“जहां सबसे अच्छे मूल्य पर मैं नॉट्रोपिक्स और स्मार्ट ड्रग्स बुक खरीद सकता हूं _सर्वोत्तम मूल्य के लिए स्मार्ट दवाओं और नोट्रोपिक्स के बीच सस्ती अंतर मैं कहां मिल सकता है”

इस सिलसिले में शहरी विकास सचिव राजीव गौबा ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग और एनबीसीसी की टॉप मैनेजमेंट के साथ इस प्लान पर विचार विमर्श किया। शहरी विकास मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि दरअसल, जिस जमीन पर यह स्मार्ट कॉलोनी बनाने की तैयारी की जा रही है, वह केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की है। लगभग 240 एकड़ की यह जमीन 1971 से ही खाली पड़ी है। ऐसे में सरकार का इरादा है कि इस जमीन पर कॉलोनी बनाने का जिम्मा एनबीसीसी को दे दिया जाए।

जैविक खेती से ही समृद्ध-सम्पन्न होंगे किसान: डा. वंदना शिवा – posted on : Oct, 01 2015 रामगढ़, देहरादून। 02 सितम्बर, 2015। ’जैविक भोजन के माध्यम से जिस तरह हम अपने स्वास्थ्य को स्वस्थ रख सकते हैं, उसी तरह जैविक-खेती से हमारे खेतों का स्वास्थ्य सुधर सकता है और हमारे किसान समृद्ध हो सकते हैं। यह कहना था विश्व-विख्यात पर्यावरणविद् एवं नवधान्य की संस्थापक निदेशक, डा. वंदना शिवा का। वह नवधान्य जैविक-फार्म, रामगढ़ देहरादून में जैविक-खेती तथा कृषि-पारस्थितिकी पर समझ बढ़ाने हेतु देश-विदेश से आये शैक्षणिक भ्रमण-दल को सम्बोधित कर रही थीं। इस शैक्षणिक सत्र के दूसरे दिन डा. शिवा ने कृषि-पारस्थितिकी, कृषि-भूमि में सुधार, मिट्टी की उर्वरता आदि विषयों पर व्याख्यान दिया। इस अवसर पर कनाडा से आए जैविक-खेती तथा ग्रामीण विकास के विशेषज्ञ, डा. अविनाश सिंह भी उपस्थित थे। डा. वंदना शिवा ने कहा कि अंधाधुंध रासायनिक खादों एवं कीटनाशकों के छिड़काव से जहां हमारी उपजाऊ भूमि बंजर हो रही है, वहीं हमारी फसलें कई तरह की बीमारियों की शिकार होने लगी हैं। उन्होंने कहा कि हरित-क्रांति के फलस्वरूप पंजाब जैसी उपजाऊ धरती की अन्नोत्पादन क्षमता अपने न्यूनतम स्तर पर आ रही है और वहां जल-स्तर लगातार घटता जा रहा है। वहीं किसान कर्ज के बोझ से तंग आकर आत्महत्या कर रहा है। डा. शिवा ने कहा कि अब रसायनिक खेती के साथ जी.एम. यानी जैव-यांत्रिक तकनीक से बने हुए बीजों द्वारा उत्पादित फसलों को बढ़ावा देने की बात की जा रही है जोकि कृषि-जैवविविधता, किसान और जनसामान्य के स्वास्थ्य तथा समृद्धि के साथ खिलवाड़ से भी अधिक गम्भीर है। इस अवसर पर उन्होंने जी.एम. बीज बनाने की प्रौद्योगिकी पर अपनी बात साझा की। उन्होंने बताया कि किस तरह से बड़ी बीज कम्पनियां किसानों को बाजार से बीज खरीदने पर मजबूर करने की साजिश रच रही हैं। डा. शिवा ने कहा कि कृषि-जैवविविधता को बचाने के लिए पारम्परिक फसल तथा उनके बीजों का संरक्षण अति-आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसान जैविक खेती के माध्यम से ही समृद्धि-सम्पन्न हो सकेंगे। इस अवसर पर उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों के जैविक-खेती एवं पर्यावरण से सम्बधित प्रश्नों के भी उत्तर दिये। दूसरे सत्र में भ्रमण दल ने कार्यकारी निदेशक, डा. विनोद कुमार भट्ट तथा कृषि विशेषज्ञ, डा. आर.एस. रावत के साथ नवधान्य फार्म का प्रयोगात्मक भ्रमण भी किया। ज्ञात हो कि 30 सितम्बर तक चलने वाले शैक्षिक भ्रमण के इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न प्रांतों सहित विदेश यथा संयुक्त राज्य अमेरिका, आॅस्ट्रेलिया, द.कोरिया, इंडोनेशिया, बाली, प. जकार्ता, स्पैन, पुर्तगाल, फ्रांस, ग्रीस आदि देशों से 56 प्रशिक्षणार्थी भाग ले रहे हैं। इन प्रतिभागियों के साथ देश-दुनिया के लगभग एक दर्जन से अधिक जानेमाने वैज्ञानिक प्रयोगात्मक तथा सैद्धांतिक बातें साझा कर रहे हैं।

जैविक खेती पर राष्ट्रीय परियोजना (NPOF) 10 वीं पंचवर्षीय योजना के बाद से एक सतत केन्द्रीय क्षेत्र की योजना है। योजना आयोग रुपये के परिव्यय के साथ 2004/01/10 से प्रभावी 10 वीं योजना अवधि के शेष दो और आधे साल के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस योजना को मंजूरी दे दी। 57.04 करोड़। योजना 12 वीं पंचवर्षीय योजना में जारी है। NPOF बेंगलूर, भुवनेश्वर, पंचकुला, इम्फाल, जबलपुर और नागपुर में गाजियाबाद और उसके छह क्षेत्रीय केंद्रों में जैविक खेती की राष्ट्रीय केन्द्र द्वारा चलाई जा रही है। NPOF के तहत लक्ष्य की प्राप्ति के लिए काम करने के अलावा, NCOF और RCOFs भी जैविक खेती को बढ़ावा देने में विशिष्ट भूमिकाओं प्रदर्शन कर रहे हैं। उद्देश्य मानव संसाधन विकास, प्रौद्योगिकी, पदोन्नति के हस्तांतरण और गुणवत्ता वाले जैविक और जैविक आदानों के उत्पादन सहित सभी हितधारकों की तकनीकी क्षमता निर्माण के माध्यम से देश में जैविक खेती को बढ़ावा देना। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से जागरूकता सृजन और प्रचार। Biofertilizers और उर्वरक नियंत्रण आदेश (एफसीओ, 1985) की आवश्यकता के अनुसार जैव उर्वरकों के विश्लेषण के लिए नोडल गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला के रूप में कार्य करने के लिए। मानकों और देखें अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति में रखते हुए परीक्षण प्रोटोकॉल का अवतरण और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था के तहत शेष जैविक आदानों ला रही है। जैविक इनपुट संसाधन प्रबंधन, समर्थन के माध्यम से प्रौद्योगिकी के विकास के लिए अनुसंधान और बाजार के विकास के लिए। नेशनल बनाए रखने और उत्पादन इकाइयों, biofertilizer उपभेदों और मां संस्कृतियों के विकास और खरीद और प्रभावकारिता मूल्यांकन करने के लिए आपूर्ति के लिए biofertilizer, जैव नियंत्रण, अपशिष्ट decomposer जीवों के क्षेत्रीय संस्कृति संग्रह बैंक के लिए। “भागीदारी गारंटी सिस्टम” के रूप में जाना कम लागत प्रमाणीकरण प्रणाली के माध्यम से जैविक खेती को बढ़ावा देना। NPOF योजना पूंजी निवेश सब्सिडी योजना कृषि अपशिष्ट खाद उत्पादन इकाइयों, जैव उर्वरक / जैव कीटनाशकों के उत्पादन इकाइयों, विकास और गुणवत्ता नियंत्रण शासन के कार्यान्वयन, मानव संसाधन विकास, आदि के लिए (CISS) के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करता है

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 सबसे लोकप्रिय स्थलों में से एक – लक्षित चिकित्सा, कैंसर “स्मार्ट” दवाइयों के खिलाफ लड़ाई है कि आसानी से रोगी के शरीर की विशिष्ट सुविधाओं के लिए adapts में प्रयोग किया जाता है। हाल ही क्लिनिकल परीक्षण व्यवहार में इन दवाओं की उच्च क्षमता साबित कर दी है।

गन्ने की उन्नतिशील प्रजातियों के बीज की उपलब्धता के स्थान – posted on : Aug, 07 2015 प्रदेश में गन्ना बुवाई शरद काल एवं बसन्तकाल में की जाती है। अधिकांश बुवाई बसन्त काल में होती है जिसके बीज की व्यवस्था गन्ना विकास परिषदों, गन्ना विकास समितियों एवं चीनी मिलों के माध्यम से करायी जाती है। गन्ना कृषकों को उन्नतिशील, रोगरहित एवं शीघ्र पकने वाली प्रजातियों का प्रमाणित बीज जिला गन्ना अधिकारी, ज्ये0गन्ना विकास निरीक्षक एवं चीनी मिल के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है। गन्ना समितियों में बीज क्रम समितियों में बीज क्रय करने के लिए ऋण की व्यवस्था की जाती है। गन्ना शोध परिषद से प्राप्त केन्द्रक बीज से आधार पौधशालाएं स्थापित की जाती है। आधार पौधशाला से प्राथमिक पौधशाला एवं प्राथमिक पौधशाला से सामान्य खेती के लिए गन्ना कृषकों को बीज उपलब्ध कराया जाता है। गन्ना बीज के लिए पौधशालाएं गन्ना कृषकों के यहॉं तैयार की जाती है।

एनबीसीसी और सीपीडब्ल्यूडी मिलकर इस प्रॉजेक्ट का प्लान फाइनल करेंगे। लगभग 15 हजार करोड़ रुपये के इस प्रॉजेक्ट पर सरकार की भी मंजूरी ली जाएगी। इस प्रॉजेक्ट के तहत यहां खाली पड़ी जमीन पर टाइप-2 से लेकर टाइप-8 तक के 6500 मकानों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा बेचने के लिए एनबीसीसी 500 और मकान भी तैयार करेगी। इसके अलावा कुछ कमर्शल स्पेस भी डिवेलप किया जाएगा। इस तरह से साढ़े छह हजार मकान बनने से अब तक इंतजार कर रहे सरकारी कर्मचारियों को ये मकान मिल सकेंगे। सरकार का कहना है कि इस तरह से मकान बनाने पर सरकार को एक भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा। एनबीसीसी 500 फ्लैट बेचकर और कमर्शल स्पेस के जरिए पूरी कॉलोनी के निर्माण का खर्च निकाल लेगा।

“Grd Smart Powder in Hindi (जीआरडी स्मार्ट पाउडर) – हिंदी, दवा, ड्रग, उसे, जानकारी, प्रयोग, फायदे, लाभ, उपयोग, दुष्प्रभाव, साइड-इफेक्ट्स, समीक्षाएं, संयोजन, पारस्परिक क्रिया, सावधानिया तथा खुराक – Zydus Cadila – TabletWise – India” Tabletwise. Accessed January 26, 2018. http://www.tabletwise.com/hi/grd-smart-powder.

• यह ई-बुक (eBook) फरवरी 2016 के करेंट अफेयर्स के बारे में पर्याप्त पृष्ठभूमि के साथ राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और पारिस्थितिकी से संबंधित सभी घटनाओं का विस्तृत विस्तृत विश्लेषण प्रदान करता है

: प्रौद्योगिकी नवाचार और सूचना आयु के केंद्र में सबसे आगे है, जो जारी रखने के लिए निश्चित है दशकों के लिए। प्रौद्योगिकी क्षेत्र स्टॉक की एक श्रेणी है जिसमें तकनीकी व्यवसाय शामिल हैं, जैसे कंप्यूटर हार्डवेयर, कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर या इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी सेवा उद्योग की कंपनियां, जैसे कि सूचना प्रौद्योगिकी और व्यवसाय डेटा प्रोसेसिंग प्रदान करने वाले निर्माता। प्रौद्योगिकी कंपनियों के कुछ उदाहरणों में एप्पल (एएपीएल), माइक्रोसॉफ्ट (एमएसएफटी), गूगल (GOOG) और फेसबुक (एफबी) शामिल हैं और अन्य तकनीकी कंपनियां, आज के बारे में नयी नवाचारों के साथ आने के लिए निश्चित हैं।

ऐसे तत्व जो आयरन के अवशोषण में मदद करते हैं- विटामिन सी आयरन अवशोषण को बढ़ा देता है। इसलिए हरी सब्जियों या अन्य आयरन युक्त खाद्य पदार्थों के साथ विटामिन सी युक्त पदार्थ जैसे आँवला, नीबू, कैरी, अमचूर आदि खट्टे पदार्थों को शामिल करें। 

(२) मनुष्य के भोजन में ऊर्जा प्रदान करने वाले रासायनिक यौगिक हैं- कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा। बहुत अधिक मात्रा में जल तथा आक्सीजन भी आवश्यक होता है, किन्तु इनको प्रायः ‘पोषक’ की श्रेणी में नहीं रखा जाता।

नए स्मार्टकार्ड के जिले के पीएचसी व सीएचसी में भी इसके लिए शिविर लगाए जाएंगे, जिसमें ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों की भी मदद ली जाएगी। महंगी दवा खरीदने को मजबूर ग्रामीण महारानी अस्पताल में स्मार्ट कार्ड वाले मरीजों को अभी बाहर से उपकरण व जरूरी दवाएं खरीदनी पड़ रही है।

यह कौन बनाता है: अल्फा मस्तिष्क Onnit द्वारा किया जाता है, एक बड़ी कंपनी के नवीन स्वास्थ्य उत्पादों को बनाने पर ध्यान केंद्रित किया। Onnit उपकरण वे “कुल मानव अनुकूलन” तक पहुँचने की जरूरत के साथ ग्राहकों को प्रदान करना है। सहायक उत्पाद, उत्कृष्ट ग्राहक सहायता, और सस्ती कीमतों की एक विस्तृत श्रृंखला के साथ, Onnit एक बड़ी कंपनी से खरीदने के लिए है!

किसानों को उनकी उत्पादन प्रक्रिया का ज़्यादा विश्वसनीयता और कम लागत में प्रबंधन करने में मदद देने के लिए उन्हे बुनियादी संसाधन उपलब्ध होने चाहिए. – ख़ास तौर पर महिला किसानों के लिए भूमि और जल संसाधनों तक पहुँच सुरक्षित करना – लघु वित्त सेवाओं, ख़ास तौर पर लघुऋण तक ग्रामीण पहुँच प्रदान करना – किसानों के लिए आपूर्ति उपलब्ध कराने हेतु- ढाँचागत विकास – ख़ास तौर पर सड़कों और बंदरगाहों का निर्माण करना – मशीनी उपकरणों, बीजों, खाड़ों और फसल सुरक्षा सामग्रियों सहित कृषि इनपुट्स और सेवाओं तक पहुँच बेहतर बनाना – जानकारी और आपूर्ति किसानों की हाथ तक पहुँचने की पुष्टि करने के लिए अनेक स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम करना और प्रोत्साहन देना – जहाँ पर जैवईंधन ऊर्जा की बचत और ग्रामीण विकास में योगदान देता है, वहाँ जैवईंधन में निवेश करें

जैविक पोषक तत्वों में कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन (अमिनो अम्ल) और विटामिन शामिल हैं। अकार्बनिक रासायनिक यौगिकों, जैसे खनिज लवण, पानी और ऑक्सीजन को भी पोषक तत्व माना जा सकता हैं।[तथ्य वांछित] किसी जीव को एक पोषक तत्व किसी बाहरी स्रोत से लेने की आवश्यकता तब पड़ती है जब उसका शरीर इनकी पर्याप्त मात्रा का संश्लेषण स्वयं उसके शरीर में नहीं कर पाता। जिन पोषक तत्वों की आवश्यकता अधिक मात्रा में पड़ती है उन्हें स्थूल पोषक तत्व कहते हैं; इसी तरह सूक्ष्म पोषक तत्व कम मात्रा में जरूरी होते हैं।

आपका भोजन पोषक तत्वों से भरा हो और उसमें ऐसे तत्व न हों जो मोटापा पैदा करें तो आपको लंच में स्मार्ट विकल्पों का चयन करना होगा। जब आप लंच नहीं ले जाते तो आप यह तय नहीं कर पाते कि आपको कितनी कैलारी लेनी है आपके मेटोबॉलिज्म पर असर पड़ता है और इससे पूरा शरीर प्रभावित होता है। ब्रेकफास्ट की तरह लंच भी शरीर के लिए महत्वपूर्ण खाना है, इसलिए लंच में पोषक तत्व वाला भोजन शामिल करना चाहिए।

स्विस अल्बिनो नामक चूहों की त्वचा में कैंसर उत्पन्न करके एक अध्ययन किया गया और उसका अश्वगंधा की जड़ से निकाले गए रस से उपचार करने पर, उनके त्वचा के घावों की संख्या में काफी कमी हुई। शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया है कि अश्वगंधा के रस में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी घटक इसके चिकित्सकीय गुणों के लिए ज़िम्मेदार होते हैं।

Bacopa अनिवार्य रूप से adaptogenic जिसका अर्थ है कि यह जोर देकर कहा मन शांत और बेहोश करने की क्रिया के बिना ऊर्जा वृद्धि करने की क्षमता है है. Adaptogens न्यूरोट्रांसमीटर संतुलन जबकि कोर्टिसोल तनाव हार्मोन के स्तर को कम करने के द्वारा एक थर्मोस्टेट की तरह व्यवहार करते है कि आप एक भावनात्मक सुविधा क्षेत्र में रखना.

बैठक में एनडीएमसी चेयरमैन नरेश कुमार ने बताया कि इनके अलावा पांच सौ करोड़ रुपये की लागत वाली कुछ परियोजनाओं पर अगले साल मार्च से काम शुरू होगा। इनमें यशवंत प्लेस में इंडियन इन्वेस्टमेंट सेंटर, शिवाजी टर्मिनल ट्रांसपोर्ट हब और मोती बाग में विश्वस्तरीय कौशल केंद्र और टूरिज्म भवन शामिल है।

FROM WEBDon’t Do It Yourself – Hire a HomeAdvisor San Jose Handyma..HomeAdvisor17 Actors You Didn’t Know Were Gay – No. 8 Will Shock WomenWorldLifestyleShe Had No Idea Why the Crowd Started to CheerLivestlyFROM NAVBHARAT TIMESWWE की ‘भारतीय नारी’ कविता को राष्ट्रपति ने किया सम्मानित दिल्ली के आया नगर में महिलाएं खुले में शौच जाने के लिए मजबूर बीएचयू बवाल: हर छात्र पर 92,000 रुपये का जुर्माना From The WebMore From NBT

यूपी में अच्छा प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को योगी सरकार पुरस्कृत करेगी। इसके लिए मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन योजना शुरू की जाएगी। मंगलवार को लखनऊ के लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में ये लिए गए फैसले- पहला निर्णय

कई अन्य Nootropics और Racetam की खुराक की तरह कार्रवाई Pramiracetam की विधि के बारे में कोई सटीक रिपोर्ट है. कहा जाता है कि Pramiracetam फैटी एसिड और लिपिड के माध्यम से खून के अंदर आंत्र पथ से तल्लीन है. यह अपने उच्चतम प्रभाव के लिए तक पहुँच जाता है (अंदर 30 एक घंटे के लिए मिनट), यह जैव उपलब्धता के एक उच्च स्तर के साथ मस्तिष्क में हो जाता है. बाद में यह Acetylcholine की रिसेप्टर साइटों को बदल देती है, मस्तिष्क में एक महत्वपूर्ण न्यूरोट्रांसमीटर.

किसान चीनी मिलें चलने की प्रतीक्षा में हैं। ये कब चलेंगी, पता नहीं। वैसे सहकारी व निजी क्षेत्र की ये मिलें आर्थिक संकट से जूझ रही हैं। शुगर मिल के चलने का समय अक्तूबर-नवंबर माह में होता है। इसके लिये 4 महीने पहले से तैयारियां शुरू की जाती हैं लेकिन अभी तक प्रदेश की किसी भी सहकारी अथवा निजी मिल में न तो मरम्मत करवाई गई है और न किसानों के साथ गन्ना खरीदने के लिये करार किया गया है। किसान भी असमंजस की स्थिति में है। हरियाणा की तीन प्राइवेट व 11 सहकारी मिलों में सत्र 2014-15 में पांच करोड़ 80 लाख क्विंटल गन्ना क्रश किया गया था। इन मिलों ने 1700 करोड़ का भुगतान किसानों को किया था, लेकिन अभी भी नारायणगढ़ मिल की तरफ किसानों का 50 करोड़ रुपये से भी ज्यादा बकाया है। इसको लेकर किसान परेशान हैं। किसानों से नहीं हुआ करार: प्रदेश की शुगर मिलों को किसानों के साथ हर वर्ष एक करार करना होता है। यह करार शुगरकेन एक्ट के तहत आता है। इसमें किसान करार करते हैं कि वे आगामी सीजन में कितना गन्ना मिल को देंगे। यह करार सिंतबर से शुरू होता है और उससे पहले शुगरकेन कंट्रोल बोर्ड की मीटिंगों में गन्ने के भाव तय हो जाते रहे हैं। इस बार अभी तक प्रदेश की किसी भी सहकारी अथवा प्राइवेट मिल ने किसानों से यह करार नहीं किया है। इस कारण प्रदेश के किसान असमंजस की स्थिति में है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से मिल रही सूचनाओं के मुताबिक इस बार किसानों ने गन्ने की बिजाई पहले से कम की है। इससे भी कई मिलों के चलने के आसार अथवा उनकी पिराई का लक्ष्य पूरा होने की संभावनाएं नहीं हैं। घाटे में नहीं चला सकते शुगर मिल प्रदेश की शुगर मिलें चलाने के लिये हर साल शुगरकेन कंट्रोल बोर्ड की मीटिंग होती है जिसमें गन्ने के भाव के साथ-साथ शुगर मिलों की समस्याओं पर भी विचार किया जाता है। बोर्ड की एक मीटिंग 7 अगस्त को पंचकूला में कृषि मंत्री ओपी धनखड़ की अध्यक्षता में हुई थी जिसमें प्रबंधकों ने घाटे के चलते वर्तमान हालात में शुगर मिलें न चलाने की बात कही थी। शुगर मिल प्रबंधकों का कहना है कि उन्हें गन्ने का भाव 310 रुपये प्रति क्विंटल देना पड़ रहा है। उधर, वे चीनी 24 से 25 सौ रुपये क्विंटल बेच रहे हैं। ऐसे में उन्हें करोड़ों का घाटा उठाना पड़ रहा है। शुरू नहीं हुई मिलों की मरम्मत प्रदेश की ज्यादातर सहकारी व प्राइवेट मिलें गन्ना पिराई का सीजन खत्म होने के बाद मिलों में मरम्मत का कार्य शुरू करती हैं। इस वर्ष मिलों की पिराई का सीजन खत्म हुए पांच माह बीत चुके हैं। मरम्मत व सफाई शुरू नहीं हुई। अक्तूबर में मिलों के चलने के ट्रायल शुरू हो जाते हैं। इस कार्य में भी दो माह लगते हैं। मिल प्रबंधक इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि सरकार की तरफ से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश आये ताकि वे आर्थिक संकट से उबर सकें।

