चीजें साफ न हो। यह बात जरूर ध्यान रखें कि अलग-अलग ऑपरेटिंग सिस्टम्स की अलग-अलग हार्डवेयर जरूरतें होती हैं। जैसे लेटेस्ट एंड्रॉयड फोन के मुकाबले विंडोज फोन (8 और इससे ऊपर) के नए वर्शन में कम प्रोसेसर स्पीड चाहिए।

जैविक खेती से ही समृद्ध-सम्पन्न होंगे किसान: डा. वंदना शिवा – posted on : Oct, 01 2015 रामगढ़, देहरादून। 02 सितम्बर, 2015। ’जैविक भोजन के माध्यम से जिस तरह हम अपने स्वास्थ्य को स्वस्थ रख सकते हैं, उसी तरह जैविक-खेती से हमारे खेतों का स्वास्थ्य सुधर सकता है और हमारे किसान समृद्ध हो सकते हैं। यह कहना था विश्व-विख्यात पर्यावरणविद् एवं नवधान्य की संस्थापक निदेशक, डा. वंदना शिवा का। वह नवधान्य जैविक-फार्म, रामगढ़ देहरादून में जैविक-खेती तथा कृषि-पारस्थितिकी पर समझ बढ़ाने हेतु देश-विदेश से आये शैक्षणिक भ्रमण-दल को सम्बोधित कर रही थीं। इस शैक्षणिक सत्र के दूसरे दिन डा. शिवा ने कृषि-पारस्थितिकी, कृषि-भूमि में सुधार, मिट्टी की उर्वरता आदि विषयों पर व्याख्यान दिया। इस अवसर पर कनाडा से आए जैविक-खेती तथा ग्रामीण विकास के विशेषज्ञ, डा. अविनाश सिंह भी उपस्थित थे। डा. वंदना शिवा ने कहा कि अंधाधुंध रासायनिक खादों एवं कीटनाशकों के छिड़काव से जहां हमारी उपजाऊ भूमि बंजर हो रही है, वहीं हमारी फसलें कई तरह की बीमारियों की शिकार होने लगी हैं। उन्होंने कहा कि हरित-क्रांति के फलस्वरूप पंजाब जैसी उपजाऊ धरती की अन्नोत्पादन क्षमता अपने न्यूनतम स्तर पर आ रही है और वहां जल-स्तर लगातार घटता जा रहा है। वहीं किसान कर्ज के बोझ से तंग आकर आत्महत्या कर रहा है। डा. शिवा ने कहा कि अब रसायनिक खेती के साथ जी.एम. यानी जैव-यांत्रिक तकनीक से बने हुए बीजों द्वारा उत्पादित फसलों को बढ़ावा देने की बात की जा रही है जोकि कृषि-जैवविविधता, किसान और जनसामान्य के स्वास्थ्य तथा समृद्धि के साथ खिलवाड़ से भी अधिक गम्भीर है। इस अवसर पर उन्होंने जी.एम. बीज बनाने की प्रौद्योगिकी पर अपनी बात साझा की। उन्होंने बताया कि किस तरह से बड़ी बीज कम्पनियां किसानों को बाजार से बीज खरीदने पर मजबूर करने की साजिश रच रही हैं। डा. शिवा ने कहा कि कृषि-जैवविविधता को बचाने के लिए पारम्परिक फसल तथा उनके बीजों का संरक्षण अति-आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसान जैविक खेती के माध्यम से ही समृद्धि-सम्पन्न हो सकेंगे। इस अवसर पर उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों के जैविक-खेती एवं पर्यावरण से सम्बधित प्रश्नों के भी उत्तर दिये। दूसरे सत्र में भ्रमण दल ने कार्यकारी निदेशक, डा. विनोद कुमार भट्ट तथा कृषि विशेषज्ञ, डा. आर.एस. रावत के साथ नवधान्य फार्म का प्रयोगात्मक भ्रमण भी किया। ज्ञात हो कि 30 सितम्बर तक चलने वाले शैक्षिक भ्रमण के इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न प्रांतों सहित विदेश यथा संयुक्त राज्य अमेरिका, आॅस्ट्रेलिया, द.कोरिया, इंडोनेशिया, बाली, प. जकार्ता, स्पैन, पुर्तगाल, फ्रांस, ग्रीस आदि देशों से 56 प्रशिक्षणार्थी भाग ले रहे हैं। इन प्रतिभागियों के साथ देश-दुनिया के लगभग एक दर्जन से अधिक जानेमाने वैज्ञानिक प्रयोगात्मक तथा सैद्धांतिक बातें साझा कर रहे हैं।

एल theanine एक अमीनो अम्ल काले और हरे रंग की चाय में पाया अर्थ में अद्वितीय है कि यह अपने मस्तिष्क तरंग पैटर्न बदल जाता है. यह “आराम सावधानी” में डालता है, जिससे फोकस sharpening, तनाव को कम करने, और की भावना समग्र छोड़ने भलाई.

नई दिल्ली, चालू पेराई सीजन में पैदा हुई चीनी उद्योग की मुश्किलें सुलझाने तथा गन्ना किसानों काबकाया भुगतान कराने के लिए सरकार ने कुछ और रियायतें देने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में बुधवार को यह फैसला किया गया। गन्ना किसानों के भुगतान के लिए सरकार ने छह हजार करोड़ रुपये की मंजूरी प्रदान की है। यह राशि पहले ही मंजूर की जा चुकी है, लेकिन इसकी शर्तों में पर्याप्त ढील देने का फैसला किया गया है। सीसीईए के ताजा फैसले में दो बड़े प्रावधान किए गए हैं। पहले की शर्तों के मुताबिक इनमें 30 जून, 2015 तक 50 फीसद गन्ना मूल्य बकाया भुगतान करने वाली मिलों को ही इस रियायती कर्ज को प्राप्त करने की छूट थी। अब इसकी अवधि बढ़ाकर 31 अगस्त, 2015 कर दी गई है। इससे सुविधा का लाभ 90 फीसद से अधिक चीनी मिलें उठा सकेंगी। दूसरी छूट के मुताबिक अब उन चीनी मिलों को भी यह रियायती कर्ज मिल सकेगा, जिन्होंने गन्ना बकाये का शत प्रतिशत भुगतान कर दिया है। उनके लिए सरकार ने दरवाजा खोल दिया है। इससे अच्छा प्रदर्शन करने वाली मिलों को अपना कर्ज चुकाने में मदद मिलेगी। सरकार के इस फैसले से गन्ना किसानों के भुगतान में तेजी आने की पूरी संभावना है। सीसीइए के फैसले में कहा गया है कि किसानों को गन्ने का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में किया जाएगा। चीनी मिलों को उन किसानों की सूची बैंकों को मुहैया करानी होगी।

किसी को भी, जो एक ऑनलाइन स्मार्ट दवाओं की दुकान से स्मार्ट ड्रग्स खरीदना चाहता है के लिए मुख्य मुद्दों वैधता है, प्रभावकारिता, और कीमत. यदि आप एक यौगिक खरीद रहे हैं जो आम तौर पर अमेरिका में एक डॉक्टर के पर्चे की आवश्यकता है., जैसे Modafinil, और कानूनी पर्यवेक्षण के अभाव भी सच्चा होना अच्छा लगता है, यह शायद है.

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इस पौधे को भोजन के साथ-साथ एक डाइटरी सप्लीमेंट के रूप में भी खाया जाता है। यह टेबलेट, पाउडर और फ्लेक रूप में उपलब्ध है। मनुष्यों द्वारा सेवन करने के अलावा, इसका उपयोग मत्स्य पालन (एक्वाकल्चर) , एक्वैरियम और मुर्गी उद्योगों में एक खाद्य पूरक के रूप में भी किया जाता है। यह काफी हद तक प्रोटीन और एमिनो एसिड से बना है और इसलिए शाकाहारियों के लिए फायदेमंद है।

रायपुर | बिलासपुर | भिलाई | बालोद | बलोदा बाजार | बलरामपुर | बेमेतारा | बीजापुर | दंतेवाड़ा | जशपुर | कोंडागांव | कोरबा | कोरिया | कांकेर | कवर्धा | महासमुंद | धमतरी | दुर्ग | गरियाबंद | जांजगीर-चांपा | मुंगेली | नारायणपुर | रायगढ़ | राजनांदगांव | सूरजपुर | सुकमा | अंबिकापुर | जगदलपुर | चारमा

धनिया भारतीय रसोई में प्रयोग की जाने वाली एक सुंगंधित हरी पत्ती है जो कि भोजन को और भी स्वादिष्ट बना देती है। सामान्यतः इसका उपयोग सब्ज़ी की सजावट और ताज़े मसाले के रूप में किया जाता है जलवायु ऐसे क्षेत्र इसके सफल उत्पादन के लिए सर्वोत्तम माने गए है धनिये की अधिक उपज एवं गुणवत्ता के लिए शुष्क एवं ठंडी जलवायु उपयुक्त रहती है इसे खुली धुप की आवश्यकता होती है । भूमि धनिये को लगभग सभी प्रकार की मृदाओं में उगाया जा सकता है बशर्ते उनमे जैविक खाद का उपयोग किया गया हो उचित जल निकास वाली रेतीली दोमट इसके उत्पादन के लिए सर्वोत्तम मानी गई है क्षारीय व हलकी बलुई मिटटी इसके सफल उत्पादन में बाधक मानी जाती है । भूमि और उसकी तैयारी खेत को भली प्रकार से जोतकर मिटटी को भुरभुरा बना लें और अंतिम जुताई के समय १५-२० टन गोबर या कम्पोस्ट की अच्छी सड़ी-गली खाद खेत में एक साथ मिला दें यदि खेत में नमी की कमी है तो पलेवा करना चाहिए । प्रजातियाँ भारत में धनिए की अनेक उन्नत किस्मे उपलब्ध है अत: कृषकों चाहिए की केवल उन्नत किस्मे ही बोए कुछ उन्नत किस्मों के गुणों का उल्लेख निचे किया गया है आर.सी.आर.४१ ,आर.सी.आर.२० ,,गुजरात धनिया २ (जी-२) ,पूसा चयन ३६०,स्वाति लाम चयन सी.एस.२ ,साधना,राजेन्द्र स्वाति,सी.एस. २८७ ,को.१ ,को.२ ,को.३ ,आर.सी.आर.६८४,आर.सी.आर.४३६ बीज बुवाई धनिया मुख्यत: रबी की फसल है भारत वर्ष के अधिकतर क्षेत्रों यह वर्षा पर आधारित फसल है इसलिए इसे शुद्ध या मिश्रित फसल के रूप में उगाया जाता है उ.प्र. में इसे ठन्डे मौसम में उगाया जाता है जबकि दक्षिणी राज्यों में इसकी खेती दोनों मौसमों में की जाती है यहाँ साल में एक बार मई से अगस्त और दूसरी बार अक्तूबर से जनवरी तक होती है दूसरी खेती का सर्वोत्तम समय अक्तूबर -नवम्बर का द्वितीय सप्ताह है क्योंकि इस समय ठण्ड अधिक नहीं पड़ती किन्तु धनिये की बुवाई का उपयुक्त समय 15 अक्तूबर से 15 नवम्बर तक है । बीज की मात्रा धनिए की बीज की मात्रा इस बात पर निर्भर करती है की इसे किस विधि से बोया जा रहा है यदि इसे छिटकवां विधि से बोया जा रहा है तो उस समय प्रति हे.२२ कि.ग्रा.बीज की आवश्यकता होती है जबकि पंक्तियों में बोने के लिए १२-१५ कि.ग्रा. बीज पर्याप्त है । बीजोपचार धनिये की खेती के लिए सर्वप्रथम इसके दानों को दो भागो में कर देना चाहिए इसके बाद बीज को नीम का तेल, गौमूत्र अगर खेत में दीमक है तो कैरोसिन से उपचारित कर बोना चाहिए । बुवाई की विधि आमतौर पर किसान भाई धनिये की छिटकावां विधि से बुवाई करते है जी की एक गलत विधि है इस विधि में कम समय में अधिक क्षेत्र की बुवाई सुगमता से हो जाती है परन्तु इस विधि में अधिक बीज की आवश्यकता होती है और कही-कही बीज अधिक और कही-कही कम पड़ते है कृषि कार्यों को करने में काफी कठिनाई होती है इसके साथ ही उपज कम मिलती है अत: धनिये की बुवाई सदैव पंक्तियों में करनी चाहिए इसके लिए पंक्तियों की आपसी दूरी 25 से 35 से.मी. और पौधों की आपसी दूरी 10 से 12 से.मी.रखनी चाहिए कूड में बीज की गहराई 3-5 से.मी.तक होनी चाहिए इससे अधिक गहरा बीज बोने से अंकुरण देर से और कम मात्रा में होता है आर्गनिक खाद धनिये कि भरपूर उपज लेने के लिए प्रति एकड़ 10 -12 टन गोबर या कम्पोस्ट खाद सड़ी हुयी प्रथम जुताई से पूरब खेत में सामान मात्रा में बिखे कर जुताई कर खेत तैयार कर बुवाई करे जब फसल २०से 25 दिन की हो जाये तो जीवामर्त का छिड्काब करना चाहिए खरपतवार धनिये फसल फसल के साथ अनेक खरपतवार उग आते है जिसके कारण पौधे के विकास एवं बढ़वार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है अंतत: उपज में भारी कमी आ जाती है । खरपतवारों के नियंत्रण के लिए दो बार निराई गुड़ाई करनी चाहिए पहली बुवाई से ३०-४५ दिन बाद और दूसरी निराई गुड़ाई के ६०-७० दिन बाद जहाँ पौधे अधिक उगे हों वहां पहली निराई गुड़ाई के समय अना
वश्यक पौधों को हटाकर पौधों की आपसी दुरी १०-१२ से.मी.कर देनी चाहिए । कीट नियंत्रण चैंपा यह धनिये पर आक्रमण करने वाला- पहला कीट है सामान्यत: पुष्पण के आरंभ होते ही आक्रमण होता है यह पौधे के कोमल अंगों का रस चूसता है । नियंत्रण इसके नियंत्रण के लिए नीम का तेल और गौमूत्र को साथ मिलाकर पम्प द्वारा तर-वतर कर छिडकाव करे । रोग धनिये के फसल में बिभिन्न प्रकार के रोग लगते है जिनके कारण उपज तो कम होती है साथ उपज की गुणवत्ता भी निम्न कोटि की हो जाती है धनिये की प्रमुख रोगों की नियंत्रम विधियों का उल्लेख निचे किया गया है । उकठा यह धनिये का सबसे भयंकर रोग है इस रोग के कारण पौधे मुरझा जाते है जिससे पौधों के विकास व बढ़वार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है । रोकथाम गर्मियों में गहरी जुताई । उचित फसल चक्र अपनाएं । बीजोपचार करके ही बीज बोएं । तना व्रण (स्टेम गांल) यह धनिया का भयंकर रोग है इसमें पौधे का उपरी भाग सुखकर संक्रमित हो जाता है । नियंत्रण इसको नियंत्रल के लिए नीम के तेल या गौ मूत्र से उपचारित कर बीज की बुवाई करे । कटाई यह फसल ९०-१०० दिन में पककर तैयार हो जाती है जब फूल आना बंद हो जाए और बिजोंके गुच्छों का रंग भूरा हो जाए तब फसल कटाई के लिए तैयार मानी जाती है कटाई के बाद फसल को खलिहान में छाया में सुखाना चाहिए पूरी तरह से सुख जाने पर दानों को अलग -अलग करके साफ कर लेते है इसके बाद में दानों को सुखाकर बोरियों में भर लेते है । उपज धनिये की उपज भूमि की उर्वरा शक्ति उनकी किस्म व फसल की देखभाल पर निर्भर करती है प्रति हे.१२-१८ क्विंटल तक उपज मिल जाती है । पाले से बचाव धनिये की फसल पर पाले से भी भारी हानि हो सकती है पाला पड़ने की संभावना नजर आते है एक हलकी सिचाई कर दे रात्रि के समय खेतमे चारों और धुआं करके भी फसल को पाले से बचाया जा सकता है । गोबर के उपलों की राख जो प्राय ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी प्राप्त हो जाती है उसका छिड्काब करने से पीला का असर कम हो जाता है नीम का काढ़ा २५ किलो नीम कि पत्ती हरा ताजा तोड़कर कुचल कर पीसकर ५० लीटर पानी में पकाए जब पानी २० – २५ लीटर रह जाये तब उतार कर ठंडा कर आधा लीटर प्रति पम्प पानी मिलकर प्रयोग करे । गौ मूत्र १० लीटर देसी गाय का गौ मूत्र लेकर किसी पारदर्शी बर्तन प्लास्टिक या कांच का उसमे रखकर १० – १५ दिन तक धुप में रखकर आधा लीटर पानी में मिलाकर प्रयोग करे ।

इस शोध से जुड़े शोधकर्ता अल्वारो मार्को ने कहा कि लार में सोडियम के स्तर से हृदय समस्याओं की प्रारंभिक चेतावनी मिल सकती है। लार से दिल की धड़कन, दबाव और कुछ नमूनों के बारे में मामूली सूचना मिलने से स्थिति को बेहतर किया जा सकता है। इससे रोगियों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकती है। 

इस मौके पर सेंट जोसेफ पब्लिक स्कूल के निदेशक अभिषेक कुमार, प्रभारी एसपी सुधीर कुमार सिंह,  आर्यभट्ट के निदेशक प्रो. अशोक कुमार सिंह अमर, भारद्वाज गुरुकुल के निदेशक शिव प्रकाश भारद्वाज सहित दर्जनों शिक्षक उपस्थित थे.

