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चीन की कंपनियां भारत को घटिया दवाएं भेजती रही हैं। डीसीजीआई की टीम ने 2012 में भारत को दवाएं भेजने वाली चीन की कई दवा कंपनियों का निरीक्षण किया। इस दौरान उसने पाया कि वे दवाएं बनाने के लिए न सिर्फ घटिया सॉल्ट का प्रयोग कर रही थीं, बल्कि उनमें जरूरी सुविधाओं का अभाव था। कई ऐसे मामले भी सामने आए जब ‘मेड इन इंडिया’ का लेबल लगाकर अफ्रीकी देशों को चीन से घटिया दवाएं सप्लाई की गईं।

70 फीसदी लोग हैं कृषि पर निर्भर – posted on : Apr, 23 2016 भारत कृषि प्रधान देश है। देश की लगभग 70 फीसदी आबादी कृषि पर निर्भर करती है। कृषि एवं इससे सम्बद्ध क्षेत्र भारत की अधिकांश जनसंख्या, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिये आजीविका का मुख्य साधन हैं। यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के निर्धारण में भी महत्त्वपूर्ण योगदान देता है, लेकिन लगातार दो वर्षों से मौसम की बेरुखी के चलते बारिश कम हुई, जिसकी वजह से देश के दस राज्य सूखे की चपेट में आ गए। इन राज्यों में फसलें लहलहाने के बजाय नष्ट हो गईं और हालात चिन्ताजनक हो गए। सूखे की वजह से कुपोषण, भुखमरी और महामारी के चलते मृत्यु दर में काफी वृद्धि हुई। सूखे का संकट झेल रहे इन राज्यों में जहाँ कृषि एवं पर्यावरण पर अत्यन्त प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, वहीं इन राज्यों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह डगमगा गई।

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लाइफस्टाइल डेस्कःलौकी हमारे शरीर के कई रोगों को दूर करने में सहायक होती है। इसका उपयोग रोगियों के लिए सलाद, रस निकालकर या सब्जी के रूप में लंबे समय से किया जाता रहा है। लौकी को कच्चा भी खाया जाता है। यह पेट साफ करने में भी बहुत ही फायदेमंद होता है साथ ही बॉडी को हेल्दी और टॉक्सिक फ्री भी बनाती है। लौकी से सेहत को होने वाले फायदे गैस और कब्ज एसिडीटी, कब्ज, पेट की बीमारियों एवं अल्सर में लौकी का रस फायदेमंद होता है। खाने के बाद अगर पेट में किसी प्रकार की कोई परेशानी महसूस हो रही हो तो लौकी का जूस पिएं। खांसी खांसी, टीबी, सीने में जलन आदि में भी लौकी बहुत उपयोगी होती है। टीबी, सीने में जलन, हार्ट डिसीज, किडनी डिसीज, डायरिया, मिर्गी, हैजा / हार्ट डिसीज खाने के बाद एक कप लौकी के रस में थोड़ी-सी काली मिर्च और पुदीना डालकर पीने से हार्ट डिसीज रोग में आराम मिलता है। किडनी रोग लौकी किडनी के रोगों में बहुत उपयोगी है और इससे मूत्र खुलकर आता है

इलेक्ट्रॉनिक पर्स पद्धति पर आधारित स्मार्ट कार्ड (जिसमें इसका मूल्य कार्ड चिप पर ही संग्रहित होता है, खाते के रिकॉर्ड पर दर्ज नहीं होता, इसीलिए नेटवर्क कनेक्टिविटी की जरूरत के बगैर मशीन कार्ड को स्वीकार कर लेता है) का उपयोग पूरे यूरोप में 1990 के दशक के मध्य से हो रहा है, उल्लेखनीय रूप से जर्मनी (गेल्डकार्टे), ऑस्ट्रिया (क्विक), नीदरलैंड (चिपनिप), बेल्जियम और स्विट्जरलैंड (कैश) में. ऑस्ट्रिया और जर्मनी में, सभी वर्तमान बैंक कार्ड अब इलेक्ट्रॉनिक पर्स में शामिल हो गए हैं।

