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अन्नदाता अपने हाथों से अपनी फसल को उजाड़ रहा है। लाखों रुपए की लागत से जिस फसल को उसने लगाया, वह अब खुद उजाड़ने के लिए मजबूर है। कराहल क्षेत्र के गांवों में सिंचाई के अभाव में नष्ट हुई सोयाबीन की फसल को उजाड़ कर किसान सरसों की बोवनी की तैयारी कर रहे हैं। आलम यह है कि हजारों बीघा हैक्टेयर में सोयाबीन के खेतों को उजाड़ने के लिए किसान हल, ट्रैक्टर चला रहे हैं। अब तक सैकड़ों किसान मेहनत से लगाई फसल को उजाड़ चुके हैं। किसानों का कहना है कि बारिश नहीं होने से फसल बर्बाद हो गई है। अब जबकि खेतों में सोयाबीन के होने की उम्मीद खत्म हो गई है तो अब उनका ध्यान सरसों की फसल पर है। महंगा बीज खरीदा, अब लागत भी नहीं निकल रही किसान इसलिए भी सकते में हैं, क्योंकि इस बार उन्होंने सोयाबीन की फसल के लिए महंगा बीज खरीदा था। महज पांच बीघा एरिया में बोवनी के लिए किसानों ने करीब सात हजार रुपए खर्च किए। जबकि पिछले साल यह बीज पांच हजार रुपए में ही खरीदा गया था। इस बार बीज के दाम बढऩे से लागत भी बढ़ गई। किसानों का यह भी कहना है कि कई खेतों में डाला गया बीज भी खराब निकला। इसलिए पौधे नहीं उगे। इससे जिन किसानों ने अपनी फसल नहीं उजाड़ी है, उनकी तो लागत भी वसूल नहीं हो पाएगी। कराहल में ट्रैक्टर से सोयाबीन की फसल को जोतता किसान

खजाने पर आएगा 600 करोड़ का बोझ – posted on : Aug, 13 2015 सरकार के इस फैसले से खजाने पर 600 करोड़ रुपये का बोझ आएगा, जिसे चीनी विकास निधि को वहन करना होगा। चीनी मिलें भारी घाटे और वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही हैं। उत्पादन लागत से कम मूल्य पर चीनी बेचने से उनका घाटा लगातार बढ़ रहा है। इसकी वजह से किसानों को उनके गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हो पा रहा है। 6,000 करोड़ के ब्याज मुक्त कर्ज से सिर्फ किसानों का भुगतान सुनिश्चित करना होगा। कर्ज की इस राशि की वसूली एक साल बाद शुरू होगी। छूट अवधि में कर्ज पर ब्याज का भार सरकार उठाएगी। यह बोझ छह सौ करोड़ रुपये बैठ रहा है। चीनी मिलों को नगदी संकट से उबारने के लिए सरकार ने दिसंबर, 2013 में भी 6,600 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया था। सरकार ने इसके पहले मिलों को राहत देने के लिए उनकी मांग पर आयात शुल्क 40 फीसद, कच्ची चीनी पर 4,000 रुपये प्रति टन की निर्यात सब्सिडी और पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण को प्रोत्साहित करने के लिए एथनॉल मूल्यों को बढ़ाया है।

पिछला भुगतान नहीं, नई फसल से किसान चिंतित – posted on : Sep, 08 2015 नारायणगढ़ : पिछला भुगतान अभी तक नहीं हुआ जबकि नई फसल लगभग तैयार हो चुकी है। ऐसे में गन्ना उत्पादक किसानों को यह चिंता आए रोज सता रही है कि उनकी इस नगदी कही जाने वाली फसल का आखिर क्या होगा? नारायणगढ़ शुगर मिल से जुड़े गन्ना उत्पादक किसान अपने बकाया भुगतान पाने को लेकर पिछले तीन माह से संघर्षरत है। धरने-प्रदर्शनों से लेकर भूख-हड़ताल तक कर चुके इन किसानों को लेकर भले ही प्रदेश सरकार प्रयासरत नजर आ रही है लेकिन शुगर मिल प्रबंधन के अड़ियल रवैये के चलते इन किसानों की हालत दयनीय हो चली है। बता दें कि नारायणगढ़ शुगर मिल से जुड़े गन्ना उत्पादक किसानों का लगभग पचास करोड़ रुपया का भुगतान चीनी मिल की ओर रुका हुआ है। हालाकि प्रदेश सरकार ने चीनी मिल को अपनी ओर से बिना ब्याज का ऋण उपलब्ध करवा तो दिया है लेकिन मिल प्रबंधन द्वारा इस गण की ऐवज में अभी तक कोई प्रतिभूति (गारटी) ना दिए जाने से यह ऋण मंजूर नहीं हो सका है जिसके चलते किसानों को भी उनका पैसा नहीं मिल पाया।

