“स्मार्ट दवाओं का पता लगा सकता हूं _जहां मैं सबसे अच्छा मूल्य के लिए सस्ती स्मार्ट दवा पेरासिटाम मिल सकता हूं”

सोलर पावर सूर्य से प्राप्त होने वाली शक्ति है। इस पावर को विद्युत में तबदील करके इसका इस्‍तेमाल किया जाता है। दरअसल ऊर्जा के इसी रूप को हम सोलर पावर कहते हैं। सोलर पावर का इस्‍तेमाल घरों और कारों में किया जाता है। ऊर्जा का यह रूप साफ और प्रदूषण रहित होता है। सूर्य के जरिए ऊर्जा को प्राप्‍त करने और उसका इस्‍तेमाल करने के लिए सोलर पैनलों की जरूरत होती है। इन सोलर पैनलों को घर की छतों और खुले मैदान में रखा जाता है, जहां उस पर सूरज की सीधी धूप आती हो। सोलर पैनलों में सोलर सेल लगे होते हैं जो सूर्य से प्राप्‍त होने वाली ऊर्जा को इस्‍तेमाल करने योग्‍य बनाते हैं। क्‍योंकि सोलर पैनल द्वारा सोलर एनर्जी को बिजली में बदल दिया जाता है।

पूर्व-अनुज्ञप्ति के आधार पर अब बहुत सारे बैंक सीमा-परे शुल्क या अपर्याप्त धनराशि शुल्क चार्ज करते हैं और यहां तक कि प्रयास के बावजूद व्यापारी द्वारा लेनदेन से इंकार कर दिया जाता है (उनमें से कुछ को ग्राहक द्वारा नहीं भी पहचाना जा सकता है).

चीन की कंपनियां भारत को घटिया दवाएं भेजती रही हैं। डीसीजीआई की टीम ने 2012 में भारत को दवाएं भेजने वाली चीन की कई दवा कंपनियों का निरीक्षण किया। इस दौरान उसने पाया कि वे दवाएं बनाने के लिए न सिर्फ घटिया सॉल्ट का प्रयोग कर रही थीं, बल्कि उनमें जरूरी सुविधाओं का अभाव था। कई ऐसे मामले भी सामने आए जब ‘मेड इन इंडिया’ का लेबल लगाकर अफ्रीकी देशों को चीन से घटिया दवाएं सप्लाई की गईं।

अब कृष्णा हॉस्पिटल में चल रहा इलाज : श्रीराम केयर से आजाद होने के बाद परिजन मरीज को लेकर मंगलवार को मंगला चौक स्थित कृष्णा अस्पताल पहुंचे। यहां उसे भर्ती कर डायलिसिस किया जा रहा है। कृष्णा अस्पताल के एक स्टाफ ने बताया एक सप्ताह में तीन दिन तक डायलिसिस करना पड़ेगा।

1- देश के 4 बड़े मंदिरों (तिरुपति, शिर्डी साईं बाबा, सिद्धि विनायक और काशी विश्वनाथ) की एक दिन की औसत कमाई 8 करोड़ रुपए और हर मिनट कमाई 55 हजार रुपए है। 2- तिरुपति मंदिर में 1200 नाईं महिलाओं के बाल काटने के लिए रखे गए हैं। इन बालों को बेचकर मंदिर को सालाना 220 करोड़ रुपए की कमाई होती है। मंदिर सालाना 850 टन बाल बेचता है। 283.5 ग्राम औसत वजन वाला महिलाओं का बाल 17900 रुपए में बिकता है। 453.6 ग्राम वजन के लंबे बालों के 29,900 रु मिलते हैं। 3- देश के मंदिरों के पास 50 लाख करोड़ रुपए की कीमत का कुल 22 हजार टन (करीब 20 लाख क्विंटल) सोना है। 4- इतने पैसे में पूरा देश 60 साल (21 हजार दिन) तक फ्री में अनलिमिटेड इंटरनेट यूज कर सकता है। (एक साल में भारतीय 82 हजार करोड़ रुपए का इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं।) 5- इतने पैसे में टाटा जैसी 8 जैसी कंपनियां खरीदी जा सकती हैं। (13 अगस्त 2015 तक टाटा ग्रुप की कुल वैल्यु 7.49 लाख करोड़ थी।)