The herb works quickly to improve memory, mental clarity, and sharpness within just a few hours after a single dose. Like Bacopa, American ginseng acts as an adaptogen, encouraging physical and mental energy while mitigating the effects of stress. It also reduces postprandial hypoglycemia which is known to trigger anxiety.

हल्दी की उन्नत खेती – posted on : Sep, 05 2015 हल्दी एक महत्वपूर्ण मसाले वाली फसल है जिसका उपयोग औषिध से लेकर अनेकों कार्यो में किया जाता है. इसके गुणों का जितना भी बखान किया जाए थोड़ा ही है, क्योंकि यह फसल गुणों से परिपूर्ण है इसकी खेती आसानी से की जा सकती है तथा कम लागत तकनीक को अपनाकर इसे आमदनी का एक अच्छा साधन बनाया जा सकता है. यदि किसान भाई इसकी खेती ज्यादा मात्र में नहीं करना चाहते तो कम से कम इतना अवश्य करें जिसका उनकी प्रति दिन की हल्दी की मांग को पूरा किया जा सकें. –हल्दी की खेती बलुई दोमट या मटियार दोमट मृदा में सफलतापूर्वक की जाती है. जल निकास की उचित व्यवस्था होना चाहिए. यदि जमीन थोड़ी अम्लीय है तो उसमें हल्दी की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है. खाद तथा उर्वरक 20 से 25 टन हेक्टेयर के मान से अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद का उपयोग करना चाहिए क्योंकि गोबर की खाद डालने से जमीन अच्छी तरह से भुरभुरी बन जायेगी तथा जो भी रासायनिक उर्वरक दी जायेगी उसका समुचित उपयोग हो सकेगा. इसके बाद 100-120 किलो ग्राम नत्रजन 60-80 किलोग्राम स्फुर 80-100 तथा किलोग्राम हेक्टेयर के मान से पोटाश का प्रयोग करना चाहिए. हल्दी की खेती हेतु पोटाश का बहुत महत्व है जो किसान इसका प्रयोग नही करते है हल्दी की गुणवत्ता तथा उपज दोनों ही प्रभावित होती है. नाइट्रोजन की एक चैथाई मात्र तथा स्फुर एवं पोटाश की पूरी मात्र बोनी के समय दी जानी चाहिए एवं नाइट्रोजन की बची मात्र की दो भागों में बांटकर पहली मात्र बुआई के 40 से 60 दिनों बाद तथा दूसरी मात्र 80 से 100 दिनों बाद देना चाहिए. फसल चक्र हल्दी की सफल खेती के लिए उचित फसल चक्र का अपनाना अति आवश्यक है. इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि हल्दी की खेती लगातार उसी जमीन पर न की जावें क्योंकि यह फसल जमीन से ज्यादा से ज्यादा पोषक तत्वों को खींचती है जिससे दूसरे साल उसी जमीन में इसकी खेती नहीं करें तो ज्याद अच्छा होगा. सिंचित क्षेत्रों में मक्का, आलू, मिर्च, ज्वार, धान, मूंगफल्ली आदि फसलों के साथ फसल चक्र अपनाकर हल्दी की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है. विकसित किस्में मसाले वाली किस्म, पूना, सोनिया, गौतम, रशिम, सुरोमा, रोमा, क्र ष्णा, गुन्टूर, मेघा, हल्दा1, सुकर्ण, सुगंधन तथा सी.ओ.1 आदि प्रमुख जातियां है जिनका चुनाव किसान कर सकते है. थोड़ी सी मात्र यदि एक बार मिल जाती है तो फिर अपना बीज तैयार किया जा सकता है. बुआई जिन किसान भाइयों के पास पानी की पर्याप्त सुविधा है वे अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक हल्दी को लगा सकते है. लेकिन जिनके पास सिंचाई सुविधा का पर्याप्त मात्र में अभाव है वे मानसून की बारिश शुरू होते ही हल्दी लगा सकते है किंतु खेती की तेयारी पहले से ही करके रखना चाहिए. जमीन अच्छी तरह से तैयार करने के बाद पांच-सात मीटर, लंबी तथा दो-तीन मीटर चौड़ी क्यारियां बनाकर 30 से 45 सेंटी मीटर कतार से कातर तथा 20 – 25 सेंटी मीटर पौध से पौध की दूरी रखते हुए चार-पांच सेंटीमीटर गहराई पर गाठी कंदो को लगाना चाहिए. इस तरह से हल्दी लगाने से 12 – 15 क्विंटल है. गाठों की जरूरत पड़ती है. सिंचाई हल्दी में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं है लेकिन यदि फसल गर्मी में ही बुवाई जाती है तो वर्षा प्रारंभ होने के पहले तक चार-पांच सिंचाई की आवश्यकता पड़ती हैं. मानसून आने के बाद सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती है. किंतु यदि बीच में वर्षा नहीं होती या कि सुखा पड़ जाता है तथा अक्टूबर के बाद यदि बारिश नहीं हो पाती है तो ऐसी परिस्थिति में 20-25 दिन के अंतराल पर सिंचाई करना आवश्यक हो जाता है. नवम्बर माह में पत्तियों का विकास तथा धनकंद की मोटाई बढ़ना आरंभ हो जाता है तो उस समय उपज ज्यादा प्राप्त करने के लिए मिट्टी चढ़ाना आवश्यक हो जाता है जिससे कंदो का विकास अच्छा होता है तथा उत्पादन में वृद्धि हो जाती है.
=— कटाई मई- जून में बोई गई फसल फरवरी माह तक खोदने लायक हो जाती है इस समय धन कंदो का विकास हो जाता है और पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगती है तभी समझना चाहिए कि हल्दी पक चुकी है तथा अब इसकी कटाइ या खोदाइ की जा सकती है. पहले पौधो के दराती हसिए से काट देना चाहिए तथा बाद में हल से जुताई करके हल्दी के कंदों को आसानी से निकाला जा सकता है जहां पर भी जरूरत समझी जाए कुदाली का भी प्रयोग किया जा सकता है. हल्दी की अगेती फसल सात-आठ आठ-नौ माह तथा देर से पकने वाली 9-10 माह में पककर तैयार होती है. उपज जहां पर उपरोक्त मात्र में उर्वरक तथा गोबर की खाद का प्रयोग किया गया है तथा सिचिंत क्षेत्र में फसल बोई गई है तो 50-100 किवंटल प्रति हेक्टेयर तथा असिंचित क्षेत्रों से 50-100 किवंटल प्रति हेक्टेयर कच्ची हल्दी प्राप्त की जा सकती है. यह ध्यान रहे कि कच्ची हल्दी को सूखाने के बाद 15-25 प्रतिशत ही रह जाती है

सार्वजनिक क्षेत्र के राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने अगले 3 साल में किसानों को सिंचाई सुविधाओं में सुधार के लिए 30,000 करोड़ रुपये का कर्ज उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। नाबार्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा कि कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्र पर ध्यान देने वाला संस्थान इस वर्ष अब तक 1000 करोड़ रुपये की पहले ही मंजूरी दे चुका है। यह वित्त पोषण सरकार द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के तहत अगले 5 साल में किसानों को दिए जाने वाले 50,000 करोड़ रुपये के कर्ज की हाल में की गई घोषणा के अतिरिक्त होगा। नाबार्ड के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक हर्ष कुमार भानवाला ने कहा, ‘हमने अगले 3 साल में किसानों को सिंचाई सुविधाओं के लिए 30,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का निर्णय किया है। इस साल हमारी 10,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की योजना है और मुझे आपको सूचित करते हुए खुशी है कि हम अब तक 1000 करोड़ रुपये आवंटित कर चुके हैं।’ उन्होंने कहा कि केवल क्षमता निर्माण के बजाए हम सिंचाई कुशलता सुधारने में मदद पर ध्यान दे रहे हैं। भानवाला ने कहा, ‘बैंक को ग्रामीण स्तर पर जलवायु परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में ग्रीन क्लाइमेट फंड (जीसीएफ) से मान्यता मिली है।’

– कई बार हम अपने लिए ख़रीदी दवा को किसी अन्य व्यक्ति को इसी तरह की बीमारी होने पर इस्तेमाल की सलाह दे देते हैं. लेकिन ऐसा करना हानिकारक हो सकता है, क्योंकि डॉक्टर ने आपकी हालत देखकर ऐसी दवा दी है, जो स़िर्फ आपके लिए सही है. ज़रूरी नहीं कि यह दवा दूसरे पर भी वही असर दिखाए.

RxAdvance announced that the International Association of Sheet Metal, Air, Rail and Transportation Workers (SMART), one of North America’s most dynamic and diverse unions with 216,000 members, has awarded its …

अल्फा GPC छूट के साथ जुड़े न्यूरोट्रांसमीटर का स्तर बढ़ता है और लगातार सभी उम्र के लोगों में स्मृति और ध्यान अवधि को बेहतर बनाता है. उत्पाद एक स्मृति पूरक हर जगह के रूप में बेचा जाता है और यह भी मस्तिष्क मदद करने के लिए प्रयोग किया जाता है एक चोट या स्ट्रोक के बाद ठीक हो.

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न्यूजीलैंड निवासी छोटे और बड़े दोनों तरह के लेनदेन के लिए एफ्टपोस (EFTPOS) का इस्तेमाल करते हैं। न्यूजीलैंड वालों के लिए 50 NZD (न्यूजीलैंड) सेंट जैसे छोटी राशि के भुगतान के लिए एफ्टपोस (EFTPOS) का उपयोग कोई असामान्य बात नहीं है। क्योंकि न्यूजीलैंड में खर्च करने का एफ्टपोस (EFTPOS) एक अभिन्न हिस्सा है, कभी-कभार नेटवर्क में खराबी के कारण, जब तक नेटवर्क सेवा वापस शुरू नहीं होती तब तक मैन्युअल “जिप-जैप” स्वाइप मशीन से एफ्टपोस (EFTPOS) लेनदेन की प्रक्रिया में उन्हें जाना पड़ता है, जिन्हें बहुत ही अधिक विलंब होने पर यह दिक्कते पेश आती है और कारोबार में आय के नुकसान का यह कारण बनता है।[23] जैसा कि ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में होता है, न्यूजीलैंड के व्यापारी आमतौर पर प्रति लेनदेन के लिए शुल्क अदा नहीं करते हैं। लेनदेन शुल्क आमतौर पर ग्राहक वहन करते हैं और खुदरा दुकानदार एक तय रकम मासिक उपकरण किराया शुल्क के रूप में अदा करते हैं। चूंकि छात्रों और 18 से नीचे की उम्र के बच्चों के बैंक खाते के लिए आमतौर पर इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन शुल्क या तो लिये नहीं जाते या बहुत ही कम लिये जाते हैं, इस कारण एफ्टपोस (EFTPOS) का उपयोग युवा पीढि़यों द्वारा लगभग हर जगह किया जाता है। हाल के समय में, प्रमुख बैंकों ने बगैर एफ्टपोस (EFTPOS) लेनदेन शुल्क के बैंक खाते की पेशकश की शुरूआत की है।

इस दवा का प्रयोग करने से पहले, अपने चिकित्सक को अपनी वर्तमान दवाओं, अनिर्देशित उत्पादों (जैसे: विटामिन, हर्बल सप्लीमेंट आदि), एलर्जी, पहले से मौजूद बीमारियों, और वर्तमान स्वास्थ्य स्थितियों (जैसे: गर्भावस्था, आगामी सर्जरी आदि) के बारे में जानकारी प्रदान करें। कुछ स्वास्थ्य परिस्थितियां आपको दवा के दुष्प्रभावों के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना सकती हैं। अपने चिकित्सक के निर्देशों के अनुसार दवा का सेवन करें या उत्पाद पर प्रिंट किये गए निर्देशों का पालन करें। खुराक आपकी स्थिति पर आधारित होती है। यदि आपकी स्थिति में कोई सुधार नहीं होता है या यदि आपकी हालत ज्यादा खराब हो जाती है तो अपने चिकित्सक को बताएं। महत्वपूर्ण परामर्श बिंदुओं को नीचे सूचीबद्ध किया गया है।

एक्स्पायर्ड Grd Smart Powder (जीआरडी स्मार्ट पाउडर) की एक खुराक लेते हुए प्रतिकूल घटना उत्पादन की संभावना नहीं है। हालाँकि, उचित सलाह के लिए या यदि आप बीमार या बेचैन महसूस करते हैं तो कृपया अपने प्रमुख स्वास्थ्य प्रदाता या दवा विक्रेता से संपर्क करें। एक्स्पायर्ड दवाएं आपकी निर्देशित स्थितियों का उपचार करने में अप्रभावी हो सकती हैं। जोखिम से बचने के लिए, एक्स्पायर्ड दवा ना लेना महत्वपूर्ण होता है। यदि आपको कोई पुरानी बीमारी है जिसके लिए आपको निरंतर दवा लेने की आवश्यकता होती है जैसे हृदय रोग, मिर्गी, और प्राणघातक एलर्जी तो अपने प्रमुख स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता के साथ संपर्क में रहना ज्यादा सुरक्षित होता है ताकि आपके पास दवाओं की बिल्कुल नयी आपूर्ति उपलब्ध रह सके।

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दोस्तों, आज हम जानते हैं बिट कॉइनके बारे में ,जोकि  न केवल अंतररास्ट्रीय बाजार में धूम मचा रहा है बल्कि भारत में भी ये काफी चर्चा में बना हुआ है  तो आइये आज डिटेल में जानते हैं की बित्कोइन क्या है ????

जैविक खेती के लिए सब्सिडी/आर्थिक सहायता – posted on : Aug, 22 2015 सरकार ने केन्‍द्रीय क्षेत्र की विभिन्‍न योजनाओं जैसे राष्‍ट्रीय सतत कृषि मिशन (एनएमएसए) के तहत देश में जैविक खेती को अपनाने के लिए राज्‍य सरकारों के जरिए किसानों को वित्‍तीय सहायता देने का प्रावधान बनाया है। बागवानी के एकीकृत विकास का मिशन (एमआईडीएच), राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) और राष्‍ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) भी इन योजनाओं में शामिल हैं। एनएमएसए के तहत जैविक कच्‍चे माल के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए लागत के 50 फीसदी तक वित्‍तीय सहायता दी जाती है। इसके तहत प्रति हेक्‍टेयर अधिकतम 5000 रुपये और प्रति लाभार्थी अधिकतम 10000 रुपये की वित्‍तीय सहायता दी जाती है। इसी तरह एनएफएसएम के तहत प्रति हेक्‍टेयर 300 रुपये की दर से जैव उर्वरकों के लिए किसानों को सहायता दी जाती है।

Citicoline एक प्राकृतिक यौगिक आपके शरीर की कोशिकाओं में से प्रत्येक में पाया जाता है. यह स्वस्थ मस्तिष्क कोशिका झिल्ली निर्माण में मदद करता है और जब तक यह भी मस्तिष्क plasticity जो मस्तिष्क के अपने जीवन भर में बदलने की क्षमता है बढ़ाने मस्तिष्क में रक्त प्रवाह में सुधार.