किसान हमेशा से हमारे देश का आधार रहे हैं और एनडीए सरकार इनोवेशन और कुछ ठोस उपायों के जरिए देश के इस आधार को मजबूत बनाने की कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना सिंचाई की सुविधाएं सुनिश्चित कर उपज को बढ़ाएगी। इस योजना का विजन यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक खेत को किसी ना किसी तरह के सुरक्षात्मक सिंचाई के साधन उपलब्ध हों। किसानों को सिंचाई के आधुनिक तरीकों के बारे में शिक्षित किया जा रहा है ताकि पानी की ‘प्रत्येक बूंद के बदले अधिक पैदावार’ मिले। किसान समूहों को जैविक खेती के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना की शुरुआत की गई। पूर्वोत्तर क्षेत्र मं ऑर्गेनिक फार्मिंग और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष योजना शुरू की गई। उत्पादन और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिए नई यूरिया नीति की घोषणा की गई है और आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए गोरखपुर, बरौनी तथा तलचर में खाद फैक्टरी का पुनरोद्धार किया गया है। ग्राम ज्योति योजना बिना कटौती के बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। इससे ना सिर्फ उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि कुटीर उद्योगों और शिक्षा सहित इसका किसानों के पूरे जीवन पर भी भारी असर होगा।

पिछला भुगतान नहीं, नई फसल से किसान चिंतित – posted on : Sep, 08 2015 नारायणगढ़ : पिछला भुगतान अभी तक नहीं हुआ जबकि नई फसल लगभग तैयार हो चुकी है। ऐसे में गन्ना उत्पादक किसानों को यह चिंता आए रोज सता रही है कि उनकी इस नगदी कही जाने वाली फसल का आखिर क्या होगा? नारायणगढ़ शुगर मिल से जुड़े गन्ना उत्पादक किसान अपने बकाया भुगतान पाने को लेकर पिछले तीन माह से संघर्षरत है। धरने-प्रदर्शनों से लेकर भूख-हड़ताल तक कर चुके इन किसानों को लेकर भले ही प्रदेश सरकार प्रयासरत नजर आ रही है लेकिन शुगर मिल प्रबंधन के अड़ियल रवैये के चलते इन किसानों की हालत दयनीय हो चली है। बता दें कि नारायणगढ़ शुगर मिल से जुड़े गन्ना उत्पादक किसानों का लगभग पचास करोड़ रुपया का भुगतान चीनी मिल की ओर रुका हुआ है। हालाकि प्रदेश सरकार ने चीनी मिल को अपनी ओर से बिना ब्याज का ऋण उपलब्ध करवा तो दिया है लेकिन मिल प्रबंधन द्वारा इस गण की ऐवज में अभी तक कोई प्रतिभूति (गारटी) ना दिए जाने से यह ऋण मंजूर नहीं हो सका है जिसके चलते किसानों को भी उनका पैसा नहीं मिल पाया।

बजट फोन खरीदने वाले ज्यादातर यूजर्स का यही मानना है कि सस्ते स्मार्टफोन दोगुनी कीमत पर मिलने वाले हाई एंड स्मार्टफोन्स से थोड़े कम पावरफुल हैं। यह सोच ग्राहक की उम्मीदें बढ़ा देती है, नतीजतन यूजर्स अपने फोन की शिकायत करते हैं। जहां श्याओमी रेडमी नोट और यूरेका ने महंगे स्मार्टफोन्स से फीचर्स के मामले में फासला कम किया है, वहीं ज्यादातर दूसरे बजट स्मार्टफोन हाई-एंड फोन के मुकाबले में कहीं नजर नहीं आते। सस्ते फोन में स्क्रीन रिजॉल्यूशन, प्रोसेसर टाइप और स्पीड, रैम, कैमरा क्वॉलिटी, बिल्ड क्वॉलिटी और बैटरी लाइफ जैसी चीजों पर ग्राहक को समझौता करना पड़ता है।