किसानों की मुसीबत गन्ने के फसल में पायरिल्ला का अटैक – posted on : Aug, 19 2015 गन्ना उत्पादक किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें छाई हुई हैं, क्योंकि क्षेत्र के गन्ना में पायरिल्ला कीट का अटैक हुआ है। इस प्रकोप से फसलों के नुकसान होने की चिंता किसानों को सताने लगी है। कृषि विभाग के वैज्ञानिकों की टीम भी इस प्रकोप पर लगातार नजर जमाए हुई है। टीम लगातर क्षेत्र का निरीक्षण कर प्रकाश प्रपंच तकनीक से इस रोग पर नियंत्रण पाने के लिए किसानों को सुझाव दे रहे हैं। क्या है पायरिल्ला पायरिल्ला कीट के निम्फ एवं प्रौढ़ कीट गन्ना फसल के पत्ते का रस चूसकर नुकसान पहुंचाते हैं जिससे पत्तियों का हरा रंग गायब हो जाता है तथा गन्ने में रस व सुक्रोज की कमी होती है। उपाय पायरिल्ला कीट के निम्फस एवं प्रौढ़ पत्तियों को चूसकर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं, जिसके कारण पत्तियों का हरा क्लोरोफिल उड़ जाता है। इसके चलते पत्तियां पीली पड़ जाती है व गन्ने के रस एवं सुक्रोज की मात्रा में कमी आ जाती है। इस कीट के नियंत्रण के लिए वैज्ञानिकों ने किसानों को सुझाव देते हुए बताया कि खेत में प्रकाश प्रपंच का निर्माण करें, जिसके लिए 5 एकड़ क्षेत्र में कम से कम दो स्थान पर गढ्ढे तैयार कर उसमें पॉलिथीन की परत बिछाकर पानी से भर दें। उसमें कोई भी कीटनाशक या कैरोसिन तेल डाल दें। उक्त गढ्ढे के पास कम से कम गन्ने से दो फीट उंचाई पर बल्ब शाम 6 से रात्रि 9 बजे तक जलाकर रखें । इस विधि से प्रकाश की रोशनी पर कीट आकार्षित होकर गढ्ढे में गिरते जाएंगे, जिसे समय-समय पर साफ करते जाएं। उन्होंने बताया कि रासायनिक कीटनाशक मिथाईलपैराथियान, एसीफेट या क्लोरपायरीफास धूल का 25 किग्रा की दर से भुुरकाव गन्ना फसल में करें। यह कार्य सुबह के समय करें, जिससे पत्तियों में उपस्थित नमी में धूूल चिपक जाए। खड़ी फसल में किसी भी प्रकार के नत्रजन उर्वरक जैसे- यूरिया या डीएपीका छिड़काव न करें। इसके स्थान पर पोटाश 30 से 40 किग्रा प्रति एकड़ आवश्यक रूप से करें। पोटाश के उपयोग से पौधों में कीटों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न होगी। इन उपायों के साथ-साथ पायरिल्ला कीट के जैविक परजीवी कीट ईपिरीकीेनिया मेलानोल्यूका के कोकून गन्ना फसल में क्लिप के माध्यम से स्टेपल करें। इस विधि को अपनाकर किसान कीट का प्रबंधन कर सकते हैं।

स्पिरुलिना में विटामिन ए, विटामिन बी -12, विटामिन ई, कैल्शियम, लोहा और फास्फोरस की उच्च सामग्री है, जो सभी आपकी त्वचा के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। मुक्त कण आपकी त्वचा को थका हुआ बनाते हैं। नियमित रूप से स्पिरुलिना की खुराक लेना आपकी त्वचा के लिए अद्धभुत काम करता है जिससे त्वचा टोन, युवा और महत्वपूर्ण दिखती है। यह शरीर के चयापचय अपशिष्ट उत्पादों को नष्ट करने और पूरे शरीर को मजबूत करने के द्वारा फलब्बी स्किन का भी इलाज करता है। स्पिरुलीना, डार्क सर्कल्स और ड्राई आईज के लक्षणों के इलाज में प्रभावी है।

किसान खेती में आपका स्वागत है – posted on : Aug, 06 2015 हम सभी जानते हैं कि अगर किसान फसलें पैदा नहीं करते और खाद्यान्न का उत्पादन नहीं करते तो हम क्या खाते I यह एक वाक्य हमें एहसास करवाता है कि किसान और खेती हमारे जीवन में कितने महत्वपूर्ण है? कृषि गतिविधि आदमी की सबसे बड़ी आवश्यकता है I क्या किसी भी व्यक्ति के लिए उसके जीवन से ज्यादा कुछ और महत्वपूर्ण हो सकता है? आत्मा शरीर को जीवन प्रदान करती है तथा शरीर को बनाए रखने के लिए हवा और पानी के बाद, भोजन ही सबसे बड़ी आवश्यकता है जोकि केवल ‘कृषि’ द्वारा प्राप्त किया जाता है I इसलिए, कृषि गतिविधि आदमी की सभी गतिविधियों में से सबसे महत्वपूर्ण गतिविधि है I पेट में अगर खाना नहीं होता है तो कोई काम नहीं किया जा सकता है I इसलिए हर किसी का मुख्य उद्देश्य कृषि विकास होना चाहिए और उसके लिए योगदान करना चाहिए I हम योगदान किस तरह से कर सकते हैं? किसानों की समस्याओं को सुन कर, उनकी विशिष्ट जरूरतों को पूरा कर के, अधिक उत्पादक खेती की तकनीक और प्रौद्योगिकी के बारे में जानकारी उपलब्ध करा कर के, बाजार और सरकार की नीतियों का अधिक से अधिक उपयोग करने में उन्हें सक्षम बनाकर और ऐसे कृषि अनुसंधान कर के जो किसानों के लिए वास्तव में उपयोगी है, द्वारा ही हम कृषि विकास में वास्तविक योगदान दे सकते हैं I इसी कड़ी में खेती से संबंधित जानकारी प्रदान करने के लिए “किसान खेती” नामक यह त्रैमासिक पत्रिका प्रकाशित की जा रही है I पत्रिका का उद्देश्य अपने ज्ञान और अनुभवों को प्रकाशित करने के लिए लेखकों को एक खुला मंच प्रदान करना है और पाठकों के लिए कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण गतिविधियों की जानकारी हासिल करवाना है I इस कदम को सफल बनाने के लिए, कृषि क्षेत्र से जुड़े हुए किसी को भी, चाहे किसान, कृषि शोधकर्ता, छात्र, वैज्ञानिक, विस्तार कार्यकर्ता, या कोई भी चाहे कृषि विज्ञान का लेखक और पाठक, सभी को यह अनुरोधित किया जाता है कि कृषि के क्षेत्र में अपने ज्ञान और अनुभवों को बांट कर एक दूसरे से लाभान्वित होवें I एक-दूसरे के अनुभवों को तथा खेती से संबंधित जानकारी को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक पंहुचा कर हम कृषि विकास में कुछ योगदान कर सकते हैं I कई बातें हैं जैसे कृषि के क्षेत्र में लोकप्रिय प्रौद्योगिकियों पर सफलता की कहानियां, हमारी प्राचीन कृषि प्रणालियां, स्वदेशी कृषि प्रौद्योगिकी ज्ञान (ITKs) और आज की कृषि पारिस्थितिकी के बदलते परिदृश्य में आधुनिक कृषि की गतिविधियां आदि जिन्हे हमें खेती के सम्पूर्ण विकास हेतु खेत से खेत तक प्रसार-प्रचारित करना चाहिए I तो आएं और अपने अनुभवों को बांट कर एक साथ मिलकर कृषि विकास में कुछ योगदान करें I उपभोक्ता हमेशा उत्पादक का ऋणी होता है I अगर हम योगदान नहीं कर रहे हैं तो हम सिर्फ उपभोक्ता बनकर कृषक के ऋणी हैं, हमें मात्र उपभोक्ता नहीं, योगदानकर्ता भी बनना है और आज से ही हमारे जीवन में कुछ महत्वपूर्ण करना है, क्यों नहीं अन्न दाता किसान के अन्न के कर्ज़ को अदा करने के लिए आज से ही कुछ करें I धन्यवाद I

“सर्वोत्तम मूल्य के लिए सबसे अच्छा स्मार्ट दवा मिल सकता है +मैं सबसे अच्छा मूल्य के लिए स्मार्ट दवा प्रोवीजिल कहां से खरीद सकता हूं”

शोधकर्ताओं ने करीब 688 बच्चों के आंकड़ों का अध्ययन कर यह निष्कर्ष निकाला है। इसमें पाया गया कि जो मां गर्भावस्था के दौरान ज़्यादा फल खाती हैं, उनके बच्चे एक साल की उम्र में विकासात्मक परीक्षण पर बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

आज जरुरत है कीटनाशकों के विकल्प साधनों की जो जैविक नियंत्रण विधि, सामाजिक व यांत्रिक तरीकों को अपनाएं | दुनिया के कई देशों में इनका व्यापक प्रयोग सफलता पूर्वक किया जा रहा है, जिससे कीटनाशकों की खपत एक तिहाई कम हो गई है और उत्पादन भी बढ़ गया है |

ग्वालियर. देश में 21 यूनिवर्सिटी फर्जी हैं। यूजीसी ने वेबसाइट पर इनकी सूची जारी कर छात्रों को इनमें एडमिशन न लेने के लिए आगाह किया है। ऐसी यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने वाले छात्रों की डिग्री मान्य नहीं होगी। लिहाजा, किसी भी नौकरी के लिए उसका उपयोग नहीं हो सकेगा। लिस्ट में देश के नौ राज्यों में संचालित यूनिवर्सिटी के नाम हैं। इनमें सर्वाधिक नौ यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश में है। नागपुर में भी राजा अरेबिक नाम की ऐसी एक यूनिवर्सिटी है।मध्यप्रदेश -केसरवानी विद्यापीठ, जबलपुर दिल्ली -कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड, दरियागंज >यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी >वोकेशन यूनिवर्सिटी >एडीआर-सेंट्रिक ज्यूरिडिकल यूनिवर्सिटी, एडीआर हाउस >इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग बिहार : मैथिली यूनिवर्सिटी, दरभंगा कर्नाटक : बडागानवी सरकार वर्ल्ड ओपन यूनिवर्सिटी एजुकेशन सोसाइटी, बेलगाम केरल : सेंट जॉन, कृष्णट्‌टम तमिलनाडु : डीडीबी संस्कृत यूनिवर्सिटी, पुत्तुर, त्रिची पश्चिम बंगाल : इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन, कोलकाता उत्तरप्रदेश : वाराणसेय संस्कृत यूनिवर्सिटी, वाराणसी यूपी/ जगतपुरी, दिल्ली >महिला ग्राम विद्यापीठ/यूनिवर्सिटी, इलाहाबाद >गांधी हिंदी विद्यापीठ, इलाहाबाद >नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ इलेक्ट्रो कम्प्लेक्स होमियोपैथी, कानपुर >नेताजी सुभाषचंद्र बोस यूनिवर्सिटी (ओपन यूनिवर्सिटी), अचलताल, अलीगढ़ >उप्र यूनिवर्सिटी, मथुरा >महाराणा प्रताप शिक्षा निकेतन यूनिवर्सिटी, प्रतापगढ़ >इंद्रप्रस्थ शिक्षा परिषद, इंस्टीट्यूशनल एरिया, खोड़ा माकनपुर, नोएडा >गुरुकुल यूनिवर्सिटी,वृंदावन, मथुरा महाराष्ट्र : फर्जी विश्वविद्यालयों की इस सूची में महाराष्ट्र का एक विश्वविद्यालय भी शामिल है। यह फर्जी विश्वविद्यालय नागपुर में है। नाम है राजा अरेबिक यूनिवर्सिटी।

सीइओ,चीफ जेनरल मैनेजर,चीफ फाइनेंस आॅफिसर, मैनेजर टेक्निकल, कंपनी सेक्रेटरी, पांच मैनेजर के पद, पीआरओ, अकाउंटेंट, सेटेनोग्राफर, कार्यपालक पदाधिकारी, कम्प्यूटर ऑपरेटर व चपरासी. इन मुद्दों पर दिया गया निर्देश: एक माह में मंदिरी नाले पर सड़क के लिए डीपीआर तैयारी का निर्देश.

पर एक तीसरा सिद्धांत कैसे काम करता है Adrafinil यह गाबा और ग्लूटामेट रास्ते को प्रभावित करता है. यह सोचा है कि ग्लूटामेट रास्ते गियर में लात मारी कर रहे हैं, जबकि यह गाबा रास्ते hinders. इस सिद्धांत का मतलब है कि Adrafinil की खुराकों मस्तिष्क के विभिन्न भागों पर दोनों निरोधक और उत्तेजक प्रभाव है.

यूं तो आपने तमाम तरह के शौकीन देखे होंगे लेकिन इन जनाब का शौक जरा हटके है। जी हां, यह हैं दिल्ली स्थित वसंत कुंज के रहने वाले अनिल मारवाह। सोमवार को इन्होंने बॉटेनिकल गार्डन से कालकाजी तक शुरू हुई मजेंटा मेट्रो लाइन में सफर के लिए पहला स्मार्ट कार्ड खरीदा और मेट्रो के पहले सफर के गवाह बने। खास बात यह है कि ऐसा इन्होंने पहली बार नहीं किया है। 2002 से अब तक दिल्ली-एनसीआर में जो भी नई मेट्रो लाइन शुरू हुई हैं, उन पर चलने वाली मेट्रो में यह हमेशा पहला स्मार्ट कार्ड खरीदते हैं और उसके पहले सफर में भागीदार बनते हैं। अब तक अनिल के पास 27 स्मार्ट कार्ड का कलेक्शन हो चुका है। इन्हें यह बहुत ही सहेजकर रखे हुए हैं।

पंजाब में हरियाणा और चंडीगढ़ के बराबर टैक्स किए जाने की मांग को लेकर मोहाली में पेट्रोल पंप के मालिकों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पंजाब में ज्यादा टैक्स वसूले जाने की वजह से व्यापार को नुकसान झेलना पड़ा है।

“कैल्शियम बेहतर रात में लीन हो जाता है,” तानिया फेररेटो कहते हैं, “इसलिए सबसे अच्छा यह `सोते समय यह लेने के लिए।” कैफीन और कॉफी और चाय में टैनिन कैल्शियम के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए एक cuppa के साथ अपने पूरक नीचे गंदा करना परीक्षा जा डॉन `t। यह एक कैल्शियम पूरक ही नहीं, रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं लेने किसी को भी लागू होता है।

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इस शोध से जुड़े शोधकर्ता अल्वारो मार्को ने कहा कि लार में सोडियम के स्तर से हृदय समस्याओं की प्रारंभिक चेतावनी मिल सकती है। लार से दिल की धड़कन, दबाव और कुछ नमूनों के बारे में मामूली सूचना मिलने से स्थिति को बेहतर किया जा सकता है। इससे रोगियों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकती है। 

जब Adrafinil जिगर हिट, यह modafinil में में बदल जाए, जिसका अर्थ है आप एक ही प्रभाव है कि modafinil उपयोगकर्ताओं को पाने के लिए मिल जाएगा. इसलिये, यह एक सार्थक विकल्प है यदि आप modafinil प्राप्त करने में असमर्थ रहे हैं. Adrafinil लेने के लिए सबसे अच्छा तरीका है पर हमारी पूरी गाइड बाहर की जाँच करें.

अश्वगंधा, कई कार्यात्मक रूप से महत्वपूर्ण जीन और सन्देश भेजने की प्रक्रिया (Signalling mechanisms) को नियंत्रित करता है, जो प्रतिरक्षा तंत्र की प्रतिक्रिया, तंत्रिकाओं में आने वाली सूजन, सन्देश स्थानांतरण, सेल सिग्नेलिंग (Cell signaling) तथा कोशिका चक्र नियमन (cell cycle regulation) आदि से सम्बंधित होते हैं। इससे अश्वगंधा, प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए प्रभावी रासायनिक एजेंट की तरह काम करता है।

– अपने दांतों का भी ख़्याल रखें. कुछ लोग जल्दबाज़ी में ब्रश करते हैं और ओरल हाइजीन की तरफ़ ध्यान ही नहीं देते, न ही नियमित रूप से डेंटिस्ट को मिलते हैं. दांतों में प्लाक जमा हो या कैविटी हो, तो उसका फ़ौरन इलाज करवाएं.

लखनऊ। उत्तरप्रदेश में योगी सरकार ने भ्रष्टाचार पर एक और वार करते हुए दवाओं की खरीद में घोटाले की गुंजाइश को समाप्त कर दिया है। योगी कैबिनेट में हुए फैसले के तहत अब दवाओं की खरीद नवगठित कारपोरेशन के माध्यम से की जायेगी। इसके साथ ही प्रदेश में स्मार्ट पंचायते बनायी जायेंगी।

क्रेडिट कार्ड की तरह, व्यक्तिगत चेक की तुलना में कम पहचान और छानबीन के कारण डेबिट कार्ड व्यापारियों द्वारा स्वीकृत है, जिससे जल्दी और कम से कम अनुचित दखलंदाजी से लेनदेन हो जाता है। व्यक्तिगत चेक के विपरीत, व्यापारी आमतौर पर यह विश्वास नहीं करते कि डेबिट कार्ड के जरिए भुगतान होने पर बाद में वह अस्वीकृत न हो जाए.

इसके बाद उन्होंने वार्ड का निरीक्षण किया। मंत्री ने एक महिला से पूछा, बाजार से कितने की दवाई खरीद लिए हो, महिला ने बताया 3 हजार रुपए की दवा खरीदी। फिर पूछा, आपके पास स्मार्ट कार्ड है, तो महिला ने तत्काल स्मार्ट कार्ड निकालकर दिखाया। महिला ने बताया कि डॉक्टर कहते हैं इससे अस्पताल में दवाइयां नहीं मिलतीं, बाजार से खरीदकर लाना पड़ेगा। डॉक्टरों के कहने पर बाहर से 1900 रुपए की दवा खरीद चुकी दूसरी महिला ने भी स्मार्ट कार्ड दिखाया। स्मार्ट कार्डधारी तीसरी महिला से भी जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने पांच सौ रुपए की दवाइयां खरीदवाई थीं। चौथी और पांचवीं महिलाओं ने भी बाहर से दवा खरीदवाने की बात बताई।

Piracetam दोनों थोक पाउडर में और कैप्सूल में उपलब्ध है. थोक पाउडर के बारे में है $40 के लिये 500 ग्राम. सिफारिश की खुराक है 1-3 ग्राम 1-2 एक दिन में कई बार और यह पानी में घुलनशील है, खुराक आसान बनाने. एक बार एक दिन ज्यादातर लोगों के लिए पर्याप्त है, लेकिन जो लोग लंबे समय तक की शिफ्ट में काम या एक लंबे अध्ययन सत्र की योजना बना रहे एक दूसरी खुराक लेना चाह सकते हैं. सिफारिश की खुराक से अधिक अनुशंसित नहीं है के रूप में यह लाभ में वृद्धि नहीं करता है और अधिक गंभीर साइड इफेक्ट का जोखिम वहन.

यह कौन बनाता है: न्यूरो स्पष्टता पोषण अनिवार्य है, एक छोटी लेकिन तेजी से बढ़ रही पूरक निर्माता द्वारा किया जाता है। गुणवत्ता के उत्पादों और महान ग्राहक सेवा पर ध्यान देने के साथ, पोषण अनिवार्य मुख्य रूप से एक मेल क्रम / इंटरनेट पूरक प्रदाता है।

सउदी अरब में डेबिट कार्ड के सभी लेनदेन सउदी पेमेंट नेटवर्क (Saudi Payments Network) (SPAN) के जरिए होते हैं, इस राजशाही में यही एकमात्र इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली है और सउदी अरब मौद्रिक एजेंसी (Saudi Arabian Monetary Agency) (SAMA) द्वारा सभी बैंक इस नेटवर्क में पूरी तरह अनुकूल कार्ड जारी करने के लिए अपेक्षित हैं। यह पूरे देश भर में बिक्री बिंदुओं के टर्मिनलों (POS) को केंद्रीय भुगतान से जोड़ता है, जो कार्ड जारी करनेवाले स्थानीय बैंक, VISA, AMEX या मास्टर कार्ड के वित्तीय लेनदेन की दिशा को फिर से बदल देता है।

कार्बामाज़ेपाइन ब्लॉकों बायोटिन के अवशोषण (विटामिन एच), जो वसा की वृद्धि और आत्मसात करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन. शरीर में इस विटामिन की कमी खतरनाक जटिलताओं की ओर जाता है, मस्तिष्क संबंधी बीमारियों सहित, और कभी-कभी मौत के लिए. हो सकता है शरीर में बायोटिन के स्तर को जोड़ें, खाने जिगर, उबले अंडे, साग.

बता दें कि कई बार अस्पतालों में दवाइयां मौजूद नहीं होने पर ईएसआई कार्ड होल्डर्स को अपने जेब ढीली करनी पड़ती थी। जिसके बाद करीब पांच महीने पहले ईएसआई हेल्थ केयर हरियाणा ने एक योजना तैयार कि जिसके तहत फरीदाबाद के नीलम चौक स्थित एक निजी मेडिकल के साथ टाइअप किया। जहां से ईएसआई कार्ड होल्डर्स को कैश लेस दवाइयां उपलब्ध कराई जाती थी, लेकिन यह योजना एक साल पूरा होने से पहले ही दम तोड़ गई और ईएसआई ने मेडिकल स्टोर के साथ अपना टाईअप खत्म कर दिया है। जिसके बाद अब ईएसआई कार्ड होल्डर्स को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

साओ पौलो (ब्राजील). ब्राजील में रहने वाले शख्स रिकार्डो एजवेडो ने एक ऐसी बाइक तैयार कर ली है जो पानी से चलती है। उन्होंने इस बाइक का नाम ‘टी पॉवर एच2ओ’ रखा है। दिलचस्प बात तो ये है कि रिकार्डो के मुताबिक ये बाइक एक लीटर पानी में 500 किलोमीटर का सफर कर सकती है। ब्राजील के साओ पौलो में रहने वाले रिकार्डो अपनी बाइक की टेस्टिंग के लिए भी तैयार हैं और स्थानीय डीलर से संपर्क कर रहे हैं। कैसे चलती है ये बाइक रिकार्डो ने हाल ही में एक वीडियो जारी किया है जिसमें वे बाइक में पानी डालने से पहले उसे पीते हुए दिखाई पड़ते हैं। ऐसा वे यह साबित करने के लिए करते हैं कि उन्होंने पानी में कुछ नहीं मिलाया है। हालांकि, जो लोग जानना चाहते हैं कि यह बाइक पानी से आखिर चलती कैसे है, उन्हें केमिस्ट्री के नियमों को समझना पड़ेगा। दरअसल, इस बाइक में एक बैटरी भी लगी होती है। बैटरी के जरिए पानी से हाइड्रोजन तैयार किया जाता है। चूंकि पानी ऑक्सीजन और हाइड्रोजन से मिलकर बना होता है। इसी वजह से पानी से मिले हाइड्रोजन से बाइक चलती है। लेकिन एक व्यक्ति ने जब उनसे सवाल किया- क्या इस बाइक में मूल इंजन ही लगा है, तो उन्होंने कहा- हां। उनकी बात के समर्थन में साऔ पॉलो यूनिवर्सिटी में केमिस्ट्री के प्रोफेसर एरनेस्टो गोनजालेज भी कहते हैं कि बाइक के मूल इंजन में हाइड्रोजन को फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

“मैं सबसे अच्छे मूल्य के लिए नॉट्रोपिक्स स्मार्ट दवाओं की सर्वश्रेष्ठ सूची कहां से खरीद सकता हूं |मैं सबसे अच्छा मूल्य के लिए सबसे अच्छा स्मार्ट दवाओं का काम कहाँ खरीद सकता हूं”

कैंसर के विकास पर प्रभाव। आंकलोजिकल ट्यूमर के विकास के लिए रक्त के प्रवाह की जरूरत है। घातक ट्यूमर के विकास की प्रक्रिया में उसमें रक्त वाहिकाओं का गठन है, जो अपने रक्त की आपूर्ति है। स्मार्ट दवाओं ट्यूमर में इन जहाजों के गठन को बाधित। उदाहरण के लिए, “एवास्टिन” स्तन कैंसर और पेट के कैंसर के उपचार के लिए बहुत प्रभावी है। एक दवा “थैलिडोमाइड” प्रोस्टेट कैंसर के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया था।

भारत के सबसे लोकप्रिय समाचार के स्रोत में आपका स्वागत है ताजा समाचार और रोज के ताजा घटनाक्रम के लिए दैनिक समाचार को पढने के लिए हमारी वेबसाइट सही और प्रमाणिक समाचारों को खोजने के लिए सबसे अच्छी जगह है। हम अपने पाठकों को पूरे देश और उसके मुख्य क्षेत्रों में नवीनतम समाचारों के साथ प्रदान करते हैं। हमारा मुख्य लक्ष्य खबरों को एक उद्देश्य के साथ मूल्यांकन भी देना है और इस तरह के क्षेत्रों में राजनीति, अर्थव्यवस्था, अपराध, व्यवसाय, स्वास्थ्य, खेल, धर्म और संस्कृति के रूप में क्या हो रहा है, इस पर भी प्रकाश डालना है। हम सूचना की खोज करते हैं और सबसे महत्वपूर्ण ग्लोबल घटनाओं से संबंधित सामग्री को तुरंत प्रकाशित करते हैं।.