डायबिटीज के शिकार लोगों की आंसुओं की जांच कर शुगर लेवल का बड़ी आसानी से पता चल जाता है. आंखों में गीलापन बनाए रखने वाले इस तरल में अगर ग्लूकोज की मात्रा ज्यादा हुई तो समझिए कि शुगर का स्तर बढ़ रहा है. स्मार्ट कॉन्टेक्ट लेंस ग्लूकोज इस मात्रा को आंख की पुतली में ही माप देगा और बता देगा कि शुगर लेवल कितना है. ऐसा हुआ तो शुगर टेस्ट के लिए खून की बूंद निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी. नोवार्टिस के अलावा कुछ और कंपनियां भी पसीने के जरिए शुगर लेवल पकड़ने की चिप पर काम कर रही हैं.

मराठवाड़ा: मराठवाड़ा का सोना जल चुका है, ये सोना है, मौसंबी, जो मराठवाड़ा में किसानों की आमदनी का मुख्य जरिया था, लेकिन 3-4 सालों के सूखे ने इस सोने को खत्म कर दिया है। किसान अपने हाथों से मौसंबी के पेड़ काटने को मजबूर हैं। 30 साल के विजय भाऊसाहेब गोगडे के लिए मौसंबी के पेड़ अपने सगों जैसे हैं, लेकिन अब पिता के साथ मिलकर वह इन पेड़ों को अपने हाथों से काट रहे हैं, ताकि खेत में कोई और फसल लगा सकें। 10 एकड़ के खेत में मौसंबी के 500 पेड़ लगाए थे, 10 लोगों का परिवार इन्हीं पेड़ों के आसरे था, अलग-अलग बैंकों से 5 लाख रुपये का कर्ज ले रखा है। साल दर साल पड़ रहे सूखे से अब ये पेड़ विजय का साथ छोड़ चुके हैं। विजय का कहना है कि 3 साल से सूखा है। कुंआ खोदा, बावड़ी लगाई, लाखों रुपये टैंकर पर खर्च कर दिए और कितना पानी देंगे, हमारे पिता ने इन्हें हमारे जैसा ही पाला-पोसा है, लेकिन अब कोई चारा नहीं है। संभाजी की कहानी भी ऐसी ही है, एक हैक्टेयर में खेती थी, मौसंबी जल गई, कपास फ्लॉप हो गया, कर्ज पर ट्रैक्टर लिया था, अब फाइनेंस कंपनी वाले नोटिस भेज रहे हैं। मराठवाड़ा के लगभग 10 फीसदी किसान मौसंबी की खेती करते थे, किसी वक्त उनके घर बेटी देना लोग शान समझते थे, जिसके घर में ज्यादा मौसंबी के पेड़ होते थे। 5-6 साल में बड़ा होने के बाद इस पेड़ से 20-25 साल तक फल मिलता था, लेकिन पिछले कुछ सालों से पड़ रहे सूखे से लगभग ढाई लाख हैक्टेयर में मौसंबी की खेती प्रभावित हुई है, किसानों को हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है। मौसंबी उत्पादक संघटन के अध्यक्ष जयाजीराव सूर्यवंशी पाटिल का कहना है कि अकेले औरंगाबाद में हजारों हैक्टेयर में मौसंबी की फसल बर्बाद हुई है। हर साल किसानों को लगभग 2000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, सरकार को इसकी कोई फिक्र नहीं है।

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यह मुख्य कारण है क्यों Piracetam बंद लेबल इस्तेमाल कर रहे हैं .इस उत्पाद को होना सिद्ध किया गया है 100% कोई साइड इफेक्ट के लिए थोड़ा के साथ उपयोग करने के लिए सुरक्षित. सबूत यह डिस्लेक्सिया रोगियों और कई अन्य लोगों को है कि विकलांग सीखने या यहां तक ​​कि उन है कि मस्तिष्क संबंधी बीमारियों से ग्रस्त इलाज में मदद कर सकता है के आधार पर. हालांकि एक एक चिकित्सा के रूप में Piracetam पर भरोसा नहीं करना चाहिए जब तक कि यह एक लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक की देखरेख में है.

अल्फा GPC छूट के साथ जुड़े न्यूरोट्रांसमीटर का स्तर बढ़ता है और लगातार सभी उम्र के लोगों में स्मृति और ध्यान अवधि को बेहतर बनाता है. उत्पाद एक स्मृति पूरक हर जगह के रूप में बेचा जाता है और यह भी मस्तिष्क मदद करने के लिए प्रयोग किया जाता है एक चोट या स्ट्रोक के बाद ठीक हो.

बैंकों से कर्ज लेने वाले किसानों और सोसाइटियों के खाताधारी कई किसानों को फसल बीमा के बारे में अधिक जानकारी ही नहीं रहती है। कर्ज लेने और खाद-बीज लेने के चक्कर में किसानों द्वारा बीमा के नियमों के बारे में जानकारी ही नहीं ली जाती है। इसके अलावा बैंक से कर्जा लेने और खाद-बीज लेने पर बीमा कराया जाना अनिवार्य रहता है। इसकी राशि कर्ज की राशि के साथ अपने आप ही जोड़ दी जाती है। किसानों को यह तक नहीं पता रहता है कि किस योजना के तहत राशि ली गई है। सहकारी समितियों द्वारा भी समिति से जुड़े किसानों से राशि लेकर फसलों का बीमा कराया जाता है। प्राकृतिक आपदा के बाद किसानों को वाजिब हक फसल का क्लेम देना तो दूर की बात है सर्वे तक नहीं कराया जाता है। जैसे तैसे किसान आग्रह कर सर्वे कराने की कोशिश करता है तो नष्ट हुई फसल का बीमा क्लेम मिल पाना संभव ही नहीं होता है। कई मौकों पर प्रशासन सर्वे कराकर रिपोर्ट बैंकों को भेज देते हैं, तो बैंक सर्वे रिपोर्ट के बाद बीमा कंपनी को नोटिस भेजते हैं। पूरी प्रक्रिया इतनी सुस्त होती है कि बीमा कंपनी की टीम जब तक सर्वे करने खेत पहुंचती है, तब तक किसान क्लेम की आस छोड़ अगली फसल समय पर लेने के लिए बोवनी कर चुका होता है। कृषक केसीसी ((किसान क्रेडिट कार्ड)) के जरिए जब बैंक या फिर सहकारी समितियों से कर्ज लेता है, तो कर्ज वसूली के लिए बैंक बोई जाने वाली फसल का बीमा कराती है। प्रति हेक्टेयर दो से तीन हजार रुपए तक फसल बीमा का भी जोड़ा जाता है। बीमा के बाद यदि फसल किसी वजह से खराब हो जाती है, तो प्रशासन ग्राम पंचायत को ईकाई मानकर पिछले पांच सालों में दो सीजन रबी-खरीफ मिलाकर कुल पैदावार का एवरेज निकाल नुकसान का आंकलन कराता है। लगातार पांच वर्षों तक नुकसान का एवरेज आने पर सर्वे रिपोर्ट संबंधित बैंकों को भेजी जाती है। बैंक बीमा कंपनी को नोटिस देकर क्लेम के लिए अवगत कराते हैं। बीमा कंपनी अपनी टीम भेज नुकसान का फिर से आकलन कराती है। संबंधित किसानों को क्लेम देने की कार्रवाई होती है।

सरकार का इरादा इस पंचवर्षीय योजना में कम से कम तीन हजार स्टोर्स खोलने का है। वैसे हकीकत यह है कि साल 2008 में इस योजना के शुरू होने के बाद से वह देश के विभिन्न हिस्सों में महज 157 स्टोर्स ही खोल पाई है। सूत्रों का कहना है कि इसकी वजह इन स्टोर्स के लिए जगह न मिल पाने के साथ-साथ दवाओं की कमी भी है। इन स्टोर्स पर सिर्फ जेनरिक दवाओं की सेल होती है और वह भी सिर्फ सरकारी दवा कंपनियों की। इस दिक्कत से निजात पाने के लिए सरकार अब निजी दवा कंपिनयों से भी दवाएं खरीदने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही वह दवाओं की खरीद, बिक्री और स्टॉक की जानकारी को मैनेज करने के लिए एक ऐसा सिस्टम बनाने पर विचार कर रही है, जिससे इन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके। सरकार ने नए स्टोर खोलने के लिए हाल में ही अपनी पॉलिसी में भी बदलाव किया है। अब कोई भी बेरोजगार फार्मासिस्ट, एनजीओ या सहकारी संस्था भी जनऔषधि स्टोर खोल सकती है। इस सिलसिले में शुरुआत उत्तर प्रदेश और उड़ीसा से की गई है।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजन को इस प्रोजेक्ट के लिए सम्मानित किया है. दरअसल स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर आमंत्रित की गई थी, इसमें देशभर से करीब 15 लाख लोगों ने अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट पेश की.

Aniracetam बेल्जियम में एक दवा कंपनी ने 1970 के दशक में विकसित किया गया था और इस्तेमाल किया गया है और बाजार पर अपने आगमन के बाद से अध्ययन किया 1979. यह आम तौर पर सुरक्षित और गैर विषैले माना जाता है, दुष्प्रभावों के एक कम भार के साथ कि आम तौर पर हल्के और अस्थायी हैं. यह दोनों जानवरों में परीक्षण किया गया है और अल्पकालिक मानसिक विकलांगता के साथ ही लंबी अवधि क्षति का सामना कर मनुष्य, अल्जाइमर के साथ रोगियों सहित. यूरोपीय बाजार पर, यह नाम के तहत बेचा जाता है Memodrin, Draganon, Sarpul, कहां से, और Ampamet.

फिलीपींस में, सभी तीन राष्ट्रीय एटीएम (ATM) नेटवर्क संकाय मालिकाना पिन डेबिट प्रदान करते हैं। 1987 में एक्सप्रेस पेमेंट सिस्टम (Express Payment System) द्वारा पहली बार इसकी पेशकश की गयी, उसके बाद 1993 में पेलिंक (Paylink) के साथ मेगालिंक (Megalink) आया और 1994 में [[बिक्री बिंदु (Point-of-Sale) के साथ बैंकनेट|बिक्री बिंदु (Point-of-Sale) के साथ बैंकनेट]] (BancNet) की शुरुआत हुई।

अस्वीकरण: इस वेबसाइट पर पाया सभी उत्पादों के ब्रांड नाम उनके संबंधित कंपनियों के ट्रेडमार्क हैं। इस वेबसाइट पर जानकारी जरूरी Top10supplements.com के विचारों या विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करता है। जानकारी केवल मनोरंजन प्रयोजनों के लिए करना है और और पेशेवर, चिकित्सा या स्वास्थ्य सलाह या निदान का गठन नहीं है, और इस तरह के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इस साइट पर जानकारी लिखित या एक चिकित्सा पेशेवर द्वारा समीक्षा की है, और अपने स्वयं के जोखिम पर इस्तेमाल किया जा करने के लिए है ही नहीं है। कोई परिस्थिति के तहत इस साइट पर पाया जानकारी चिकित्सा सलाह के रूप में लिया या, रोकने का निदान, या किसी भी बीमारी या बीमारी के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। आप खरीद जो भी उत्पाद के लिए लेबल निर्देशों का पालन करना सुनिश्चित करें। हमेशा आप इस वेबसाइट पर देख किसी की खुराक का उपयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

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चीनी निर्यात अनिवार्य किए जाने का कानून – posted on : Aug, 06 2015 चीनी मिलों को घाटे से उबारने के लिए केंद्र सरकार चीनी स्टॉक का निर्यात अनिवार्य बनाने का कानून बना सकती है। सूत्रों के मुताबिक सरकार लाखों टन चीनी के स्टॉक दुनियाभर के बाजारों में निर्यात करवाकर चीनी मिलों को घाटे से उबारना चाहती है। इस मसले पर आखिरी फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को करना है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस हफ्ते के अंत में मोदी मंत्रियों के साथ बैठक में इस प्रस्ताव पर विचार कर सकते हैं। मोदी इस संवेदनशील मसले पर मंत्रियों, अधिकारियों और चीनी मिल मालिकों से मशविरा करेंगे। 1 अक्टूबर से कानून संभवयह प्रस्ताव सरकार ऐसे समय लाई है, जब चीनी मिल मालिक घाटे के कारण प्लांट बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। पिछले छह माह से भारी निर्यात के कारण ग्लोबल मार्केट में भी चीनी के भाव में गिरावट आई है।सूत्रों ने बताया कि सरकार चीनी निर्यात अनिवार्य किए जाने का कानून नए फसल वर्ष यानी एक अक्टूबर से लागू कर सकती है।

अस्पताल प्रबंधन की इस व्यवस्था से मरीजों को काफी राहत मिली है। लेकिन फिलहाल डॉक्टरों को कुछ परेशानी भी हो रही है। डॉक्टरों का कहना है कि कई बार जिस दवा में निशान लगाकर देते हैं दवा वितरण केंद्र में यदि वह दवा खत्म रहती है तो मरीज को दोबारा आकर दूसरी दवा में निशान लगवाना पड़ता है।

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उत्‍तरी भारत में प्‍याज रबी की फसल है यहां प्‍याज का भंडारण अक्‍टूबर माह के बाद तक करना सम्‍भव नही है क्‍योकि कंद अंकुरित हो जाते हैं। इस अवधि‍(अक्‍टूबर से अप्रैल) में उत्‍तर भारत में प्‍याज की उपलब्‍ध्‍ता कम होने तथा परिवहन खर्चे के कारण दाम बढ जाते हैं। इसके समाधान के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने उत्‍तर भारत के मैदानो में खरीफ में भी प्‍याज की खेती के लिए एन-53(N-53) तथा एग्रीफाउंड डार्क रैड नामक प्‍याज की किस्‍मों का विकास किया है। प्‍याज की किस्‍म : एन-53(आई.ए.आर.आई.); एग्रीफाउंड डार्क रैड (एन.एच.आर.डी.एफ.)—– बीज बुआई समय: मई अंत से जून—- रोपाई का समय : मध्‍य अगस्‍त—– कटाई : दिसम्‍बर से जनवरी—- पैदावार : 150 से 200 क्विंटल/हैक्‍टेयर

लंदन। हमारे मोबाइल में नेटवर्क नहीं आता, तो हम सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों को बुरा भला कहकर चुप हो जाते हैं। पर ब्रिटेन के एक किसान को इतना गुस्सा आया कि उसने खुद का नेटवर्क टॉवर खड़ा कर लिया। अब उससे वो कई गुना तेजी से इंटरनेट की स्पीड का मजा ले रहा है। और तो और, किसान ने खुद की कंपनी खड़ी करने का निर्णय भी ले लिया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में जहां नेटवर्क की समस्या आती है और इंटरनेट की स्पीड बेहद धीमी है, वहां वो नेटवर्क प्रोवाइड कराएगा। रिचर्ड ग्वे नाम का ये किसान ब्रिटेन में के एक गांव में रहता है। गांव में उसका फोन 4जी सपोर्ट तो करता है, पर इंटरनेट की स्पीड बेहद कम आती है। बस, इस समस्या से निजात पाने के लिए उसने खुद का जुगाड़ू टॉवर खड़ा करने की सोची और खुद के पूर्व इंजीनियर होने का फायदा उठाते हुए टॉवर बना लिया। पहले जहां उसे महज 1एमबीपीएस की स्पीड मिलती थी, वो अब कई गुने बढ़कर 69 एमबीपीएस तक पहुंच गई है। जबकि समूचे ब्रिटेन में इंटरनेट की स्पीड 25 एमबीपीएस है।

हर कपल चाहता है कि उसका पार्टनर उसे कुछ इस तरह से प्यार करे कि वह पल उनके जीवन का यादगार पल बन जाए। आमतौर पर लोग अपनी प्रेम अभिव्यक्ति के लिए अपने पार्टनर को किस करते हैं। कुछ प्रेमी जोडे अपने अंतरंग पलों को यादगार बनाने के लिए कुछ अनोखे तरीके अपनाते हैं। लेकिन आज हम आपको ऐसे कपल …

चिली में एफ्टपोस (EFTPOS) पद्धति है, जो रेडकैम्प्रा (Redcompra) (खरीददारी नेटवर्क) कहलाती है, वर्तमान समय में देश भर में कम से कम 23,000 प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होती है। इस पद्धति का उपयोग करते हुए सामान प्रमुख शहरी केंद्रों के ज्यादातर सुपरमार्केट, खुदरा दुकानों, पब और रेस्तरां से खरीदा जा सकता है।

Piracetam 1970 के बाद से दोनों प्रयोगशाला पशुओं और मनुष्यों में एक स्मार्ट दवा के रूप में पढ़ाई कर दिया गया है. कुछ देशों में यह मस्तिष्क समारोह स्ट्रोक पीड़ितों और रोगियों को जो स्ट्रोक के लिए उच्च जोखिम में माना जाता है की रक्षा के लिए निर्धारित है. नैदानिक ​​रोगियों पर किया पढ़ाई अल्जाइमर रोग के साथ कुछ लाभ दिखाया है, हालांकि यह रोग रिवर्स नहीं है, और न ही वहाँ पर्याप्त सबूत मौजूदा दवाओं की जगह का औचित्य साबित करने के लिए है. यह अभी भी फायदेमंद हो सकता है जब मौजूदा दवाओं के साथ मिलाकर प्रयोग. Piracetam आम तौर पर सुरक्षित माना जाता है और साइड इफेक्ट की घटना कम है और वे आम तौर पर हल्के होते हैं. भले ही यह आम तौर पर सुरक्षित माना जाता है, ऑस्ट्रेलिया में नियमन की जलवायु Piracetam मुश्किल लग बनाता है.