 मुंबई विश्‍वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट और आई.आई.टी. (सोम) मुंबई के पूर्व छात्र श्री एन. रघुरामन मँजे हुए पत्रकार हैं। 30 वर्ष से अधिक के अपने पत्रकारिता के कॅरियर में वे ‘इंडियन एक्सप्रेस’, ‘डीएनए’ और ‘दैनिक भास्कर’ जैसे राष्‍ट्रीय दैनिकों में संपादक के रूप में काम कर चुके हैं। उनकी निपुण लेखनी से शायद ही कोई विषय बचा होगा, अपराध से लेकर राजनीति और व्यापार-विकास से लेकर सफल उद्यमिता तक सभी विषयों पर उन्होंने सफलतापूर्वक लिखा है। ‘दैनिक भास्कर’ के सभी संस्करणों में प्रकाशित होनेवाला उनका दैनिक स्तंभ ‘मैनेजमेंट फंडा’ देश भर में लोकप्रिय है और तीनों भाषाओं—मराठी, गुजराती व हिंदी—में प्रतिदिन करीब तीन करोड़ पाठकों द्वारा पढ़ा जाता है। इस स्तंभ की सफलता का कारण इसमें असाधारण कार्य करनेवाले साधारण लोगों की कहानियों का हवाला देते हुए जीवन की सादगी का चित्रण किया जाता है।

भारत को आज़ाद हुए 59 साल हो चुके हैं और इस दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की दशा में ज़बरदस्त बदलाव आया है. औद्योगिक विकास ने अर्थव्यवस्था का हुलिया ही बदल दिया है. लेकिन औद्योगिक विकास के बावजूद इन 59 सालों में एक तथ्य जो नहीं बदला है वो ये कि आज भी भारत के 65 से 70 फ़ीसदी लोग रोज़ी-रोटी के लिए कृषि और कृषि आधारित कामों पर निर्भर हैं. ! आज़ाद हुए 59 साल हो चुके हैं और इस दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की दशा में ज़बरदस्त बदलाव आया है. औद्योगिक विकास ने अर्थव्यवस्था का हुलिया ही बदल दिया है. लेकिन औद्योगिक विकास के बावजूद इन 59 सालों में एक तथ्य जो नहीं बदला है वो ये कि आज भी भारत के 65 से 70 फ़ीसदी लोग रोज़ी-रोटी के लिए कृषि और कृषि आधारित कामों पर निर्भर हैं. भारत में कृषि की विकास दर और कुल विकास दर की तुलना ये एक अजीब विसंगति है कि जनसंख्या का इतना बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर करता है लेकिन कृषि में विकास की दर औद्योगिक और सेवा क्षेत्र के मुकाबले कहीं कम है. भारतीय अर्थव्यवस्था के अन्य पहलू पिछले कुछ सालों में कृषि क्षेत्र में विकास दर दो से तीन प्रतिशत के बीच रही है. वर्ष 2002-03 में कृषि क्षेत्र में विकास दर शून्य से भी कम थी. 2003-04 में इसमें ज़बरदस्त उछाल आया और ये 10 फ़ीसदी हो गई लेकिन 2004-05 में विकास दर फिर लुढ़क गई और ऐसी लुढ़की कि 0.7 फ़ीसदी हो गई. आर्थिक प्रगति में इस विसंगति को केंद्र सरकार भी स्वीकार करती है. केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पवन कुमार बंसल कहते हैं, “कृषि पीछे है इसमें कोई दो राय नहीं. अगर विकास दर को 10 फ़ीसदी करना है तो कृषि में भी चार फ़ीसदी की दर से विकास करना होगा दर और कुल विकास दर की तुलना ये एक अजीब विसंगति है कि जनसंख्या का इतना बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर करता है लेकिन कृषि में विकास की दर औद्योगिक और सेवा क्षेत्र के मुकाबले कहीं कम है. भारतीय अर्थव्यवस्था के अन्य पहलू पिछले कुछ सालों में कृषि क्षेत्र में विकास दर दो से तीन प्रतिशत के बीच रही है. वर्ष 2002-03 में कृषि क्षेत्र में विकास दर शून्य से भी कम थी. 2003-04 में इसमें ज़बरदस्त उछाल आया और ये 10 फ़ीसदी हो गई लेकिन 2004-05 में विकास दर फिर लुढ़क गई और ऐसी लुढ़की कि 0.7 फ़ीसदी हो गई. आर्थिक प्रगति में इस विसंगति को केंद्र सरकार भी स्वीकार करती है. केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पवन कुमार बंसल कहते हैं, “कृषि पीछे है इसमें कोई दो राय नहीं. अगर विकास दर को 10 फ़ीसदी करना है तो कृषि में भी चार फ़ीसदी की दर से विकास करना होगा