सीधे शब्दों में कहें, नॉटोट्रोपिक्स पूरक या दवाएं हैं जो मस्तिष्क समारोह में मदद कर सकती हैं। विशेष रूप से, ये उत्पाद आम तौर पर फोकस, प्रेरणा, रचनात्मक कार्य, आदि में सहायता के लिए उपयोग किया जाता है। आम तौर पर एक अल्पकालिक मानसिक बढ़ावा के लिए उपयोग किया जाता है।

स्मार्ट दवाओं कैंसर कोशिकाओं के विकास को धीमा करने के अलग अलग तरीकों से कार्य कर सकते हैं प्रतिरक्षा और एक दूसरे के साथ बातचीत के साथ उनकी बातचीत प्रभावित करते हैं। इसराइल में कैंसर के इलाज के लक्ष्य-चिकित्सा की मदद से केंद्रित है।

लगभग हर लेनदेन, ब्रांड या सिस्टम कोई भी हो, को एक तत्काल डेबिट लेनदेन के रूप में संसाधित किया जाता है। इन पद्धतियों के अंतर्गत गैर डेबिट लेनदेन की एक सीमा है, जब वीसा या मास्टरकार्ड खातों के साथ तुलना की जाती है तो यह बिलकुल सीमित हो जाती हैं।

अंबेडकर अस्पताल में स्मार्ट कार्ड होने के बावजूद कई मरीजों को दवाओं के साथ-साथ उपकरण और मशीनें अपने पैसों से खरीदनी पड़ रही है। अस्पताल में केवल वही दवा व उपकरण मरीजों को फ्री उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ऐसी दवा व उपकरण जो नहीं हैं उसे मरीजों को खुद खरीदना पड़ रहा है, जबकि स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर कह रहे हैं सब फ्री दिया जा रहा है।

Phenylpiracetam के रूप में जाना जाता एक और पूरक बहुत ही प्रभाव है कहा जाता है, लेकिन यह भी एक पर्चे की आवश्यकता नहीं है ऑनलाइन खरीद. आप इस तरह से स्मार्ट ड्रग्स खरीद सकते हैं nootropic दुकानों से आसानी से.

हिटेश मालवीय, विटकइन विशेषज्ञ, इसकी ब्लॉचैन डॉट कॉम बताते हैं, बिटकॉन्स पूरी तरह से आभासी सिक्के हैं जो अपने मूल्य के लिए ‘आत्म-निहित’ होने के लिए डिजाइन किए गए हैं, जिससे बैंकों को पैसा इकट्ठा और स्टोर करने की कोई ज़रूरत नहीं है।

चिली में एफ्टपोस (EFTPOS) पद्धति है, जो रेडकैम्प्रा (Redcompra) (खरीददारी नेटवर्क) कहलाती है, वर्तमान समय में देश भर में कम से कम 23,000 प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होती है। इस पद्धति का उपयोग करते हुए सामान प्रमुख शहरी केंद्रों के ज्यादातर सुपरमार्केट, खुदरा दुकानों, पब और रेस्तरां से खरीदा जा सकता है।

दिल्ली परिवहन विभाग (डीटीसी) की बसों में यात्रा के लिए मेट्रो की तर्ज पर जल्द ही स्मार्ट कार्ड सुविधा शुरू की जाएगी। डीटीसी अधिकारियों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक टिकट मशीन (ईटीएम) के लिए अगले कुछ दिन में निविदा निकाली जाएगी।

इस दवा का प्रयोग करने से पहले, अपने चिकित्सक को अपनी वर्तमान दवाओं, अनिर्देशित उत्पादों (जैसे: विटामिन, हर्बल सप्लीमेंट आदि), एलर्जी, पहले से मौजूद बीमारियों, और वर्तमान स्वास्थ्य स्थितियों (जैसे: गर्भावस्था, आगामी सर्जरी आदि) के बारे में जानकारी प्रदान करें। कुछ स्वास्थ्य परिस्थितियां आपको दवा के दुष्प्रभावों के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना सकती हैं। अपने चिकित्सक के निर्देशों के अनुसार दवा का सेवन करें या उत्पाद पर प्रिंट किये गए निर्देशों का पालन करें। खुराक आपकी स्थिति पर आधारित होती है। यदि आपकी स्थिति में कोई सुधार नहीं होता है या यदि आपकी हालत ज्यादा खराब हो जाती है तो अपने चिकित्सक को बताएं। महत्वपूर्ण परामर्श बिंदुओं को नीचे सूचीबद्ध किया गया है।

चावल – posted on : Aug, 03 2015 हालांकि यह एक उष्णकटिबंधीय पोधा नहीं है। इस बात की सबसे अधिक संभावना है कि धान पूर्वी हिमालय की तलहटी में पाई जाने वाली जंगली घास की वंशज है।एक विचार के अनुसार धान का जन्म दक्षिण भारत में हुआ और बाद में यह देश के उत्तर में फैल गया कर फिर चीन तक पहुँच गया। जापान और इंडोनेशिया में इसका आगमन लगभग 2 000 ई.पू. तो कोरिया , फिलीपींस में लगभग 1000 ई.पू. में माना जाता है। दुनिया भर में चावल की यात्रा धीमी रही है, लेकिन एक बार आने के बाद यह रुक गया और लोगों के लिए एक प्रमुख कृषि और आर्थिक उत्पाद बन गया। भारतीय उपमहाद्वीप में खेती की भूमि के एक चौथाई से अधिक में चावल ( 20011-12 ) बोया जाता है। यह भारत के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में दैनिक भोजन का एक बहुत जरूरी हिस्सा है। उपमहाद्वीप के उत्तरी और मध्य भाग में जहां गेहूं अक्सर खाया जाता है, चावल अपना ही एक खास स्थान रखता है और त्योहारों और विशेष अवसरों पर इसे पकाया जाता है। भारत में चावल का इतिहास भारत चावल की खेती का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। भारत में चावल की सबसे बड़े क्षेत्र पर खेती की जाती है। इतिहासकारों के अनुसार चावल की इंडिका किस्म बर्मा के माध्यम से पूर्वी हिमालय (यानी उत्तर पूर्वी भारत), की तलहटी वाले क्षेत्र में पहले लगाई गई , जबकि थाईलैंड, लाओस, वियतनाम और दक्षिणी चीन में, बिही किस्म की जंगली किस्म को पालतू बनाया गया और इसे ही भारत में लाया गया था। बारहमासी जंगली चावल अभी भी असम और नेपाल में काफी मात्रा में होता हैं। यह उत्तरी मैदानों में अपने पालतू बनाने के बाद दक्षिण भारत में 1400 ई.पू. के आसपास दिखाई दिया गया। उसके बाद यह नदियों द्वारा सिंचित सब उपजाऊ पानी वाले मैदानी इलाकों में फैल गया। कुछ लोग चावल तमिल शब्द arisi से निकला हुआ मानते हैं। चावल के पोषण का महत्व चावल अपने सबसे महत्वपूर्ण घटक कार्बोहाइड्रेट ( स्टार्च ) के रूप में तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है जो एक पोषण मुख्य भोजन है। दूसरी ओर, चावल में केवल 8 फीसदी वसा और लिपिड भी नगण्य है। नाइट्रोजन पदार्थों की औसत में भी चावल काफी गरीब है। और इस कारण इसे खाने के लिए एक पूर्ण भोजन के रूप में माना जाता हैI चावल का आटा स्टार्च में समृद्ध है और विभिन्न खाद्य सामग्री बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह शराब माल्ट बनाने के लिए भी शराब बनाने वIलों द्वारा कुछ मामलों में प्रयोग किया जाता है। इसी तरह, अन्य सामग्री के साथ चावल के छिलके को मिश्रित कर चीनी मिट्टी के बरतन, कांच और मिट्टी के बर्तनों का उत्पादन किया जाता है। चावल पेपर पल्प और पशुओं के बिस्तर के निर्माण भी में प्रयोग किया जाता है। रचना और चावल की विविधता विशेषताओं की परिवर्तनशीलता बहुत व्यापक है और उन परिस्थितिओं पर निर्भर करता है जिन में फसल उगाई जाती है। Husked चावल में प्रोटीन सामग्री 12 प्रतिशत – 7 प्रतिशतके बीच में रहती है। नाइट्रोजन उर्वरकों के प्रयोग से कुछ अमीनो एसिड का प्रतिशत बढ़ जाता है। औषधीय मूल्य चावल जर्मप्लाज्म की विशाल विविधता, कई चावल आधारित उत्पादों के लिए एक समृद्ध स्रोत है और यह अपच, मधुमेह, गठिया, लकवा, मिर्गी और गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को ताकत देने के रूप में कई स्वास्थ्य संबंधी विकृतियों के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। प्राचीन आयुर्वेदिक साहित्य में भारत में उगाई चावल के विभिन्न प्रकारओं के औषधीय और रोगनाशक गुणों की गवाही देता है। कंठई बांको (छत्तीसगढ़), मेहर, सरिफुल, डनवार (उड़ीसा), आतीकाया और कारी भट्ट (कर्नाटक) जैसे औषधीय चावल की कई किस्मे भारत में आम हैं। चिकित्सा गुणों वाली कुछ किस्मों जैसे Chennellu, Kunjinellu, Erumakkari और Karuthachembavu आदि की खेती अब भी केरल के कुछ खास इलाकों में होती है।

हर रोज 20 सिगरेट पीने वालों की तुलना में एक सिगरेट पीने वाले को हार्ट अटैक का कितना खतरा होगा? शायद आपका जवाब होगा 5 फीसदी लेकिन वैज्ञानिक कह रहे हैं कि रोज एक सिगरेट पीने वालो को हार्ट अटैक का खतरा 50 फीसदी रहता है.

यू तो बच्चे बहुत प्यारे और सुंदर होते है पर खाने पीने की आदतो का असर भी पैदा होने वाले बच्चे पर पड़ता है. प्रेग्नेन्सी के वक़्त खाने पीने की कुछ बातो का ध्यान रखा जाए तो बेबी की स्किन सॉफ्ट और मुलायम होती है. आइए जानते है प्रेग्नेन्सी मे क्या खाए जिससे बचा गोरा पैदा हो .

वहां मरीजों ने उनसे ढेरों शिकायतें कीं। पांच मरीज ऐसे मिले, जिनके पास स्मार्ट कार्ड होने के बावजूद डॉक्टरों ने उनसे बाजार से महंगी दवाइयां मंगवाई थीं। सप्रमाण मामला सामने के बाद मंत्री भी पहले की तरह ये नहीं कह सके, कि सारी व्यवस्था ठीक है। बल्कि उन्होंने सीएमएचओ और सिविल सर्जन को जमकर फटकार लगाई। साथ ही पांचों मरीजों के दस्तावेजों की फोटो कॉपी कराकर इसकी जांच के लिए सीएमएचओ को निर्देशित किया। रविवार को सुबह साढ़े 10 बजे नगरीय निकाय मंत्री अमर अग्रवाल, संभागीय कमिश्नर निहारिका बारिक सिंह जिला अस्पताल में बच्चों को पोलियो ड्राप्स पिलाने के लिए पहुंचे।

हमारे कृषि क्षेत्र के समक्ष क्या चुनौतियां हैं? – posted on : Apr, 29 2016 भारत के पास विश्व के भौगोलिक क्षेत्र का मात्र 2.4% हिस्सा और जल संसाधनों का मात्र 4% हिस्सा है, लेकिन भारत पर विश्व की 17% मानव जनसंख्या और 15% पशुधन की जिम्मेदारी है। भूमि पट्टों के लगातार बंटवारे, प्राकृतिक संसाधनों के घटते आधार और जलवायु परिवर्तन की उभरती चिंताओं से भूमि और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। चूंकि भूमि और जल संसाधन सीमित हैं, इसलिए उच्चतर प्रति व्यक्ति आय वाली बढ़ती आबादी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कृषि उत्पादन में वृद्धि और खाद्यान्नों का विविधीकरण उपलब्ध जल और भूमि संसाधनों का इष्टतम उपयोग कर उसी सीमित कुल बोए हुए क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाकर करना है। यह सत्य है कि जनांकिकीय और सामाजिक-आर्थिक दबावों, मानसून से उत्पन्न समस्याओं, बार-बार बाढ़ और सूखा आने के कारण प्राकृतिक संसाधन यथा कृषि योग्य भूमि, जल, मृदा, जैव विविधता बहुत तेजी से कम हो रही है। सीमांत भूमि का जरूरत से ज्यादा उपयोग, असंतुलित उर्वरक और सिंचाई का उपयोग, मिट्टी की खराब होती स्थिति, कृषि भूमि का गैर कृषि कार्यों हेतु उपयोग, घटते जलवाही स्तर और सिंचाई के स्रोत, लवणीकरण और पानी का जमाव ऐसी गंभीर चुनौतियां हैं जिन पर तत्काल ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। कृषि को देश की खाद्यान्न अपेक्षाओं को पूरा करने योग्य बनाने के लिए विवेकपूर्ण भूमि उपयोग नीति, जल उपलब्धता और मृदा की स्थिति उन स्तरों पर बरकरार रखने की जरूरत है जो उच्च स्तर की उत्पादकता के कृषि कार्य करने के अनुकूल हों। प्रमाणों के अनुसार भारतीय खेतों में उत्पादकता सुधार हेतु पर्याप्त संभावनाएं हैं जिनका दोहन नहीं किया गया है। फिर क्या किए जाने की जरूरत है? बारहवीं पंचवर्षीय योजना के दस्तावेज में भविष्य में कृषि विकास के प्रमुख निर्धारक तत्वों को सूचीबद्ध किया गया है। इनमें शामिल हैं कृषि उद्यमिता और उत्पादक आधार संरचना जैसे मृदा और जल संरक्षण व विस्तार की व्यवहार्यता, सिंचाई प्रणालियों में सुधार, बाजार सुलभता, कीमत और जोखिम, विशेषकर वर्षा-सिंचित क्ष्‍ोत्रों में उपयुक्त प्रौद्योगिकियों और फसल की किस्मों का विकास, क्योंकि फसलयुक्त क्षेत्र का 55 प्रतिशत वर्षा सिंचित है और वहां अधिकांश निर्धनों का निवास है, ऋण जैसी सेवाओं की बेहतर आपूर्ति, बढ़िया आदान जैसे बीज, उर्वरक, जीवनाशी और कृषि मशीनरी, फसल विविधीकरण, बाजारों का बेहतर कार्यकरण, प्राकृतिक संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग और अधिक मूल्य की फसलों जैसे दालों, तिलहनों, फलों और सब्जियों के पक्ष में फसल विविधीकरण। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों, निजी क्षेत्र और कृषकों के सामूहिक प्रयास की जरूरत होगी। विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी क्योंकि कृषि के परिवर्तन में कृषि अनुसंधान और विस्तार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

लक्षित थेरेपी वर्तमान में सक्रिय रूप से दुनिया में विकसित किया जा रहा है। उपचार की यह बेहद सटीक विधि रोकथाम, निदान और रोगों के उपचार के उद्देश्य के लिए जीन और मानव शरीर के प्रोटीन के बारे में जानकारी का उपयोग करता है।  

  Aarogya Sanjeevani is a monthly health magazine that serves as a comprehensive guide for readers. Well-known health and fitness experts give suggestions, tips and tricks for you to lead a wholesome life. 

नीचे पंक्ति: कुल मिलाकर, फोकस + बहुत उपयोगी सहायक सामग्री के साथ भरी हुई एक मजबूत नॉटोट्रोपिक है इसमें उत्तेजक (कैफीन) की काफी उच्च सामग्री है, इसलिए आपको इसे दोपहर और शाम को लेने से बचना चाहिए। यह एक मालिकाना मिश्रण का भी उपयोग करता है, जो एक नकारात्मक पक्ष है क्योंकि यह आपको यह नहीं बताता कि प्रत्येक घटक का उपयोग कितना किया जाता है। फिर भी, यह एक सस्ती नोोट्रोपिक है जो निश्चित रूप से एक कोशिश के लायक है।

(यदि आप `गर्भवती, शराब पीने मूर्ख वैसे भी, क्योंकि यह आपके अजन्मे बच्चे के लिए जोखिम पैदा कर सकता है है। NHMRC की सलाह है कि अगर तुम गर्भवती या योजना होने के लिए, सबसे सुरक्षित विकल्प शराब पूरी तरह से बचने के लिए है।)

नैनो प्रौद्योगिकी के क्षेत्र: भारत: भारत: भारत अभी भी नैनो प्रौद्योगिकी के विकास के चरण में है और इस क्षेत्र को भारत में स्थापित होने के लिए काफी कुछ साल लगेगा। आईआईएससी, टीआईएफआर, एनसीबीएस, आईआईटी आदि जैसे अनुसंधान प्रयोगशालाएं और संस्थान भारत में उत्कृष्ट शोध कर रहे हैं। हालांकि, जब यूके, जर्मनी और अमेरिका जैसे देशों के साथ तुलना की जाती है, तो उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान का उत्पादन काफी महत्वपूर्ण होता है। यह नैनो में आर एंड डी के लिए विभिन्न विभागों के बीच एकीकरण की कमी जैसे कई कारणों के कारण है।

“कुछ महिलाओं को विशेष रूप से अगर वे डॉन `टी लाल मांस खाने के अकेले भोजन के माध्यम से इस आरडीआई को पूरा करने के लिए संघर्ष कर सकते हैं,” तानिया फेररेटो, मान्यता प्राप्त ऑस्ट्रेलिया की Dietitians एसोसिएशन के लिए अभ्यास आहार विशेषज्ञ और प्रवक्ता कहते हैं।

मुख्य Citicoline के लाभ में से एक है कि यह मस्तिष्क के भीतर Acetylcholine के स्तर बढ़ जाती है। यह एक अपने न्यूरॉन्स न्यूरोट्रांसमीटर के बीच संवाद करने के लिए इस्तेमाल किया निभाता है कि एक महत्वपूर्ण भूमिका में विकास और गठन की स्मृति और एक अन्य संज्ञानात्मक की संख्या प्रक्रियाओं. स्मृति याद है की गति के रूप में भी सुधार किया जा करने के लिए सोचा है सिनेप्टिक plasticity और इसलिए सीखने. लेने जब Citicoline की खुराक, आप भी पाते हैं कि कुल मिलाकर मस्तिष्क चयापचय बढ़ाया है. रक्त परिसंचरण में सुधार, जो ऑक्सीजन तेज और ग्लूकोज चयापचय बढ़ाने में मदद करता है. कई उपयोगकर्ताओं भी नोट एक बेहतर मानसिक ऊर्जा के स्तर. इस ध्यान अवधि में वृद्धि करने के लिए सुराग, फोकस, और एकाग्रता के रूप में अच्छी तरह के रूप में अधिक से अधिक मात्रा में प्रेरणा और जीवन शक्ति

यह मानसिक सतर्कता और जो असामांय बदलाव या एक रात के अध्ययन सत्र का सामना कर रहे लोगों के लिए काम के लिए तीक्ष्णता प्रदान कर सकते है जबकि परीक्षा के लिए cramming. स्थिति या सामयिक उपयोग लंबी अवधि के उपयोग पर सिफारिश की है.

नए स्मार्टकार्ड के जिले के पीएचसी व सीएचसी में भी इसके लिए शिविर लगाए जाएंगे, जिसमें ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों की भी मदद ली जाएगी। महंगी दवा खरीदने को मजबूर ग्रामीण महारानी अस्पताल में स्मार्ट कार्ड वाले मरीजों को अभी बाहर से उपकरण व जरूरी दवाएं खरीदनी पड़ रही है।

9 मई 2007 को पेमेंट एक्सप्रेस (Payment Express) ने पहली बार IP/ ब्रॉडबैंड प्रमाणित टर्मिनल के रूप में मान्यता प्रदान की और एफ्‍टपोस (EFTPOS) लेनदेन को इंटरनेट पर सुरक्षित प्रसारित करने की अनुमति प्रदान की।

“Grd Smart Powder in Hindi (जीआरडी स्मार्ट पाउडर) – हिंदी, दवा, ड्रग, उसे, जानकारी, प्रयोग, फायदे, लाभ, उपयोग, दुष्प्रभाव, साइड-इफेक्ट्स, समीक्षाएं, संयोजन, पारस्परिक क्रिया, सावधानिया तथा खुराक – Zydus Cadila – TabletWise – India” Tabletwise.com. N.p., n.d. Web. 26 Jan. 2018.

