“मैं सबसे अच्छा मूल्य पर नोोट्रोपिक्स और स्मार्ट ड्रग्स कहां मिल सकता हूं _मैं सबसे अच्छा मूल्य के लिए स्मार्ट दवा किस चीज को खरीद सकता हूं”

रायसेन(भोपाल). एमपी में लगातार आत्महत्या कर रहे किसानों के बीच कुछ किसान ऐसे भी हैं जो खेती कर हर साल लाखों में मुनाफा कमा रहे हैं। dainikbhaskar.com आज रायसेन के रहने वाले एक ऐसे ही किसान के बारे में आपको बताने जा रहा है। मध्यप्रदेश के वनमंत्री डॉ.गौरीशंकर शेजवार के बेटे मुदित शेजवार मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री लेने के बाद खेती-बाड़ी कर रहे हैं। मुदित ने फूलों की खेती करने के लिए पॉलीहाउस तैयार किया। वे एक एकड़ में फूलों की खेती कर 15 से 18 लाख रुपए सालाना कमा रहे हैं। जिसके लिए उन्होंने 32 लाख का पैकेज भी छोड़ दिया था। ग्राम बारला में पॉलीहाउस में मुदित शेजवार जराबेरा किस्म के फूल की खेती कर रहे हैं। एक एकड़ में फूलों की खेती से 15 से 18 लाख रुपए तक सालाना आय प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने बताया कि पॉली हाउस या ग्रीन हाउस का निर्माण करने के लिए शासन द्वारा अनुदान भी दिया जाता है। साथ ही उद्यानिकी विभाग द्वारा समय-समय पर तकनीकी जानकारी से भी अवगत कराया जाता है। श्री शेजवार ने बताया फूलों की फसल के उत्पाद को बेचने के लिए कोई संगठित बाजार उपलब्ध नहीं है। अगर फसल उत्पादक आपस में क्लस्टर बनाकर मार्केट बना लें तो फूलों को मांग के अनुसार सप्लाई किया जा सकता है। खेती के लिए छोड़ा 32 लाख का पैकेज मुदित शेजवार ने गवरमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज भोपाल से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री ली है। साथ ही नर्सी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज मुम्बई से एमबीए की डिग्री हासिल की है। उसके बाद उन्होंने मुम्बई की एनएम एडवरटाईजिंग संस्था में 32 लाख रुपए सालाना के पैकेज पर नौकरी की शुरुआत की थी, लेकिन वे मुम्बई की चकाचौंध को छोड़कर अपने गांव बारला आ गए और यहां पर कृषि को ही अपना रोजगार का साधन बनाकर फूलों की खेती करना प्रारंभ कर दिया है।

न्यूयॉर्क. बैंगनी आलू को अपने भोजन में शामिल कर आप पेट के कैंसर से बच सकते हैं. एक नए खोज के मुताबिक, बैंगनी आलू पेट के कैंसर के लिए जिम्मेदार स्टेम कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं तथा इस घातक बीमारी को फैलने से रोकते हैं. अमेरिका की पेन्सिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में खाद्य विज्ञान के सहायक प्रोफेसर जयराम वानामाला ने बताया कि कैंसर का मुकाबला करने के लिए स्टेम कोशिकाओं पर हमला करना एक प्रभावी तरीका है. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के पूर्व छात्र वानामाला ने कहा कि लोग चाहें तो कैंसर की स्टेम कोशिकाओं की तुलना झाड़ियों की जड़ों से कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि लोग भले ही झाड़ी को काट डालें, लेकिन जब तक जड़ बची रहती है, वे फिर उग आते हैं. इसी तरह अगर कैंसर की स्टेम कोशिकाएं जिंदा हैं, तो कैंसर फिर बढ़ेगा और फैलेगा. धकर्ताओं ने शोध के लिए उबले बैंगनी आलू का इस्तेमाल किया कि क्या सब्जियों में पकने के बाद भी कैंसर रोधी गुण रहते हैं. पहले प्रयोग में उन्होंने पाया कि उबला बैंगनी आलू पेट के कैंसर की स्टेम कोशिकाओं के प्रसार को रोकता है. शोधकर्ताओं के अनुसार बैंगनी रंग के आलू में कई पदार्थ ऐसे हो सकते हैं, जो पेट के कैंसर की स्टेम कोशिकाओं को खत्म करने के लिए अलग-अलग तरह से काम करते हैं. वानामाला ने सुझाव दिया कि बैंगनी रंग के आलू को कैंसर के लिए पहली और दूसरी रोकथाम रणनीति में इस्तेमाल किया जा सकता है. प्रथम रणनीति का लक्ष्य कैंसर के पहले प्रभाव को रोकना है, जबकि दूसरी रणनीति का लक्ष्य रोगियों को कैंसर से मुक्त कराना है.