वजन घटाने के लिए दालचीनी पाउडर और शहद: – posted on : Oct, 19 2015 दालचीनी पाउडर का एक भाग और शहद के दो भाग (मधु मक्खियों की छोटी प्रजातियों से प्राप्त शहद) ले लो। सबसे पहले, दालचीनी पाउडर में उबला हुआ पानी के एक छोटे कप जोड़ सकते हैं और एक समाधान करें। और फिर शांत करने में यह शहद जोड़ सकते हैं और यह अच्छी तरह से मिश्रण करने के लिए 30 मिनट के लिए इस समाधान रखें। इस मिश्रण का आधा भाग सिर्फ खाली पेट में निम्नलिखित सुबह में सेवन किया जाना चाहिए बिस्तर और आराम करने के लिए जाने से पहले सेवन किया जाना चाहिए। काफी वजन घटाने के लिए एक या दो महीने के लिए इस मिश्रण का उपयोग करें। दालचीनी स्वाभाविक रूप से अधिक वजन कम कर देता है और स्वाभाविक रूप से प्रणाली शुद्ध।

जिसकी राशि स्मार्ट कार्ड से काट ली जा रही है। बकावण्ड निवासी परमेश्वर नेताम बुधवार को फार्मेसी रूम पहुंचा और उसे ब्रांडेड दवा दी गई। जिस दवा का मूल्य बाहर मेडिकल स्टोर्स में 2 हजार रुपए से अधिक नहीं है। उसके स्मार्ट कार्ड से 6 हजार रुपए में दी गई।

हालांकि, तथ्य यह है कि Modafinil एक नुस्खा की आवश्यकता है और Adrafinil एक नुस्खा के बिना खरीदा जा सकता है मतलब है कि कई लोग हैं, जो Modafinil उपयोग करना चाहते है इस कानूनी विकल्प के बजाय बंद हो जाएगा.

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कुछ nootropics, विशेष रूप से उन युक्त piracetam, कुछ लोगों में सिर दर्द पैदा कर सकता है। भी हो रही तकनीकी बिना, यह अनिवार्य रूप से कठिन की तुलना में यह करने के आदी हैं काम कर रहा है, और अधिक acetylcholine के माध्यम से जल की तुलना में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध है मस्तिष्क के कारण होता है। इस लड़ाई, सबसे ऊपर nootropics कि piracetam शामिल भी अपने मस्तिष्क रसायन बाहर संतुलन और सिर दर्द से बचने में मदद करने के कोलीन का एक अच्छा राशि में शामिल होंगे।

सार्वजनिक क्षेत्र के राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने अगले 3 साल में किसानों को सिंचाई सुविधाओं में सुधार के लिए 30,000 करोड़ रुपये का कर्ज उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। नाबार्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा कि कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्र पर ध्यान देने वाला संस्थान इस वर्ष अब तक 1000 करोड़ रुपये की पहले ही मंजूरी दे चुका है। यह वित्त पोषण सरकार द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के तहत अगले 5 साल में किसानों को दिए जाने वाले 50,000 करोड़ रुपये के कर्ज की हाल में की गई घोषणा के अतिरिक्त होगा। नाबार्ड के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक हर्ष कुमार भानवाला ने कहा, ‘हमने अगले 3 साल में किसानों को सिंचाई सुविधाओं के लिए 30,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का निर्णय किया है। इस साल हमारी 10,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की योजना है और मुझे आपको सूचित करते हुए खुशी है कि हम अब तक 1000 करोड़ रुपये आवंटित कर चुके हैं।’ उन्होंने कहा कि केवल क्षमता निर्माण के बजाए हम सिंचाई कुशलता सुधारने में मदद पर ध्यान दे रहे हैं। भानवाला ने कहा, ‘बैंक को ग्रामीण स्तर पर जलवायु परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में ग्रीन क्लाइमेट फंड (जीसीएफ) से मान्यता मिली है।’

कब खिलाएं – आपके बच्चे को रोज़ाना 30 से 35 प्रतिशत हेल्दी फैट्स की ज़रूरत होती है. जिसे आप घी से पूरा कर सकते हैं. अगर आप बच्चे को फीड कराती हैं तो घी न दें. लेकिन उससे बड़े बच्चों की डाइट में इसे शामिल करें. रोज़ाना 2 से 3 चम्मच से ज़्यादा घी बच्चे को न दें. 