उर्वरक की मात्रा को प्रभावित करने वाले करक – posted on : Oct, 14 2015 फसल की किस्म :- अलग-अलग फसलों कि पोषक तत्व संम्बधी आवष्यकता अलग-अलग होती हैं। उदाहरण के लियें दलहनी फसलों की नत्रजन की आवष्यकता गेहॅू या गन्नों की फसल की तुलना में कम होती हैं। मृदा उर्वरता व गठन :- जो मृदाएं कमजोर अथवा कम उर्वरा होती हैं उन में अधिक खाद की आवष्यकता होती हैं। जैसे बलुई भूमियों में दोमट मृदाओं की अपेक्षा एक ही फसल को अधिक खाद देना पड़ता हैं। शस्य चक्र :- फसल चक्र में यदि हरी खाद उगा रहें हैं या दलहनी फसल उगा रहें है, तो इसके बाद बाली फसलों को नत्रजन के खादों की कम आवष्यकता हैं। खरपतवार का प्रकोप :- यदि खेत में खरपतवारों का प्रकोप अधिक हैं, तो फसल की खाद सम्बधी आवष्यकता बढ़ जाती हैं। मृदा में नमी की मात्रा :- मृदा में नमी की मात्रा कम हैं। और सिंचाई के साधन भी उपलब्ध नहीं हैं तो भूमि में खाद की मात्रा भी कम दी जाती हैं। खाद की किस्म :- एक ही तत्व को खेत में देने के लिये, बाजार में कई एक उर्वरक उपलब्ध होते हैं। जिन खादों में तत्व की प्रतिषतता अधिक होती हैं। उनकी मात्रा कम करते हैं। मौसम :- शुष्क मौसम होने पर खेत में उर्वरक की कम मात्रा प्रयोग की जाती है। अधिक वर्षा वालें क्षेत्र में खाद तत्व उद्वीपन से या अपधावन द्वारा अधिक नष्ट होते हैं। खाद देने की विधि:- खाद देने की विधि भी खाद की मात्रा को कम या अधिक करती है। उदाहरण के लिए हम खेत में नत्रजन देने के लिए यूरिया उर्वरक के घोल का छिड़काव करें, तो फसल की आवष्यकता पूर्ति के लिए कम खाद की आवष्यता होगी और यदि खाद ठोस रूप में मृदा में बिखेर दी जाये तो इसकी अधिक मात्रा की आवष्यकता होगी । यूरिया को हलकी नम मिट्टी के साथ रात भर मिला कर रखें तथा दूसरे दिन मिट्टी का छिड़काव करें ।

“सर्वोत्तम मूल्य के लिए सस्ती सबसे प्रभावी स्मार्ट दवाएं मैं सबसे अच्छा मूल्य के लिए किफायती स्मार्ट दवा पेरासिटाम कहां खरीद सकता हूं”

Modafinil narcolepsy और शिफ्ट काम नींद विकार के साथ रोगियों के लिए निर्धारित है. अपने ऑफ लेबल लाभ अविश्वसनीय मानसिक ध्यान और एकाग्रता शामिल, तीव्र विस्तार के पूरा होने के लिए अनुमति-व्याकुलता के बिना कार्य उंमुख. फिल्म में, इस मुख्य चरित्र से कुछ ही दिनों में एक संपूर्ण उपंयास लिखने में सक्षम किया जा रहा था चित्र.

इस तरह से प्रदेश में हर साल कुल 2463 ग्राम पंचायतें सम्मानित होंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्मार्ट सिटी की तर्ज पर ही स्मार्ट ग्राम पंचायत बनाने का एलान किया था। इस सपने को पूरा करने के लिए यह योजना शुरू की गई है।

इलेक्ट्रॉनिक पर्स पद्धति पर आधारित स्मार्ट कार्ड (जिसमें इसका मूल्य कार्ड चिप पर ही संग्रहित होता है, खाते के रिकॉर्ड पर दर्ज नहीं होता, इसीलिए नेटवर्क कनेक्टिविटी की जरूरत के बगैर मशीन कार्ड को स्वीकार कर लेता है) का उपयोग पूरे यूरोप में 1990 के दशक के मध्य से हो रहा है, उल्लेखनीय रूप से जर्मनी (गेल्डकार्टे), ऑस्ट्रिया (क्विक), नीदरलैंड (चिपनिप), बेल्जियम और स्विट्जरलैंड (कैश) में. ऑस्ट्रिया और जर्मनी में, सभी वर्तमान बैंक कार्ड अब इलेक्ट्रॉनिक पर्स में शामिल हो गए हैं।

आप एक पूरक लेते हैं तो ध्यान रखें कि लोहे की मात्रा विभिन्न योगों के बीच काफी भिन्न हो। एकल पोषक तत्व की आपूर्ति करता है, उदाहरण के लिए, बहु विटामिन की तुलना में अधिक लोहे हो सकती है। लोहे की उच्च खुराक कुछ लोगों में पेट दर्द और कब्ज पैदा कर सकते हैं, तो Ferraretto उच्च खुराक की खुराक का उपयोग कर जब तक आप एक फार्मासिस्ट या अन्य स्वास्थ्य पेशेवर द्वारा सलाह दी जाती है के खिलाफ चेतावनी देते हैं।

खराब नेटवर्क से झल्लाया किसान, लगा डाला खुद का 4जी टॉवर! – posted on : Aug, 19 2015 लंदन। हमारे मोबाइल में नेटवर्क नहीं आता, तो हम सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों को बुरा भला कहकर चुप हो जाते हैं। पर ब्रिटेन के एक किसान को इतना गुस्सा आया कि उसने खुद का नेटवर्क टॉवर खड़ा कर लिया। अब उससे वो कई गुना तेजी से इंटरनेट की स्पीड का मजा ले रहा है। और तो और, किसान ने खुद की कंपनी खड़ी करने का निर्णय भी ले लिया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में जहां नेटवर्क की समस्या आती है और इंटरनेट की स्पीड बेहद धीमी है, वहां वो नेटवर्क प्रोवाइड कराएगा। रिचर्ड ग्वे नाम का ये किसान ब्रिटेन में के एक गांव में रहता है। गांव में उसका फोन 4जी सपोर्ट तो करता है, पर इंटरनेट की स्पीड बेहद कम आती है। बस, इस समस्या से निजात पाने के लिए उसने खुद का जुगाड़ू टॉवर खड़ा करने की सोची और खुद के पूर्व इंजीनियर होने का फायदा उठाते हुए टॉवर बना लिया। पहले जहां उसे महज 1एमबीपीएस की स्पीड मिलती थी, वो अब कई गुने बढ़कर 69 एमबीपीएस तक पहुंच गई है। जबकि समूचे ब्रिटेन में इंटरनेट की स्पीड 25 एमबीपीएस है।

स्मार्ट तकिये को एप्लीकेशन से जोड़कर इंसान की नींद को ट्रैक कर सकते हैं। यह एप आपको बताएगा कि आप कितने समय तक गहरी नींद में सोए और सोने के बाद कितने वक्त के लिए आपकी बेचैनी बढ़ गई। इस तकिये का फैब्रिक इतना शानदार है कि इस पर सिर रखने के बाद आपको किसी तरह की असुविधा नहीं होगी और भरपूर नींद का आनंद ले सकेंगे।

ज्यादा से ज्यादा आराम करें। सिर दर्द में फायदा होगा। सिर पर बर्फ की ठण्डी पट्टियां रखें।/ /या फिर गर्म पानी से नहा लें तो भी सिर दर्द से राहत मिलेगी। / सिर की तेल मालिश करें।या फिर गर्म पानी से नहा लें तो भी सिर दर्द से राहत मिलेगी। / थोड़ा-थोड़ा लेकिन कई बार खाते रहें बजाए एक या दो बार ज्यादा खाने से। /खूब पानी पिएं। /माइग्रेन में तनाव को कम करें। ये सिर के दर्द को बढ़ा देता है। / बहुत ज्याद नहीं लेकिन थोड़ी सी चाय या कॉफी ली जा सकती है सिर दर्द में। / अगर माइग्रेन है तो धूप से खुद को बचाएं। / सिर में दर्द भगाने के ये हैं सरल घरेलू उपाय, एक बार जरूर पढ़ें / रोजाना कसरत करें। / बहुत ज्यादा शोर या फिर तेज रोशनी या अंधेरे कमरे में फिल्म देखने से बचें। ये दर्द को बढ़ा देता है। / काम करते समय अगर थकान हो तो थोड़ आराम कर लें। / वजन नियंत्रित रखें।

हरियाणा स्टेट कैमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन केे प्रधान मनजीत सिंह ने बताया कि ऑनलाइन फार्मेसी सहित सरकार द्वारा मेडिकल शॉप का सारा रिकॉर्ड ऑनलाइन रखने के नियम का वे विरोध कर रहे हैं। पूरे देश में मंगलवार को हड़ताल रखी गई। इसको लेकर जिला कार्यकारिणी की ओर से 26 मई को मांगों को लेकर ज्ञापन दिया था और हड़ताल के बारे में बताया था। एसोसिएशन के महासचिव राजकुमार बंसल, यमुनानगर सिटी प्रधान चरणजीत सिंह मक्कड़, जगाधरी सिटी प्रधान नरेश ढिंगराव एसोसिएशन के सदस्य शशी जयसवाल, जितेंद्र, राजू मक्कड़, जितेंद्र सिंह, संजय चड्ढा राजेंद्र सिंह ने बताया कि ऑनलाइन फार्मेसी से प्रतिबंधित दवा सॉल्ट भी बिक रहे हैं। इस पर सरकार को रोक लगानी चाहिए। पोर्टल पर दवाईयों की जानकारी डालने जैसा सरकार को फैसला गलत है। हुडा सेक्टर-18 निवासी सुमित उर्फ जोनी ने बताया कि वह सेक्टर-18 में में दवाइयां लेने बाजार में गया तो मेडिकल शॉप बंद मिली। जगाधरी के केसर नगर निवासी गुरनाम ने बताया कि उसे शुगर है। सोमवार को दवाई खत्म हो गई थी। मंगलवार सुबह बाजार में गया तो मेडिकल शॉप बंद मिली।

टोरंटो: कहते हैं कि व्यक्ति के जीवन में स्मार्ट और हेल्दी लाइफस्टाइल होना बहुत ज़रूरी होता है। स्वास्थ्य डाइट लेना, संतुलित मात्रा में पोषक तत्व लेना और दिन में हरी सब्जियां और फल खाते रहना, एक हेल्दी लाइफस्टाइल को बढ़ावा देना है। ख़ासतौर से गर्भवती महिलाओं के लिए उनका हेल्दी लाइफस्टाइल होना बेहद महत्वपूर्ण है। अगर आप भी मां बनने जा रही है, तो कृपया सावधान हो जाइए।

एक बार जब आप बिटकॉइन के मालिक होते हैं, तो वे मूल्य और व्यापार करते हैं जैसे कि वे आपकी जेब में सोने के सोने की डली थे। आप सामान और सेवाएं ऑनलाइन खरीदने के लिए अपने बिटकॉइन का उपयोग कर सकते हैं, या आप उन्हें दूर कर सकते हैं और उम्मीद कर सकते हैं कि उनका मूल्य साल के दौरान बढ़ता है ..

नई दिल्ली। अपना देश 29 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेशों से मिलकर बना है, मगर यह अपने आप में किसी दुनिया से कम नहीं है। यह जानकर हैरत होगी कि यदि महाराष्ट्र को एक देश की तरह माना जाए तो इसका सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 286.50 अरब डॉलर यानी करीब 18,909 अरब रुपये का होगा। इस तरह इसकी गिनती दुनिया की 38 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में होगी। यह आंकड़ा मिस्र और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था से ज्यादा है। पड़ोसी देश पाकिस्तान की कुल जीडीपी 250 अरब डॉलर है। जहां तक भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार का सवाल है तो इसकी जीडीपी लगभग 2,100 अरब डॉलर है।ईरान के बराबर मध्य प्रदेश की जनसंख्याआबादी के मामले में भी अनेक भारतीय राज्य कई देशों के बराबर हैं। गुजरात को ही ले लिया जाए। इस राज्य की जनसंख्या इटली के बराबर है। जहां तक मध्य प्रदेश की आबादी का सवाल है, तो इसकी बराबरी ईरान की आबादी के साथ की जा सकती है।अर्थव्यवस्था के आंकड़े राज्य – बराबरी वाला देश – जीडीपीमहाराष्ट्र – मिस्र- 18,876 अरब रुपये (286 अरब डॉलर)जम्मू-कश्मीर , बोस्निया-हर्जेगोविना -1,122 अरब रुपये (17 अरब डॉलर)हिमाचल प्रदेश – कंबोडिया- 1,056 अरब रुपये (16 अरब डॉलर)उत्तराखंड – साइप्रस-1,518 अरब रुपये (23 अरब डॉलर)उत्तर प्रदेश -बांग्लादेश- 12,210 अरब रुपये (185 अरब डॉलर)बिहार – डोमिनिक रिपब्लिक -4,224 अरब रुपये (64 अरब डॉलर)झारखंड – बोलिविया -2,244 अरब रुपये (34 अरब डॉलर)पंजाब – म्यांमार- 4,092 अरब रुपये (62 अरब डॉलर)हरियाणा – श्रीलंका – 4,884 अरब रुपये (74 अरब डॉलर)राजस्थान – मोरक्को – 7,194 अरब रुपये (109 अरब डॉलर)गुजरात – हंगरी – 9,042 अरब रुपये (137 अरब डॉलर)मध्य प्रदेश -स्लोवाकिया- 6,534 अरब रुपये (99 अरब डॉलर)छत्तीसगढ़ -जॉर्डन -2,310 अरब रुपये (35 अरब डॉलर)पश्चिम बंगाल- यूक्रेन- 8,580 अरब रुपये (130 अरब डॉलर)———–राज्य- बराबरी वाला देश ———-आंध्र प्रदेश -जर्मनीबिहार – मेक्सिकोछत्तीसगढ़ -नेपालदिल्ली – बेलारूसगुजरात -इटलीहरियाणा – यमनहिमाचल प्रदेश -हांगकांगजम्मू-कश्मीर -जिम्बाब्वेझारखंड -इराककर्नाटक -फ्रांसमध्य प्रदेश – ईरानमहाराष्ट्र – जापानपंजाब – मलेशियाउत्तर प्रदेश– ब्राजीलउत्तराखंड – पुर्तगालपश्चिम बंगाल – वियतनाम –

जर्मनी में डेबिट कार्ड को सालों साल से व्यापक रूप से स्वीकृति प्राप्त है। एफ्टपोस (EFTPOS) से पहले ही यह सुविधा थी, लेकिन यूरोचेक कार्ड के साथ यह लोकप्रिय हो गयी, असली चेक में हस्ताक्षर करने के अलावा शुरू में इसके साथ ही ग्राहकों को सुरक्षा उपाय के तहत कार्ड की भी जांच कराने की जरूरत पड़ती थी। ATM (एटीएम) टर्मिनल में और कार्ड-आधारित इलेक्ट्रॉनिक धन हस्तांतरण (जो गिरोकार्ड (Girocard) कहलाता है) के लिए भी इन कार्डों का उपयोग किया जा सकता है। ऐसे कार्डों का अब केवल इतना ही कार्य हैं: 2002 में लेनदेन के दौरान यूरो को डेयूटस्चे मार्क देकर यूरोचेक प्रणाली को (ब्रांड के साथ) छोड़ दिया गया है। 2005 तक, ज्यादातर दुकान और पेट्रोल के आउटलेट एफ्टपोस (EFTPOS) की सुविधाएं देते रहे। प्रक्रमण शुल्क व्यापारियों द्वारा भुगतान किया जाता है, नतीजा यह होता है कि कुछ व्यापार मालिक कुल बिक्री के एक तय रकम का भुगतान, आमतौर पर 5 से 10 यूरो के लिए, डेबिट कार्ड लेने से मना कर देते हैं।

बेगूसराय: अभयानंद सुपर 30 के लिए बच्चों का चयन करने के मुहिम में रविवार को स्थानीय सेंट जोसेफ पब्लिक स्कूल पहुंचे पूर्व DGP अभयानंद ने 10-11 कक्षा के छात्र-छात्राओं से इंट्रेक्शन करते हुए कहा कि पढ़ने की आदत डालिए. पढ़ते रहेंगे तो अंदर जाता रहेगा. किताब दर किताब पढ़ते रहेंगे और सोचेंगे नहीं तो सफलता मिलना कठिन है.

अल्फा मस्तिष्क लोग हैं, जो उनकी मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता के स्तर को बढ़ाने के लिए देख रहे हैं के लिए अच्छा है. यह जानने के लिए और अध्ययन के लिए जानकारी को याद करने की क्षमता में सुधार के द्वारा छात्रों को स्कूल या विश्वविद्यालय में बेहतर करने में मदद कर सकता. अल्फा मस्तिष्क भी एक Adderall विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है अगर आप इस कठोर स्मार्ट दवा है कि जाना जाता है लेने के दुष्प्रभावों के एक बहुत कुछ है नहीं करना चाहती. आप एकाग्रता के लिए और अधिक अल्फा मस्तिष्क समीक्षा की जांच कर सकते हैं और अधिक जानने के लिए अध्ययन कर.

एक मुख्य चिंता निष्पक्षता है। कल्पना कीजिए कि जब आप अपनी मानसिक ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए दौड़ रहे हैं, तो आपका सहयोगी इसके बजाय रितलिन को भगा रहा है। जब आप एकाग्रता हासिल करने के लिए अपनी दोपहर की झपकी में विश्वास करते हैं, तो आपका कार्यालय साथी प्रावीगिल पर निर्भर करता है अनुचित? सामान्य जनता सोचती है कि स्मार्ट दवाओं को धोखाधड़ी करना धोखाधड़ी है, क्योंकि यह उपयोगकर्ताओं को एक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दे सकती है वास्तव में, यहां तक ​​कि कई शिक्षाविदों तर्क किया है कि मस्तिष्क डोपिंग उन लोगों के लिए अनुचित है जो ऐसा नहीं करते हैं।

खुराकों को नैदानिक ​​अध्ययन द्वारा कारगर साबित में सूत्र, उनके सबसे शक्तिशाली रूपों में केवल प्रीमियम सामग्री के होते हैं (आप के बारे में और अधिक पढ़ सकते हैं उनके सूत्र तथा यह कैसे काम करता है उनकी वेबसाइट पर)।

क्या आप जानते हैं कि गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिलाएं जितना ज़्यादा फल खाएंगी उतना ही उनके बच्चे का आईक्यू लेवल ज़्यादा होगा। एक अध्ययन से यह पता चला है कि अगर गर्भवती महिलाएं औसतन छह या सात बार फल या फलों का जूस रोज़ाना लेती हैं, तो उनके बच्चे का एक साल की उम्र में आईक्यू, उसे नापने वाले स्केल में छह या सात अंक अधिक होता है।

यह अभी तक ज्ञात नहीं है – नहीं स्पष्ट रूप से वैसे भी – कैसे दवा काम करता है, हालांकि शोधकर्ताओं ने कई सिद्धांतों की क्या ज़रूरत है. क्या शोधकर्ताओं का एहसास हो गया है कि एक बार दवा जिगर तक पहुँच जाता है, जिगर दवा modafinil में इसे बदलना होगा. इसलिये, Modafinil का उपयोग करने में रुचि रखते हैं, लेकिन इसके लिए एक डॉक्टर के पर्चे को प्राप्त करने में असमर्थ है या असमर्थ लोगों को इसके लिए भुगतान करने के लिए, बजाय Adrafinil खरीद सकते हैं. यहाँ Adrafinil के उपयोगकर्ता समीक्षाएँ पढ़ें.

अश्वगंधा एक रेडियोसेंसिटाइज़र (वह दवा जो ट्यूमर कोशिकाओं को रेडिएशन थेरेपी के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है) और कीमोथेरेप्यूटिक एजेंट (जल्दी जल्दी बढ़ने वाली कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने वाली दवाएं) के रूप में कार्य करता है।

इंटरनेट खरीददारी ऑनलाइन या ऑफ़लाइन दोनों मोड में की जा सकती है और जब आप किसी दुकान में जहां आप अपना कार्ड इस्तेमाल करते हैं, उस मामले में यह कहना असंभव है (कम से कम ज्यादातर देशों में) कि किया गया लेनदेन ऑनलाइन या ऑफलाइन मोड में किया गया है (अगर एक ‘केवल ऑनलाइन कार्ड’ का उपयोग होता है, तो इस मामले में आपको पता है कि आपने ऑनलाइन मौड का इस्तेमाल किया है), क्योंकि मोड किसी रसीद या इसी तरह के किसी तरीके से इसका जिक्र नहीं करता है। इंटरनेट खरीददारी में न तो पिन कोड का उपयोग होता है और न ही पहचान के लिए हस्ताक्षर का. लेनदेन क्रेडिट या डेबिट दोनों ही कार्ड पर हो सकता है, (जो कभी-कभी रसीद में बता दिया जाता है, लेकिन हमेशा नहीं) और इससे कुछ लेनादेना नहीं होता है कि लेनदेन ऑनलाइन या ऑफलाइन मोड में हुआ है, क्योंकि ये दोनों क्रेडिट और डेबिट दोनों ही मोड में किए जा सकते हैं।

आईआईवीआर में 42 वैज्ञानिक अन्य सब्जियों पर रिसर्च में दिन-रात जुटे हैं – posted on : Aug, 23 2015 वाराणसी: बनारस स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) के वैज्ञानिकों की रिसर्च के मुताबिक तीखी मिर्च के रंग से अब लिपस्टिक तैयार हो सकेगी। जी हां, तीखी हरी मिर्च से लाल और कद्दू से नैचरल पीले (वसंती) कलर का एक्सट्रैक्ट निकालने के लिए संस्थान में चल रहे रिसर्च के परिणाम सामने आए हैं। इंस्टिट्यूट के हेड और साइंटिस्ट डॉ़ ए.बी. राय का कहना है कि मिर्च और कद्दू की पैदावार ज्यादा होने के कारण कम खर्च में नैचरल कलर एक्सट्रैक्ट तैयार करके लिपस्टिक और अन्य सौंदर्य प्रसाधन में इसका प्रयोग किया जा सकेगा। खाने पर हिलाकर रख देने वाली तीखी हरी मिर्च अब जहां होंठों पर लाली बिखेरेगी, वहीं कद्दू, सफेद कद्दू (पेठे वाला) और बैंगन खाने पर कैंसर-हाई ब्लड प्रेशर पर विजय हासिल होगी। यह कोई गप नहीं, बल्कि कृषि वैज्ञानिकों के रिसर्च के नतीजे हैं। आईआईवीआर में 42 वैज्ञानिक अन्य सब्जियों पर रिसर्च में दिन-रात जुटे हैं।