स्मार्ट सिटी में कर्मियों के लिए सेवा निर्धारित करने के लिए सेवा नियमावली कमेटी का गठन किया गया. इसमें सात सदस्यीय कमेटी रहेगी. कमेटी में नगर आयुक्त, बुडको के एमडी,अपर नगर आयुक्त संजय कुमार दूबे व कंपनी के निदेशक केडी प्रोज्जवल, विनोद कुमार तिवारी, अजय कुमार व आयुक्त के सचिव कृत्यानंद सिंह को रखा गया है. पदाधिकारियों को वित्तीय शक्ति प्रदान करने के लिए टीम का गठन किया गया. 

किसान कर सकेंगे सौर ऊर्जा उत्पादन में भागीदारी – posted on : Aug, 22 2015 गुजरात ‘कृषि सौर नीति’ पेश करने वाला पहला राज्य होगा जिसके तहत किसानों को सौर ऊर्जा उत्पादन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा और इससे उन्हें बिजली उत्पादन कंपनियों से अतिरिक्त आय प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी। यह बात गुजरात ऊर्जा अनुसंधान एवं प्रबंधन संस्थान (जेर्मी) के अधिकारियों ने कही। अधिकारियों ने कहा कि खेतों में सौर बिजली उत्पादन, किसानों और बिजली उत्पादन कंपनियों, दोनों के लिए लाभकारी स्थिति होगी। जेर्मी के निदेशक प्रोफेसर टी हरिनारायण ने कहा कि सरकारी कंपनियां खेतों में सौर फोटो वोल्टेइक (एसपीवी) इकाइयां स्थापित करेंगी। हरिनारायण ने कहा ‘जीआईपीसीएल (गुजरात इंडस्ट्रीज पावर कंपनी लिमिटेड), जीएसईसीएल (गुजरात स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कॉर्पोरेशन लिमिटेड) और जीपीसीएल (गुजरात पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड) ने प्रायोगिक तौर पर खेतों में एसपीवी इकाइयां स्थापित की हैं।’ जेर्मी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि किसानों को बिजली उत्पादन कंपनियों के मुनाफे में से 30-40 फीसदी की हिस्सेदारी मिलेगी और सौर फोटो वोल्टेइक इकाइयां खंभों पर स्थापित की जाएंगी ताकि किसान खेती भी कर सकें। राज्य के ऊर्जा मंत्री और गुजरात सरकार के प्रवक्ता सौरभ पटेल ने कहा, ‘हम जल्दी ही नीति की घोषणा करेंगे।’