फरीदाबाद।। कैश लेस मेडिकल स्टोर की सुविधा बंद हो जाने से ईएसआई कार्ड होल्डर्स की परेशानी बढ़ गई है। अस्पताल में दवाइयां नहीं होने पर अब कार्ड होल्डर्स को अपनी जेब से दवाइयां खरीदनी पड़ रही है। इसके अलावा बाहरी मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदने पर केवल उन्हीं कार्ड होल्डर्स को भुगतान किया जा रहा है, जिनके पास पेन कार्ड और भारतीय स्टेट बैंक में अकाउंट हैं। इसके चलते कई कार्ड होल्डर्स को भुगतान नहीं हो पा रहा है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि अश्वगंधा, कैंसर को नियंत्रित करने में सक्षम है और साथ ही साथ कैंसर का उपचार करने वाले अन्य तरीकों जैसे रेडियो और कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स को भी कम करने में मदद करता है। आयुर्वेद के अनुसार तो हमेशा अश्वगंधा के गुणों को एक अद्भुत जड़ी बूटी के रूप में उपयोग किया जाता रहा है जो शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता में सुधार करते हैं जिस वजह से अश्वगंधा को अब कैंसर का इलाज करने के लिए भी उपयोग किया जाने लगा है।

बरहनी (चंदौली) : जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, किसानों नेताओं के लाख प्रयास के बाद भी पानी, बिजली व खाद की समस्या नरवन में आज भी सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ी है। इसका निवाला नरवन के किसान एक बार फिर बनने के कगार पर है। इसके लिए रात दिन दर बदतर भटक रहे हैं कि इन समस्याओं से कैसे निजात पाया जाए। लेकिन समस्याएं घटने की बजाए और बढ़ती ही जा रही है। बीते वर्ष के सूखे, ओला वृष्टि से किसान उबरे नहीं थे कि फिर खाद, पानी व बिजली की समस्या के कारण उनके खेत में दरार पड़ गई और फसल बर्बादी की कगार पर पहुंच चुकी है। जहां नरवन के पूर्वी उत्तरी बेल्ट में पानी का घोर अभाव है, वहीं समितियों से खाद गायब है। ऊपर से बिजली की आंख मिचौली से लोग परेशान है। इसका नतीजा है कि रोपाई किए गए खेतों में दरार पड़ चुकी ह कहने को तो नहरों का जाल बिछा है। लेकिन अधिकांश नहरों में इस समय पानी गायब है। कुछ सुखी है तो कुछ के तली में पानी है, जो किसी भी काम का नहीं है। यानि मेन मौके पर ही नरवन परगना में ¨सचाई के सभी संसाधन फेल हो जाते हैं। इससे किसानों की फसल अक्सर ही बर्बाद हो जाया करती है। वहीं हाल दर्जनों खाद समितियों का है। जहां पर समितियों पर से खाद ही गायब है। जबकि किसानों को खाद की इस अत्यंत आवश्यकता है। लेकिन थक हार कर किसान ऊंचे दामों पर बाजारों से खाद खरीद कर खेतों में छिड़काव करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है है कि बीते वर्ष सूखे और ओलावृष्टि के कारण हम किसानों की कमर तो टूट ही गई थी। अब लग रहा किसानों को पानी, खाद व बिजली के लिए अपने फसल की कुर्बानी देनी पड़ेगी। –

एप्पल जैसी कई दिग्गज, सोनी, एलजी, सेमसंग, मोटोरोला पहले से ही अपने स्मार्ट घड़ियों प्रस्तुत किया है और उपयोगकर्ताओं से अच्छा उत्साह प्राप्त कर रहे हैं. Xiaomi एक कदम आगे चला गया और एम आई बैंड की शुरुआत की, हमारे अभ्यास और हमारी नींद का ट्रैक रखने में मदद करता है, जो एक फिटनेस बैंड.

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