कंपनी का दावा है कि जिन लोगों की पास की नजर कमजोर है, यह लेंस उनके लिए भी खासा मददगार साबित होगा. स्मार्ट लेंस, पढ़ाई लिखाई या सुई में धागा डालने जैसे नजदीकी काम के दौरान खुद ही ऑटो फोकस हो जाएगा. इससे प्रेसबायोपिया के मरीजों को बहुत मदद मिलेगी. प्रेसबायोपिया बीमारी में इंसान की आंख किसी चीज पर फोकस नहीं कर पाती.

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स्मार्ट पंप Saskatchewan के भीतर सभी क्षेत्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों में 31 दिसम्बर, 2016 से शुरू हो जाएगा। अन्य क्षेत्रों सहित रेजिना Qu’Appelle स्वास्थ्य क्षेत्र, प्रांत में पहले नई प्रौद्योगिकी को लागू करने के लिए, पहले से ही पूरा कर लिया है या उनके rollouts नए उपकरणों को पूरा करने की प्रक्रिया में हैं।

सउदी अरब में डेबिट कार्ड के सभी लेनदेन सउदी पेमेंट नेटवर्क (Saudi Payments Network) (SPAN) के जरिए होते हैं, इस राजशाही में यही एकमात्र इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली है और सउदी अरब मौद्रिक एजेंसी (Saudi Arabian Monetary Agency) (SAMA) द्वारा सभी बैंक इस नेटवर्क में पूरी तरह अनुकूल कार्ड जारी करने के लिए अपेक्षित हैं। यह पूरे देश भर में बिक्री बिंदुओं के टर्मिनलों (POS) को केंद्रीय भुगतान से जोड़ता है, जो कार्ड जारी करनेवाले स्थानीय बैंक, VISA, AMEX या मास्टर कार्ड के वित्तीय लेनदेन की दिशा को फिर से बदल देता है।

इसलिए कैबिनेट ने सदर तहसील के ग्राम छावनी मीरानपुर में 4050 वर्ग मीटर (करीब एक एकड़) जमीन मात्र एक रुपये में 90 साल की लीज पर देने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। एफएम रेडियो स्टेशन की स्थापना से जहां सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार में मदद मिलेगी, वहीं आपदा आने की भविष्यवाणी और आपदा प्रबंधन में भी मदद मिलेगी।

भारतीय बागवानी की झलक – posted on : Apr, 30 2016 फलों और सब्जियों का विश्व में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश। आम, केला, नारियल, काजू, पपीता, अनार आदि का शीर्ष उत्पादक देश। मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश। अंगूर, केला, कसावा, मटर, पपीता आदि की उत्पादकता में प्रथम स्थान ताजा फलों और सब्जियों के निर्यात में मूल्य के आधार पर 14 प्रतिशत और प्रसंस्करित फलों और सब्जियों में 16.27 प्रतिशत वृद्धि दर।

क्रेडिट कार्ड के विपरीत, जो उच्च शुल्क और ब्याज दर चार्ज करता है, जब अग्रिम नकद प्राप्त करता है, एक डेबिट कार्ड का इस्तेमाल एटीएम (ATM) से या एक पिन-आधारित लेनदेन से विदेशी ATM शुल्क की तुलना में बगैर कोई अतिरिक्त शुल्क अदा किए नकद प्राप्त हो जाता है।

इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट कार्ड लेनदेन अनुज्ञप्ति और पारंपरिक एफ्टपोस (EFTPOS) अनुज्ञप्ति कार्ड सिस्टम ऑस्ट्रेलिया दोनों ही संचालित करता है, इस दोनों के बीच अंतर यह है कि एफ्टपोस (EFTPOS) लेनदेन एक व्यक्तिगत पहचान संख्या (पिन) द्वारा अधिकृत हैं, जबकि क्रेडिट कार्ड लेनदेन आमतौर पर छपाई और एक रसीद पर हस्ताक्षर द्वारा अधिकृत हैं। यदि उपयोगकर्ता 3 बार सही पिन दर्ज करने में विफल रहता है तो परिणाम के रेंज में ताला लग जाएगा और तब फोन कॉल या शाखा में जाकर नए पिन के साथ पुन: सक्रिय करने की आवश्यकता होती है, कार्ड व्यापारी नष्ट कर दिया जाटा है या एटीएम के मामले में मशीन कार्ड अंदर ही रखा लेता है, उनमें से दोनों को एक नया कार्ड बनाने के आदेश की आवश्यकता होती है।

भारत में मूली का प्रयोग सलाद व सब्‍जी के रूप में पूरे साल होता है परन्‍तू इसकी कोई भी एक किस्‍म सारे साल नही उगाई जा सकती। पूसा संस्‍थान दिल्‍ली द्वारा विकस्ति पॉच किस्‍मो को उगाकर, उत्‍तरी भारत के मैदानों में पूरे साल मूली का उत्‍पादन किया जा सकता है। 1. पूसा देशी (Pusa Desi) अगस्‍त से अक्‍टूबर सितम्‍बर से नवम्‍बर 175 कि./है. — 2. पूसा रश्मि (Pusa Rashmi) सितम्‍बर से नवम्‍बर अक्‍टूबर से दिसम्‍बर 200 कि./है. —- 3. जापानीज वहाईट (Japanes White) अक्‍टूबर से दिसम्‍बर नवम्‍बर से जनवरी 250 कि./है. —- 4. पूसा हिमानी (Pusa Himani) दिसम्‍बर से मार्च जनवरी से अप्रैल 250 कि./है. —– पूसा चेतकी (Pusa Chetki) फरवरी से अगस्‍त मार्च से सितम्‍बर 170 कि./है

आरएसबीवाई, एमएसबीवाई के तहत होने वाले उपचार में 40 फीसदी राशि मुख्यमंत्री राहत कोष, 35 फीसदी राशि अस्पताल के बजट और 25 फीसदी राशि ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर्स, नर्स, मेडिकल स्टाफ को बतौर प्रोत्साहन दी जाती है। नियमानुसार 35 फीसदी राशि का इस्तेमाल अस्पताल के विकास कार्यों और मरीजों के हितों में खर्च करना है।

गुलाब की खेती कैसे करें – posted on : Apr, 30 2016 हेल्लो दोस्तों मैं हु संदीप ओला और आज मैं आपको गुलाब की खेती एक बारे में बताऊंगा की कैसे आप भी गुलाब की खेती करके विदेशों में बेचकर पैसे कमा सकते है दोस्तों फूलों में गुलाब भी महंगे फूलों की लिस्ट में आता है. दोस्तों कहते है की गुलाब का फूल कीचड़ में भी उग जाता है क्या आपके अंदर वैसी क्षमता है आप विपरीत परिस्थियों में डटे रहते है या भाग खड़े होते है. आप इसकी खेती कैसे करनी ये सिखने के साथ भी सिख भी लेनी है की कितनी भी परेशानी क्यों ना जाए आप सामना करेंगे. गुलाब वानस्पतिक नाम – रोजा इंडिका कुल – रोजेसी सामान्य विवरण – गुलाब एक झाड़ीनुमा बहु-वर्षीय पौधा है जो कि सुन्दर पुष्पों के लिए उगाया जाता है। उत्पत्ति स्थान निश्चित नहीं है किन्तु रोम, मिस्र और भारत में प्राचीन काल से उगाया जाता है। यह सर्वाधिक लोकप्रिय पुष्प है, इसलिए फूलों का राजा कहा जाता है। सुन्दरता के लिए क्यारियों तथा गमलों में उगाया जाता है। फूलदानों में भी सजाया जाता है। गुलाब जल, गुलाब इत्र, गुलकंद तथा पेय पदार्थ तैयार करने में गुलाब का उपयोग होता है। विटामिन ‘सी’ भी गुलाब में होता है। गुलाब का पौधा एक वर्ष में दो किलो पुष्प देता है तथा 8 से 10 वर्ष तक फूलता रहता है। जिस क्यारी में इसे उगाया जाता है, ’रोजरी’ और गुलाब उत्पादक को ‘रोजेरियन’ कहते है। पंखुडि़याँ – कड़वी, कषैली और उत्तम सुगन्ध वाली होती है। शीतलतादायक, दस्तावर, उत्तेजक, ज्वरनाशक, त्रिदोष नाशक, जलन नाशक। कुष्ठ में लाभदायक मुंह की गंध नष्ट करता है। क्षुधावर्धक, कफ निःसारक, हृदय बलवर्धक और आंखों के लिये उत्तम। सिर दर्द, पेट दर्द, मुखपाक में लाभदायी। फेफड़े, गुर्दे तथा यकृत में लाभकरक। गर्मी, पुराना ज्वर, दाह सूजन में आराम पहुँचता है। (आयुर्वेद)। गुलाब के तेल में सिट्रोनेलाल Citronellol)], नेराल (Nerol)], जिरेनिऑल Geraniol)], लिनेलूल Linalool), फेनिल एथिल एल्कोहाॅल (Phenyl Ethyl Alcohol), फार्नसोल (Farnasol), सिट्रल (Citral), यूजिनाॅल (Eugenol)प्रमुख रासायनिक तत्व होते है। इसके साथ ही कुछ अन्य तत्व जैसे – डैमस्कोन, रोज ऑक्साइड और राजे फ्यूरान आदि। प्रमुख किस्में – गुलाब को 18 प्रजातियों में विभक्त किया गया है, जिनमें 8 प्रजातियाँ जंगली गुलाब की हैं। कुछ प्रमुख जातियाँ इस प्रकार है: 1. ‘टी’ रोज Tea Rose) – सुगन्धित पुष्प जिनके खिलने पर चाय की पत्तियों जैसी सुगन्ध आती है। विपुलता से फूलते हैं। संकर ‘टी’ किस्मों के विकास के कारण इन्हें कम लगाया जाता है। लेडी हेलिंग्डन, मोली शर्मन आदि प्रमुख किस्में है। 2. शकर ‘टी’ रोज Hybrid Tea Rose) – संकर परपीचुएल्स और टी गुलाब के संकरण से विकसित की गई किस्में है। वर्तमान समय में लोकप्रिय किस्में इसी समूह के अंतर्गत आती हैं। रंगों के अनुसार कुछ प्रमुख किस्में इस प्रकार हैं: सफेद – तुशार, वीर्गो, स्वामी विवेकानंद, डाॅ. होमी भाभा। गुलाबी – कान्फीडेन्स, फम्र्ट प्राइज, मिशेल मैलेण्ड। पीला – गोल्डेन जाइण्ट, मैक-ग्रेडी सन-सेट, पीस, रंभा, गे्रनेडा, ग्रेन्ड मेरी जेनी, किंग रेन्सम। नारंगी-सिन्दूरी, मूंगा, सिन्दूरी – अरूणा, मान्टीजुमा, सुपर स्टार। लाल से गहरा लोहित रंग – एवन, क्रिश्चियन डायर, एलेक्स रेड क्रिमसन ग्लोरी, मिस्टर लिंकन, ओकलाहोमा, कालिमा, लालबहादुर, भीम, एलेक्स रेड, हैपीने। मोतिया रंग – ब्ल्यूमून, लेडी एक्स, अफ्रीका स्टार। दो रंग मिश्रित – बजाजो (लाल-भूरा सफेद), फलेमिंग सन्सेट (गहरा नारंगी-पीला), अकेबनो (पीला-लाल)। मिश्रित रंग – अमेरिकन हेरिटेज, केअर-लेस, लव, किस ऑफ फायर, एनविल स्पार्क, तहीटी, थैस।

कब खिलाएं – कई बच्चों को अंडे के सफेद हिस्से से एलर्जी होती है. अगर आपके बच्चे के साथ भी ऐसा ही है तो एक बार डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें. अगर एलर्जी नहीं है तो बच्चों को रोज़ाना 1 अंडा ज़रूर खिलाएं. बच्चों को कच्चा अंडा कभी भी ना खिलाएं. 

“मैं सबसे अच्छे मूल्य के लिए सबसे अच्छा स्मार्ट दवा कहां से खरीद सकता हूं _मैं सबसे अच्छा मूल्य पर बिक्री के लिए नॉट्रोपिक्स स्मार्ट दवाओं को कहाँ खरीद सकता हूं”

इस दवा का प्रयोग करने से पहले, अपने चिकित्सक को अपनी वर्तमान दवाओं, अनिर्देशित उत्पादों (जैसे: विटामिन, हर्बल सप्लीमेंट आदि), एलर्जी, पहले से मौजूद बीमारियों, और वर्तमान स्वास्थ्य स्थितियों (जैसे: गर्भावस्था, आगामी सर्जरी आदि) के बारे में जानकारी प्रदान करें। कुछ स्वास्थ्य परिस्थितियां आपको दवा के दुष्प्रभावों के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना सकती हैं। अपने चिकित्सक के निर्देशों के अनुसार दवा का सेवन करें या उत्पाद पर प्रिंट किये गए निर्देशों का पालन करें। खुराक आपकी स्थिति पर आधारित होती है। यदि आपकी स्थिति में कोई सुधार नहीं होता है या यदि आपकी हालत ज्यादा खराब हो जाती है तो अपने चिकित्सक को बताएं। महत्वपूर्ण परामर्श बिंदुओं को नीचे सूचीबद्ध किया गया है।

American ginseng can cause some side effects including diarrhea, itching, insomnia, सरदर्द, और घबराहट और महिलाओं अमेरिकन जिनसेंग लेने के लिए अगर वे गर्भवती हैं सलाह नहीं दी जाती, स्तनपान या एक हार्मोन के प्रति संवेदनशील कैंसर.