लाइफस्टाइल डेस्कःलौकी हमारे शरीर के कई रोगों को दूर करने में सहायक होती है। इसका उपयोग रोगियों के लिए सलाद, रस निकालकर या सब्जी के रूप में लंबे समय से किया जाता रहा है। लौकी को कच्चा भी खाया जाता है। यह पेट साफ करने में भी बहुत ही फायदेमंद होता है साथ ही बॉडी को हेल्दी और टॉक्सिक फ्री भी बनाती है। लौकी से सेहत को होने वाले फायदे गैस और कब्ज एसिडीटी, कब्ज, पेट की बीमारियों एवं अल्सर में लौकी का रस फायदेमंद होता है। खाने के बाद अगर पेट में किसी प्रकार की कोई परेशानी महसूस हो रही हो तो लौकी का जूस पिएं। खांसी खांसी, टीबी, सीने में जलन आदि में भी लौकी बहुत उपयोगी होती है। टीबी, सीने में जलन, हार्ट डिसीज, किडनी डिसीज, डायरिया, मिर्गी, हैजा / हार्ट डिसीज खाने के बाद एक कप लौकी के रस में थोड़ी-सी काली मिर्च और पुदीना डालकर पीने से हार्ट डिसीज रोग में आराम मिलता है। किडनी रोग लौकी किडनी के रोगों में बहुत उपयोगी है और इससे मूत्र खुलकर आता है

गड़बड़ी सामने आने पर मंत्री ने सीधे सिविल सर्जन से सवाल किया, ये सब क्या हो रहा है? सिविल सर्जन जवाब नहीं दे सके। वे बगलें झांकने लगे। इसके बाद मंत्री ने पूछा कौन डॉक्टर लिख्ख रहा बाहर की दवाइयां। उन्होंने सीएमएचओ को इसकी जांच करके संभागीय कमिश्नर को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए। मंत्री के जाने के बाद डॉक्टरों द्वारा लिखी गई पर्ची की फोटो कॉफी सीएमएचओ को सौंप दी गई। मंत्री ने अस्पताल में जगह-जगह मिली गंदगी पर भी नाराजगी जताई।

प्रोटीन शुद्ध करने में शामिल समय और लागत स्मार्ट पॉलीमर का उपयोग करके काफी कम हो सकता है जो मध्यम गुणों में परिवर्तन के जवाब में तेजी से प्रतिवर्ती परिवर्तन से गुजरती हैं। कई वर्षों से शारीरिक और आत्मीयता अलग-अलग और प्रतिरक्षकों में संयुग्मित प्रणाली का उपयोग किया गया है। बहुलक ढांचे में सूक्ष्म परिवर्तन द्रव की संरचना के रूप में प्रकट होते हैं, जिसका उपयोग हल से फँसा हुआ प्रोटीन को अलग करने में सहायता के लिए किया जा सकता है। ये प्रथाएं काम करती हैं जब एक प्रोटीन या अन्य अणु जो मिश्रण से अलग किया जाता है, बहुलक के साथ एक बायोकेनजुएट बनाती है और बहुलक के साथ उपजी हो जाती है जब इसके पर्यावरण में परिवर्तन पड़ता है। इस द्रव्य को मीडिया से हटा दिया जाता है, इस प्रकार संयुग्म के इच्छित घटक को शेष मिश्रण से अलग कर दिया जाता है। संयुग्म से इस घटक को निकालने पर बहुलक की वसूली और उसके मूल राज्य में वापसी पर निर्भर करता है, इस प्रकार इस तरह की प्रक्रियाओं के लिए हाइड्रोगल्स बहुत उपयोगी होते हैं। स्मार्ट पॉलिमर का उपयोग करने वाली जैविक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने के लिए एक और तरीका है कि लैगेंड या सेल बाइंडिंग साइट्स के करीब निर्मित बहुलक बाध्यकारी साइटों के साथ पुनः संयोजक प्रोटीन तैयार करना। तापमान और प्रकाश सहित विभिन्न प्रकार के ट्रिगर्स के आधार पर लिगैंड और सेल बाइंडिंग गतिविधि को नियंत्रित करने के लिए इस तकनीक का उपयोग किया गया है।

शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण महिलाओं को असमय विभिन्न तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले में विशेषतौर से युवतियों को फिक्रमंद रहने के लिए कहा गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक देश में 50 प्रतिशत से भी अधिक महिलाओं में आयरन, कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों की कमी पाई गई है। एम्स की सहायक डाइटीशियन रेखा पाल साह के मुताबिक पोषक तत्वों की कमी युवतियों के बीमार होने का कारण साबित हो रही है।