ब़़ढ रहा शक्कर का भंडार, निर्यात की तैयारी – posted on : Aug, 13 2015 चेन्नई । देश में शक्कर का ब़़ढता भंडार कम करने के लिए सरकार ने कई देशों को इसके निर्यात के लिए चर्चा शुरू कर दी है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि पिछले चार साल से भंडार लगातार ब़़ढ रहा है। सीतारमण ने कहा कि शक्कर के ब़़ढते भंडार के कारण शक्कर मिलों को किसानों का भुगतान करने में कठिनाई हो रही है। स्थिति विकट हो गई है। इसलिए सरकार कुछ हल निकालने में लगी है। समाधान की तलाश हो रही है, अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं। दालों के बदले शक्कर निर्यात वाणिज्य मंत्री ने बताया कि विदेश मंत्रालय के जरिए विभिन्न देशों से उनकी दालों के आयात पर भी चर्चा चल रही है। अफ्रीकी देशों, म्यांमार, कनाडा से दालें मिलने की उम्मीद है। हम दाल आयात के बदले शक्कर निर्यात करना पसंद करेंगे। इस विकल्प पर सरकार काम कर रही है। ब़़ढा स्टॉक, घटे दाम उल्लेखनीय है कि देश में लगातार छठे साल शक्कर उत्पादन 2.83 करो[ड़ टन को पार करने का अनुमान है। इस कारण भाव निरंतर घटते हुए 2000 से 2500 रपए प्रति क्विंटल तक आ गए हैं।

यह एक खुला रहस्य है: जबकि एथलीटों ने अपने शरीर को डोप किया है, नियमित कार्यालय कार्यकर्ता अपने दिमाग को डोप करते हैं। वे दवाइयां खरीदते हैं जैसे कि Ritalin or Provigil अपने संज्ञानात्मक प्रदर्शन को बढ़ावा देने के लिए इंटरनेट के समृद्ध काला बाजार पर।

इन देशों में है सबसे सस्‍ता पेट्रोल 1. सबसे सस्ता पेट्रोल वेनेजुएला में मिलता है जहां इसकी कीमत एक रुपया प्रति लीटर से भी कम है। यह एक मोटे तौर लिया गया अनुमान है क्योंकि मुद्रा-मूल्य के आधार पर एकदम सही अनुमान लगाना कठिन होता है। बहरहाल यह कीमत 1998 से चल रही है। वेनेजुएला तेल निर्यातक देश है और अपने नागरिकों को इसपर सब्सिडी देता है। 2. लीबिया में 6.94 रुपए प्रति लीटर 3. सउदी अरब में यह 10.31 रुपए प्रति लीटर 4. तुर्कमेनिस्तान में 22.62 रुपए प्रति लीटर 5. ईरान में करीब 22.69 रुपए प्रति लीटरइन देशों में ये है पेट्रोल की कीमत > भारतः 63.2 रुपए प्रति लीटर(दिल्ली) > पाकि‍स्‍तान: 44.05 रुपए प्रति लीटर > श्रीलंका: 54.75 रुपए प्रति लीटर > नेपाल: 68.13 रुपए प्रति लीटर > बांग्लादेश: 76.97 रुपए प्रति लीटर > भूटान: 40.14 रुपए प्रति लीटर

नई दिल्ली/ब्यूरो। कहा जाता है कि अगर घर की महिला ही बीमार हो तो उसका असर पूरे परिवार की सेहत पर पड़ता है। देश में महिलाओं में पोषक तत्वों की कमी चिंताजनक स्तर तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञों की मानें तो महिलाओं को खुद का ख्याल रखने के लिए जागरूक करने की जरूरत है।

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बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय खिलौना ‘टेडी बीयर’ देखने में भले ही कितना भी मासूम लगे लेकिन उसे सही साज सम्भाल के बिना रखा जाए तो न केवल यह किटाणुओं का घर बन जाता है बल्कि बच्चों में अस्थमा जैसी बीमारी का कारण भी बन सकता है।..