परंपरागत रूप से, FSAs (इन खातों में सबसे पुराना) नुकसान उठाने के बाद प्रतिपूर्ति के दावे के जरिए केवल इनका इस्तेमाल किया जाता है और अक्सर जेब से ज्यादा खर्च का भुगतान किया जाता है, ऐसा अक्सर तब होता है जब रकम कर्मचारी की तनख्वाह के चेक से काट लिया जाता है। (FSAs से धन आमतौर पर वेतन में कटौती करके दिया जाता हैं।) इस दोहरी गिरावट से बचने के लिए सटीक और लेखा-परीक्षण योग्य कर विवरणी के लिए प्रतिवेदन के जरिए चिकित्सा के लिए FSAs और HRAs इंटरनल रेवेन्यू सर्विस (Internal Revenue) (IRS) द्वारा अनुमोदित अकेला तरीका है। डेबिट कार्ड का ब्यौरा कहता है, केवल चिकित्सा उपयोग के लिए विभिन्न कारणों के लिए अमान्य हैं: (1) व्यापारी और जारी करनेवाले बैंक के पास जल्द से जल्द तय करने के अलावा कोई रास्ता नहीं कि पूरी खरीददारी ग्राहक के कर लाभ के प्रकार के योग्य है या नहीं; (2) ग्राहकों के लिए जल्द से जल्द जानने का कोई रास्ता नहीं; बहुधा वह जरूरत और सुविधा से मिली-जुली खरीददारी करते हैं और आसानी से गलतियां कर सकते हैं; (3) ग्राहक और जारी करनेवाले बैंकों के बीच अतिरिक्त संविदात्मक अनुच्छेद अतिरिक्त भ्रम पैदा करते हुए (उदाहरणस्वरूप अगर ग्राहक के असावधानीवश अयोग्य सामग्री की खरीददारी पर दंड दिया जाता, तो यह खाते में संभावित बचत के लाभ को कमजोर बना देगा) भुगतान प्रक्रिया मानकों में बदलाव करेगा। योग्य खरीदादारी के लिए कार्ड का विशेष इस्तेमाल ग्राहकों के लिए सुविधाजनक हो सकता है, लेकिन वास्तव में कार्ड का इस्तेमाल कैसे हो, इससे कुछ लेनादेना नहीं। दवा की दुकान मान्यताप्राप्त न होने के कारण अगर बैंक लेनदेन को खारिज कर देता है तो यह कार्डधारकों के लिए नुकसान पहुंचानेवाला और भ्रम पैदा करनेवाला होगा। संयुक्त राज्य अमेरिका में सभी चिकित्सा सेवा या आपूर्ति भंडार सटीक सूचना उपलब्ध कराने समर्थ नहीं होते हैं, इसलिए डेबिट कार्ड जारी करनेवाले सभी लेनदेन को मान्य कर सकते हैं, अगर खारिज हो गया या कागजी कार्रवाई नियमों को संतुष्ट करने में पर्याप्त नहीं पाया गया तो कार्डधारकों को प्रपत्र मैन्युअली भेज दिया जा सकता है।

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शोधकर्ताओं ने करीब 688 बच्चों के आंकड़ों का अध्ययन कर यह निष्कर्ष निकाला है। इसमें पाया गया कि जो मां गर्भावस्था के दौरान ज़्यादा फल खाती हैं, उनके बच्चे एक साल की उम्र में विकासात्मक परीक्षण पर बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

विक्टोरियन सरकार के बेहतर स्वास्थ्य चैनल के अनुसार, विकासशील भ्रूण के जन्म के बाद पहले पांच या छह महीने के माध्यम से यह पिछले माँ से पर्याप्त लोहा खींचता है। इसका मतलब यह है कि गर्भावस्था के दौरान लोहे के लिए RDI सामान्य से बहुत अधिक है, प्रति दिन 27mg पर है, तो एक पूरक लेने में मदद कर सकते हैं।

नई दिल्‍ली। सरकार की योजना साल 2022 तक सभी को 24 घंटे बिजली मुहैया कराने की है। देश में बिजली की सप्‍लाई और डिमांड में काफी अंतर है। क्‍योंकि मांग के अनुपात में बिजली का उत्‍पादन नहीं हो रहा है। जबकि इसकी बढ़ती हुई कीमतों ने आम आदमी के बजट को बिगाड़कर रख दिया है। ऐसे में सोलर पावर लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प बनकर उभरा है। जिसकी मदद से ग्रिड एनर्जी पर बढ़ती निर्भरता को भी कम किया जा सकता है। साथ ही सोलर पावर हेल्‍थ और पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है। सरकार ने जवाहर लाल नेहरू सोलर मिशन के जरिए साल 2022 तक 1 लाख मेगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्‍य रखा है। जिसमें 40 हजार मेगावाट घर के छतों पर लगाए जाने वाले (रूफटाप) से और 60 हजार मेगावाट बिजली बड़े और मझोले ग्रिड से जुड़े हुए प्रोजेक्‍ट के जरिए पूरा किया जाएगा।इसके अलावा सोलर पावर का करोबार करने वालों को भी सरकार मौका देगी। साथ ही देशभर में प्रोजेक्‍ट लगाने के लिए आर्थिक सहायता भी देगी। केंद्रीय अक्षय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) इन प्रोजेक्‍ट को यह आर्थिक सहायता वायबिलिटी गैप फंड (वीजीएफ) स्‍कीम के तहत देगी। वहीं, रूफटाप सोलर पावर प्रोजेक्‍ट और छोटे प्रोजेक्‍ट लगाने के लिए भी लोगों को सब्सिडी और वित्‍तीय सहायता भी सरकार मुहैया कराएगी जिसमें एफएआर और होम लोन आदि प्रमुख है। ताकि आने वाले समय में बिजली का प्रोडक्‍शन बढ़ाकर सभी को बिजली उपलब्‍ध कराया जा सके।

एफ्टपोस (EFTPOS) कार्ड गिरोपोस्ट में भागीदार ऑस्ट्रेलिया पोस्ट आउटलेट के काउंटर पर नकदी जमा करने या निकालने के लिए भी इस्तेमाल किये जा सकते हैं, ठीक उसी तरह जैसे कि बैंक शाखा के बंद हो जाने के बाद भी बैंक शाखा में लेन-देन चला करता था। ऑस्ट्रेलिया में इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन आम तौर पर टेल्स्ट्रा अर्जेन्ट (Telstra Argent) और ओप्ट्स ट्रांजैक्ट प्लस नेटवर्क (Optus Transact Plus network) के मार्फत संसाधित होते हैं – जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में पुराने ट्रानसेंड नेटवर्क (Transcend network) का स्थान लिया है। सबसे पुराना कीकार्ड केवल एफ्टपोस (EFTPOS) के लिए उपयोग योग्य था और एटीएम (ATM) या बैंक की शाखाओं में, जबकि नई डेबिट कार्ड प्रणाली क्रेडिट कार्ड की ही तरह काम करता है, केवल निर्दिष्ट बैंक खाते में धन का उपयोग करने को छोड़कर. इसका मतलब यह है कि, अन्य लाभ के बीच नई पद्धति की देरी के बिना इलेक्ट्रॉनिक खरीद के लिए उपयुक्त है 2 बैंक से पैसा बैंक स्थानान्तरण के लिए 4 दिनों के लिए।

अन्य दुष्प्रभाव संभव हो रहे हैं, लेकिन संभावना नहीं है। जब तक आप एक अच्छा उत्पाद चयन कर रहे हैं (नीचे शीर्ष 10 nootropics की हमारी सूची देखें) और आप खुराक निर्देशों का पालन कर रहे हैं, तो आप कई दुष्प्रभाव अनुभव नहीं होना चाहिए।

बी) पूर्णकालिक इंस्पेक्टर के माध्यम से ऑपरेटर आत्म-निरीक्षण की जांच करें, और इसी रिकॉर्ड की समीक्षा करें और साइन इन करें। पूर्ण समय निरीक्षण तैयार उत्पाद के निरीक्षण के लिए जिम्मेदार है, और तैयार उत्पाद आने वाले निरीक्षण रिकॉर्ड बनाते हैं।

वैज्ञानिक यह कहते हैं कि कितने लोग ऐसे “स्मार्ट दवाओं” या “औषधीय संज्ञानात्मक संवर्द्धन पदार्थ” लेते हैं, इस पर विश्वसनीय डेटा प्राप्त करना कठिन है। प्रचलित अध्ययन और सर्वेक्षण से पता चलता है, कि जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से लोग उनका उपयोग करते हैं, जैसे शोधकर्ताओं, चिकित्सकों, और छात्रों एक में अनौपचारिक सर्वेक्षण प्रकृति की जर्नल के पाठकों के बीच, 20% ने बताया कि उन्होंने स्मार्ट ड्रग्स ले ली हैं और ऐसा लगता है कि उनकी उपयोग बढ़ने पर है.

उपचार के लिए निजी व सरकारी अस्पतालों का चक्कर काट रहे आम आदमी को डॉक्टर की फीस से कहीं ज्यादा खर्च मंहगी दवाओं पर करना पड़ता है। मुफ्त के सरकारी अस्पताल के मरीज भी दवाओं के खर्च से परेशान हैं। लेकिन राजधानी के सदर अस्पताल में अब ऐसा नहीं होगा। डॉक्टर मरीज के पुर्जे (प्रिस्क्रिप्शन) पर मनमर्जी की ब्रांडेड दवा नहीं लिख सकेंगे। इसके लिए सदर अस्पताल प्रबंधन ने नई व्यवस्था की है। जिसके तहत अब मरीजों को ओपीडी के पुर्जे पर ही अस्पताल में उपलब्ध मुफ्त मिलने वाली दवाओं के नाम प्रिंट कर दिए हैं। डॉक्टर मरीज का डायग्नोसिस करने के बाद पर्ची पर प्रिंट दवाओं के नाम में से जरूरी दवा के आगे उसका पावर और डोज लिखेंगे।

इन प्रभावों का अध्ययन, प्रयोगशाला में मानव कैंसर कोशिकाओं और पशुओं दोनों पर किया गया है, लेकिन मानव कोशिकाओं पर किये जाने वाले परीक्षण सीमित हैं। इन प्रयोगों से ये पाया गया कि विथाफेरिन ए कैंसर के इलाज में सबसे अधिक सक्रिय तब होता है जब वो अशवगंधा की जड़ों या पत्तियों से निकाला जाता है।

स्मार्ट कार्ड से दवाओं, उपकरणों की स्थानीय खरीदी पर रोक लगाने संबंधी आदेश जारी कर दिया गया हैं। जब सीजीएमएससी दवाओं, आवश्यक उपकरणों की खरीदी कर रही है तो फिर बाहर से दवाएं खरीदने की जरूरत नहीं है। अस्पताल स्मार्ट कार्ड की 35 फीसदी राशि का इस्तेमाल अस्पताल के विकास में करें।

जब क्रेडिट कार्ड का उपयोग करके कोई लेनदेन की जाती है तब बैंक के पैसे खर्च होते हैं और इसीलिए, जहां धोखाधड़ी या विवाद होता है वहां अपने पैसों का दावा करने में बैंक का निहित स्वार्थ होता है। उपभोक्ता, जो खरीददारी से असंतुष्ट है, या जो व्यापारी द्वारा ठगा गया हो, बैंक उसके आरोपों को निरस्त करने के लिए लड़ सकता है। लेकिन जब डेबिट पर खरीददारी की जाती है, तब उपभोक्ता अपने पैसे खर्च करते/करती हैं और अगर धन प्राप्त करने की कोई अभिप्रेरणा है भी तो इसमें बैंक का कोई काम नहीं।

जिन्को के पार्श्व प्रभाव पाचन परेशान शामिल, दस्त, dizziness, सरदर्द, और बेचैनी और यह मस्तिष्क के पूरक ऐसे प्रोज़ैक या Zoloft के रूप में चयनात्मक serotonin अवरोध करनेवाला अवसादरोधी दवाओं के साथ नहीं लिया जाना चाहिए.

उपभोक्ता सुरक्षा इस्तेमाल किये गए अलग-अलग नेटवर्क पर निर्भर होता है। उदाहरण के लिए वीसा और मास्टर कार्ड व्यापारियों की ओर से न्यूनतम और अधिकतम खरीददारी, अधिभार और मनमाने ढंग से सुरक्षा प्रक्रियाओं का निषेध करता है। व्यापारी आमतौर पर क्रेडिट लेनदेन के लिए अधिक शुल्क चार्ज करते हैं, चूंकि डेबिट जिसमें धोखाधड़ी की संभावना होती है, के नेटवर्क लेनदेन में कम चार्ज करते हैं। जिसके फलस्वरूप डेबिट लेनदेन के वे “स्टीर” ग्राहक बन सकते हैं। चूंकि क्रेडिट कार्ड के उपभोक्ता के लिए पैसा उसके नियंत्रण से तुरंत बाहर नहीं निकल जाएगा, इस‍लिए विवादित आरोप से निपटना उनके लिए आसान हो जाता हैं। डेबिट कार्ड पर धोखाधड़ी के आरोप चालू खाटा के लिए समस्या का कारण हो सकते हैं, क्योंकि पैसा तुरंत निकल जाता है और जिसके कारण ओवरड्राफ्ट या चेक बाउंस हो सकता है। कुछ मामलों में डेबिट कार्ड जारी करनेवाला बैंक मामले का जब तक निपटारा नहीं हो जाता है, विवादित चार्ज को तुरंत वापस कर देंगे और कुछ अधिकार-क्षेत्र में, अनाधिकृत चार्ज के लिए उपभोक्ता की देनदारी डेबिट और क्रेडिट दोनों कार्ड के लिए एक जैसे हैं।

मशीनों में आंकड़े भरकर उनसे नतीजे निकालने को कहा जाता है. मगर कई बार आंकड़ों का हेर-फेर इन मशीनों को ग़लत नतीजे निकालने की तरफ़ धकेल सकता है. ऐसे में हम स्मार्ट मशीनों की ग़लतियों के शिकार बन सकते हैं.

स्मार्ट फोन्स और अत्याधुनिक मशीन सीखने और गहरी शिक्षा एल्गोरिदम में मिले छह अलग-अलग सेंसर से एकत्र की गई जानकारी के संयोजन का उपयोग करते हुए, शोधकर्ताओं ने एंड्रॉइड स्मार्ट फोन को अनलॉक करने में सफलता प्राप्त की, जिसमें केवल तीन प्रयासों में 99.5 प्रतिशत सटीकता थी, एक फोन जिसमें 50 सबसे आम पिन नंबरों में से एक था।

यह कौन बनाता है: यह उत्पाद प्राकृतिक ढेर, एक डेलावेयर आधारित पूरक कंपनी द्वारा किया जाता है। प्राकृतिक ढेर सबसे अच्छी खुराक संभव बनाने के लिए, जबकि गुणवत्ता, स्थिरता और ग्राहकों की संतुष्टि के लिए एक सच्चे प्रतिबद्धता के साथ प्रयुक्त सामग्री, विनिर्माण प्रक्रियाओं, आदि के विषय में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने, प्राकृतिक ढेर एक नाम तुम पर भरोसा कर सकते हैं करना है।

साइड इफेक्ट: विशिष्ट एंफ़ैटेमिन साइड इफेक्ट का प्रदर्शन नहीं करता है. कुछ मामलों में, सिरदर्द का कारण हो सकता है, मतली, उल्टी, दस्त, भूख न लगना, चिड़चिड़ापन, घबराहट, अनिद्रा, स्तब्ध हो जाना, दर्द, शुष्क मुँह, orofacial dyskinesia और लंबे समय तक उपयोग के साथ वृद्धि हुई जिगर एंजाइम का स्तर. और पढ़ें…

निर्देशित खुराक से ज्यादा का सेवन ना करें। ज्यादा दवा के उपयोग से आपके लक्षणों में सुधार नहीं होगा, बल्कि इससे विषाक्तता या गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। यदि आपको लगता है कि आपने या किसी और ने Grd Smart Powder (जीआरडी स्मार्ट पाउडर) की ज्यादा खुराक ले ली है तो कृपया अपने नजदीकी अस्पताल या नर्सिंग होम के आपातकालीन विभाग में जाएँ। आवश्यक जानकारी पाने में चिकित्सकों की सहायता करने के लिए अपने साथ मेडिसिन बॉक्स, कंटेनर या लेबल ले जाएँ।

कम सेरोटोनिन के स्तर कर सकते हैं अवसाद का एक प्रमुख कारण. प्रोजाक और Zoloft की तरह सबसे लोकप्रिय एंटी दवाओं अधिक सेरोटोनिन मस्तिष्क में उपलब्ध बनाने. बढ़ती serotonin के स्तर तक, tryptophan मस्तिष्क संबंधी और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों की एक विस्तृत विविधता के साथ उन लोगों के लिए जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि कर सकते हैं. कम tryptophan दोनों लंबे समय तक और अल्पकालिक स्मृति हानि का कारण और कुछ संज्ञानात्मक कार्यों शिथिल पड़ सकते हैं.

किसान बेच रहे सस्ता और डेयरी वाले महंगा दूध – posted on : Sep, 28 2015 जबलपुर। बिना पॉश्चराइजिंग (दूध शुद्घ करने की प्रक्रिया) के डेयरी वाले 50 रुपए लीटर दूध बेच रहे हैं। यह दूध बिना बिल और गारंटी के बिक रहा है, जबकि सांची किसानों से 32 रुपए लीटर दूध लेकर उसे शुद्ध करती। इसके बाद भी 44 रुपए लीटर में बेच रही है। किसान भी कम रेट पर दूध बेचकर फायदा कमा रहे है और सांची अपना प्रॉफिट निकाल रही है। बावजूद इसके डेयरी वालों की मनमानी को रोकने में जिला प्रशासन ठोस कदम नहीं उठा सकी। अंदाजा इसी बात से लगा सकते है अब सांची का दूध छत्तीसगढ़ तक सप्लाई किया जाने लगा है। वहीं डोर टू डोर सप्लाई भी शुरू कर दी गई है।

Aniracetam बेल्जियम में एक दवा कंपनी ने 1970 के दशक में विकसित किया गया था और इस्तेमाल किया गया है और बाजार पर अपने आगमन के बाद से अध्ययन किया 1979. यह आम तौर पर सुरक्षित और गैर विषैले माना जाता है, दुष्प्रभावों के एक कम भार के साथ कि आम तौर पर हल्के और अस्थायी हैं. यह दोनों जानवरों में परीक्षण किया गया है और अल्पकालिक मानसिक विकलांगता के साथ ही लंबी अवधि क्षति का सामना कर मनुष्य, अल्जाइमर के साथ रोगियों सहित. यूरोपीय बाजार पर, यह नाम के तहत बेचा जाता है Memodrin, Draganon, Sarpul, कहां से, और Ampamet.