1 लीटर में 100 Km चलेगी टाटा की ये कार, लॉन्चिंग की तैयारी में जुटी कंपनी – posted on : Aug, 26 2015 नई दिल्ली. टाटा मोटर्स भारत में जल्द ही 1 लीटर पेट्रोल में 100 किमी का माइलेज देने वाली कार लॉन्‍च करने जा रही है। ‘टाटा मेगापिक्सल’ के रूप में सामने आने वाली यह कार देखने में आकर्षक होगी और इसमें बेहद एडवांस फीचर होंगे। कंपनी फ्यूल की कम खपत करने वाली कार लाने के प्रोजेक्‍ट पर कई साल से काम कर रही थी। मनीभास्कर आपको बता रहा है ‘टाटा मेगापिक्सल’ के फीचर्स और खासियतें…, जो मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है। चार सीटों वाली इस कार को पर्यावरण के अनुकूल बनाया गया है। इस कार में प्रति किलोमीटर महज 22 ग्राम कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन होगा।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा मेगापिक्सल जनवरी, 2016 में लॉन्च हो सकती है। कंपनी इसकी लॉन्चिंग को लेकर तैयारियों में जुटी है। इस कार की कीमत 5 से 6 लाख रुपए के बीच होने की संभावना है।टाटा मेगा पिक्सल में 325 सीसी सिंगल सिलेंडर का इस्तेमाल किया गया है। इस कार में एक लिथियम आयन फास्फेट बैटरी और चलती कार में रीचार्ज के लिए पेट्रोल इंजन जेनरेटर लगा है। टंकी फुल कराने पर यह कार एक बार में 900 किलोमीटर तक चलाई जा सकेगी। कार 100 किमी/लीटर का माइलेज देगी।

आज की प्रतिद्वंदिता भरी जीवनशैली में तनाव एक आम बात है। यह आज की जीवनशैली से उपजा हुआ एक ऐसा रोग है जिससे हर कोई कभी न कभी परेशान रहता ही है। अपने मन के अनुसार काम न होना, किसी प्रतियोगिता में पीछे रह जाना, सबसे आगे निकलने की होड़, प्रेम संबंधों की वजह से आदि कई ऐसे कारण हैं जिनसे डिप्रेशन की समस्या जन्म लेती है। ऐसे में किसी भी काम में मन नहीं लगता। इंसान बिल्कुल ही ऊर्जाहीन महसूस करता है। डिप्रेशन का कारण केवल लाइफस्टाइल ही नहीं होता है, बल्कि हमारे शरीर में कई तरह के पोषक तत्वों की कमी भी इसके लिए जिम्मेदार होती है। तो चलिए, आज हम आपको बताते हैं कि ऐसे कौन से पोषक तत्व हैं जिनकी कमी आपको डिप्रेशन के गर्त में दकेल सकती है।

नई दिल्ली. टाटा मोटर्स भारत में जल्द ही 1 लीटर पेट्रोल में 100 किमी का माइलेज देने वाली कार लॉन्‍च करने जा रही है। ‘टाटा मेगापिक्सल’ के रूप में सामने आने वाली यह कार देखने में आकर्षक होगी और इसमें बेहद एडवांस फीचर होंगे। कंपनी फ्यूल की कम खपत करने वाली कार लाने के प्रोजेक्‍ट पर कई साल से काम कर रही थी। मनीभास्कर आपको बता रहा है ‘टाटा मेगापिक्सल’ के फीचर्स और खासियतें…, जो मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है। चार सीटों वाली इस कार को पर्यावरण के अनुकूल बनाया गया है। इस कार में प्रति किलोमीटर महज 22 ग्राम कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन होगा।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा मेगापिक्सल जनवरी, 2016 में लॉन्च हो सकती है। कंपनी इसकी लॉन्चिंग को लेकर तैयारियों में जुटी है। इस कार की कीमत 5 से 6 लाख रुपए के बीच होने की संभावना है।टाटा मेगा पिक्सल में 325 सीसी सिंगल सिलेंडर का इस्तेमाल किया गया है। इस कार में एक लिथियम आयन फास्फेट बैटरी और चलती कार में रीचार्ज के लिए पेट्रोल इंजन जेनरेटर लगा है। टंकी फुल कराने पर यह कार एक बार में 900 किलोमीटर तक चलाई जा सकेगी। कार 100 किमी/लीटर का माइलेज देगी।