केंद्र सीखने और शिक्षा के लिए शिक्षक। चयन विधि यह कई लोगों के कुछ छात्रों कि इन शेफ बनाने के उच्च स्तर, वे भी मास्टर चाहिए लगता है कि हो सकता है। लेकिन, ये खेल संस्करण प्रभाग साक्षरता की सीमा, आम तौर पर संस्करण काम खेलने के कारण जिस तरह शिक्षण और अध्यापन कौशल और खेल संस्करण सॉफ्टवेयर समारोह व्यस्त, नहीं कई बार शोध की तुलना में, कई खेल संस्करण प्रभाग समारोह के सॉफ्टवेयर को पूरी तरह से नहीं है, वे सामान्य केवल गुरु है 40 से 60 60% के आदेश, फिर से एक विभाजन करना होगा संस्करण नहीं कहा खेल रहा है , भाषा अभिव्यक्ति क्षमता, गरीब छात्र जल्द ही समझ में शिक्षक द्वारा अप का मतलब, मास्टर ऑपरेशन ने कहा कि चिकनी है, लेकिन लोग सीखने सिखाया धैर्य का अच्छा नहीं है ऐसा नहीं कर सकते और दूसरा, काम बहुत व्यस्त है, क्योंकि क्लाइंट संस्करण, क्लाइंट आपात स्थिति और अन्य कारणों से। गुरु से पूछना यह छात्रों को समझने के लिए, स्मार्ट, मजबूत क्षमता की तुलना करने के लिए की आवश्यकता है।

नकली दवाओं के कारोबार और इसकी आशंका को देखते हुए दवा बेचने वाली वेबसाइट के संचालकों ने स्मार्ट कदम उठाया है। वे दिल्ली-एनसीआर की फार्मेसी दुकानों और वितरकों की विस्तृत जानकारी लेते हैं कि इन्हें किन दवाओं के ब्रांड्स बेचने की इजाजत है। इसके साथ ही ये भी देखा जाता है कि केमिस्ट के पास फार्मेसी की डिग्री है या नहीं। ऑर्गेनाइज्ड ट्रेड के साथ काम करने पर नकली दवाओं का खतरा न्यूनतम होता है।

2008 के एक अध्ययन में पाया गया कि अश्वगंधा की पत्तियों से निकाला गया रस, मानव कैंसर कोशिकाओं (हड्डी, स्तन, फेफड़े, बड़ी आंत, त्वचा, गर्दन, फाइब्रोसारकोमा, अग्न्याशय (Pancreas), और मस्तिष्क का ट्यूमर आदि) को नष्ट करने में बहुत प्रभावी है। की एक विशाल विविधता को मार डाला गया। अश्वगंधा के विथानोन (Withanone) तत्व में, कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के गुण पाए जाते हैं।