इस सिस्टम को आसानी से एक से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है, जहां किसी बीमारी को ठीक करने के लिए कोई विशेष दवा की जरूरत हो। फिलहाल इस तकनीक पर काम जारी है और शोधकर्ता इसके आकार को छोटा करने में जुटे हैं।

बैंकनेट (BancNet) ने 1994 में अपने बिक्री बिंदु (Point of sale) के रूप में प्रथम संकाय-संचालित एफ्टपोस (EFTPOS) सेवा शुरू की। यह सेवा दूसरी व तीसरी श्रेणी की नगरपालिकाओं सहित पूरे फिलीपींस के 1,400 स्थानों में उपलब्ध है। 2005 में, बैंकनेट (BancNet) ने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के एकमात्र एटीएम (ATM) स्विच चाइना यूनियनपे (china UnionPay) को स्थानीय सुविधा प्रदान करने के लिए एक करार पर हस्ताक्षर किया। इससे 1.0 बिलियन चीनी एटीएम कार्डधारकों को सभी SM सुपरमाल (SM Supermalls) में एफ्टपोस और बैंकनेट एटीएम के उपयोग की सुविधा मिलेगी.

Acetylcholine सीखने की तरह संज्ञानात्मक कार्यों की एक संख्या में मदद करता है, याद, और नए कनेक्शन और नए न्यूरॉन्स के विकास. Pramiracetam कार्रवाई की मुख्य विधि हिप्पोकैम्पस के भीतर acetylcholine के तेज दिमाग का एक प्रमुख खंड है और बनाने और नई यादें भंडारण में मदद करता है कि बढ़ाना है. Pramiracetam इन रिसेप्टर साइटों के लिए बाध्य और मस्तिष्क में असत्य्ल्चोलिने उत्तेजना को बेहतर बना कर कार्य करता है. यह भी मस्तिष्क के विशिष्ट क्षेत्रों में बेहतर न्यूरोनल आवेग धारा प्राप्त करने में मदद करता है. यहाँ Pramiracetam के उपयोगकर्ता समीक्षाएँ पढ़ें.