Pramiracetam का सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बढ़ाने में मदद करता है. सुधार रक्त के प्रवाह को बेहतर ग्लूकोज चयापचय और प्रणाली में ऑक्सीजन तेज हो रही है के लिए उपयोगी है. मस्तिष्क मदद में ये सुधार मानसिक ऊर्जा को बढ़ाने और उन अधिक सतर्क हो जाते हैं करने की अनुमति और ध्यान केंद्रित करने के लिए. यह लंबे समय तक ध्यान में जो परिणाम, बेहतर ध्यान और एकाग्रता और ध्यान में तेजी से प्रक्रियाओं.

कुछ उपभोक्ता “क्रेडिट” लेनदेन को पसंद करते हैं, क्योंकि इसमें उपभोक्ता/खरीददार से शुल्क नहीं लिया जाता है, इसके अलावा कुछ डेबिट कार्ड (उदाहरण के लिए वाशिंगटन मुचुअल का “वामूला” (WaMoola)[29] और S&T बैंक का “प्रैफर्ड डेबिट रिवार्ड कार्ड” (Preferred Debit Rewards Card)) “क्रेडिट” का उपयोग करने पर पुरस्कार देते हैं।[30] बहरहाल, चूंकि क्रेडिट का खर्च व्यापारियों के लिए ज्यादा है, इसीलिए बहुत सारे टर्मिनल ने पिन स्वीकार करनेवाले व्यापारिक स्थानों में क्रेडिट प्रकार्य प्राप्त करना कहीं अधिक कठिन कर दिया गया है। उदाहरण के लिए ऑनलाइन डेबिट के लिए अगर आप U.S. के वॉल-मार्ट (Wal-Mart) में डेबिट कार्ड स्वाइप करवाते हैं, पिन स्क्रीन पर आप तुरंत दिखाई देने लगते हैं, ऑफलाइन का उपयोग करने पर आपको पिन स्क्रीन से निकलने के लिए “कैंसिल” बटन दबाना जरूरी है, इसके बाद अगली स्क्रीन पर “क्रेडिट” बटन दबाना होता है।

पुरानी कहावत है कि पेड़ तो खजूर का भी बड़ा होता है लेकिन उससे क्या. मुसाफिर को छांव नहीं मिलती और उसका फल भी पहुंच से दूर होता है. भारत के बड़े-बड़े शहरों का भी यही हाल है. इनमें रहने के लिए पर्याप्त मकान नहीं हैं, सड़कों पर जाम लगे हैं, बिजली दिन भर आंख-मिचौली खेलती है, हवा में जहर घुला है, पानी ऐसा है कि बिना साफ किए पी नहीं सकते और कूड़े के ढेर हर जगह दिख जाते हैं. पिछली जनगणना बताती है कि मुंबई की आधी से भी ज्यादा और कोलकाता की एक तिहाई आबादी झुग्गियों में रहती है. इस आबादी को शहरी सेवाएं और सुशासन देने में सरकारें विफल रही हैं. इतने साल बीत गए हैं लेकिन, ढहती आधारभूत सुविधाओं, मकान, पानी और बिजली जैसी समस्याओं का हम कोई पुख्ता हल नहीं खोज पाए हैं.

मंत्री अस्पताल से बाहर निकल रहे थे, इस दौरान मरीज के परिजनों ने शिकायतों की झड़ी लगा दी। कहा कि ओपीडी में डॉक्टर नहीं मिलते। सिविल सर्जन से कई बार शिकायत की गई, लेकिन कुछ नहीं हुआ। मंत्री ने व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने पर सिविल सर्जन को कार्रवाई की चेतावनी दी है।

यह मानसिक सतर्कता और जो असामांय बदलाव या एक रात के अध्ययन सत्र का सामना कर रहे लोगों के लिए काम के लिए तीक्ष्णता प्रदान कर सकते है जबकि परीक्षा के लिए cramming. स्थिति या सामयिक उपयोग लंबी अवधि के उपयोग पर सिफारिश की है.