Vincamine एक फूल बेल सिर दर्द के इलाज के लिए इस्तेमाल किया गया है है, स्मरण शक्ति की क्षति, और उम्र के बाद से सिर का चक्कर. Vinpocetine की आपूर्ति करता है याददाश्त में सुधार करने के लिए लिया जाता है, मस्तिष्क कोहरे से उबरने, मानसिक स्पष्टता बढ़ाने, और उम्र बढ़ने के खिलाफ मस्तिष्क की रक्षा. यह तेजी से मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को बढ़ाने के लिए में प्रवेश करती है, मस्तिष्क सूजन कम कर देता है, मुक्त कणों से नुकसान के विरुद्ध सुरक्षा, और संतुलन न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर.

“जब आप पिन में अपना फोन और चाबी पकड़ते हैं, तो जिस तरह से फोन 1, 5 या 9 को दबाते हैं, वही बहुत अलग होता है। इसी तरह, आपके दाहिने अंगूठे से 1 दबाने से आप 9 को दबाकर अधिक रोका जायेगा,” बताते हैं कि डॉ। भसीन, जिन्होंने अपने सहयोगियों, डेविड बेरेन्द और डॉ। बर्नहार्ड जुंग के साथ 10 महीने बिताए, इस परियोजना पर।

डायबिटीज और भिंडी डायबिटीज ऐसी बीमारी है जो पूरा जीवन साथ निभाती है। इसके स्‍ट्रोक से बचने के लिए दिनचर्या के साथ खानपान पर विशेष ध्‍यान दिया जाता है, नहीं तो ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ जाता है और इससे कई समस्‍यायें हो सकती हैं। डायबिटीज के मरीजों की सबसे बड़ी मुश्किल है खानपान को लेकर। इस बीमारी में क्‍या खायें और क्‍या न खायें इसका विशेष ध्‍यान रखना पड़ता है। डायबिटीज के मरीजों को भिंडी खाना चाहिए यह बहुत ही फायदेमंद होता है और इससे ब्‍लड शुगर का स्‍तर सामान्‍य भी रहता है। शायद ही यह किसी को पता होगा कि यह डायबिटिक के लिए भिंडी कितना फायदेमंद साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि फल और सब्ज़ी दोनों में इतनी क्षमता होती है कि वह ब्लड-ग्लूकोज को नियंत्रित करने के साथ-साथ वजन को भी कम करने में मददगार है। साथ ही पूर्ण रूप से स्वस्थ और तंदुरूस्त रहने में पूरी तरह से सहायता करता है। डायबिटीज के मरीजों को फाइबर युक्त डायट फायदेमंद होती है। भिंडी में घुलनशील फाइबर रहता है जो ग्लूकोज को सोखकर ब्लड-शुगर लेवल को खाने के बाद नियंत्रण में रखता है। कई अध्ययनों से यह पता चला है कि सब्जियों में एक प्रकार का एंजाइम होता है जो कार्बोहाइड्रेट को मेटाबॉलाइज करने, इन्सुलिन लेवल के उत्पादन को बढ़ाने, अग्न्याशय में बीटा सेल्स को बेहतर बनाने में भिंडी मदद करती है। डायबिटीज के मरीजों को वजन कम करने की सलाह दी जाती है। इसलिए डायबिटिक्‍स को ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जिससे वजन निंयत्रण में रहे। भिंडी के सेवन से वजन कम होता है, क्‍योंकि इसमें लो कैलोरी होती है। 100 ग्राम भिंडी में मात्र 33 कैलोरी होती है। भिंडी में विटामिन सी होता है जो इम्युनिटी बढ़ाता है। जो लोग मधुमेह के कारण कई प्रकार के संक्रमण से ग्रस्‍त हो जाते है यह उनसे बचाव करता है। जिन खाद्य पदार्थों में लो ग्लाइसेमिक इन्डेक्स होता है वे शुगर के निकलने की गति को कम कर देते हैं।

स्वास्थ्य संचालनालय से इसी महीने अचानक स्मार्ट कार्ड से इलाज का सिस्टम बदला गया था। यह फरमान जारी किया गया था कि अस्पताल में जो दवाएं या उपकरण उपलब्ध होंगे, वही मरीजों को मुहैया कराया जाएगा। दवा व उपकरण उपलब्ध न होने पर मरीजों को खुद बाजार से खरीदना होगा। स्मार्ट कार्ड होने के बावजूद यही सिस्टम अमल में लाने को कहा गया। नए सिस्टम लागू करने के कुछ दिनों के भीतर ही मरीजों के सामने दिक्कत खड़ी होने लगी थी।

मिट्टी गुणवत्‍ता की जॉच अर्थात मिट्टी – परीक्षण क्‍यों – कब – कैसे ? महत्‍व – जिस प्रकार मनुष्‍य एवं जानवरों को संतुलित आहार की आवश्‍यकता होती है, उसी प्रकार फसलों के लिये भी संतुलित आहार ( पोषक तत्‍वों) की आवश्‍यकता होती है। अत्‍यधिक एवं असंतुलित उर्वरकों तथा कृषि रसायनों के प्रयोग से खेत की मिट्रृटी मृत हो रही है या दिनों दिन उत्‍पादन क्षमता घट रही है। जिन क्षेत्रों में अधिक उपज वाली उन्‍नत, संशोधित (रिसर्च) एवं संकर किस्‍में उगाई जाती है वहॉं मिट्टी में आवश्‍यक पोषक तत्‍वों की कमी बहुत तेजी से होती है। अत: भरपूर उत्‍पादन लेने के लिए खेत की मिट्टी में उपलब्‍ध तत्‍वों की मात्रा एवं मिट्टी में स्‍वस्‍थ्‍य जानने के लिए मिट्टी परीक्षण (जॉंच) करना आवश्‍यक हो जाता है- मिट्टी की जॉंच आवश्‍यक क्‍यों ? (1) फसलों से अधिक उपज लेने के लिये यह जानना जरूरी हो जाता है कि मिट्टी में कौन-कौन से पोषक तत्‍व कितनी मात्रा में उपलब्‍ध हैं। (2) फसल के अनुरूप जैविक खाद, उर्वरकों की मात्रा निर्धारण के लिये (3) खेत की मिट्टी कौन-कौन से फसल के लिये उपयुक्‍त है। (4) मिट्टी की अम्‍लीयता, क्षारीयता (पी.एच.) विद्युत चालकता का स्‍तर जानने के लिए। (5) लक्षित उत्‍पादन प्राप्‍त करने एवं उर्वरकों की उपयोगिता क्षमता में वृद्धि के लिये। (6) समस्‍याग्रस्‍त, अम्‍लीय, क्षारीय, ऊसर मिट्टी के सुधार हेतु। (1) कृषि विभाग, कृषि वि.वि.एवं कृषि तकनीकी संस्‍थाओं द्वारा फसलों, सब्जियों, फलों, औषधीय पौधों की खेती के लिये की गई पोषक तत्‍वों की अनुसंशित मात्रा के निर्धारण के लिये। मिट्टी का नमूना कब लें ? गर्मियों में रबी फसल की कटाई के बाद से लेकर खरीफ की बुवाई के पहले त‍क। जहां लगातार पूरे वर्ष फसलें ली जाती है वहां कटाई के तुरंत बाद। बहुवर्षीय/खड़ी फसल में पौधों की कतार के बीच से मिट्टी का नमूना लें। मिट्टी नमूना लेने के लिए सामग्री खुरपी या आगर, तसला या प्‍लास्टिक की साफ बाल्‍टी, एक किग्रा. की दो पॉलीथीन, धागा, सादा कागज, साफ पुराना अखबार। सावधानियॉं – किसान भाइयों मिट्टी नमूना लेने के पहले निम्रलिखित सुझावों पर अवश्‍य ध्‍यान दें- 1. वृक्ष और देशी खाद के ढेर के नीचे की मिट्टी न ले। 1. 2. खेत के कोनों एवं मेड़ से एक मीटर अंदर के ओर की मिट्टी न लें। 2. 3. अधिकतर समय पानी भरे रहने वाले एवं नाली के पास के स्‍थान से मिट्टी न लें। 3. 4. खेत की मिट्टी यदि अलग – अलग है तो नमूना की मिट्टी अलग –लगग लें। 5. उर्वरक, खाद, नमक की बोरी के ऊपर मिट्टी नमूना न सुखवायें। 6. खेत की मिट्टी में स्‍वाभाविक रूप से पाये जाने वाले कंकड़ आदि अलग न करें। 7. मिट्टी नमूना रखने के लिए नई एवं साफ पॉलीथीन का प्रयोग करें। 8. यदि खेत ऊंचहन, निचहन है और फसल अलग- अलग बोते हैं तो मिट्टी का नमूना अलग – अलग लें। 9. चाही गई जानकारी नमूना पत्रक में भरकर मिट्टी के साथ अवश्‍य भेजें। 10. नमूना पत्रक उपलब्‍ध न होने पर सादे कागज में नाम, पता, रकबा, खेत निशानी, सिंचाई स्‍त्रोत, असिंचित, ली गई फसल, प्रस्‍तावित अगली फसल दिनांक, अन्‍य संबंधित जानकारी लिखकर मिट्टी नमूना के साथ भेजें। 11. अधिकतम एक हेक्‍टेयर क्षेत्रफल तक के खेत से एक नमूना लें। मिट्टी का नमूना कैसे लें (तरीका) ? जिस खेत में मिट्टी लेना हो उसमें अनिश्चित आधार पर दस से बारह बिंदुओं/जगहों का चुनाव करें। चुने गये बिंदुओं/स्‍थानों की उपरी एक-दो सेमी. सतह साफ करके घास, पत्‍थर, कचड़ा आदि हटा दें। खुरपी की सहायता से चुने गये स्‍थानों में व्‍ही आकार का 6 – 8 इंच गहरा काट लगाकर तसला या बाल्‍टी में रखते जायें। खेत से लायी गई मिट्टी को साफ फर्श के ऊपर अखबार में बिछाकर छाया में सुखा लें। अब मिट्टी से घास, गोबर, पत्‍थर के टुकडे फसल अवशेष निकालकर फेंक दें व मिट्टी को भुरभुरी बना लें। अब मिट्टी के ढेर को लगभग 3 इं
च की मोटाई में गोलाकार रूप देकर सीधी रेखा चार बराबर भागों में बॉटकर आमने- सामने की दो भाग मिट्टी हटा दें। शेष दो भाग को मिलाकर इसे भी चार भागों में बॉटकर दो आमने – सामने के भाग अलग करें। ऐसा तब कि करें जब कि कि शेष दो भाग की मिट्टी (500 ग्राम) आधा किलोग्राम के लगभग हो जाये। साफ पॉलीथीन में शेष आधा किलोग्राम मिटटी भरकर धागा से बांध दें। दूसरी नई पॉलीथीन में मिट्टी वाली पॉलीथीन, जानकारी सहित नमूना पत्रक रखकर धागा से पॉलीथीन को बॉंध दें। अब आपका यह मिट्टी नमूना जांच के लिए तैयार है।

उदाहरण के लिए, अच्छी तरह से जाना जाता एडीएचडी दवा Ritalin एक स्मार्ट दवा होने के लिए कई द्वारा माना जाता है. Ritalin डोपामाइन का उत्पादन बढ़ाता है आदेश में बढ़ मानसिक स्पष्टता उत्पंन करने के लिए, ऊर्जा, और प्रेरणा.

जितना छोटा 250 tryptophan के मिलीग्राम नींद की गुणवत्ता, जबकि अप करने के लिए बढ़ जाती है 12 प्रतिदिन ग्राम अवसाद का मुकाबला करने का सुझाव दिया गया. अनुपूरक निर्माताओं में से एक दैनिक खुराक का सुझाव 1,000 सेवा मेरे 1,500 mg.

जीरे एवं गुड़ के पानी का घोल बनाने के लिए सबसे पहले किसी बर्तन में दो कप सादा पानी लें। इसके बाद इसमें एक चम्मच पिसा हुआ गुड़ और एक चम्मच जीरा मिलाएं और अच्छी तरह से उबाल लें। उबालने के पश्चात इस घोल के ठंडा होने पर आप इसे पी सकते हैं। हर रोज सुबह खाली पेट एक गिलास यह पानी पीने से आपके स्वास्थ्य को काफी आराम मिलता है।

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जब डेबिट कार्ड प्रमुख क्रेडिट कार्ड लोगो के साथ होता है तब जहां समकक्ष क्रेडिट कार्ड लिये जाते हैं वहां वस्तुतः वे लगभग सभी लेनदेन के लिए स्वीकार कर लिये जाते है, कुछ देशों में किराये पर कार की सुविधाओं एक प्रमुख अपवाद हैं।[9] कुछ देशों में किराये के कार की एजेंसियों को उपयोग के लिए वास्तविक क्रेडिट कार्ड की मांग करते हैं, या कम से कम, किराये पर लेने वालों द्वारा उपयोग की जा रही डेबिट कार्ड की ऋण पात्रता की वे जांच करेंगे। इन अनिर्दिष्ट देशों में, ऐसी कंपनियां उन्हें किराये के लिए मना कर देती है, जो उनकी जरूरतों के अनुकूल नहीं होते और जब तक इस तरह की चीजें होती हैं, खरीदादारी जिस देश में की जा रही है और/या ग्राहक जिस देश में रहता है, ऐसे क्रेडिट चेक वास्तव में किसी की साख को चोट पहुंचाते हैं।

बच्चा गोरा होने के उपाय : हर माँ चाहती है उसका बेबी स्मार्ट, इंटेलिजेंट और तेज दिमाग़ वाला हो. पर क्या आप ये जानती है की बच्चा गोरा कैसे पैदा हो ये सब गर्भवती महिला के खान पान पर भी डिपेंड करता है. प्रेग्नेन्सी के दौरान महिला जो कुछ खाती है उसका सीधा असर बच्चे की मानसिक और शारीरिक ग्रोथ पर पड़ता है इसलिए प्रेग्नेंट वुमन की डाइयेट में ऐसे फुड होना ज़रूरी है जिसे बेबी का विकास सही तरीके से हो. आइए जाने प्रेग्नेन्सी डाइयेट फॉर स्मार्ट आंड इंटेलिजेंट बेबी.