हमारे देष का एक बड़ा भाग कृषि उत्पादन पर निर्भर करता है। भारतवर्ष में 60 के दषक में हरित क्रांति के प्रारंभ होने के साथ ही खाद्यान्नों के उत्पादन में वृध्दि हुई है। लेकिन अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए रासायनिक उर्वरको का अधिक एव अनियमित प्रयोग किया जाता रहा है। रासायनिक उर्वरक व कीटनाषको के अत्याधिक प्रयोग से भूमि के भौतिक व रासायनिक गुणों पर विपरीत प्रााव पडता है तथा पर्यावरण संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न हो रही है। मृदा को स्वस्थ बनाए रखने, उत्पादन लक्ष्य प्राप्त करने के लिए पर्यावरण और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से जैविक खादों के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। मृदा उर्वरता और फसल उत्पादन में जैविक खादों का महत्व:- जैविक खादों के प्रयोग से मृदा का जैविक स्तर एवं जीवाणुओं की संख्या बढ़ जाती है और मृदा की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है। भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए कार्बनिक/प्राकृतिक खादों का प्रयोग बढ़ रहा है। प्राकृतिक खादों में गोबर की खाद, कम्पोस्ट व हरी खाद प्रमुख है जो पौधों के लिए आवष्यक खनिज प्रदान कराते है और जिससे फसलों का उत्पादन बढ़ता है। इसके प्रयोग से हयूमस की बढोतरी होती है। एवं मृदा की भौतिक दशा में सुधार होता है। पौधों को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्वों की प्राप्ति हो जाती है। कीट, बीमारियों तथा खरपतवारों का नियन्त्रण भी जैव उत्पादो द्वारा किया जा सकता है। जैविक खादे सडने पर कार्बनिक अम्ल देकर मृदा का पी.एच. 7 से कम कर देती है। जिससे पोषक तत्थ्व पौधों को काफी समय तक मिलाते रहते है तथा दूसरी फसलों को भी लाभ मिलता रहता है। जैविक खादों के प्रकार:- जैविक खादो में फार्म यार्ड खाद, कम्पोस्ट हरी खाद वर्मी कम्पोस्ट, नैडप की खाद इससे अलावा मूंगफली, केक, इत्यादि मुख्य रूप् से है। कम्पोस्ट खाद बनाने के लिए केचुए का प्रयोग किया जाता है। इस विधि को वर्मी कम्पोस्टिंग या केंचुए द्वारा कम्पोस्ट बनाना कहा जाता है तथा तैयार कम्पोस्ट को वर्मी कम्पोस्ट कहते है। कम्पोस्ट बनाने के लिए केंचुए का चयन:- भूमि में मुख्यत: तीन प्रकार के केंचुए पाएं जाते है। एपीजेइक (उपरी सतह पर) एनीसिक (उपरी सतह के नीचे) इन्डोजेइक (गहरी सतह पर) ऐसिनिया फीटिडा एवं एंसिनिया होरटन्सिस प्रजातियाँ मुख्य है। इनमें से ऐसिनिया फीटिडा को लाल केचुआ भी कहा जाता है का उपयोग अत्यधिक होता है। ये 0ºc से 35ºc तक तापमान को सहन कर सकते है। ये केचुंए कम समय से अधिक कम्पोस्ट बनाते है तथा इनकी प्रजनन क्षमता भी ज्यादा होती है। ऐसिनिया होरटन्सिस का आकार ऐसिनिया फीटिडा से बडा होता है, परन्तु इनकी प्रजनन क्षमता कम होती है तथा कम्पोस्ट बनाने की क्षमता कम होती है। केचुओ के मुख्य गुण केचुए सडने, गलने व तोडने की प्रक्रिया को बढ़ाने में सहायक होते है। मृदा में वायु संचार के प्रवाह को बढ़ाने में सहायक है। जैव क्षतिषील व्यर्थ कार्बनिक पदार्थों का विखंडन व विद्यटन कर उन्हें कम्पोस्ट में बदल देते है। वर्मीकम्पोस्ट बनाने की विधि वर्मीकम्पोस्ट बनाने के लिए छायाकार ऊँचे स्थान पर जमीन की सतह से ऊपर मिट्टी डालकर बैड बनाते है। जिससे सूर्य की किरणे, गर्मी व बरसात से बचा जा सके। बैड में सबसे नीचे एक-दो इंच बालू/रेतीली म्टिटी बिछाते है। इसके ऊपर 3-4 सरसो या गेहँ के भूसे की परत व पानी छिड़ककर नम कर देते है। इसके बाद 8-10 इंच कार्बनिक पदार्थ जैसे गोबर की परत, पत्तो, बची हुई साक सब्जिजयां आदि की परत लगाते है। इसके बाद एक हजार केंचुए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से छोड देते है। बैड के ऊपर ताजा गोबर का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि ताजा गोबर का तापमान अधिक होने के कारण केंचुए मर सकते है। बैड में नमी बानाने के लिए प्रतिदिन पानी का छिड़काव करना चाहिए। गर्मी में 2-3 दिन बाद एवं सर्दी में 1 बार करना चाह
िए। बैंड को बोरी/पत्ताो से ढ़ककर रखना चाहिए क्योंकि केंचुए अंधेरे में काम करते है। केंचुए ऊपर से खाते हुए नीचे की तरफ जाते है और खाद में परिवर्तित कर देते है। 2-3 महीने में वर्मी कम्पोस्ट बनकर तैयार हो जाती है। इससे एक हजार केंचुए प्रतिदिन एक कि.ग्रा. वर्मी कम्पोस्ट तैयार करते है। वर्मी कम्पोस्ट की खाद बनने के बाद इसमें पानी छिडकना बन्द कर देते है और कम्पोस्ट का एकत्रित कर लेते है। केंचुए नमी में रहना पसन्द करते है। इसलिए जब कम्पोस्ट सूखती है तो केंचुए नीचे की नम सतह पर चले जाते है और जब कम्पोस्टिग पदार्थ रखा जाता है तो केंचुए ऊपर आकर अपना काम प्रारम्भ कर देते है। वर्मीकम्पोस्ट की विषेषताएं पर्यावरण को सुरक्षित रखने में सहायक होते है। मृदा की उर्वरा शक्ति को बढ़ाते है। वर्मी कम्पोस्ट खाद प्राकृतिक और सस्ती होती है। भूमि में उपयोगी जीवाणुओं की संख्या में वृध्दि होती है। रासायनिक खाद का उपयोग कम होने से काष्त लागत कम होती है। भूमि में वाष्पीकरण कम होता है अत: सिंचाई जल की बचत होती है। लगातार वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग करने से ऊसर भूमि को सुधारा जा सकता है। फलो, सब्जियों एवं अनाजों की उत्पादन बढ़ जाता है और स्वाद, रंग व आकार अच्छा हो जाता है। पौधों में रोगरोधी क्षमता भी बढ़ जाती है। इसके प्रयोग से खेतों में खरपतवार भी कम होती है। बीज के जमाव प्रतिषत को बढ़ाता है। पौधों को पोषक तत्वों की उपयुक्त मात्रा उपलब्ध कराता है। पौधों की जडो का आकार व वृध्दि बढाने में सहायक होता है। ग्रीन हाउस गैस के उत्पादन को रोकता है। रोजगार के अवसर बढ़ाने में सहायक है। वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग खाद्यान्न फसलों में 5-6 टन प्रति हैक्टर की दर से डालना चाहिए। सब्जियों में 3-5 टन प्रति हैक्टर की दर से उपयोग करना चाहिए। बगीचों में 20 कि.ग्रा. प्रति पौधों के हिसाब से डालना चाहिए। गमलों में 500 ग्राम तक डालना चाहिए। वर्मीकम्पोस्ट का प्रयोग मल्च के रूप में भी किया जा सकता है। मृदा को सुधारने के लिए 1½-2 इंच मोटी परत फैलाकर एवं मिट्टी के मिलाने के बाद बागों में पौधों को लगाना चाहिए।

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बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय खिलौना ‘टेडी बीयर’ देखने में भले ही कितना भी मासूम लगे लेकिन उसे सही साज सम्भाल के बिना रखा जाए तो न केवल यह किटाणुओं का घर बन जाता है बल्कि बच्चों में अस्थमा जैसी बीमारी का कारण भी बन सकता है।..

पीएचडी कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए, एक उम्मीदवार ने मैकेनिकल, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक, जैव प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर विज्ञान आदि में एम.टेक या भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर विज्ञान आदि में एम.एस.सी उत्तीर्ण होना आवश्यक है।

गुड़गांव।। सिटी में विदेशी प्रजाति की सब्जियां और सलाद खाने के शौकीन लोगों के लिए खुशखबरी है। जिला बागवानी विभाग ने हाईटेक ग्रीन हाउस को प्रयोग के तौर पर खोल दिया है। इसमें विदेशी सब्जियों के बीज उगाने की टेस्टिंग शुरू कर दी गई है। इसके अंदर का तापमान जरूरत के अनुसार एडजस्ट किया जाएगा। इसमें पूरे साल सीजन के हिसाब से विदेशी सब्जियों के बीज तैयार किए जाएंगे। यहां समय – समय पर विदेशी वैज्ञानिक विजिट कर नए बीज उगाने की तरकीब बताएंगे। आम लोग विभाग के जारी नंबरों पर फोन कर बीज के बारे में जानकारी ले सकते हैं या खरीदने की बात कर सकते हैं। घीया , शिमला मिर्च , बैगन , टमाटर , हरी मिर्च , टिंडा , गोभी पेठा , भिंडी , गाजर , मूूली , सोयाबीन , धनिया , प्याज , खीरा , परमल आदि सब्जियों के बीज का रेट प्रति पौध 1 रुपये तय किया है। चेरी और टमाटर आदि कुछ पौधों की कीमत 5 रुपये होगी। ग्रीन हाउस में दर्जनों किस्म की विदेशी प्रजाति की सब्जियों की बीज उगाए जाएंगे। ग्रीन हाउस में तैयार होने वाले विदेशी सब्जियांे की बिजाई के लिए किसानों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इसमें बताया जाएगा कि इन्हें कितने पानी , कीटनाशक आदि की जरूरत है।

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कुछ उपभोक्ता “क्रेडिट” लेनदेन को पसंद करते हैं, क्योंकि इसमें उपभोक्ता/खरीददार से शुल्क नहीं लिया जाता है, इसके अलावा कुछ डेबिट कार्ड (उदाहरण के लिए वाशिंगटन मुचुअल का “वामूला” (WaMoola)[29] और S&T बैंक का “प्रैफर्ड डेबिट रिवार्ड कार्ड” (Preferred Debit Rewards Card)) “क्रेडिट” का उपयोग करने पर पुरस्कार देते हैं।[30] बहरहाल, चूंकि क्रेडिट का खर्च व्यापारियों के लिए ज्यादा है, इसीलिए बहुत सारे टर्मिनल ने पिन स्वीकार करनेवाले व्यापारिक स्थानों में क्रेडिट प्रकार्य प्राप्त करना कहीं अधिक कठिन कर दिया गया है। उदाहरण के लिए ऑनलाइन डेबिट के लिए अगर आप U.S. के वॉल-मार्ट (Wal-Mart) में डेबिट कार्ड स्वाइप करवाते हैं, पिन स्क्रीन पर आप तुरंत दिखाई देने लगते हैं, ऑफलाइन का उपयोग करने पर आपको पिन स्क्रीन से निकलने के लिए “कैंसिल” बटन दबाना जरूरी है, इसके बाद अगली स्क्रीन पर “क्रेडिट” बटन दबाना होता है।

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रायपुर.सरकारी अस्पतालों में स्मार्ट कार्ड से इलाज करवाने वाले मरीजों को दवा व जरूरी उपकरण बाजार से खरीदकर नहीं लाना पड़ेगा। अस्पताल में जो दवा या उपकरण नहीं होंगे, वह मरीजों अस्पताल प्रशासन खरीदकर उपलब्ध कराएगा। स्वास्थ्य सचिव विकासशील ने बुधवार को इस बारे निर्देश दे दिए हैं।

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कार्बामाज़ेपाइन ब्लॉकों बायोटिन के अवशोषण (विटामिन एच), जो वसा की वृद्धि और आत्मसात करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन. शरीर में इस विटामिन की कमी खतरनाक जटिलताओं की ओर जाता है, मस्तिष्क संबंधी बीमारियों सहित, और कभी-कभी मौत के लिए. हो सकता है शरीर में बायोटिन के स्तर को जोड़ें, खाने जिगर, उबले अंडे, साग.

न्यूजीलैंड के लिए यह कोई असमान्य बात नहीं है कि यहां एक से अधिक एफ्टपोस (EFTPOS) कार्ड हैं और बैंक पूरे महीने भर में असीमित (100 या उससे अधिक से अधिक) एफ्टपोस (EFTPOS) लेनदेन के लिए एक मासिक शुल्क तय कर देने की पेशकश करता है। एफ्टपोस (EFTPOS) पद्धति बहुत ही खास अवधि में मसलन; क्रिसमस के दौरान बहुत बड़ी मात्रा में होनेवाले लेनदेन को संभाल लेने में सक्षम है। नेटवर्क बहुत ही समृद्धि हैं और इसमें सुरक्षा सुनिश्चित करने और यहां तक कि लेनदेन की अधिकतम अवधि में विघटन के जोखिम को कम से कम करने के इसमें बहुत सारे सुरक्षा उपाय हैं।

70 फीसदी लोग हैं कृषि पर निर्भर – posted on : Apr, 23 2016 भारत कृषि प्रधान देश है। देश की लगभग 70 फीसदी आबादी कृषि पर निर्भर करती है। कृषि एवं इससे सम्बद्ध क्षेत्र भारत की अधिकांश जनसंख्या, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिये आजीविका का मुख्य साधन हैं। यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के निर्धारण में भी महत्त्वपूर्ण योगदान देता है, लेकिन लगातार दो वर्षों से मौसम की बेरुखी के चलते बारिश कम हुई, जिसकी वजह से देश के दस राज्य सूखे की चपेट में आ गए। इन राज्यों में फसलें लहलहाने के बजाय नष्ट हो गईं और हालात चिन्ताजनक हो गए। सूखे की वजह से कुपोषण, भुखमरी और महामारी के चलते मृत्यु दर में काफी वृद्धि हुई। सूखे का संकट झेल रहे इन राज्यों में जहाँ कृषि एवं पर्यावरण पर अत्यन्त प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, वहीं इन राज्यों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह डगमगा गई।

कृषि विभाग की वेबसाइट पर सोलर पंप के लिए अब तक 5000 रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। किसानों को अनुदान काटकर सोलर पंप 23050 रुपये में दिया जा रहा है। जबकि इसकी बाजार कीमत बहुत अधिक है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का काम फिलहाल साइबर कैफों पर शुरू किया गया है।

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भारतीय खेती – posted on : Aug, 02 2015 चीन में खेती की विकास की सालाना दर 7 से 9 प्रतिशत है, जबकि भारत में यह गत् 20 सालों से दो को पार नहीं कर पाई है। अब तो विकास के नाम पर खेत उजाड़ने के खिलाफ पूरे देश में हिंसक आन्दोलन भी हो रहे हैं। यह वक्त है कि हम खेती का रकबा बढ़ाने पर काम करें, इसे लिए जरूरी है कि उत्पादक जमीन पर हर तरह के निर्माण पर पाबन्दी हो। किसान को फसल के सुनिश्चित दाम, उसके परिवार के लिए शिक्षा व स्वास्थ्य की गारंटी हो और खेत व खेती को पावन कार्य घोषित किया जाए।

रियल हीरो अक्षय कुमार ने सूखा पीड़ितों के लिए 50 लाख रुपए दान दिए – posted on : Apr, 19 2016 महाराष्ट्र में ाआई आपद के लिए एक बार फिर अभिनेता अक्षय कुमार सामने आये हैं। महाराष्ट्र के सूखा पीड़ितों के लिए अक्षय कुमार ने 50 लाख रुपये दान में दिये हैं। महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भयानक सूखा पड़ा है। पानी की बहुत ज़्यादा किल्लत हो रही है। पीने और ज़रूरी कामों के लिए भी पानी मुहैय्या नहीं हो पा रहा है। लोग पानी के लिए मीलों पैदल चल रहे हैं और घंटों पानी के लिए लाइन लगा रहे हैं। पहले भी किसानों की मदद कर चुके हैं अक्षय… ऐसे में सहायता का हाथ एक बार फिर अक्षय कुमार की तरफ़ से बढ़ा है। उन्होंने 50 लाख रुपये दिए हैं ताकि उन लोगों तक पानी पहुंचाया जा सके। इससे पहले भी अक्षय कुमार ने महाराष्ट्र में क़र्ज तले दबकर आत्महत्या कर रहे किसानों को बचाने की कोशिश में 90 लाख रुपये दिए थे ताकि किसानों को कुछ रहत मिल सके।

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क्या यह भी ज्ञात है कि पूरक Hypocretin के स्तर को उठाती है, एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो जाग्रतावस्था के साथ मदद कर सकता है, भूख और कामोत्तेजना. यह सोचा है कि एक उच्च स्तर Hypocretin डोपामाइन में वृद्धि का कारण बन सकती, हिस्टामिन और norepinephrine.

एक nootropic अनुपूरक के रूप में Piracetam की समीक्षा Galantamine – याददाश्त में सुधार के लिए एक प्राकृतिक पूरक क्या मेमोरी और मूड के लिए Phenibut की nootropic इफेक्ट होते हैं? Noopept समीक्षा – इस nootropic अनुपूरक क्या है? Nootropic शुरुआती के लिए piracetam उपयोगकर्ता समीक्षा Piracetam citicoline (सीडीपी Choline) मेमोरी और फोकस के लिए समीक्षा और खुराकें ढेर एक Nootropic ढेर में Piracetam और Oxiracetam का मेल शुरुआती के लिए nootropic अनुपूरक गाइड – Oxiracetam क्या है

अगर तुम मासिक धर्म, खासकर यदि आपके अवधि लंबे समय तक या भारी रहे हैं, आप लोहे की कमी का खतरा हो सकता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य और चिकित्सा अनुसंधान परिषद (NHMRC) है, जो तय करता है ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के लिए अनुशंसित आहार अंतर्ग्रहण (RDIs) का मानना ​​है कि 19 से 50 आयु वर्ग की महिलाओं के लिए प्रति दिन लोहे के 18 मिलीग्राम हो रही किया जाना चाहिए।

भारतीय बागवानी की झलक – posted on : Apr, 30 2016 फलों और सब्जियों का विश्व में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश। आम, केला, नारियल, काजू, पपीता, अनार आदि का शीर्ष उत्पादक देश। मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश। अंगूर, केला, कसावा, मटर, पपीता आदि की उत्पादकता में प्रथम स्थान ताजा फलों और सब्जियों के निर्यात में मूल्य के आधार पर 14 प्रतिशत और प्रसंस्करित फलों और सब्जियों में 16.27 प्रतिशत वृद्धि दर।

इस तरह की सीमाओं, भाग में, कोलोरेक्टल कैंसर के रोगियों में सेटुक्सीमब पर दो बड़े चरण III नैदानिक ​​परीक्षणों की विफलता के लिए एक विवरण प्रदान कर सकता है, के बाद से कैंसर रोगियों में सीरम sEGFR सांद्रता अत्यधिक चर रहे हैं. इन अध्ययनों से संकेत मिलता है कि सीरम sEGFR और मापा जाना चाहिए सेटुक्सीमब साथ उपचार से पहले माना जाता है. अन्य अनुसंधान सेटुक्सीमब साथ उपचार के जवाब में कि सीरम sEGFR एकाग्रता परिवर्तन दिखा द्वारा इस अवधारणा का समर्थन किया है.

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने सोलर पावर के जरिए वर्ष 2022 तक 1 लाख मेगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्‍य रखा है। जिसमें से 40 हजार मेगावाट बिजली रुफटाप के जरिए पैदा करने का लक्ष्‍य तय किया गया है। एमएनआरई की योजना सोलर पावर के लक्ष्‍य को साल दर साल हासिल करना है। इसमें पहले साल 2015-16 में 200 मेगावाट सोलर पावर का लक्ष्‍य हासिल किया जाना है। इसके बाद लक्ष्‍य क्रमश: साल 2016-17 में 4800 मेगावाट, साल 2017-18 में 5000 मेगावाट, साल 2018-19 में 6000 मेगावाट, साल 2019-20 में 7000 मेगावाट और साल 2020-21 में 8000 मेगावाट तथा साल 2021-22 में 9000 मेगावाट बिजली रूफटाप सोलर प्‍लांट के जरिए हासिल की जाएगी।

एक अन्य आम पक्ष प्रभाव है कि सूचना दी थी वजन में वृद्धि हुई थी. तुम्हें पता है कि आप ताजा फल और सब्जियों का सेवन करें सुनिश्चित करने के द्वारा पूरी तरह से इसे रोकने के लिए और नए सिरे से साफ तरल पदार्थ पीने से हाइड्रेटेड रहने के लिए कर सकते हैं. यह भी कोशिश करते हैं और एक बहुत ही आसान व्यायाम की योजना का पालन करें.

गन्ना ( ईख ) परिवार एक प्रकार की अंतवर्धी घास की प्रकार है और व्यापक रूप से भारत में उगाई जाती है। यह राष्ट्रीय खजाने में महत्वपूर्ण योगदान के अलावा सीधे या परोक्ष रूप से एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है। दुनिया में गन्ना बढ़ रही अक्षांश 36.7 डिग्री उत्तर और 31.0 डिग्री दक्षिण उष्णकटिबंधीय से उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भूमध्य रेखा के बीच के देशों में उगाया जाता है। हजारों साल से यह माना जाता है कि गन्ना न्यू गिनी में शुरू हुआ। गन्ने का पोधा एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप के लिए मानव प्रवास मार्गों के साथ फैल गया। यहाँ हम आज जानते हैं कि वाणिज्यिक गन्ना उत्पादन कुछ जंगली गन्ना किस्मो के साथ मिल कर बना है। भारत में गन्ने की खेती का उल्लेख वैदिक काल से है। गन्ने की खेती का पहला उल्लेख भारतीय लेखन में 1000-1400 ई.पू. में पाया जाता है। अब यह व्यापक रूप से स्वीकार कर लिया है गया है कि भारत गन्ने कि saccharum प्रजातियों का मूल घर है। Saccharum barberi और न्यू गिनी के पॉलिनेशियन समूह विशेष रूप से एस officinarum किस्मों की उत्पत्ति का केंद्र है। यह परिवार एक प्रकार की अंतवर्धी घास की कोटि ( Poaceae ) , monocotyledons वर्ग और glumaceae उप परिवार panicoidae , Andripogoneae जनजाति और saccharininea उप जनजाति के अंतर्गत आता है। गन्ने की दो मुख्य किस्मों हैं (क) पतली, मजबूत उत्तर भारतीय प्रकार S.barberi और S.Sinense और (ख ) मोटी , रसदार। अत्यधिक बेशकीमती गन्ना एस officinarum है। भारत में गन्ने की खेती के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र मोटे तौर पर भारत में गन्ने की खेती के दो अलग कृषि जलवायु क्षेत्र, अर्थात्, उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय हैं। हालांकि, पांच कृषि जलवायु क्षेत्र मुख्य रूप से गन्ने की किस्मों के विकास के उद्देश्य के लिए जाने जाते है। वे हैं (i) उत्तर पश्चिमी क्षेत्र (ii) उत्तर मध्य क्षेत्र (iii) उत्तर पूर्वी क्षेत्र (iv ) प्रायद्वीपीय क्षेत्र (v) तटीय क्षेत्र वर्ष 2011-12 में उष्णकटिबंधीय क्षेत्र का 77 टन / हेक्टेयर की औसत उत्पादकता के साथ क्रमशः 45% देश के कुल गन्ना क्षेत्रफल और 55% उत्पादन का योगदान रहा। जबकी 2011-12 में ही उपउष्णकटिबंधीय क्षेत्र का 55% क्षेत्र और 63 टन / हेक्टेयर की औसत उत्पादकता के साथ 45% गन्ने के उत्पादन में हिस्सा रहा। उष्णकटिबंधीय गन्ना क्षेत्र उष्णकटिबंधीय गन्ना क्षेत्र 4 (प्रायद्वीपीय क्षेत्र) और 5 (तटीय क्षेत्र) कृषि जलवायु क्षेत्र को मिला कर बनता हैं और इसमें महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश, गोवा, पांडिचेरी और केरल राज्य शामिल हैं। उप उष्णकटिबंधीय गन्ना क्षेत्र: देश में कुल गन्ना क्षेत्र का 55 फीसदी के आसपास उप उष्णकटिबंधीय में है. उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और पंजाब इस क्षेत्र के तहत आते है। फसल वितरण: दुनिया के गन्ना पैदा करने वाले देश उष्णकटिबंधीय क्षेत्र अक्षांश 36.70 उत्तर और 31.00 दक्षिण के बीच भूमध्य रेखा के साथ हैं। भारत में गन्ने की खेती वाले क्षेत्र 80 एन से 330 एन अक्षांश तक हैं। यह कश्मीर घाटी, हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश जैसे ठंडे पहाड़ी क्षेत्रों को छोड़कर देश भर में उगाया जाता है। जलवायु आवश्यकता गन्ने के विभिन्न महत्वपूर्ण चरणों के लिए तापमान: विभिन्न महत्वपूर्ण चरणों, जल्दी विकास, सक्रिय विकास और बढ़ाव बुआई, अंकुरण हैं। कलमों के अंकुरण के लिए अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से 38 डिग्री है। यह 25 डिग्री से नीचे तापमान पर पर धीमा हो जाता है। 30 ° -34 ° के बीच पठार तक पहुँच जाता है। 38° से ऊपर तापमान प्रकाश संश्लेषण की दर को कम करने और पानी की आवश्यकता में वृद्धि करने वाला होता है। पकने के लिए तथापि 12 से 14 डिग्री की सीमा में अपेक्षाकृत कम तापमान वांछनीय हैं।