हर घर में मच्छरों का आतंक रहता ही है। ये न सिर्फ आपकी नींद खराब करते हैं बल्कि पूरे शरीर भर में कहीं भी काट कर दाग दे देते हैं। लेकिन मच्छरों को भगाने का सबसे सरल उपाय घर में ही मौजूद है। बस इन सात टिप्स को अपनाइए। नीम और नारियल के तेल को बराबर मात्रा में लें और मिश्रण बना लें। नीम में वायरस, बैक्टीरिया और फंगस से लड़ने की क्षमता होती हैं। इसे अपने शरीर पर लगाने से एक खास तरह की बू आएगी जो मच्छरों को दूर भगाएगी और वे 8 घंटों तक आपके पास नहीं मंडराएंगे। कपूर में दूसरी चीजों के मुकाबले सबसे ज्यादा देर तक मच्छरों को दूर रखने की क्षमता होती है। कमरे में बस एक कपूर जला दें और 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें। वापस जब कमरे में जाएंगे तो मच्छरों का निशान तक नहीं मिलेगा। तुलसी के पौधे को कमरे की खिड़की के पास रख देने बर से मच्छर भाग जाएंगे। तुलसी न सिर्फ मच्छरों को भगाती है बल्कि उन्हें अंदर आने से भी रोकती है। इसके अलावा आप नींबू और गेंदे का पौधा भी लगा सकते हैं। इनका भी मच्छरों पर ऐसा ही असर होता है। लहसुन की बदबू से मच्छर इसके पास नहीं आते। इसे पीस कर, पानी में उबाल कर कमरे में छिड़क दें। असर साफ दिखेगा। अगर आपको इसकी बदबू से परेशानी न हो तो यह स्प्रे अपने शरीर पर भी छिड़क सकते हैं। लैवेंडर की खुशबू इतनी तेज होती है कि मच्छर उसे सूंघ कर कांट नहीं पाते हैं। इसलिए कमरे में लैवेंडर का फ्रेशनर इस्तेमाल करेंगे तो मच्छर भी नहीं रहेंगे और कमरा भी महकेगा। नींबू और युकलिप्सटस के तेल को मिला कर त्वचा पर लगाएंगे तो मच्छर पास नहीं आएंग। इसमें न सिर्फ कीड़े मकौड़ो को दूर भगाने की खासियत होती है बल्कि ये एंटीसेप्टिक की तरह भी काम करता है। पुदीने की खुशबू को कमरे में फैला कर या उसके तेल को शरीर पर लगा कर या उसके पौधे को कमरे की खिड़की पर रख कर आप इसका असर देख सकते हैं, मच्छर नजर नहीं आएंगे।

डेबिट कार्ड की सहायता से आप तुरंत नकदी निकाल सकते हैं, क्योंकि यह एटीएम (ATM) कार्ड और चेक गारंटी कार्ड की तरह प्रयुक्त होता है। जहां ग्राहक खरीददारी के साथ साथ नकदी भी निकाल सकते हैं, वहां व्यापारी अपने ग्राहक को “कैशबैक”/”कैश आउट” की सुविधाएं देने की पेशकश कर सकता है।

उत्तेजित होने के बजाय एक शांत दिमाग बेहतर सोच सकता है। अपने मस्तिष्क को हर दिन कुछ मिनट के लिए पूरी तरह शांत छोड़ दीजिए और फिर देखिए कि यह आपको आपकी इच्छाओं के अनुरूप जिंदगी जीने में कितनी मदद करता है।

The Harvard School of Public Health also advises all adults to take a multivitamin supplement to fill any nutritional gaps that can’t be promised by the daily diet. Though opt for the more expensive one rather than a junky Cetrum version or if its just brain health you seek to improve consider MaxSynapse or Lumonol.

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