गन्ना उत्पादक किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें छाई हुई हैं, क्योंकि क्षेत्र के गन्ना में पायरिल्ला कीट का अटैक हुआ है। इस प्रकोप से फसलों के नुकसान होने की चिंता किसानों को सताने लगी है। कृषि विभाग के वैज्ञानिकों की टीम भी इस प्रकोप पर लगातार नजर जमाए हुई है। टीम लगातर क्षेत्र का निरीक्षण कर प्रकाश प्रपंच तकनीक से इस रोग पर नियंत्रण पाने के लिए किसानों को सुझाव दे रहे हैं। क्या है पायरिल्ला पायरिल्ला कीट के निम्फ एवं प्रौढ़ कीट गन्ना फसल के पत्ते का रस चूसकर नुकसान पहुंचाते हैं जिससे पत्तियों का हरा रंग गायब हो जाता है तथा गन्ने में रस व सुक्रोज की कमी होती है। उपाय पायरिल्ला कीट के निम्फस एवं प्रौढ़ पत्तियों को चूसकर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं, जिसके कारण पत्तियों का हरा क्लोरोफिल उड़ जाता है। इसके चलते पत्तियां पीली पड़ जाती है व गन्ने के रस एवं सुक्रोज की मात्रा में कमी आ जाती है। इस कीट के नियंत्रण के लिए वैज्ञानिकों ने किसानों को सुझाव देते हुए बताया कि खेत में प्रकाश प्रपंच का निर्माण करें, जिसके लिए 5 एकड़ क्षेत्र में कम से कम दो स्थान पर गढ्ढे तैयार कर उसमें पॉलिथीन की परत बिछाकर पानी से भर दें। उसमें कोई भी कीटनाशक या कैरोसिन तेल डाल दें। उक्त गढ्ढे के पास कम से कम गन्ने से दो फीट उंचाई पर बल्ब शाम 6 से रात्रि 9 बजे तक जलाकर रखें । इस विधि से प्रकाश की रोशनी पर कीट आकार्षित होकर गढ्ढे में गिरते जाएंगे, जिसे समय-समय पर साफ करते जाएं। उन्होंने बताया कि रासायनिक कीटनाशक मिथाईलपैराथियान, एसीफेट या क्लोरपायरीफास धूल का 25 किग्रा की दर से भुुरकाव गन्ना फसल में करें। यह कार्य सुबह के समय करें, जिससे पत्तियों में उपस्थित नमी में धूूल चिपक जाए। खड़ी फसल में किसी भी प्रकार के नत्रजन उर्वरक जैसे- यूरिया या डीएपीका छिड़काव न करें। इसके स्थान पर पोटाश 30 से 40 किग्रा प्रति एकड़ आवश्यक रूप से करें। पोटाश के उपयोग से पौधों में कीटों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न होगी। इन उपायों के साथ-साथ पायरिल्ला कीट के जैविक परजीवी कीट ईपिरीकीेनिया मेलानोल्यूका के कोकून गन्ना फसल में क्लिप के माध्यम से स्टेपल करें। इस विधि को अपनाकर किसान कीट का प्रबंधन कर सकते हैं।

यूनाइटेड किंगडम में बैंकों ने 1980 के दशक के मध्य में खरीददारी के लिए बड़ी संख्या में चेक दिए जाने की प्रवणता, जिस पर कार्रवाई करना बैंक के लिए खर्चीला था, को कम करने के लिए डेबिट कार्ड जारी करना शुरू किया, पहला बैंक जिसने यह शुरू किया वह है बार्कलेस (Barclays), जिसने बार्कलेस कनेक्ट (Barclays Connect) कार्ड जारी किया। ज्यादातर देशों की तरह, यूनाइटेड किंगडम में क्रेडिट कार्ड स्वीकार करने के लिए व्यापारियों द्वारा भुगतान किया गया शुल्क लेनदेन की रकम का एक प्रतिशत होता है,[26] जो कार्डधारकों के ब्याज-मुक्त ऋण अवधि साथ ही साथ प्रोत्साहन योजना जैसे अंक, एयरमाइल्स, या कैशबैक के लिए धन मुहैया कराता है। डेबिट कार्डों में इस तरह की विशेषताएं आमतौर पर नहीं होती हैं और इसलिए व्यापारियों द्वारा डेबिट कार्ड स्वीकार करने के शुल्क के रूप में बहुत ही कम रकम निर्धारित है, फिर चाहे लेनदेन की रकम कितनी भी क्यों ना हो[26]. बहुत छोटी रकम के लिए, क्रेडिट कार्ड की तुलना में डेबिट कार्ड के स्वीकार करने के लिए यह व्यापरियों के लिए कहीं अधिक सस्ता है। हालांकि भुगतान तरीके के अनुसार व्यापारी, ग्राहकों को अलग-अलग रकम चार्ज करने का अधिकार क्रेडिट कार्ड (मूल्य भेदभाव) आदेश 1990 के जरिए प्राप्त करता है, UK में कुछ व्यापारी क्रेडिट कार्ड की तुलना में डेबिट कार्ड द्वारा भुगतान करने के लिए कम पैसे वसूलते हैं, सबसे उल्लेखनीय अपवाद बजट एयरलाइन्स, ट्रैवेल एजेंट और IKEA होते हैं।[27] भुगतान न करनेवाले व्यापारियों के खिलाफ UK में जारी किए गए क्रेडिट कार्डों धारकों को उपभोक्ता क्रेडिट अधिनियिम 1974 की धारा 75 के तहत दिए जानेवाले; नि:शुल्क प्रोत्साहन (अंक, एयरमाइल्स, कैशबैक इत्यादि), व्याज-मुक्त क्रेडिट और संरक्षण जैसे लाभ; UK में डेबिट कार्ड में नहीं मिलते हैं। यूनाइटेड किंगडम में लगभग सभी प्रतिष्ठान जो क्रेडिट कार्ड स्वीकार करते हैं डेबिट कार्ड भी स्वीकार करते हैं (हालांकि सोलो और वीसा इलेक्ट्रॉन हमेशा नहीं), लेकिन लागत के कारण व्यापारियों में कुछ डेबिट कार्ड स्वीकार करते हैं, पर क्रेडिट कार्ड नहीं।

स्मार्ट क्लोथिंग- आज के समय में बहुत सी कंपनियां एडवांस टेक्नोलॉजी के साथ रनिंग क्लॉथ्‍स डिजाइन कर रही हैं. जैसे सॉक्स, टी-शर्ट और स्पोर्ट्स ब्रा में इलेक्ट्रॉनिक सेंसर्स लगे हुए हैं जो आपकी रनिंग और हेल्थ को लेकर एक्यूरेट डाटा बताती हैं. इन स्मार्ट गारमेंट्स के जरिए हार्ट रेट मोनिटर कर सकते हैं.

लोगों के बीच ये मिथक है कि केले की तासीर ठंडी होती है, इसीलिए इसे बच्चों को कम खिलाना चाहिए. लेकिन आपको बता दें कि ऐसा कुछ भी नहीं है. कई रिसर्च में खुलासा हो चुका है कि केला कभी भी सर्दी-खांसी की वजह नहीं बनता है. इसीलिए इसे बच्चों की डाइट में हमेशा शामिल करें. इसमें मैग्निशियम, विटामिन C, विटामिन A, विटामिन B6, पोटैशियम, बाओटिन, फाइबर जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं. इसके अलावा केले लो फैट और ग्लूकोज़ से भरा होता है, जो इसे और भी रिच बनाता है. ये ब्रेन पावर और आइसाइट को स्ट्रॉंग बनाता है. अनेमिया दूर कर रेड सेल्स को बढ़ाता है. इंसटेंट एनर्जी देने के साथ-साथ डाइजेशन सिस्टम को भी मज़बूत बनाता है. 

इसलिए, अगर आपके सहकर्मी को आपकी तुलना में एक बेहतर प्रदर्शन रिपोर्ट मिलती है, तो क्या यह वास्तव में रितेलिन की वजह से है? यदि आपके कार्यालय के साथी में अधिक रचनात्मक विचार हैं, तो क्या यह प्रावीगिल की वजह से है? शायद ऩही। वर्तमान में उपलब्ध स्मार्ट दवाओं में मस्तिष्क के प्रदर्शन को बढ़ावा दिया जा सकता है, फिर भी वे जितना प्रभावशाली नहीं हैं, उतनी आसानी से मीडिया रिपोर्ट्स का सुझाव देते हैं। वास्तव में, अनुसंधान से पता चलता है कि जब तक वे कुछ लोगों को बेहतर ढंग से प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं, वे वास्तव में दूसरों की तुलना में सामान्य रूप से कम अच्छी तरह से प्रदर्शन कर सकते हैं। चलो दो प्रमुख स्मार्ट दवाओं को देखो, methylphenidate तथा modafinil, और उनके प्रभाव

मराठवाड़ा: मराठवाड़ा का सोना जल चुका है, ये सोना है, मौसंबी, जो मराठवाड़ा में किसानों की आमदनी का मुख्य जरिया था, लेकिन 3-4 सालों के सूखे ने इस सोने को खत्म कर दिया है। किसान अपने हाथों से मौसंबी के पेड़ काटने को मजबूर हैं। 30 साल के विजय भाऊसाहेब गोगडे के लिए मौसंबी के पेड़ अपने सगों जैसे हैं, लेकिन अब पिता के साथ मिलकर वह इन पेड़ों को अपने हाथों से काट रहे हैं, ताकि खेत में कोई और फसल लगा सकें। 10 एकड़ के खेत में मौसंबी के 500 पेड़ लगाए थे, 10 लोगों का परिवार इन्हीं पेड़ों के आसरे था, अलग-अलग बैंकों से 5 लाख रुपये का कर्ज ले रखा है। साल दर साल पड़ रहे सूखे से अब ये पेड़ विजय का साथ छोड़ चुके हैं। विजय का कहना है कि 3 साल से सूखा है। कुंआ खोदा, बावड़ी लगाई, लाखों रुपये टैंकर पर खर्च कर दिए और कितना पानी देंगे, हमारे पिता ने इन्हें हमारे जैसा ही पाला-पोसा है, लेकिन अब कोई चारा नहीं है। संभाजी की कहानी भी ऐसी ही है, एक हैक्टेयर में खेती थी, मौसंबी जल गई, कपास फ्लॉप हो गया, कर्ज पर ट्रैक्टर लिया था, अब फाइनेंस कंपनी वाले नोटिस भेज रहे हैं। मराठवाड़ा के लगभग 10 फीसदी किसान मौसंबी की खेती करते थे, किसी वक्त उनके घर बेटी देना लोग शान समझते थे, जिसके घर में ज्यादा मौसंबी के पेड़ होते थे। 5-6 साल में बड़ा होने के बाद इस पेड़ से 20-25 साल तक फल मिलता था, लेकिन पिछले कुछ सालों से पड़ रहे सूखे से लगभग ढाई लाख हैक्टेयर में मौसंबी की खेती प्रभावित हुई है, किसानों को हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है। मौसंबी उत्पादक संघटन के अध्यक्ष जयाजीराव सूर्यवंशी पाटिल का कहना है कि अकेले औरंगाबाद में हजारों हैक्टेयर में मौसंबी की फसल बर्बाद हुई है। हर साल किसानों को लगभग 2000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, सरकार को इसकी कोई फिक्र नहीं है।

1 लीटर में 100 Km चलेगी टाटा की ये कार, लॉन्चिंग की तैयारी में जुटी कंपनी – posted on : Aug, 26 2015 नई दिल्ली. टाटा मोटर्स भारत में जल्द ही 1 लीटर पेट्रोल में 100 किमी का माइलेज देने वाली कार लॉन्‍च करने जा रही है। ‘टाटा मेगापिक्सल’ के रूप में सामने आने वाली यह कार देखने में आकर्षक होगी और इसमें बेहद एडवांस फीचर होंगे। कंपनी फ्यूल की कम खपत करने वाली कार लाने के प्रोजेक्‍ट पर कई साल से काम कर रही थी। मनीभास्कर आपको बता रहा है ‘टाटा मेगापिक्सल’ के फीचर्स और खासियतें…, जो मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है। चार सीटों वाली इस कार को पर्यावरण के अनुकूल बनाया गया है। इस कार में प्रति किलोमीटर महज 22 ग्राम कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन होगा।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा मेगापिक्सल जनवरी, 2016 में लॉन्च हो सकती है। कंपनी इसकी लॉन्चिंग को लेकर तैयारियों में जुटी है। इस कार की कीमत 5 से 6 लाख रुपए के बीच होने की संभावना है।टाटा मेगा पिक्सल में 325 सीसी सिंगल सिलेंडर का इस्तेमाल किया गया है। इस कार में एक लिथियम आयन फास्फेट बैटरी और चलती कार में रीचार्ज के लिए पेट्रोल इंजन जेनरेटर लगा है। टंकी फुल कराने पर यह कार एक बार में 900 किलोमीटर तक चलाई जा सकेगी। कार 100 किमी/लीटर का माइलेज देगी।

स्वास्थ्य जगत में यह बदलाव लोगों की जरूरतों व सुविधा के कारण आया है। समय की कमी या बीमारी या उम्र के कारण दवाएं खरीदने के लिए यहां-वहां भटकने में असमर्थता तो कारण हैं ही। ऑनलाइन शॉपिंग से सुविधा और समय की बचत होती है। यही नहीं, कई बार प्रेस्क्राइब्ड सभी दवाइयां एक ही दुकान पर नहीं मिलती और इसके लिए भटकना पड़ता है। ऑनलाइन शॉपिंग इससे भी निजात दिलाती है।

Onnit अल्फा मस्तिष्क काम करता है या यह एक घोटाला है? पहले आप खरीद पढ़ें अल्फा मस्तिष्क कैप्सूल की नकारात्मक दुष्प्रभाव होते हैं? बिक्री के लिए ऑनलाइन अल्फा मस्तिष्क – कूपन कोड और छूट अल्फा मस्तिष्क Nootropic प्रभाव, लाभ और अनुभवों मेमोरी और फोकस के लिए अल्फा मस्तिष्क गोलियों के उपयोगकर्ता समीक्षा अपने मानसिक प्रदर्शन को अधिकतम करने के लिए Onnit लैब्स अल्फा मस्तिष्क खरीदें अल्फा मस्तिष्क कैप्सूल में तत्व क्या हैं? खुराक जानकारी अल्फा मस्तिष्क की समीक्षा: अच्छा है और इस nootropic पूरक का उपयोग का बुरा

FROM WEBBreaking – 5$ Shark Tank cream gets biggest investment ever.CollagenThinking About Installing Solar Panels? Read This FirstEnergy Bill Cruncher Solar QuotesDon’t Do It Yourself – Hire a HomeAdvisor San Jose Handyma..HomeAdvisorFROM NAVBHARAT TIMESNH पर हादसे की सूचना देने के लिए टोल फ्री नंबर 1033 WWE की ‘भारतीय नारी’ कविता को राष्ट्रपति ने किया सम्मानित जेवर एयरपोर्ट : पहले चरण के लिए शिफ्ट नहीं होंगे गांव From The WebMore From NBT

ऐसे तत्व जो आयरन के अवशोषण में मदद करते हैं- विटामिन सी आयरन अवशोषण को बढ़ा देता है। इसलिए हरी सब्जियों या अन्य आयरन युक्त खाद्य पदार्थों के साथ विटामिन सी युक्त पदार्थ जैसे आँवला, नीबू, कैरी, अमचूर आदि खट्टे पदार्थों को शामिल करें। 

अब जरा देश के मंदिरों से जुड़े इन 5 फैक्ट्स को जान लीजिए… – posted on : Aug, 23 2015 1- देश के 4 बड़े मंदिरों (तिरुपति, शिर्डी साईं बाबा, सिद्धि विनायक और काशी विश्वनाथ) की एक दिन की औसत कमाई 8 करोड़ रुपए और हर मिनट कमाई 55 हजार रुपए है। 2- तिरुपति मंदिर में 1200 नाईं महिलाओं के बाल काटने के लिए रखे गए हैं। इन बालों को बेचकर मंदिर को सालाना 220 करोड़ रुपए की कमाई होती है। मंदिर सालाना 850 टन बाल बेचता है। 283.5 ग्राम औसत वजन वाला महिलाओं का बाल 17900 रुपए में बिकता है। 453.6 ग्राम वजन के लंबे बालों के 29,900 रु मिलते हैं। 3- देश के मंदिरों के पास 50 लाख करोड़ रुपए की कीमत का कुल 22 हजार टन (करीब 20 लाख क्विंटल) सोना है। 4- इतने पैसे में पूरा देश 60 साल (21 हजार दिन) तक फ्री में अनलिमिटेड इंटरनेट यूज कर सकता है। (एक साल में भारतीय 82 हजार करोड़ रुपए का इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं।) 5- इतने पैसे में टाटा जैसी 8 जैसी कंपनियां खरीदी जा सकती हैं। (13 अगस्त 2015 तक टाटा ग्रुप की कुल वैल्यु 7.49 लाख करोड़ थी।)

मध्यप्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिये राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों में सहयोग के लिये निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने वाली है। हाल ही में मण्डला में हुए राष्ट्रीय जैविक कृषि उत्सव में विभिन्न कम्पनी ने जैविक खेती उत्पादों के साथ 20 एमओयू कर हस्ताक्षर किये। उल्लेखनीय है कि भारत में होने वाले जैविक खेती उत्पादन में मध्यप्रदेश का योगदान 40 प्रतिशत है। राज्य सरकार ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिये जैविक कृषि नीति भी लागू की है। मण्डला में राष्ट्रीय जैविक कृषि उत्सव में लेन्टस इंद्रा प्रायवेट लिमिटेड, भोपाल द्वारा कान्हा कृषि वनोपज उत्पादक प्रोडयूसर कम्पनी, बिछिया जिला मण्डला के साथ 30 गाँव में जैविक खेती के कार्य में समग्र सहयोग के लिये एमओयू किया। राय ब्रदर्स आर्गेनिक एग्रो प्रायवेट लिमिटेड, इंदौर ने 5 एमओयू किये गये। इनमें ग्रीन हेवन आर्गेनिक, इंदौर के साथ 500 क्विंटल प्रोसेस्ड पल्सेस और मसाले के लिये, सशक्त किसान प्रोडयूसर कम्पनी गोहपारू जिला शहडोल के साथ 3 टन हल्दी, 10 टन मिलेट और एक टन अदरक के लिये, हरिओम आर्गेनिक प्रोडक्ट जबलपुर के साथ 200 क्विंटल फ्लेक्स बीज, मिलेट्स और चावल के लिये, कान्हा कृषि वनोपज उत्पादक प्रोडयूसर कम्पनी बिछिया जिला मण्डला के 2000 क्विंटल मिलेट्स, छिंदीकपूर और आसाम कोटी चावल के लिये तथा मण्डला ट्रायबल फार्मर प्रोडयूसर कम्पनी पोडीलिंगा मण्डला के साथ 300 क्विंटल मिलेट्स एवं रॉय के लिये किये गये एमओयू शामिल हैं।