गुजरात ‘कृषि सौर नीति’ पेश करने वाला पहला राज्य होगा जिसके तहत किसानों को सौर ऊर्जा उत्पादन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा और इससे उन्हें बिजली उत्पादन कंपनियों से अतिरिक्त आय प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी। यह बात गुजरात ऊर्जा अनुसंधान एवं प्रबंधन संस्थान (जेर्मी) के अधिकारियों ने कही। अधिकारियों ने कहा कि खेतों में सौर बिजली उत्पादन, किसानों और बिजली उत्पादन कंपनियों, दोनों के लिए लाभकारी स्थिति होगी। जेर्मी के निदेशक प्रोफेसर टी हरिनारायण ने कहा कि सरकारी कंपनियां खेतों में सौर फोटो वोल्टेइक (एसपीवी) इकाइयां स्थापित करेंगी। हरिनारायण ने कहा ‘जीआईपीसीएल (गुजरात इंडस्ट्रीज पावर कंपनी लिमिटेड), जीएसईसीएल (गुजरात स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कॉर्पोरेशन लिमिटेड) और जीपीसीएल (गुजरात पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड) ने प्रायोगिक तौर पर खेतों में एसपीवी इकाइयां स्थापित की हैं।’ जेर्मी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि किसानों को बिजली उत्पादन कंपनियों के मुनाफे में से 30-40 फीसदी की हिस्सेदारी मिलेगी और सौर फोटो वोल्टेइक इकाइयां खंभों पर स्थापित की जाएंगी ताकि किसान खेती भी कर सकें। राज्य के ऊर्जा मंत्री और गुजरात सरकार के प्रवक्ता सौरभ पटेल ने कहा, ‘हम जल्दी ही नीति की घोषणा करेंगे।’

प्रक्रति की एक अमूल्य देंन है नीम नीम लोगों की दैनिक जिन्दगी में एक महत्वपूर्ण भूमिका रखता है नीम एक औषधि है और एक प्रभावशाली कीटनाशक भी आधुनिक जहरीले कीटनाशकों की तुलना में नीम एक सर्वोत्तम कीटनाशक है। अनाज के भंडारण, दीमकों से सुरक्षा से लेकर पेड़-पौधों की हर तरह की बीमारी में इसके विविध उपयोग आज भी लोग किया करते हैं। इस क्षेत्र में किसानों को यदि वैज्ञानिकों का सहयोग मिल जाए तो यह अकेला वृक्ष दुनिया भर के कीटनाशकों के कारखाने बंद करवा सकता है। नीम एक तेजी से बढ़ने वाला सदाबहार पेड़ है, जो 15-20 मी (लगभग 50-65 फुट) की ऊंचाई तक पहुंच सकता है और कभी-कभी 35-40 मी (115-131 फुट) तक भी ऊंचा हो सकता है। नीम एक सदाबहार पेड़ है लेकिन गंभीर सूखे में इसकी अधिकतर या लगभग सभी पत्तियां झड़ जाती हैं। इसकी शाखाओं का प्रसार व्यापक होता है| तना अपेक्षाकृत सीधा और छोटा होता है और व्यास मे 1.2 मीटर तक पहुँच सकता है। इसकी छाल कठोर, विदरित (दरारयुक्त) या शल्कीय होती है और इसका रंग सफेद-धूसर या लाल, भूरा भी हो सकता है। नीम के कीटनाशक गुणों का सबसे उज्जवल पहलू यह है कि यह सर्वथा हानिरहित है। आधुनिक कीटनाशक जब खेतों में डाले जाते हैं तो वे शत्रु कीटों के अलावा मित्र कीटों को भी मार डालते हैं जिससे प्राकृतिक असंतुलन पैदा होता है और कीटनाशकों की माँग लगातार बढ़ती जाती है। इसके अलावा आधुनिक कीटनाशकों के दीर्घजीवी होने के कारण आज सारी पृथ्वी और उसके जलस्रोत प्रदूषित हो चुके हैं। परंतु नीम ऐसा प्राकृतिक कीटनाशक है, जो अपना काम करने के बाद शीघ्र ही अपघटित हो जाता है तथा पृथ्वी की उर्वरता शक्ति बढ़ा देता है। आधुनिकतम जानकारियों के अनुसार नीम की पत्तियों से निकाले गए कीटनाशकों से 300 किस्मों की कीट प्रजातियों को नियंत्रित किया जा सकता है। यही नहीं नीम उत्पादों से करीब एक दर्जन किस्म के हानिकारक सूत्र कृमियों एवं कुछ फफूंदियों को भी नियंत्रित किया जा सकता है। केवल भारत में ही 110 से अधिक ऐसी कीट प्रजातियाँ हैं जिनका नियंत्रण नीम से किया जाता सकता है। यह नीम के कीटनाशी गुणों का ही कमाल है कि भारतीय जड़ी-बूटियों एवं औषधिय पौधों में नीम पर सर्वाधिक पेटेंट किए गए हैं। अब तक नीम पर अमेरिका 54, जापान 59, इंग्लैंड 6 तथा भारत 36 उत्पाद एवं प्रक्रिया पेटेंट ले चुका है। इसके बावजूद दुनिया के अनेक देशों में नीम पर अनुसंधान जारी हैं। इसके गुणों को देखते हुए ही ऑस्टेलिया, अफ्रीका, कैरिबियाई द्वीप समूह, प्योर्टोरिको, वर्जिन द्वीप समूह तथा हाइती आदि देशों में नीम के वृक्ष बहुतायत से लगाए जा रहे हैं। भारत से नीम के पदार्थों का निर्यात लगातार बढ़ रहा है। जैविक खेती में रासायनिक कीटनाशकों से तो परहेज किया जाता है। बदले में कंपोस्ट खाद, हरी खाद, नील हरित शैवाल एवं अन्य जैविक विधियों द्वारा जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाई जाती है। पश्चिम के देशों में जैविक खेती द्वारा तैयार अनाज, फल और सब्जियों की भारी माँग है। हमारे देश में भी इस क्षेत्र में जागरुकता बढ़ रही है। देश में तो जैविक खेती एक आंदोलन का रूप ले रहा है। सरकार का संरक्षण भी प्राप्त हो रहा है। सिक्किम देश का पहला जैविक राज्य बन चूका है मध्य प्रदेश में भी जैविक खेती के लिए 313 ब्लॉकों का चयन किया गया है जिनमें 239 गाँवों में जैविक खेती शुरू भी हो गई है। गुजरात बिहार राजस्थान भी इस समय जैविक खेती पर जोर दे रहे है । उत्तर प्रदेश में जैविक की एक सकारात्मक पहल हो चुकी है । देश में हमारी पुरातन प्रथा दुवारा आने लगी है

– हाथों की सफ़ाई के दौरान सबसे ़ज़्यादा ध्यान नेल हाइजीन पर दिया जाना चाहिए, क्योंकि नाख़ूनों में भी कई तरह के कीटाणु फंसे हो सकते हैं. इसलिए नाख़ूनों को समय-समय पर काट लेना चाहिए और हाथ धोते व़क़्त उनकी सफ़ाई पर ख़ासतौर से ध्यान देना चाहिए.

A typical daily dose of American ginseng is 100 सेवा मेरे 200 mg although no standards have been set for it. Brain supplements that contain Cereboost usually contain 200 mg. American ginseng supplements are available in different forms; capsules, tablets, powders, and liquid extracts.

जैविक पोषक तत्वों में कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन (अमिनो अम्ल) और विटामिन शामिल हैं। अकार्बनिक रासायनिक यौगिकों, जैसे खनिज लवण, पानी और ऑक्सीजन को भी पोषक तत्व माना जा सकता हैं।[तथ्य वांछित] किसी जीव को एक पोषक तत्व किसी बाहरी स्रोत से लेने की आवश्यकता तब पड़ती है जब उसका शरीर इनकी पर्याप्त मात्रा का संश्लेषण स्वयं उसके शरीर में नहीं कर पाता। जिन पोषक तत्वों की आवश्यकता अधिक मात्रा में पड़ती है उन्हें स्थूल पोषक तत्व कहते हैं; इसी तरह सूक्ष्म पोषक तत्व कम मात्रा में जरूरी होते हैं।

जुलाब सभी पोषक तत्वों की मात्रा को कम करना, मध्यम steatorrhea (चर्बी घटाना 9-15 ग्राम / दिन।), कैल्शियम आयनों की हानि, पोटैशियम, ग्लूकोज तेज का निषेध वृद्धि हुई मोटर और आंतों के स्रावी समारोह, अधूरा पाचन,मल त्याग की शुरुआत में तेजी

जीपीएस स्मार्ट वॉच- लॉन्ग बैटरी लाइफ, फोन के स्मार्ट नोटिफिकेशन, ट्रेनिंग प्लांस इन सबसे लेस स्मार्ट जीपीएस वॉच आपके रनिंग टाइम के लिए बेहतर है. ये आपको बताएगी कि आप कब टायर्ड हैं. ये आपकी स्पीड और हार्ट रेट जैसे फीचर्स के बारे में भी आपको बताएगी.

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मौजूदा समय में डेबिट कार्ड की लेनदेन प्रक्रिया तीन तरह से होती है: ऑनलाइन डेबिट (पिन डेबिट के रूप में भी जाना जाता है), ऑफलाइन डेबिट (हस्ताक्षर डेबिट के रूप में भी जाना जाता है) और इलेक्ट्रॉनिक पर्स कार्ड सिस्टम .[3] ध्यान देने की बात यह है कि एक भौतिक कार्ड में ऑनलाइन डेबिट कार्ड, ऑफलाइन डेबिट कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक पर्स कार्ड के कार्य शामिल हैं।

बड़े संकट की ओर भारतीय कृषि – posted on : Aug, 06 2015 भारत सहित पूरी दुनिया में पूँजीवाद का प्रभाव बढ़ रहा है। अपने देश में अरबपतियों की संख्या बढ़ रही है लेकिन किसान और किसानी बेहद खस्ता हालत में है। किसान या तो कर्ज और तंगहाली में जी रहा है या फिर आत्महत्या कर रहा है। आज कोई भी किसानी नहीं करना चाहता, आप अपने आसपास एक सर्वे करके देख लीजिए आपको खुद पता चल जाएगा कि कितने लोग किसानी कर रहे हैं या करना चाहते हैं

उत्तर प्रदेश सरकार का कृषि विभाग, कृषि योजनाओं को लागू करने में रफ्तार और पारदर्शिता लाने के लिए सब्सिडी का पैसा किसानों के खातों में सीधे भेज रहा है। किसानों को इसका लाभ भी मिल रहा है। कृषि विभाग की वेबसाइट पर सोलर पंप के लिए 5000 रजिस्ट्रेशन कराए जा चुके हैं। दिनोंदिन रजिस्ट्रेशन कराने वालों की बढ़ रही है।

जैसे ही आप पेपर टैबलेट पर स्मार्ट पेन से लिखना शुरू करेंगे, पेन में लगा डिजिटल कैमरा शब्दों आदि का आकलन कर डिजिटल रूप दे देगा। इसे आप पेपर टैबलेट पर बने एक बटन के जरिए तुरंत एंड्रॉइड के लिए नियो नोट्स एप और आईफोन के लिए मोलेस्किन नोट्स एप पर भेज सकते हैं। इसके बाद स्मार्ट डिवाइस पर आसानी से इसे आप स्टोर, एडिट और ईमेल के जरिए अन्य यूजर्स से साझा भी कर सकते हैं।

यह भी अल्जाइमर और उम्र से संबंधित संज्ञानात्मक गिरावट के अन्य कारणों के लिए एक संभावित उपचार के रूप में अध्ययन किया गया है और जानवरों के अध्ययन में सुरक्षित करने के लिए पाया गया है. संभव दुष्प्रभाव आम तौर पर हल्के होते हैं, सिर दर्द के साथ सबसे आम किया जा रहा है. Nootropic नियमित करने के लिए एक अच्छा कोलीन पूरक जोड़ने के लिए कम या सिर दर्द नहीं रोक सकता, जो racetam परिवार के किसी भी सदस्य के साथ हो सकता है, वे neurotransmitter acetylcholine के लिए मस्तिष्क की मांग में वृद्धि के रूप में.

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अगर कृषक खेती के पारंपरिक तरीकों की अपेक्षा आधुनिक खेती की ओर चलेंगे तो कम लागत में अपनी उपज को बढ़ा सकते हैं। इसके लिए बहुत ज्यादा खाद और पेस्टीसाइड का उपयोग न करें। यह बात नर्मदा घाटी विकास विभाग के प्रमुख सचिव रजनीश वैश्य ने बुधवार को महेतवाड़ा रोड स्थित पाटीदार धर्मशाला में आयोजित कृषि संगोष्ठी कार्यक्रम में कृषकों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि हमारा देश कृषिप्रधान देश है। कृषि के क्षेत्र में वह दिनोंदिन प्रगति कर रहा है। जैसा हम खाने में नमक का उपयोग स्वाद अनुसार करते हैं, वैसे ही खेती में पानी का उपयोग करें।

अंडे में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है जो गर्भावस्था के दौरान लिया जाना बहुत आवश्यक है. गर्भ में पल रहे बच्चे की हर कोशिका प्रोटीन से बनती है. ऐसे में गर्भवती महिला अगर अंडे खाती है तो भ्रूण का विकास बेहतर तरीके से होता है.

प्रोटीन शुद्ध करने में शामिल समय और लागत स्मार्ट पॉलीमर का उपयोग करके काफी कम हो सकता है जो मध्यम गुणों में परिवर्तन के जवाब में तेजी से प्रतिवर्ती परिवर्तन से गुजरती हैं। कई वर्षों से शारीरिक और आत्मीयता अलग-अलग और प्रतिरक्षकों में संयुग्मित प्रणाली का उपयोग किया गया है। बहुलक ढांचे में सूक्ष्म परिवर्तन द्रव की संरचना के रूप में प्रकट होते हैं, जिसका उपयोग हल से फँसा हुआ प्रोटीन को अलग करने में सहायता के लिए किया जा सकता है। ये प्रथाएं काम करती हैं जब एक प्रोटीन या अन्य अणु जो मिश्रण से अलग किया जाता है, बहुलक के साथ एक बायोकेनजुएट बनाती है और बहुलक के साथ उपजी हो जाती है जब इसके पर्यावरण में परिवर्तन पड़ता है। इस द्रव्य को मीडिया से हटा दिया जाता है, इस प्रकार संयुग्म के इच्छित घटक को शेष मिश्रण से अलग कर दिया जाता है। संयुग्म से इस घटक को निकालने पर बहुलक की वसूली और उसके मूल राज्य में वापसी पर निर्भर करता है, इस प्रकार इस तरह की प्रक्रियाओं के लिए हाइड्रोगल्स बहुत उपयोगी होते हैं। स्मार्ट पॉलिमर का उपयोग करने वाली जैविक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने के लिए एक और तरीका है कि लैगेंड या सेल बाइंडिंग साइट्स के करीब निर्मित बहुलक बाध्यकारी साइटों के साथ पुनः संयोजक प्रोटीन तैयार करना। तापमान और प्रकाश सहित विभिन्न प्रकार के ट्रिगर्स के आधार पर लिगैंड और सेल बाइंडिंग गतिविधि को नियंत्रित करने के लिए इस तकनीक का उपयोग किया गया है।

“मैं सबसे अच्छे मूल्य के लिए सस्ती स्मार्ट दवाओं को स्मार्ट कैसे खरीद सकता हूं -मैं सबसे अच्छा मूल्य के लिए किफायती स्मार्ट दवाओं के नोट्रोपिक्स एकाग्रता बढ़ाने को कहां प्राप्त कर सकता हूं”

उपायुक्त डॉ. यश गर्ग ने कहा है कि प्राकृतिक और जैविक खेती हमारी भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। हमारे पूर्वज प्रारंभ से ही जैविक खेती करते आए हैं। जैविक खेती से उत्पन्न अनाज और सब्जी के सेवन से हम आजीवन स्वस्थ रह सकते हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार स्वयं अपनी विभिन्न योजनाओं के जरिए जैविक खेती को बढ़ावा देने का हर संभव प्रयास कर रही है। डॉ. गर्ग ने बताया कि हमारे राज्य में शुरू से ही जैविक खेती प्रचलित रही है। राज्य सरकार अपनी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से इसे और बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक और असंतुलित उपयोग से अनाज और सब्जियों के विषैले होने की आशंका होती है। इसका प्रतिकूल असर मानव स्वास्थ्य पर भी देखा जा रहा है। जैव विविधता पर भी इसका विपरीत असर हो रहा है। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन को घटाए बिना रासायनिक खाद के अत्यधिक उपयोग को रोकना और संतुलन बनाना हम सबके लिए बड़ी चुनौती है। किसानों में इस विषय में जागरूकता लाकर इसमें कामयाबी लाई जा सकती है। जैविक खेती से जहां धरती की उर्वरता में साल दर साल वृद्धि होती जाती है, वहीं मिट्टी के भुरभुरी होने से फसलों में भीच्अच्छी वृद्धि होती है।

Piracetam एक मस्तिष्क रक्षक के रूप में काम करने के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन इस piracetam के लिए मुख्य उपचार के रूप में भी अपने दिमाग में कट्टरपंथियों के जोखिम को मुख्य रूप से है कि कम कर सकते हैं नहीं किया जाना चाहिए तनाव और चिंता की वजह से. तनाव कोलीनर्जिक नुकसान का प्राथमिक कारण है कि पागलपन और अल्जाइमर या अन्य मस्तिष्क संबंधी बीमारियों को जन्म दे सकता करने के लिए नेतृत्व कर सकते हैं.

रायपुर.सरकारी अस्पतालों में स्मार्ट कार्ड से इलाज करवाने वाले मरीजों को दवा व जरूरी उपकरण बाजार से खरीदकर नहीं लाना पड़ेगा। अस्पताल में जो दवा या उपकरण नहीं होंगे, वह मरीजों अस्पताल प्रशासन खरीदकर उपलब्ध कराएगा। स्वास्थ्य सचिव विकासशील ने बुधवार को इस बारे निर्देश दे दिए हैं।

यदि Grd Smart Powder (जीआरडी स्मार्ट पाउडर) दवा का सेवन करने के बाद दुष्प्रभावों के रूप में आपको निद्रा, चक्कर आना, निम्न रक्तचाप या सिरदर्द का अनुभव होता है तो गाड़ी या भारी मशीन चलाना सुरक्षित नहीं होता है। यदि दवा खाने पर आपको नींद आती है, चक्कर आता है या आपका रक्तचाप बेहद कम हो जाता है तो आपको गाड़ी नहीं चलानी चाहिए। दवा विक्रेता दवाओं के साथ शराब ना पीने की सलाह देते हैं क्योंकि शराब नींद के दुष्प्रभाव को तेज कर देता है। Grd Smart Powder (जीआरडी स्मार्ट पाउडर) का प्रयोग करते समय कृपया इन प्रभावों का ध्यान रखें। अपने शरीर और स्वास्थ्य स्थितियों के अनुसार सुझाव पाने के लिए हमेशा अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

आईआईवीआर में 42 वैज्ञानिक अन्य सब्जियों पर रिसर्च में दिन-रात जुटे हैं – posted on : Aug, 23 2015 वाराणसी: बनारस स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) के वैज्ञानिकों की रिसर्च के मुताबिक तीखी मिर्च के रंग से अब लिपस्टिक तैयार हो सकेगी। जी हां, तीखी हरी मिर्च से लाल और कद्दू से नैचरल पीले (वसंती) कलर का एक्सट्रैक्ट निकालने के लिए संस्थान में चल रहे रिसर्च के परिणाम सामने आए हैं। इंस्टिट्यूट के हेड और साइंटिस्ट डॉ़ ए.बी. राय का कहना है कि मिर्च और कद्दू की पैदावार ज्यादा होने के कारण कम खर्च में नैचरल कलर एक्सट्रैक्ट तैयार करके लिपस्टिक और अन्य सौंदर्य प्रसाधन में इसका प्रयोग किया जा सकेगा। खाने पर हिलाकर रख देने वाली तीखी हरी मिर्च अब जहां होंठों पर लाली बिखेरेगी, वहीं कद्दू, सफेद कद्दू (पेठे वाला) और बैंगन खाने पर कैंसर-हाई ब्लड प्रेशर पर विजय हासिल होगी। यह कोई गप नहीं, बल्कि कृषि वैज्ञानिकों के रिसर्च के नतीजे हैं। आईआईवीआर में 42 वैज्ञानिक अन्य सब्जियों पर रिसर्च में दिन-रात जुटे हैं।

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आंखों पर लगा चश्मा हटा देता है गिलोय, जानिए और फायदे – posted on : Oct, 11 2015 गिलोय एक तरह बेल होती है, जिसे आयुर्वेदिक उपचार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेद में इसे अमृतदायनी भी कहते हैं। यह पत्तियां नीम और आम के पेड़ के आस-पास पाई जाती है। नीम के पेड़ पर चढ़ी गिलोय को ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। – डायबिटीज: अगर आप डायबिटीज से पीडित तो गिलोय आपके लिए बहुत फायदेमंद है। ये हाईपोग्लिकैमिक एजेंट के रूप में काम करता है। गिलोय ब्लड प्रेशर लेवल को कम कर सकता है। जिससे टाइप 2 डायबिटीज में राहत मिलती है। डायबिटीज के मरीज बढ़े हुए शुगर लेवल को कम करने के लिए इसका ज्यूस भी पी सकते हैं। – अस्थमा: अस्थमा बहुत ही खतरनाक बीमारी होती है। इससे आपको कफ और सांस में दिक्कत जैसी परेशानियां होने लगती है। अस्थमा के इलाज के लिए गिलोय को बहुत फायदेमंद माना जाता है। इससे अस्थमा से राहत मिलती है। – आंखों की रोशनी: आई डिसऑर्डर का इलाज करने के लिए भी गिलोय का इस्तेमाल किया जाता है। गिलोय आपकी दृष्टि बढ़ाता है, जिससे आप बिना चश्मे के भी साफ देख पाते हैं। देश के कुछ हिस्सों में तो गिलोय को आंखों पर भी लगाया जाता है। इसकी कुछ मात्रा को पानी में उबाले, फिर उसे ठंडा होने दें। इसके बाद उसे अपनी पलकों पर लगाएं। इससे आपकी नजर में काफी फर्क दिखेगा। – पेट की समस्याएं: गिलोय पेट की समस्याओं को दूर करता है। इससे आपका पाचन तंत्र दुरूस्त बना रहता है। गैस होने पर गिलोय का चूर्ण बनाकर उसे घी के साथ लें। इससे कब्ज भी दूर होती है। अगर आपके पेट में दर्द है तो गिलोय के रस को शहद में मिलाकर सुबह और शाम पीएं – पिंपल्स: फेस पर होने वाले पिंपल्स से गिलोय राहत दिलाता है। इसके लिए गिलोय के फल को पीसकर उन्हें पिंपल्स पर लगाएं। जल्द ही आपको इसका असर दिखने लगेगा। ये फेस के दाग-धब्बों को भी दूर करता है –