यूनाइटेड किंगडम में बैंकों ने 1980 के दशक के मध्य में खरीददारी के लिए बड़ी संख्या में चेक दिए जाने की प्रवणता, जिस पर कार्रवाई करना बैंक के लिए खर्चीला था, को कम करने के लिए डेबिट कार्ड जारी करना शुरू किया, पहला बैंक जिसने यह शुरू किया वह है बार्कलेस (Barclays), जिसने बार्कलेस कनेक्ट (Barclays Connect) कार्ड जारी किया। ज्यादातर देशों की तरह, यूनाइटेड किंगडम में क्रेडिट कार्ड स्वीकार करने के लिए व्यापारियों द्वारा भुगतान किया गया शुल्क लेनदेन की रकम का एक प्रतिशत होता है,[26] जो कार्डधारकों के ब्याज-मुक्त ऋण अवधि साथ ही साथ प्रोत्साहन योजना जैसे अंक, एयरमाइल्स, या कैशबैक के लिए धन मुहैया कराता है। डेबिट कार्डों में इस तरह की विशेषताएं आमतौर पर नहीं होती हैं और इसलिए व्यापारियों द्वारा डेबिट कार्ड स्वीकार करने के शुल्क के रूप में बहुत ही कम रकम निर्धारित है, फिर चाहे लेनदेन की रकम कितनी भी क्यों ना हो[26]. बहुत छोटी रकम के लिए, क्रेडिट कार्ड की तुलना में डेबिट कार्ड के स्वीकार करने के लिए यह व्यापरियों के लिए कहीं अधिक सस्ता है। हालांकि भुगतान तरीके के अनुसार व्यापारी, ग्राहकों को अलग-अलग रकम चार्ज करने का अधिकार क्रेडिट कार्ड (मूल्य भेदभाव) आदेश 1990 के जरिए प्राप्त करता है, UK में कुछ व्यापारी क्रेडिट कार्ड की तुलना में डेबिट कार्ड द्वारा भुगतान करने के लिए कम पैसे वसूलते हैं, सबसे उल्लेखनीय अपवाद बजट एयरलाइन्स, ट्रैवेल एजेंट और IKEA होते हैं।[27] भुगतान न करनेवाले व्यापारियों के खिलाफ UK में जारी किए गए क्रेडिट कार्डों धारकों को उपभोक्ता क्रेडिट अधिनियिम 1974 की धारा 75 के तहत दिए जानेवाले; नि:शुल्क प्रोत्साहन (अंक, एयरमाइल्स, कैशबैक इत्यादि), व्याज-मुक्त क्रेडिट और संरक्षण जैसे लाभ; UK में डेबिट कार्ड में नहीं मिलते हैं। यूनाइटेड किंगडम में लगभग सभी प्रतिष्ठान जो क्रेडिट कार्ड स्वीकार करते हैं डेबिट कार्ड भी स्वीकार करते हैं (हालांकि सोलो और वीसा इलेक्ट्रॉन हमेशा नहीं), लेकिन लागत के कारण व्यापारियों में कुछ डेबिट कार्ड स्वीकार करते हैं, पर क्रेडिट कार्ड नहीं।

Mannitol, कैल्शियम कार्बोनेट और अन्य दवाओं फैटी एसिड के साथ बंधन से शरीर से वसा परिणाम निकालना कर सकते हैं. Mannitol ग्लूकोज के अवशोषण का उल्लंघन, पानी, लवण, triamterene – फोलिक एसिड. निकोटिनिक एजेंटों भोजन से पोषक तत्वों के अवशोषण को प्रतिबंधित.

अश्वगंधा, न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों (Neurodegenerative diseases) के उपचार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके घटक तंत्रिका तंतुओं और सिनैप्स (Synapse- दो तंत्रिका तंत्रों के मिलने का स्थान) तथा एक्सोन (Axons- तंत्रिका कोशिका का वो भाग जिससे तंत्रिका संदेशों को उसी तंत्रिका कोशिका में एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है) और डेन्ड्राइट (Dendrites- तंत्रिका कोशिका का वो भाग जिससे तंत्रिका संदेश दूसरी कोशिका तक जाते हैं) का पुनर्निर्माण करते हैं और याददाश्त सुधारते हैं। (और पढ़ें – याददाश्त बढ़ाने के घरेलू उपाय)

साइड इफेक्ट: विशिष्ट एंफ़ैटेमिन साइड इफेक्ट का प्रदर्शन नहीं करता है. कुछ मामलों में, सिरदर्द का कारण हो सकता है, मतली, उल्टी, दस्त, भूख न लगना, चिड़चिड़ापन, घबराहट, अनिद्रा, स्तब्ध हो जाना, दर्द, शुष्क मुँह, orofacial dyskinesia और लंबे समय तक उपयोग के साथ वृद्धि हुई जिगर एंजाइम का स्तर. और पढ़ें…

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