प्रोटीन शुद्ध करने में शामिल समय और लागत स्मार्ट पॉलीमर का उपयोग करके काफी कम हो सकता है जो मध्यम गुणों में परिवर्तन के जवाब में तेजी से प्रतिवर्ती परिवर्तन से गुजरती हैं। कई वर्षों से शारीरिक और आत्मीयता अलग-अलग और प्रतिरक्षकों में संयुग्मित प्रणाली का उपयोग किया गया है। बहुलक ढांचे में सूक्ष्म परिवर्तन द्रव की संरचना के रूप में प्रकट होते हैं, जिसका उपयोग हल से फँसा हुआ प्रोटीन को अलग करने में सहायता के लिए किया जा सकता है। ये प्रथाएं काम करती हैं जब एक प्रोटीन या अन्य अणु जो मिश्रण से अलग किया जाता है, बहुलक के साथ एक बायोकेनजुएट बनाती है और बहुलक के साथ उपजी हो जाती है जब इसके पर्यावरण में परिवर्तन पड़ता है। इस द्रव्य को मीडिया से हटा दिया जाता है, इस प्रकार संयुग्म के इच्छित घटक को शेष मिश्रण से अलग कर दिया जाता है। संयुग्म से इस घटक को निकालने पर बहुलक की वसूली और उसके मूल राज्य में वापसी पर निर्भर करता है, इस प्रकार इस तरह की प्रक्रियाओं के लिए हाइड्रोगल्स बहुत उपयोगी होते हैं। स्मार्ट पॉलिमर का उपयोग करने वाली जैविक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने के लिए एक और तरीका है कि लैगेंड या सेल बाइंडिंग साइट्स के करीब निर्मित बहुलक बाध्यकारी साइटों के साथ पुनः संयोजक प्रोटीन तैयार करना। तापमान और प्रकाश सहित विभिन्न प्रकार के ट्रिगर्स के आधार पर लिगैंड और सेल बाइंडिंग गतिविधि को नियंत्रित करने के लिए इस तकनीक का उपयोग किया गया है।

सउदी अरब में डेबिट कार्ड के सभी लेनदेन सउदी पेमेंट नेटवर्क (Saudi Payments Network) (SPAN) के जरिए होते हैं, इस राजशाही में यही एकमात्र इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली है और सउदी अरब मौद्रिक एजेंसी (Saudi Arabian Monetary Agency) (SAMA) द्वारा सभी बैंक इस नेटवर्क में पूरी तरह अनुकूल कार्ड जारी करने के लिए अपेक्षित हैं। यह पूरे देश भर में बिक्री बिंदुओं के टर्मिनलों (POS) को केंद्रीय भुगतान से जोड़ता है, जो कार्ड जारी करनेवाले स्थानीय बैंक, VISA, AMEX या मास्टर कार्ड के वित्तीय लेनदेन की दिशा को फिर से बदल देता है।

गौरतलब है कि रियल एस्टेट सेक्टर में अब पूरी पारदर्शिता है। इंदौर में प्रॉपर्टी खरीदने के कई फायदे हैं। स्मार्ट सिटी में शामिल होने, स्वच्छता में नंबर वन का खिताब मिलने और मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए नामांकित होने से यहां प्रॉपर्टी की पूछपरख काफी बढ़ी है। लिहाजा, अभी प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट किया तो भविष्य में अच्छा रिटर्न दिलाएगा। दैनिक भास्कर रियल एस्टेट एक्सपो ऐसा अवसर लाया है जहां वर्तमान स्थिति के सभी फायदे ग्राहकों को मिलेंगे।

आयुर्वेदाचार्य डॉ. एम. मुफीक के मुताबिक, गुड़ और जीरे का पानी पीने से सिरदर्द से काफी आराम मिलता है। सिरदर्द के अलावा इसका पानी पीना बुखार में भी लाभदायक होता है। इसके सेवन से हमारे शरीर से विषैले तत्व दूर होते हैं, जिससे हमारा प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होता है। इससे हमारे शरीर को बीमारियों से लड़ने में सहायता मिलती है। जीरा और गुड़ दोनों ही पेट संबंधी परेशानियों के लिए उत्तम माने जाते हैं। इन दोनों का अलग-अलग सेवन करने से भी गैस, कब्ज, पेट दर्द एवं पेट फूलना आदि समस्याओं से निजात मिलती है।

U.S.A. में, एफएसए (FSA) डेबिट कार्ड केवल चिकित्सा के खर्च की अनुमति देता है। इसका इस्तेमाल कुछ बैंकों द्वारा अपने FSAs, MSAs और साथ ही साथ HSAs निकासी के लिए होता है। इसमें वीसा या मास्टरकार्ड लोगो होता है, लेकिन इसका उपयोग डेबिट कार्ड की तरह नहीं किया जा सकता, केवल क्रेडिट कार्ड की तरह किया जा सकता है और हर व्यापारी जो डेबिट और क्रेडिट कार्ड स्वीकार करता है, इसे स्वीकार नहीं करता है, पर केवल उन्हीं के द्वारा स्वीकार किया जाता है जो एफएसए (FSA) डेबिट कार्ड स्वीकार करते हैं। बिक्री के समय व्यापारी कोड और उत्पाद कोड का इस्तेमाल (USA में कुछ व्यापारी द्वारा निश्चित तारीखों तक कानूनन) उनकी गुणवत्ता अच्छी न होने पर बिक्री प्रतिबंधित करने के लिए होता है। अतिरिक्त जांच और कागजी कार्रवाई चलते रहने के कारण, जो कि चलता रहता है, बाद में कर में कटौती के लिए ब्यौरे का इस्तेमाल खरीदी हुई वस्तुओं को प्रमाणित करने के लिए किया जा सकता है। सामयिक उदाहरण ऐसे हैं जिसमें योग्य खरीददारी को अस्वीकार कर दिया जाता है, भुगतान की अन्य तरीके (एक चेक या अन्य खाते से भुगतान और बाद में प्रतिपूर्ति के लिए दावा) का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे ही दूसरे मामले में अयोग्य खरीददारी को स्वीकार कर लिया जाता है, तकनीकी तौर पर इसके लिए उपभोगता ही जिम्मेवार होता है और लेखा परीक्षा के दौरान इन विसंगतियों का खुलासा हो जाता है। U.S. में डेबिट कार्ड का छोटा-सा, मगर बढ़ते हुए कारोबार का अनुभाग कर-समर्थन लागत खाते जैसे फ्लेक्सिबल स्पेंडिंग एकाउंट (FSA), हेल्थ रिएर्म्बेसमेंट एकाउंट (HRA) और हेल्थ सेविंग एकाउंट (HSA), के अभिगमन से जुड़ा है। इनमें से ज्यादातर डेबिट कार्ड चिकित्सा व्यय के लिए हैं, हालांकि कुछ आश्रितों की देखभाल और परिवहन खर्च के लिए जारी किये जाते हैं।

कनाडा कानून Aniracetam की छोटी मात्रा में एक डॉक्टर के पर्चे के बिना व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात करने के लिए अनुमति देता है, लेकिन दवा की बिक्री या वितरण पर प्रतिबंध लगाता है. ऑनलाइन अमेरिका में स्थित कंपनियों सबसे आसान कर रहे हैं, दवा की सबसे तेज और सबसे अधिक लागत प्रभावी स्रोतों.

जिस देश में 1.25 अरब के लगभग आबादी निवास करती है और देश की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर आधारित है, उस देश में कृषि शिक्षा के विश्वविद्यालय और कॉलेज नाम-मात्र के हैं, उनमें भी गुणवत्तापरक शिक्षा का अभाव है। भूमंडलीकरण के दौर में कृषि पर आधुनिक तकनीकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के माध्यम से जो इस देश में आती हैं उसे कृषि का प्रचार-प्रसार तंत्र उन किसानों तक पहुंचाने में लाचार नजर आता है, यह गंभीर और विचारणीय विषय है। शिक्षा का ही दूसरा पहलू जिसे प्रबंधन शिक्षा की श्रेणी में रखा जा सकता है, नाम-मात्र भी नहीं है। राष्ट्रीय अथवा प्रदेश स्तर पर कृषि शिक्षा के जो विश्वविद्यालय हैं, उनमें शोध संस्थानों के अभाव में उच्चस्तरीय शोध समाप्त प्राय से हैं। चाहे संस्थानों का अभाव हो, वित्तीय एवं तकनीकी सुविधाओं का अभाव हो अथवा गुणवत्तापरक शिक्षकों का अभाव हो, जिसके कारण एक हरित क्रांति के बाद फिर कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं हुआ। किसान ईश्वरीय कृपा पर ही आज भी निर्भर हैं। कृषि शिक्षा का व्यापक प्रचार-प्रसार ग्रामीण क्षेत्रों में होना चाहिए और प्रत्येक शिक्षण संस्थान में न्यूनतम माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा अवश्य होनी चाहिए। उन लोगों का उपयोग कृषि के निचले स्तर के व्यापक प्रचार-प्रसार और उत्पादन वृद्धि में किया जाना चाहिए । देश की 70 फीसदी आबादी गांवों में रहती है और कृषि पर ही निर्भर है। ऐसे में किसानों की खुशहाली की बात सभी करते हैं और उनके लिए योजनाएं भी बनाते हैं किंतु उनकी मूलभूत समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती है। लेखक ने किसानों की समस्याओं को उठाते हुए उनके शीघ्र निराकरण की जरूरत पर जोर दिया है। स्वतंत्र भारत से पूर्व और स्वतंत्र भारत के पश्चात एक लम्बी अवधि व्यतीत होने के बाद भी भारतीय किसानों की दशा में सिर्फ 19-20 का ही अंतर दिखाई देता है। जिन अच्छे किसानों की बात की जाती है, उनकी गिनती उंगलियों पर की जा सकती है। बढ़ती आबादी, औद्योगीकरण एवं नगरीकरण के कारण कृषि योग्य क्षेत्रफल में निरंतर गिरावट आई है।

इन सब के अलावा, इस बात का भी ध्यान रखें कि एक बार में थोक कपड़े न खरीदें क्योंकि छोटे बच्चों में यह बहुत जल्दी खत्म हो जातें हैं। हालाँकि, आप पाने बच्चे के लिए अभी कपड़े खरीद सकते हैं क्योंकि अभी हर जगह सेल लगा हुआ है।

सफ़ेद रंग की शर्ट हर लड़कों के पास होनी चाहिए, क्योंकि इसके बिना लड़कों का बार्डरोब अधूरा है। हालाँकि, आप यह सोच रही होंगी कि इसे मैंटेन करना कितना मुश्किल है और यह सच भी है। क्योंकि, छोटे बच्चे सबसे ज्यादा कपड़े गंदे करते हैं और सफ़ेद शर्ट पर कोई दाग लग जाए तो उसे छुड़ा पाना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन, बाजार में दाग छुड़ाने वाले ऐसे डिटर्जेंट आ गए हैं जिससे कि आप इसे आसानी से छुड़ा सकते हैं। आप खुद सोचो न जब आपका लाड़ला सफ़ेद शर्ट और डेनिम जींस में होता है तो कितना क्यूट लगता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजन को इस प्रोजेक्ट के लिए सम्मानित किया है. दरअसल स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर आमंत्रित की गई थी, इसमें देशभर से करीब 15 लाख लोगों ने अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट पेश की.

एसीएमओ ने जब एंबुलेंस में रखा मेडिसिन बाक्स देखा तो उसमें जीवनरक्षक दवाएं ही नहीं मिलीं. उन्होंने एंबुलेंस पर तैनात स्टाफ से इस बारे में पूछताछ की. उसके बाद एसीएमओ ने दूसरी एंबुलेंस का निरीक्षण किया. उसमें भी साफ-सफाई नहीं मिली.

लखनऊ। प्रदेश में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (वाटर शेड विकास कम्पोनेंट) लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए कैबिनेट ने 14वें वित्त आयोग की व्यवस्था के अनुरूप राज्य सरकार के बढ़े शेयर को स्वीकृत करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इससे राज्य सरकार को योजना के तहत चलाई जा रहीं 612 परियोजनाओं पर 791.81 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा।

ऊपर बताए गए कारणों की वजह से ही गर्भावस्था के दौरान, आयरन की आवश्यकता सामान्य 18 मिली ग्राम प्रतिदिन से बढ़कर 27 मिली ग्राम प्रतिदिन  हो जाती है। चूँकि आयरन की यह मात्रा, केवल सामान्य भोजन से प्राप्त  करना आसान नहीं है, इसलिए डॉक्टर महिलाओं को इस अवस्था में 30 मिली ग्राम एलिमेंटल आयरन पूरक आहार के रूप  लेने की सलाह देते हैं, जो बाजार में दवा की दुकानों पर उपलब्ध होती हैं।

उत्‍तर भारत में खरीफ मौसम में प्‍याज की खेती – posted on : Aug, 26 2015 उत्‍तरी भारत में प्‍याज रबी की फसल है यहां प्‍याज का भंडारण अक्‍टूबर माह के बाद तक करना सम्‍भव नही है क्‍योकि कंद अंकुरित हो जाते हैं। इस अवधि‍(अक्‍टूबर से अप्रैल) में उत्‍तर भारत में प्‍याज की उपलब्‍ध्‍ता कम होने तथा परिवहन खर्चे के कारण दाम बढ जाते हैं। इसके समाधान के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने उत्‍तर भारत के मैदानो में खरीफ में भी प्‍याज की खेती के लिए एन-53(N-53) तथा एग्रीफाउंड डार्क रैड नामक प्‍याज की किस्‍मों का विकास किया है। प्‍याज की किस्‍म : एन-53(आई.ए.आर.आई.); एग्रीफाउंड डार्क रैड (एन.एच.आर.डी.एफ.)—– बीज बुआई समय: मई अंत से जून—- रोपाई का समय : मध्‍य अगस्‍त—– कटाई : दिसम्‍बर से जनवरी—- पैदावार : 150 से 200 क्विंटल/हैक्‍टेयर

हालाँकि, यह सच है कि हर बच्चा एक-सा नहीं होता है, क्योंकि हर बच्चे की अपनी फीजिकल और मेंटल ग्रोथ होती है और वह उसी के अनुसार बढ़ता है। ऐसे में बच्चों के स्लो लर्नर होने के कई कारण हो सकते हैं। जिसमें एक कारण यह भी हो सकता है कि उस विषय में आपके बच्चे की रूचि न हो, या फिर उसे उन चीजों का पोषण नहीं मिल पा रहा हो जिससे उसकी स्मरण शक्त‍ि बेहतर हो।

ठेठ Modafinil उपयोगकर्ता के लिए, वास्तविक जीवन लाभ जीवन के सभी कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकते है आसान और अधिक मनोरंजक. जबकि Modafinil एक पर्चे की आवश्यकता होती है, ठेठ स्मार्ट दवाओं की दुकान भी वहन करती है Adrafinil, पर्चे मुक्त पूर्व कर्सर Modafinil जो एक ही प्रभाव पैदा करने के लिए.

बिलासपुर. जिला अस्पताल में लंबे समय से घालमेल चल रहा है। स्मार्ट कार्ड होने के बावजूद कमीशनखोरी के चक्कर में मरीजों से महंगी दवाइयां बाहर से खरीदवाई जा रही हैं। रविवार को मंत्री अमर अग्रवाल बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाने पहुंचे, तो यह भेद उनके सामने ही खुल गया। दरअसल मंत्री को भी इस तरह की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। सुबह साढ़े 10 बजे वे बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने के बाद सीधे वार्ड में पहुंच गए।