हल्दी की उन्नत खेती – posted on : Sep, 05 2015 हल्दी एक महत्वपूर्ण मसाले वाली फसल है जिसका उपयोग औषिध से लेकर अनेकों कार्यो में किया जाता है. इसके गुणों का जितना भी बखान किया जाए थोड़ा ही है, क्योंकि यह फसल गुणों से परिपूर्ण है इसकी खेती आसानी से की जा सकती है तथा कम लागत तकनीक को अपनाकर इसे आमदनी का एक अच्छा साधन बनाया जा सकता है. यदि किसान भाई इसकी खेती ज्यादा मात्र में नहीं करना चाहते तो कम से कम इतना अवश्य करें जिसका उनकी प्रति दिन की हल्दी की मांग को पूरा किया जा सकें. –हल्दी की खेती बलुई दोमट या मटियार दोमट मृदा में सफलतापूर्वक की जाती है. जल निकास की उचित व्यवस्था होना चाहिए. यदि जमीन थोड़ी अम्लीय है तो उसमें हल्दी की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है. खाद तथा उर्वरक 20 से 25 टन हेक्टेयर के मान से अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद का उपयोग करना चाहिए क्योंकि गोबर की खाद डालने से जमीन अच्छी तरह से भुरभुरी बन जायेगी तथा जो भी रासायनिक उर्वरक दी जायेगी उसका समुचित उपयोग हो सकेगा. इसके बाद 100-120 किलो ग्राम नत्रजन 60-80 किलोग्राम स्फुर 80-100 तथा किलोग्राम हेक्टेयर के मान से पोटाश का प्रयोग करना चाहिए. हल्दी की खेती हेतु पोटाश का बहुत महत्व है जो किसान इसका प्रयोग नही करते है हल्दी की गुणवत्ता तथा उपज दोनों ही प्रभावित होती है. नाइट्रोजन की एक चैथाई मात्र तथा स्फुर एवं पोटाश की पूरी मात्र बोनी के समय दी जानी चाहिए एवं नाइट्रोजन की बची मात्र की दो भागों में बांटकर पहली मात्र बुआई के 40 से 60 दिनों बाद तथा दूसरी मात्र 80 से 100 दिनों बाद देना चाहिए. फसल चक्र हल्दी की सफल खेती के लिए उचित फसल चक्र का अपनाना अति आवश्यक है. इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि हल्दी की खेती लगातार उसी जमीन पर न की जावें क्योंकि यह फसल जमीन से ज्यादा से ज्यादा पोषक तत्वों को खींचती है जिससे दूसरे साल उसी जमीन में इसकी खेती नहीं करें तो ज्याद अच्छा होगा. सिंचित क्षेत्रों में मक्का, आलू, मिर्च, ज्वार, धान, मूंगफल्ली आदि फसलों के साथ फसल चक्र अपनाकर हल्दी की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है. विकसित किस्में मसाले वाली किस्म, पूना, सोनिया, गौतम, रशिम, सुरोमा, रोमा, क्र ष्णा, गुन्टूर, मेघा, हल्दा1, सुकर्ण, सुगंधन तथा सी.ओ.1 आदि प्रमुख जातियां है जिनका चुनाव किसान कर सकते है. थोड़ी सी मात्र यदि एक बार मिल जाती है तो फिर अपना बीज तैयार किया जा सकता है. बुआई जिन किसान भाइयों के पास पानी की पर्याप्त सुविधा है वे अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक हल्दी को लगा सकते है. लेकिन जिनके पास सिंचाई सुविधा का पर्याप्त मात्र में अभाव है वे मानसून की बारिश शुरू होते ही हल्दी लगा सकते है किंतु खेती की तेयारी पहले से ही करके रखना चाहिए. जमीन अच्छी तरह से तैयार करने के बाद पांच-सात मीटर, लंबी तथा दो-तीन मीटर चौड़ी क्यारियां बनाकर 30 से 45 सेंटी मीटर कतार से कातर तथा 20 – 25 सेंटी मीटर पौध से पौध की दूरी रखते हुए चार-पांच सेंटीमीटर गहराई पर गाठी कंदो को लगाना चाहिए. इस तरह से हल्दी लगाने से 12 – 15 क्विंटल है. गाठों की जरूरत पड़ती है. सिंचाई हल्दी में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं है लेकिन यदि फसल गर्मी में ही बुवाई जाती है तो वर्षा प्रारंभ होने के पहले तक चार-पांच सिंचाई की आवश्यकता पड़ती हैं. मानसून आने के बाद सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती है. किंतु यदि बीच में वर्षा नहीं होती या कि सुखा पड़ जाता है तथा अक्टूबर के बाद यदि बारिश नहीं हो पाती है तो ऐसी परिस्थिति में 20-25 दिन के अंतराल पर सिंचाई करना आवश्यक हो जाता है. नवम्बर माह में पत्तियों का विकास तथा धनकंद की मोटाई बढ़ना आरंभ हो जाता है तो उस समय उपज ज्यादा प्राप्त करने के लिए मिट्टी चढ़ाना आवश्यक हो जाता है जिससे कंदो का विकास अच्छा होता है तथा उत्पादन में वृद्धि हो जाती है.
=— कटाई मई- जून में बोई गई फसल फरवरी माह तक खोदने लायक हो जाती है इस समय धन कंदो का विकास हो जाता है और पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगती है तभी समझना चाहिए कि हल्दी पक चुकी है तथा अब इसकी कटाइ या खोदाइ की जा सकती है. पहले पौधो के दराती हसिए से काट देना चाहिए तथा बाद में हल से जुताई करके हल्दी के कंदों को आसानी से निकाला जा सकता है जहां पर भी जरूरत समझी जाए कुदाली का भी प्रयोग किया जा सकता है. हल्दी की अगेती फसल सात-आठ आठ-नौ माह तथा देर से पकने वाली 9-10 माह में पककर तैयार होती है. उपज जहां पर उपरोक्त मात्र में उर्वरक तथा गोबर की खाद का प्रयोग किया गया है तथा सिचिंत क्षेत्र में फसल बोई गई है तो 50-100 किवंटल प्रति हेक्टेयर तथा असिंचित क्षेत्रों से 50-100 किवंटल प्रति हेक्टेयर कच्ची हल्दी प्राप्त की जा सकती है. यह ध्यान रहे कि कच्ची हल्दी को सूखाने के बाद 15-25 प्रतिशत ही रह जाती है

अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि राज्य शासन ने स्मार्ट कार्ड की क्लेम राशि से दवा व उपकरण खरीदना बंद करवा दिया है। शासन ने विभागीय बजट से यह खरीदने को कहा है। विभागों के पास पर्याप्त बजट ही नहीं है, जिससे मरीजों के लिए दवा व उपकरण खरीदा जा सके। प्रबंधन का दावा है कि विभागीय बजट विभागों की जरूरतों को ही पूरा नहीं कर पाता।

यदि आपको किसी ऐसे दुष्प्रभाव का पता चलता है जो ऊपर सूचीबद्ध नहीं किया गया है तो चिकित्सीय सलाह के लिए अपने चिकित्सक से संपर्क करें। आप अपने स्थानीय खाद्य और दवा प्रबंधन अधिकारी को भी दुष्प्रभावों की सूचना दे सकते हैं।

GUOLAN चीन में अग्रणी निर्माताओं और आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। अब हम आपके पेशेवर कारखाने से स्मार्ट ब्लूटूथ ईरफ़ोन और हेडसेट शैल लाए हैं। हमारे कारखाने से थोक में अत्यधिक सटीक और प्रतिस्पर्धी मूल्य के उत्पादों को खरीदने के लिए आपका स्वागत है, और कस्टमाइज़्ड सर्विस भी पेशकश की जाती है।

कार्बोहाइड्रेट युक्त लंच– जब वजन कम करने की बात आती है तो प्राय: डाइटर ज्यादा कार्बोहाइड्रेट से युक्त भोजन करने से बचते हैं।  जौ, गेहूं, बाजरा, ज्वार, आलू, चावल, चुकंदर, खजूर और केले में विशेष रूप से कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। कार्बोहाइड्रेट आपके शरीर के लिए ग्लूकोज का काम करता है। यह आपके वजन को संतुलित रखता है।

बिलासपुर. जिला अस्पताल में लंबे समय से घालमेल चल रहा है। स्मार्ट कार्ड होने के बावजूद कमीशनखोरी के चक्कर में मरीजों से महंगी दवाइयां बाहर से खरीदवाई जा रही हैं। रविवार को मंत्री अमर अग्रवाल बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाने पहुंचे, तो यह भेद उनके सामने ही खुल गया। दरअसल मंत्री को भी इस तरह की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। सुबह साढ़े 10 बजे वे बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने के बाद सीधे वार्ड में पहुंच गए।

Young, L.Y., M.A. Koda-Kimble (eds.). Applied Therapeutics. The Clinical Use of Drugs. 6th ed. Vancouver, WA., Applied Therapeutics, Inc. 1995., p. 48-7 from HSDB Record Name: NICOTINAMIDE http://toxnet.nlm.nih.gov?dbs+hsdb:@term… – प्राप्त: October 12, 2016.

हर कपल चाहता है कि उसका पार्टनर उसे कुछ इस तरह से प्यार करे कि वह पल उनके जीवन का यादगार पल बन जाए। आमतौर पर लोग अपनी प्रेम अभिव्यक्ति के लिए अपने पार्टनर को किस करते हैं। कुछ प्रेमी जोडे अपने अंतरंग पलों को यादगार बनाने के लिए कुछ अनोखे तरीके अपनाते हैं। लेकिन आज हम आपको ऐसे कपल …

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