TabletWise.com वेबसाइट के प्रयोगकर्ताओं ने सबसे सामान्य तौर पर खाने के बाद Grd Smart Powder (जीआरडी स्मार्ट पाउडर) का सेवन करने के बारे में बताया है। हालाँकि, यह इस बात को नहीं दर्शाता है कि आपको यह दवा कैसे लेनी चाहिए। आपको यह दवा कैसे खानी चाहिए इस पर अपने चिकित्सक के सुझाव का पालन करें। Grd Smart Powder (जीआरडी स्मार्ट पाउडर) प्रयोग करने के समय के रूप में अन्य मरीज क्या बताते हैं यह पता लगाने के लिए यहां क्लिक करें और सर्वेक्षण परिणामों को देखें।

Onnit अल्फा मस्तिष्क काम करता है या यह एक घोटाला है? पहले आप खरीद पढ़ें अल्फा मस्तिष्क कैप्सूल की नकारात्मक दुष्प्रभाव होते हैं? बिक्री के लिए ऑनलाइन अल्फा मस्तिष्क – कूपन कोड और छूट अल्फा मस्तिष्क Nootropic प्रभाव, लाभ और अनुभवों मेमोरी और फोकस के लिए अल्फा मस्तिष्क गोलियों के उपयोगकर्ता समीक्षा अपने मानसिक प्रदर्शन को अधिकतम करने के लिए Onnit लैब्स अल्फा मस्तिष्क खरीदें अल्फा मस्तिष्क कैप्सूल में तत्व क्या हैं? खुराक जानकारी अल्फा मस्तिष्क की समीक्षा: अच्छा है और इस nootropic पूरक का उपयोग का बुरा

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इस साल 10,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की योजना – posted on : Aug, 23 2015 सार्वजनिक क्षेत्र के राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने अगले 3 साल में किसानों को सिंचाई सुविधाओं में सुधार के लिए 30,000 करोड़ रुपये का कर्ज उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। नाबार्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा कि कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्र पर ध्यान देने वाला संस्थान इस वर्ष अब तक 1000 करोड़ रुपये की पहले ही मंजूरी दे चुका है। यह वित्त पोषण सरकार द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के तहत अगले 5 साल में किसानों को दिए जाने वाले 50,000 करोड़ रुपये के कर्ज की हाल में की गई घोषणा के अतिरिक्त होगा। नाबार्ड के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक हर्ष कुमार भानवाला ने कहा, ‘हमने अगले 3 साल में किसानों को सिंचाई सुविधाओं के लिए 30,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का निर्णय किया है। इस साल हमारी 10,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की योजना है और मुझे आपको सूचित करते हुए खुशी है कि हम अब तक 1000 करोड़ रुपये आवंटित कर चुके हैं।’ उन्होंने कहा कि केवल क्षमता निर्माण के बजाए हम सिंचाई कुशलता सुधारने में मदद पर ध्यान दे रहे हैं। भानवाला ने कहा, ‘बैंक को ग्रामीण स्तर पर जलवायु परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में ग्रीन क्लाइमेट फंड (जीसीएफ) से मान्यता मिली है।’

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दूरस्थ देसी समुदायों सहित वैश्विक कृषि को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक अधिकतर जानकारी मौजूद होने के बावजूद, यह अक्सर उन किसानों तक नही पहुँचती जिनको इनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है. – किसानों के लिए फसलों पर शिक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन का स्तर बढ़ाना – ग्राम आधारित जानकारी केंद्रों के विकास को बढ़ावा देना – किसानों के लिए मौसम, फसल और मार्केट की चेतावनियों के साथ साथ जल्दी चेतावनी देने वाली प्रणालियों के लिए पाने योग्य जानकारी की तकनीकों तक पहुँच प्रदान करना ताकि टिकऊपन और उत्पादकता के लिए उन्हे सही फ़ैसला लेने में मदद मिल सके. – खुला और दो- तरफ़ा आदान प्रदान स्थापित करना जो नीति निर्धारण और क्रियान्वन की प्रक्रिया में ‘किसान की आवाज़’ शामिल कर सके.

विभागों के बजट से खरीदा जाएगा : स्मार्ट कार्ड के मरीजों के लिए दवा व उपकरण खरीदी के लिए विभागों को आवंटित बजट से किया जाएगा। सभी विभागों को पर्याप्त बजट दिया गया है। स्मार्ट कार्ड की क्लेम की राशि से कुछ भी खरीदा नहीं जाएगा। इस राशि का उपयोग अस्पताल के विकास में होगा। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज संबद्ध अस्पतालों को नए सिरे से आदेश जारी किया जाएगा।

उर्वरक सब्सिडी में घपले को लेकर उठते सवालों के बीच सरकार ने फर्टिलाइजर कंपनियों को सब्सिडी जारी करने के बजाय अब किसानों को सीधे खाद सब्सिडी देने की तैयारी शुरू कर दी है। सब्सिडी की यह धनराशि किसानों के बैंक खाते में जमा कराई जाएगी। इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए किसानों के बैंक खातों को उनके आधार नंबर से जोड़ा जाएगा। उर्वरक, कृषि और सहकारिता मंत्रालय के साथ राज्यों के सहयोग से प्रायोगिक परियोजना की शुरुआत की जाएगी। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सीधी सब्सिडी योजना में सबसे बड़ी बाधा वास्तविक किसानों की पहचान को लेकर पैदा हुई है। खेतों का रकबा जांचकर खाद की सब्सिडी देने का प्रावधान वास्तविक किसानों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है। इतना ही नहीं ज्यादातर राज्यों में भूमि संबंधी दस्तावेज न तो अप-टू-डेट हैं और न ही ऑनलाइन। इससे पैदा होने वाली मुश्किलों को लेकर सरकार चाक-चौबंद और पुख्ता इंतजाम करने में जुट गई है। आधार नंबर वाले किसानों के साथ उनके फर्टिलाइजर उपयोग का पिछला रिकॉर्ड भी जांचा जाएगा। यह आंकड़ा निचले स्तर पर खाद की खुदरा आपूर्ति करने वाली दुकानों से लिया जाएगा। इससे खेत के असल मालिक और वास्तविक खेती करने वालों के बीच तनाव पैदा हो सकता है। बटाई पर होने वाली खेती के प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है। इन सारी चुनौतियों का मुकाबला करने की तैयारियां भी की जा रही हैं। फिलहाल खाद सब्सिडी सीधे किसानों को देने के बजाय उर्वरक उत्पादक कंपनियों को दी जाती है। कंपनियों को सब्सिडी का भुगतान करने की पेचीदगी को लेकर खाद कंपनियां आजिज आ गई हैं। खाद कंपनियों का सरकार पर 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बकाया हो गया है। उनका आरोप है कि सरकार अपने बजट में इतनी कम धनराशि का आवंटन करती है कि कंपनियों का बकाया मिलना मुश्किल हो गया है। सीधे तौर पर किसानों को सब्सिडी देने की योजना उर्वरक मंत्रालय के साथ कृषि व सहकारिता मंत्रालय संयुक्त रूप से तैयार कर रहे हैं। इस योजना में राज्य सरकारों की भूमिका सबसे अहम होगी। योजना के पहले चरण में प्रायोगिक परियोजना शुरू की जाएगी। इसमें उन्हीं राज्यों के कुछ जिलों को शामिल किया जाएगा, जहां भूमि दस्तावेजों का डिजिटलीकरण हो चुका है।

शहरी विकास मंत्रालय अब दक्षिण दिल्ली के घिटोरनी इलाके में सरकारी कर्मचारियों के लिए स्मार्ट सिटी की तर्ज पर एक बड़ी कॉलोनी बनाने की तैयारी में है। हालांकि इस कॉलोनी में इस तरह का प्रावधान किया जा रहा है कि बनाए जा रहे मकानों में साढ़े छह हजार मकान सरकारी कर्मचारियों के लिए होंगे, जबकि 500 मकानों का निर्माण करके उन्हें अन्य लोगों को बेचा जा सकेगा। उन मकानों के बेचने से आने वाली रकम से ही निर्माण का खर्च निकल सकेगा। इस तरह से सरकार को बिना पैसा खर्च किए ही साढ़े छह हजार फ्लैट तैयार मिलेंगे।

“पासवर्ड लीक करने की क्षमता के साथ, हम चिंतित हैं कि फोन संवेदक जानकारी तक पहुंच उपयोगकर्ता के व्यवहार के बारे में बहुत ज्यादा बता सकती है। इसमें प्राइवेट प्राइसेज के महत्वपूर्ण प्रावधान हैं, जिन पर दोनों व्यक्तियों और उद्यमों को तत्काल ध्यान देना चाहिए।” डॉ भसीन ने कहा कि भविष्य में इन छह सेंसर तक पहुंच को प्रतिबंधित करने के लिए मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए यह सलाह दी जाएगी, ताकि उपयोगकर्ता सक्रिय रूप से उन भरोसेमंद ऐप को अनुमति दे सकें जो उन्हें ज़रूरत हैं।

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– लगभग 80% महिलाएं पीएमएस यानी मासिक से पहले होनेवाले तकलीफ़ों से जूझती हैं. इसकी मुख्य वजह होती है, हर महीने एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरॉन हार्मोंस के स्तरों में बदलाव. रोज़ाना 2 कप दही के सेवन से यह समस्या 40% तक कम हो जाती है.

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जैविक खेती के लिए सब्सिडी/आर्थिक सहायता – posted on : Aug, 22 2015 सरकार ने केन्‍द्रीय क्षेत्र की विभिन्‍न योजनाओं जैसे राष्‍ट्रीय सतत कृषि मिशन (एनएमएसए) के तहत देश में जैविक खेती को अपनाने के लिए राज्‍य सरकारों के जरिए किसानों को वित्‍तीय सहायता देने का प्रावधान बनाया है। बागवानी के एकीकृत विकास का मिशन (एमआईडीएच), राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) और राष्‍ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) भी इन योजनाओं में शामिल हैं। एनएमएसए के तहत जैविक कच्‍चे माल के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए लागत के 50 फीसदी तक वित्‍तीय सहायता दी जाती है। इसके तहत प्रति हेक्‍टेयर अधिकतम 5000 रुपये और प्रति लाभार्थी अधिकतम 10000 रुपये की वित्‍तीय सहायता दी जाती है। इसी तरह एनएफएसएम के तहत प्रति हेक्‍टेयर 300 रुपये की दर से जैव उर्वरकों के लिए किसानों को सहायता दी जाती है।

CSK Team 2018 Players List: इस सीजन चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलते दिखेंगे ये खिलाड़ी, यहां देखें India vs South Africa 3rd Test: भारत ने बचाया सम्मान, तीसरे टेस्ट में साउथ अफ्रीका को दी 63 रन से मात

अल्फा GPC (अल्फा glycerophosphocholine) अनिवार्य रूप से सिंथेटिक Choline जो मस्तिष्क के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है है, स्वस्थ मस्तिष्क की कोशिकाओं, और न्यूरोट्रांसमीटर गठन. Choline की अल्फा GPC रूप कुशलता से मस्तिष्क में Choline ले जाता है जहां यह मस्तिष्क कोशिका झिल्ली के गठन में मदद करता है और मस्तिष्क की कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा.

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Curcumin डोपामाइन और सेरोटोनिन के स्तर को जो खुशी मस्तिष्क रसायन है बढ़ जाती है. यह मस्तिष्क को झटका प्रवाह के साथ-साथ शारीरिक व्यायाम को बढ़ा देता है और एक खुराक लेने के बाद एक घंटे के भीतर दोनों स्मृति और स्वस्थ वरिष्ठ नागरिकों में ध्यान में सुधार पाया गया था.

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अंडा प्रोटीन का भुत अच्छा स्त्रोत है और इसी के साथ इसमें पर्याप्त मात्र में पोषक तत्व भी पाए जाते है जिसकी वजह से अंडे को सुपेर फ़ूड कहा जाता है अगर आप प्रेगनेंट हाई और अपने और अपने बच्चे के स्वस्थ्य को लेकर चिंचित रहती है तो अब आप को ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है क्युकी हाल में हुए एक शोध के मुताबिक अगर प्रेगनेंट महिला इसको अपनी डाइट में शामिल कर लेती है तो बच्चा सुन्दर और स्मार्ट होता है

Phenylpiracetam के रूप में जाना जाता एक और पूरक बहुत ही प्रभाव है कहा जाता है, लेकिन यह भी एक पर्चे की आवश्यकता नहीं है ऑनलाइन खरीद. आप इस तरह से स्मार्ट ड्रग्स खरीद सकते हैं nootropic दुकानों से आसानी से.

Bacopa मस्तिष्क रक्त प्रवाह बढ़ता है, और इतने अधिक ऑक्सीजन उद्धार, पोषक तत्वों, और मस्तिष्क को ग्लूकोज. इस प्राचीन हर्बल उपचार भी लोकप्रिय स्मार्ट दवा modafinil के खिलाफ परीक्षण किया गया था और Bacopa एक दूर बेहतर समग्र घोषित था.

1 लीटर में 100 Km चलेगी टाटा की ये कार, लॉन्चिंग की तैयारी में जुटी कंपनी – posted on : Aug, 26 2015 नई दिल्ली. टाटा मोटर्स भारत में जल्द ही 1 लीटर पेट्रोल में 100 किमी का माइलेज देने वाली कार लॉन्‍च करने जा रही है। ‘टाटा मेगापिक्सल’ के रूप में सामने आने वाली यह कार देखने में आकर्षक होगी और इसमें बेहद एडवांस फीचर होंगे। कंपनी फ्यूल की कम खपत करने वाली कार लाने के प्रोजेक्‍ट पर कई साल से काम कर रही थी। मनीभास्कर आपको बता रहा है ‘टाटा मेगापिक्सल’ के फीचर्स और खासियतें…, जो मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है। चार सीटों वाली इस कार को पर्यावरण के अनुकूल बनाया गया है। इस कार में प्रति किलोमीटर महज 22 ग्राम कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन होगा।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा मेगापिक्सल जनवरी, 2016 में लॉन्च हो सकती है। कंपनी इसकी लॉन्चिंग को लेकर तैयारियों में जुटी है। इस कार की कीमत 5 से 6 लाख रुपए के बीच होने की संभावना है।टाटा मेगा पिक्सल में 325 सीसी सिंगल सिलेंडर का इस्तेमाल किया गया है। इस कार में एक लिथियम आयन फास्फेट बैटरी और चलती कार में रीचार्ज के लिए पेट्रोल इंजन जेनरेटर लगा है। टंकी फुल कराने पर यह कार एक बार में 900 किलोमीटर तक चलाई जा सकेगी। कार 100 किमी/लीटर का माइलेज देगी।

2007 के वाशिंगटन पोस्ट में – बैंकों के लाभकारी डेबिट कार्ट ओवरड्राफ्ट शुल्क पर – एक लेख में बताया गया कि डेबिट कार्ड जारी करनेवाले ग्राहकों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ओवरड्राफ्ट शुल्क से उन्हें बचने की अनुमति देने की सूचना दे सकते हैं। बैंकिंग उद्योग के प्रवक्ता और प्रचारक नेसा फेडीज (Nessa Feddis) दावे के साथ कहते हैं कि मौजूदा तकनीक ओवरड्राफ्टों के निषेधात्मक-लागत की चेतावनी वास्तविक समय में देता है।[10] लेख दावा करता है कि “वित्तीय संस्थान यथापूर्व स्थिति में बदलाव नहीं चाहते हैं, क्योंकि ग्राहकों की गलतियों और उनकी गैर-जिम्मेदारी से वे अच्छा और आसानी से रुपए कमाते हैं।”[10]

जिस देश में 1.25 अरब के लगभग आबादी निवास करती है और देश की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर आधारित है, उस देश में कृषि शिक्षा के विश्वविद्यालय और कॉलेज नाम-मात्र के हैं, उनमें भी गुणवत्तापरक शिक्षा का अभाव है। भूमंडलीकरण के दौर में कृषि पर आधुनिक तकनीकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के माध्यम से जो इस देश में आती हैं उसे कृषि का प्रचार-प्रसार तंत्र उन किसानों तक पहुंचाने में लाचार नजर आता है, यह गंभीर और विचारणीय विषय है। शिक्षा का ही दूसरा पहलू जिसे प्रबंधन शिक्षा की श्रेणी में रखा जा सकता है, नाम-मात्र भी नहीं है। राष्ट्रीय अथवा प्रदेश स्तर पर कृषि शिक्षा के जो विश्वविद्यालय हैं, उनमें शोध संस्थानों के अभाव में उच्चस्तरीय शोध समाप्त प्राय से हैं। चाहे संस्थानों का अभाव हो, वित्तीय एवं तकनीकी सुविधाओं का अभाव हो अथवा गुणवत्तापरक शिक्षकों का अभाव हो, जिसके कारण एक हरित क्रांति के बाद फिर कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं हुआ। किसान ईश्वरीय कृपा पर ही आज भी निर्भर हैं। कृषि शिक्षा का व्यापक प्रचार-प्रसार ग्रामीण क्षेत्रों में होना चाहिए और प्रत्येक शिक्षण संस्थान में न्यूनतम माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा अवश्य होनी चाहिए। उन लोगों का उपयोग कृषि के निचले स्तर के व्यापक प्रचार-प्रसार और उत्पादन वृद्धि में किया जाना चाहिए । देश की 70 फीसदी आबादी गांवों में रहती है और कृषि पर ही निर्भर है। ऐसे में किसानों की खुशहाली की बात सभी करते हैं और उनके लिए योजनाएं भी बनाते हैं किंतु उनकी मूलभूत समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती है। लेखक ने किसानों की समस्याओं को उठाते हुए उनके शीघ्र निराकरण की जरूरत पर जोर दिया है। स्वतंत्र भारत से पूर्व और स्वतंत्र भारत के पश्चात एक लम्बी अवधि व्यतीत होने के बाद भी भारतीय किसानों की दशा में सिर्फ 19-20 का ही अंतर दिखाई देता है। जिन अच्छे किसानों की बात की जाती है, उनकी गिनती उंगलियों पर की जा सकती है। बढ़ती आबादी, औद्योगीकरण एवं नगरीकरण के कारण कृषि योग्य क्षेत्रफल में निरंतर गिरावट आई है।

– लहसुन, प्याज़, हरी प्याज़ आदि भी अपने भोजन में शामिल करें. केप टाउन के चाइल्ड्स हेल्थ इंस्टीट्यूट में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि कच्चे लहसुन के सेवन से बच्चों को होनेवाले बहुत-से गंभीर इंफेक्शन्स से बचाया जा सकता है.

क्या यह भी ज्ञात है कि पूरक Hypocretin के स्तर को उठाती है, एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो जाग्रतावस्था के साथ मदद कर सकता है, भूख और कामोत्तेजना. यह सोचा है कि एक उच्च स्तर Hypocretin डोपामाइन में वृद्धि का कारण बन सकती, हिस्टामिन और norepinephrine.

लेकिन इससे पहले कि आप उन गोलियों पॉप, विचार करने के लिए कैसे और जब आप उन्हें लेने को रोकने लायक `s। कुछ पूरक, दूसरे के साथ हस्तक्षेप करते हुए खाद्य और पेय में कुछ पदार्थों की आपूर्ति करता है की अपनी अवशोषण को प्रभावित कर सकते कर सकते हैं। क्या अधिक है, लेने के एकल पोषक तत्व की आपूर्ति करता है की बड़ी खुराक विशेष रूप से गर्भावस्था के दौरान, असुरक्षित स्तर तक अपने खपत में वृद्धि हो सकती है।

नई दिल्ली, चालू पेराई सीजन में पैदा हुई चीनी उद्योग की मुश्किलें सुलझाने तथा गन्ना किसानों काबकाया भुगतान कराने के लिए सरकार ने कुछ और रियायतें देने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में बुधवार को यह फैसला किया गया। गन्ना किसानों के भुगतान के लिए सरकार ने छह हजार करोड़ रुपये की मंजूरी प्रदान की है। यह राशि पहले ही मंजूर की जा चुकी है, लेकिन इसकी शर्तों में पर्याप्त ढील देने का फैसला किया गया है। सीसीईए के ताजा फैसले में दो बड़े प्रावधान किए गए हैं। पहले की शर्तों के मुताबिक इनमें 30 जून, 2015 तक 50 फीसद गन्ना मूल्य बकाया भुगतान करने वाली मिलों को ही इस रियायती कर्ज को प्राप्त करने की छूट थी। अब इसकी अवधि बढ़ाकर 31 अगस्त, 2015 कर दी गई है। इससे सुविधा का लाभ 90 फीसद से अधिक चीनी मिलें उठा सकेंगी। दूसरी छूट के मुताबिक अब उन चीनी मिलों को भी यह रियायती कर्ज मिल सकेगा, जिन्होंने गन्ना बकाये का शत प्रतिशत भुगतान कर दिया है। उनके लिए सरकार ने दरवाजा खोल दिया है। इससे अच्छा प्रदर्शन करने वाली मिलों को अपना कर्ज चुकाने में मदद मिलेगी। सरकार के इस फैसले से गन्ना किसानों के भुगतान में तेजी आने की पूरी संभावना है। सीसीइए के फैसले में कहा गया है कि किसानों को गन्ने का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में किया जाएगा। चीनी मिलों को उन किसानों की सूची बैंकों को मुहैया करानी होगी।

OptiMind एक शक्तिशाली नॉटोट्रोपिक पूरक है जो आपको आपके मन की वास्तविक क्षमता को उगलाने में मदद कर सकता है। छात्र, एथलीट, डेस्क जॉकी या मानसिक उत्तेजना की तलाश में रहने वाले सभी व्यक्ति ऑप्टिमाइंड से लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

> हमारे देश में जिस रफ़्तार से कीटनाशक दवाओं का प्रयोग बढ़ता जा रहा है, वह एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है | फसल की उपज को कीड़ों की मार से बचाने के लिए खेतों में अँधा-धुंध जहर छिडकने का प्रचलन में किसान भाई एक दुसरे को पछाड़ने में लगे हुए है |

एक ऑपरेशन, इलाज के लिए स्मार्ट कार्ड में पैकेज की राशि तय है। उसी राशि में इलाज करना है, जब सीजीएमएससी दवाएं उपलब्ध करवा रही है तो फिर दवाओं को बाहर से खरीदने की क्या आवश्यकता है? अगर सीजीएमएससी दवाएं उपलब्ध नहीं करवाती है तो शासन को सूचित क्यों नहीं किया जाता? अगर स्थानीय खरीदी हो रही है तो यह उस 35 फीसदी राशि की बर्बादी है जो अस्पताल के विकास में खर्च होनी चाहिए। निजी अस्पताल कैसे पैकेज रेट पर इलाज करते हैं।

जीरे और गुड़ का यह मिश्रण नेचुरल बॉडी डिटॉक्स (शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालना) के रूप में कार्य करता है, जिससे आपका पूरा शरीर स्वस्थ और स्वच्छ रहता है। जीरे और गुड़ दोनों में ही लौह तत्व की अधिकता होती है। साथ ही इनमें खनिज एवं पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते है, जो हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को स्वस्थ रखने और उनके निर्माण में सहायक होते हैं। इनका घोल रोजाना पीने से रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है और अल्परक्तता से बचाव होता है। ये हमारे रक्त में मौजूद अशुद्धियों को भी दूर करते हैं।

अन्नदाता कार्यक्रम में हम आज बात करेंगे दूधिया मशरूम के बारे में. जिन किसान भाइयों ने बीज लगा लिया है वह इस फसल से अच्छा उत्पादन ले सकते हैं. इसे ग्रीष्मकालीन मशरूम भी कहते हैं. इसे बुवाई मई जून के आसपास ही होती है. इसे उगाने के लिए 30 डिग्री तापमान होना जरूरी है.40 फीट चौड़ा और 80 फीट लंबा एक कमरे का आकार होना चाहिए जहां पर आप इसे उगा रहे हैं. इसमें मशरूम के 8000 बैग आराम से आ सकते हैं. कमरे में कुछ पंखे लगाए जाते हैं ताकि हवा आ सके. बाजार में अन्य मशरूम के मुकाबले दुधिया मशरूम अधिक समय तक चलती है.

ऊपर बताए गए कारणों की वजह से ही गर्भावस्था के दौरान, आयरन की आवश्यकता सामान्य 18 मिली ग्राम प्रतिदिन से बढ़कर 27 मिली ग्राम प्रतिदिन  हो जाती है। चूँकि आयरन की यह मात्रा, केवल सामान्य भोजन से प्राप्त  करना आसान नहीं है, इसलिए डॉक्टर महिलाओं को इस अवस्था में 30 मिली ग्राम एलिमेंटल आयरन पूरक आहार के रूप  लेने की सलाह देते हैं, जो बाजार में दवा की दुकानों पर उपलब्ध होती हैं।

आज की प्रतिद्वंदिता भरी जीवनशैली में तनाव एक आम बात है। यह आज की जीवनशैली से उपजा हुआ एक ऐसा रोग है जिससे हर कोई कभी न कभी परेशान रहता ही है। अपने मन के अनुसार काम न होना, किसी प्रतियोगिता में पीछे रह जाना, सबसे आगे निकलने की होड़, प्रेम संबंधों की वजह से आदि कई ऐसे कारण हैं जिनसे डिप्रेशन की समस्या जन्म लेती है। ऐसे में किसी भी काम में मन नहीं लगता। इंसान बिल्कुल ही ऊर्जाहीन महसूस करता है। डिप्रेशन का कारण केवल लाइफस्टाइल ही नहीं होता है, बल्कि हमारे शरीर में कई तरह के पोषक तत्वों की कमी भी इसके लिए जिम्मेदार होती है। तो चलिए, आज हम आपको बताते हैं कि ऐसे कौन से पोषक तत्व हैं जिनकी कमी आपको डिप्रेशन के गर्त में दकेल सकती है।

दिमाग के विकास के लिए सबसे ज़रूरी फूड माना जाता है अंडा. प्रोटीन्स, विटामिन्स, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट्स और कोलीन से भरपूर अंडा आपके बच्चों को शार्प और स्मार्ट बनाते हैं. इसे आप किसी भी फॉर्म जैसे उबालकर, ऑमलेट के तौर पर या एग भुर्जी बनाकर खिला सकते हैं. ये अपने आप में एक कम्प्लीट फूड है. इसका एक और फायदा ये भी है कि अंडा बच्चों की जॉ लाइन और आंखों को मज़बूत बनाता है. साथ ही ये बच्चों के वज़न बढ़ाने में भी काफी मददगार होता है. 

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सत्तर वर्षीय सौमित्र बनर्जी मधुमेह के मरीज हैं। जोड़ों में दर्द के कारण चलने-फिरने से भी लाचार। बच्चे बाहर रहते हैं। कंप्यूटर-फ्रैंडली सौमित्र बिल भरने से लेकर राशन की खरीद तक सारे काम घर बैठे करते हैं। यहां तक कि वह अपनी जरूरत की दवाओं की खरीदारी भी ऑनलाइन करते हैं। सौमित्र की तरह हजारों लोग अब दवाओं की ऑनलाइन खरीद को तरजीह देने लगे हैं। इसमें उपभोक्ता कंप्यूटर या मोबाइल पर संबंधित वेबसाइट खोलकर उस पर प्रेस्क्रिप्शन (पीडीएफ या तस्वीर) भेजते हैं और कुछ घंटों में दवाएं आपके घर पर पहुंच जाती हैं।

ब्रैस्ट फीडिंग- मां का दूध बच्चे के दिमागी विकास के लिए बहुत जरूरी है। नवजात के लिए मां के दूध से अच्छा कोई भी आहार नहीं होता है। इतना ही नहीं, स्तनपान से बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है वहीं यह बच्चों के दिमागी विकास के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। एक रिसर्च के मुताबिक यह बात सामने आयी है कि स्तनपान करने वाले बच्चे ज्यादा स्वस्थ और बुद्धिमान होते हैं।

फ्रांस में डेबिट कार्ड के लिए बैंक सालाना शुल्क लेते हैं (कार्ड से भुगतान बैंकों के लिए बहुत ही लागत कुशल होने के बावजूद), फिर भी वे निजी ग्राहकों से चेक बुक या जांच प्रक्रिया के लिए चार्ज नहीं करते (बैंकों के लिए जांच बहुत ही खर्चीला होने के बावजूद). यह असंतुलन उस दिन से है जब 1990 के शुरूआत में फ्रांस का चिप और पिन डेबिट कार्ड की एकतरफा शुरूआत की गयी, इस तकनीक की लागत अब जितनी है तब इससे कहीं अधिक थी। यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका में जिस तरह के क्रेडिट कार्ड पाए जाते हैं वे फ्रांस में असामान्य हैं और अस्थगित डेबिट कार्ड के लगभग बराबर हैं, जो कि एक सामान्य डेबिट कार्ड की तरह संचालित होता है, सिवाय इसके कि खरीददारी के लिए होनेवाले सभी लेनदेन को महीने के आखिरी तक स्थगित रखा जाए, इसके कारण ग्राहक को 1 से 31 के बीच व्याज-मुक्त क्रेडिट दिया जाए. अस्थगित डेबिट के लिए सालाना शुल्क उनके लिए जो तुरंत डेबिट करते हैं, लगभग €10 से अधिक है। फ्रांस के ज्यादातर डेबिट कार्ड कार्टे ब्लू (Carte Bleue) लोगो से ब्रांडेड होते हैं, जो पूरे फ्रांस में स्वीकृत होने का भरोसा दिलाते है। ज्यादातर कार्डधारक अपने कार्डे ब्लू (Carte Bleue) में वीसा या मास्टरकार्ड लोगो प्राप्त करने के लिए सालाना अतिरिक्त शुल्क लगभग भुगतान करने का चुनाव करते हैं, ताकि कार्ड को अंतर्राष्ट्रीय स्वीकृति मिल जाए. कार्टे ब्लू (Carte Bleue) बगैर वीसा या मास्टरकार्ड लोगो के “कार्टे ब्लू नेशनल” के रूप में जाना जाता है और कार्टे ब्लू वीसा या मास्टरकार्ड लोगो के साथ “कार्टे ब्लू इंटरनेशनल” कहलाता है, या ज्यादातर बस “वीसा” या “मास्टरकार्ड” कहलाता है। फ्रांस में बहुत सारे छोटे व्यापारी कुछ निश्चित रकम की लेनदेन के लिए डेबिट कार्ड लेने से मना कर देते हैं, क्योंकि व्यापारी के बैंक प्रति लेनदेन के लिए न्यूनतम चाज करते हैं (यह न्यूनतम रकम 5€ से 15€ तक होता है, या कुछ विरल मामलों में इससे अधिक होता है। लेकिन अधिक से अधिक व्यापारी छोटी रकम के लिए डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि आजकल डेबिट कार्ड का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो रहा है। फ्रांस के व्यापारी डेबिट और क्रेडिट कार्ड के बीच अंतर करते ही नहीं, इसीलिए दोनों को एक जैसी स्वीकृति मिली हुई है। व्यापारी लेनदेन के लिए न्यूनतम रकम तय कर दें, फ्रांस में यह कानूनी है, लेकिन व्यापारी को इसे साफ-साफ प्रदर्शित करना होता है।

वर्तमान में विकास और परीक्षण के तहत कई स्मार्ट कैंसर की दवाओं। रिसर्च काफी तेजी से किया जा रहा है। विशेष रूप से, इसराइल की सरकार एक गंभीर बना देता हैवित्तीय निवेशइस क्षेत्र के विकास में। कई रोगियों के लिए प्रयोगात्मक दवाओं के उपयोग वसूली के लिए आशा दे।

स्मार्ट किसान ट्रस्ट द्वारा स्थानीय संसाधन विकसित करना – posted on : Apr, 20 2016 किसानों को उनकी उत्पादन प्रक्रिया का ज़्यादा विश्वसनीयता और कम लागत में प्रबंधन करने में मदद देने के लिए उन्हे बुनियादी संसाधन उपलब्ध होने चाहिए. – ख़ास तौर पर महिला किसानों के लिए भूमि और जल संसाधनों तक पहुँच सुरक्षित करना – लघु वित्त सेवाओं, ख़ास तौर पर लघुऋण तक ग्रामीण पहुँच प्रदान करना – किसानों के लिए आपूर्ति उपलब्ध कराने हेतु- ढाँचागत विकास – ख़ास तौर पर सड़कों और बंदरगाहों का निर्माण करना – मशीनी उपकरणों, बीजों, खाड़ों और फसल सुरक्षा सामग्रियों सहित कृषि इनपुट्स और सेवाओं तक पहुँच बेहतर बनाना – जानकारी और आपूर्ति किसानों की हाथ तक पहुँचने की पुष्टि करने के लिए अनेक स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम करना और प्रोत्साहन देना – जहाँ पर जैवईंधन ऊर्जा की बचत और ग्रामीण विकास में योगदान देता है, वहाँ जैवईंधन में निवेश करें

सफ़ेद रंग की शर्ट हर लड़कों के पास होनी चाहिए, क्योंकि इसके बिना लड़कों का बार्डरोब अधूरा है। हालाँकि, आप यह सोच रही होंगी कि इसे मैंटेन करना कितना मुश्किल है और यह सच भी है। क्योंकि, छोटे बच्चे सबसे ज्यादा कपड़े गंदे करते हैं और सफ़ेद शर्ट पर कोई दाग लग जाए तो उसे छुड़ा पाना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन, बाजार में दाग छुड़ाने वाले ऐसे डिटर्जेंट आ गए हैं जिससे कि आप इसे आसानी से छुड़ा सकते हैं। आप खुद सोचो न जब आपका लाड़ला सफ़ेद शर्ट और डेनिम जींस में होता है तो कितना क्यूट लगता है।

किसी न किसी तरीके बचकर नकल ही जाते है। लेकिन ब्राजील में ऐसा कैमरा बनाया गया है जिससे बचकर निकलना आसान नहीं है। यह कैमरा भारतीय शहरों की सड़कों की निगरानी करेगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। खबरों के मुताबिक  इसे सबसे पहले मुंबई, दिल्ली और आगरा की सड़कों पर लगाया जाएगा।

“मैं सबसे अच्छा मूल्य के लिए सस्ती स्मार्ट दवा की दुकान कहाँ खरीद सकते हैं मैं सबसे अच्छे मूल्य के लिए राइटलाइन स्मार्ट औषध कहां खरीद सकता हूं”

बढ़ते हुए बच्चे के लिए जब भी आप ड्रेस खरीदें तो इस बात का जरूर ध्यान रखें कि उनके साइज से एक साइज बड़ा हो। क्योंकि, बच्चों के कपड़े बहुत जल्द छोटे होते हैं इसलिए इस बात का विशेष तौर से ध्यान रखें। साथ ही लड़के थोड़ा रफ वे में खेलते हैं इसलिए उसका भी ध्यान रखें।

अल्फा मस्तिष्क Amazon.com के माध्यम से उपलब्ध है, onmit.com और कुछ अन्य ऑनलाइन स्टोर पर. लोगों को साइट पर सही जगह के लिए देख सकते हैं. एक कंपनी है कि के साथ आता है की वेबसाइट पर दवा की क्लासिक संस्करण खरीद सकते हैं 90 पर गोलियाँ $79.95, एल Tyrosine और सेरीन, का नया फार्मूला 30 सेवा मेरे 90 की कीमत पर गोलियाँ $34.95 या $79.95 या वे गोलियों की एक दो पैक चुन सकते हैं (30) पर $59.95. अल्फा मस्तिष्क का सुझाव दिया खुराक हर दिन यह बाजार में priciest दवाओं में से एक आज बनाता है कि दो गोलियाँ है.

सफ़ेद रंग की शर्ट हर लड़कों के पास होनी चाहिए, क्योंकि इसके बिना लड़कों का बार्डरोब अधूरा है। हालाँकि, आप यह सोच रही होंगी कि इसे मैंटेन करना कितना मुश्किल है और यह सच भी है। क्योंकि, छोटे बच्चे सबसे ज्यादा कपड़े गंदे करते हैं और सफ़ेद शर्ट पर कोई दाग लग जाए तो उसे छुड़ा पाना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन, बाजार में दाग छुड़ाने वाले ऐसे डिटर्जेंट आ गए हैं जिससे कि आप इसे आसानी से छुड़ा सकते हैं। आप खुद सोचो न जब आपका लाड़ला सफ़ेद शर्ट और डेनिम जींस में होता है तो कितना क्यूट लगता है।

अवधि nootropic उत्पादों की एक नहीं बल्कि विस्तृत रेंज को कवर कर सकते हैं। सबसे आम प्रकार है उत्तेजक, कैफीन के रूप में इस तरह के। कैफीन ध्यान, प्रेरणा, और ऊर्जा के स्तर में सुधार कर सकते हैं, और इसलिए एक बहुत ही प्रभावी और बेहद लोकप्रिय nootropic है।

Adrafinil डोपामाइन का टूटना को रोकने और सेरोटोनिन की मात्रा को बढ़ा देता है सकते हैं. इसलिये, लोग हैं, जो प्रेरणा के अपने स्तर को बढ़ाने की जरूरत के लिए उपयोगी – दवा एक मूड बढ़ाने के रूप में मदद कर सकते हैं. दवा ग्लूटामेट रिसेप्टर्स को प्रोत्साहित करने का संदेह है, स्य्नाप्से प्लास्टिसिटी betters, साथ ही उन्हें सीखने और स्मृति प्रदर्शन के लिए एक बेहतर मौका दे रही है.

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इटली में डेबिट कार्ड काफी लोकप्रिय हैं। यहां क्लासिक और प्रीपेड दोनों तरह के कार्ड हैं। इटली में मुख्य क्लासिक डेबिट कार्ड पागोबैनकोमैट (PagoBancomat) है: इस तरह के कार्ड अक्सर क्रेडिट कार्ड के साथ इतावली बैंक द्वारा जारी किए जाते हैं (ताकि आपके पास दोहरे मोडवाले कार्ड हों). यह कार्ड के मालिक को बैंक खाते से यह धन निकालने की अनुमति देता है और व्यापक रूप से यह ज्यादातर दुकानों में यह स्वीकृत है, हालांकि इंटरनेट पर यह केवल क्रेडिट कार्ड मोड की ही अनुमति देता है। प्रमुख डेबिट प्रीपेड कार्ड जारी किया जाता है पोस्टे इटालियाना S.p.A, द्वारा, जो पोस्टपे (Postepay) कहलाता है और वीसा इलेक्ट्रॉन (Visa Electron) सर्किट पर चलाता है। पोस्ट इटालियाना के एटीएमों (ATMs) (पोस्टमैट (Postamat)) का इस्तेमाल किया जा सकता है और दुनिया भर के वीसा इलेक्ट्रॉन अनुकूल बैंक के एटीएमों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इंटरनेट पर या POS-आधारित लेनदेन के लिए इसका इस्तेमाल किया जाए तो कोई शुल्क नहीं लगता है। कार्ड अन्य कंपिनयों जैसे वोडाफोन कैशकार्ड (Vodafone CashCard), बैनका डि मिलानो (Banca di Milano) का कार्टा जिन्स (Carta Jeans) और कार्टा मॉनेटा ऑनलाइन (Carta Moneta Online) द्वारा जारी किए जाते हैं।

कड़वा घूंट पी रहे गन्ना उगाने वाले किसान – posted on : Sep, 28 2015 किसान चीनी मिलें चलने की प्रतीक्षा में हैं। ये कब चलेंगी, पता नहीं। वैसे सहकारी व निजी क्षेत्र की ये मिलें आर्थिक संकट से जूझ रही हैं। शुगर मिल के चलने का समय अक्तूबर-नवंबर माह में होता है। इसके लिये 4 महीने पहले से तैयारियां शुरू की जाती हैं लेकिन अभी तक प्रदेश की किसी भी सहकारी अथवा निजी मिल में न तो मरम्मत करवाई गई है और न किसानों के साथ गन्ना खरीदने के लिये करार किया गया है। किसान भी असमंजस की स्थिति में है। हरियाणा की तीन प्राइवेट व 11 सहकारी मिलों में सत्र 2014-15 में पांच करोड़ 80 लाख क्विंटल गन्ना क्रश किया गया था। इन मिलों ने 1700 करोड़ का भुगतान किसानों को किया था, लेकिन अभी भी नारायणगढ़ मिल की तरफ किसानों का 50 करोड़ रुपये से भी ज्यादा बकाया है। इसको लेकर किसान परेशान हैं। किसानों से नहीं हुआ करार: प्रदेश की शुगर मिलों को किसानों के साथ हर वर्ष एक करार करना होता है। यह करार शुगरकेन एक्ट के तहत आता है। इसमें किसान करार करते हैं कि वे आगामी सीजन में कितना गन्ना मिल को देंगे। यह करार सिंतबर से शुरू होता है और उससे पहले शुगरकेन कंट्रोल बोर्ड की मीटिंगों में गन्ने के भाव तय हो जाते रहे हैं। इस बार अभी तक प्रदेश की किसी भी सहकारी अथवा प्राइवेट मिल ने किसानों से यह करार नहीं किया है। इस कारण प्रदेश के किसान असमंजस की स्थिति में है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से मिल रही सूचनाओं के मुताबिक इस बार किसानों ने गन्ने की बिजाई पहले से कम की है। इससे भी कई मिलों के चलने के आसार अथवा उनकी पिराई का लक्ष्य पूरा होने की संभावनाएं नहीं हैं। घाटे में नहीं चला सकते शुगर मिल प्रदेश की शुगर मिलें चलाने के लिये हर साल शुगरकेन कंट्रोल बोर्ड की मीटिंग होती है जिसमें गन्ने के भाव के साथ-साथ शुगर मिलों की समस्याओं पर भी विचार किया जाता है। बोर्ड की एक मीटिंग 7 अगस्त को पंचकूला में कृषि मंत्री ओपी धनखड़ की अध्यक्षता में हुई थी जिसमें प्रबंधकों ने घाटे के चलते वर्तमान हालात में शुगर मिलें न चलाने की बात कही थी। शुगर मिल प्रबंधकों का कहना है कि उन्हें गन्ने का भाव 310 रुपये प्रति क्विंटल देना पड़ रहा है। उधर, वे चीनी 24 से 25 सौ रुपये क्विंटल बेच रहे हैं। ऐसे में उन्हें करोड़ों का घाटा उठाना पड़ रहा है। शुरू नहीं हुई मिलों की मरम्मत प्रदेश की ज्यादातर सहकारी व प्राइवेट मिलें गन्ना पिराई का सीजन खत्म होने के बाद मिलों में मरम्मत का कार्य शुरू करती हैं। इस वर्ष मिलों की पिराई का सीजन खत्म हुए पांच माह बीत चुके हैं। मरम्मत व सफाई शुरू नहीं हुई। अक्तूबर में मिलों के चलने के ट्रायल शुरू हो जाते हैं। इस कार्य में भी दो माह लगते हैं। मिल प्रबंधक इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि सरकार की तरफ से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश आये ताकि वे आर्थिक संकट से उबर सकें।

कनेक्टिविटी के लिए इसमें 3 HDMI पोर्ट्स, 2 USB पोर्ट्स, 1 हेडफोन जैक, बिल्ट-इन वाईफाई और बाकी सभी जरूरी कनेक्टिविटी विकल्प शामिल हैं। ये भी एक स्मार्ट टीवी है इसलिए इसमें भी आपको स्वाइप एंड शेयर, स्क्रीन मिररिंग, एप्स चलाने की सुविधा, डबल USB शेयरिंग आदि फीचर्स मिल जाएंगे। इस टीवी का कुल माप 994 x 569 x 80 मिमी है। इस टीवी के साथ आने वाले बॉक्स में कोई स्टैंड नहीं मिलता है और बाकी की तरह इसपर भी कंपनी एक साल की घरेलू वारंटी दे रही है।

स्मार्ट किसान ट्रस्ट द्वारा कटी हुई फसल की सुरक्षा करना – posted on : Apr, 20 2016 अधिकतर ग़रीब देशों में, कटाई के पहले और बाद में अपर्याप्त इंतज़ाम होने के कारण फसल की उपज का २०-४०% नुकसान होता है. इसी तरह से, खाद्य शृंखला के उत्पादन और खपत के चरणों के दौरान खाद्यान्नों की बहुत बड़ी मात्रा बर्बाद होती है. – खाद्यान्नों के संग्रहण के लिए शीतगृहों सहित स्थानीय भंडारण संयंत्रो और परिवहन प्रणालियों को बनाना – कृषि संबंधी जानकारी, कीटन को पहचानने और मौसम संबंधी जानकारी को स्थानीय रूप से लागू करना – टिकाऊ खपत और उत्पादन की ज़रूरतों और व्यवहरों के बारे में जनता को शिक्षित करना – मौसम और मार्केट के उतार चढ़ावों का प्रबंधन करने में किसानों को सहयोग देने वाले जोखिम प्रबंधन साधन प्रदान करना

जबलपुर। बिना पॉश्चराइजिंग (दूध शुद्घ करने की प्रक्रिया) के डेयरी वाले 50 रुपए लीटर दूध बेच रहे हैं। यह दूध बिना बिल और गारंटी के बिक रहा है, जबकि सांची किसानों से 32 रुपए लीटर दूध लेकर उसे शुद्ध करती। इसके बाद भी 44 रुपए लीटर में बेच रही है। किसान भी कम रेट पर दूध बेचकर फायदा कमा रहे है और सांची अपना प्रॉफिट निकाल रही है। बावजूद इसके डेयरी वालों की मनमानी को रोकने में जिला प्रशासन ठोस कदम नहीं उठा सकी। अंदाजा इसी बात से लगा सकते है अब सांची का दूध छत्तीसगढ़ तक सप्लाई किया जाने लगा है। वहीं डोर टू डोर सप्लाई भी शुरू कर दी गई है।

हिटेश मालवीय, विटकइन विशेषज्ञ, इसकी ब्लॉचैन डॉट कॉम बताते हैं, बिटकॉन्स पूरी तरह से आभासी सिक्के हैं जो अपने मूल्य के लिए ‘आत्म-निहित’ होने के लिए डिजाइन किए गए हैं, जिससे बैंकों को पैसा इकट्ठा और स्टोर करने की कोई ज़रूरत नहीं है।